मत्ती 21
पाठ
यीशु जैतून पहाड़ से गदहे पर बैठकर यरूशलेम में प्रवेश करते हैं, भीड़ कपड़े और डालियाँ बिछाकर "दाऊद के सन्तान को होशाना" पुकारती है, और वे सीधे मन्दिर में जाकर लेन-देन की मेजें उलट देते हैं। अगली सुबह एक निष्फल अंजीर का पेड़ सूख जाता है, और मन्दिर में प्रधान याजक उनके अधिकार पर सवाल उठाते हैं। उत्तर में यीशु तीन बार पलटवार करते हैं: यूहन्ना के बपतिस्मा का प्रश्न, दो पुत्रों का दृष्टान्त, और दाख की बारी के दुष्ट किसानों की कहानी।
मर्म
ध्यान दीजिए कि भीड़ जो गीत गाती है और यीशु जो पद उद्धृत करते हैं, वे एक ही भजन से आते हैं। "धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है" भजन 118 की पंक्ति है, जो यात्रियों के स्वागत का गीत था। और कुछ ही घण्टों बाद यीशु उसी भजन का अगला हिस्सा याजकों के सामने रखते हैं: "जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने बेकार समझा था, वही कोने के सिरे का पत्थर हो गया।" यही इस अध्याय का धर्मशास्त्रीय हृदय है। परमेश्वर का राजा आता है, और जो उसे ठुकराते हैं वे उसे रोक नहीं पाते, केवल अपने ऊपर गिरा लेते हैं। अनुग्रह और न्याय यहाँ एक ही पत्थर के दो पहलू हैं।
सूत्र
गदहे का चुनाव भावुकता नहीं, उद्धरण है। मत्ती स्वयं बताते हैं कि यह जकर्याह की वाणी की पूर्ति है: "देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह नम्र है और गदहे पर बैठा है।" उस भविष्यवाणी में यही राजा धनुष तोड़ता है और जातियों से शान्ति की बात करता है। सुलैमान भी अपने अभिषेक के दिन खच्चर पर यरूशलेम आया था, पर यहाँ घोड़ा नहीं, युद्ध-रथ नहीं। फिर मन्दिर में यीशु के दो वाक्य भी उद्धरण हैं: "मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा" यशायाह से, जहाँ यह घर सब जातियों के लिए खुला है, और "डाकुओं की खोह" यिर्मयाह से, जहाँ भविष्यद्वक्ता ने मन्दिर के विनाश की घोषणा की थी। जो कान वाला है वह समझ गया कि यह सफाई नहीं, चेतावनी है।
दर्पण
दो पुत्रों का दृष्टान्त सबसे असहज है, क्योंकि यह धार्मिक लोगों के लिए है, अधर्मियों के लिए नहीं। "जी हाँ जाता हूँ" कहकर न जाना, यह हमारी भाषा है। हम प्रार्थना सभा में हाथ उठाते हैं, छोटे समूह का नेतृत्व करते हैं, रविवार की तैयारी गम्भीरता से करते हैं, और घर पर वही पुराना रूखापन चलता रहता है। अंजीर का पेड़ दूर से हरा दिखता था; पत्ते पूरे थे, फल एक भी नहीं। यीशु ने उसे शाप नहीं दिया क्योंकि वह बाँझ था, बल्कि इसलिए कि उसने फल का वादा किया और निभाया नहीं। याजकों का "हम नहीं जानते" भी यही है: जानते थे, पर भीड़ का डर था।
आज यह कीजिए: उस एक काम को याद कीजिए जिसके लिए आपने "हाँ" कहा था और टाल दिया, और अगले दस मिनट में उसका पहला कदम उठा लीजिए, एक फोन, एक संदेश, एक माफ़ी।
संदर्भ
यह फसह का सप्ताह है। यरूशलेम में हज़ारों तीर्थयात्री भरे हुए हैं, रोमी राज्यपाल सैनिकों के साथ शहर में आ चुका है, और मन्दिर प्रशासन जानता है कि इस भीड़ में कोई भी मसीही नारा दंगा बन सकता है। इसीलिए "सारे नगर में हलचल मच गई" कोई हल्का वाक्य नहीं है। मन्दिर का बाहरी आँगन, जहाँ सर्राफों की मेजें थीं, वही एकमात्र जगह थी जहाँ गैर-यहूदी प्रार्थना कर सकते थे; व्यापार ने उसी जगह को बाज़ार बना दिया था। और प्रधान याजकों की सत्ता आर्थिक रूप से इसी व्यवस्था से जुड़ी थी। मेजें उलटना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं था, उनकी जेब पर सीधा हमला था।
एक बारीकी
यीशु का यशायाह 56 वाला उद्धरण अधूरा दिखता है, पर अगली ही आयत उसे पूरा कर देती है: "अंधे और लँगड़े, मन्दिर में उसके पास आए, और उसने उन्हें चंगा किया।" पुरानी व्यवस्था में अंधे और लँगड़े को मन्दिर क्षेत्र से दूर रखा जाता था; यह परम्परा दाऊद के समय से चली आ रही थी। यीशु व्यापारियों को निकालते हैं और उन्हीं को भीतर लाते हैं जिन्हें परम्परा ने बाहर रखा था। यही "प्रार्थना का घर" का व्यावहारिक अर्थ है। और इसी पर याजक क्रोधित होते हैं, चंगाई पर नहीं, बल्कि उन बच्चों की पुकार पर जो भजन 8 के शब्दों को सच कर रहे थे: "बालकों और दूध पीते बच्चों के मुँह से तूने स्तुति सिद्ध कराई।"
श्रोताओं का चेहरा
मत्ती के पहले पाठक यहूदी मसीही थे, जिनके लिए मन्दिर अब जल चुका था या जलने वाला था। उनके कानों में दाख की बारी का दृष्टान्त तुरंत यशायाह 5 का "दाख की बारी का गीत" बजा होगा, जहाँ बाड़ा, कुण्ड और गुम्मट ठीक इसी क्रम में हैं और बारी इस्राएल है। अन्तर यह है कि यशायाह में बारी ही खराब फल लाती है, यहाँ बारी ठीक है, किसान भ्रष्ट हैं। यह फर्क उनके लिए राहत भी था और चेतावनी भी: परमेश्वर ने अपनी प्रजा को नहीं, उसके अगुवों को जवाबदेह ठहराया। पर "ऐसी जाति को जो उसका फल लाए" वाला वाक्य उन्हें भी छूट नहीं देता। ठेका बदला है, माँग वही है: समय पर फल।
चिंतन
मेरे जीवन में कहाँ पत्ते भरपूर हैं पर फल नहीं, और मैं किसे दिखाने के लिए हरा बना रहता हूँ?
याजकों ने "हम नहीं जानते" कहा क्योंकि सच कहना महँगा था; किस सवाल पर मैं जानबूझकर अनजान बना रहता हूँ?
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Matthew 21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Matthew 21 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
एक गृहस्थ था, जिसने दाख की बारी लगाई, और उसके चारों ओर बाड़ा बाँधा, और उसमें रस का कुण्ड खोदा, और गुम्मट बनाया।" ध्यान दे, जाने से पहले उसने सब कुछ पूरा कर दिया। तुझे खाली ज़मीन नहीं मिली, तैयार बारी मिली है। तेरी सेहत, तेरा घर, तेरा समय, सब उसी का लगाया हुआ है। सवाल यह नहीं कि तेरे पास क्या है, सवाल यह है कि तू इसे किसका मानता है।
पिता, धन्यवाद कि आपने हार नहीं मानी। ठुकराए गए दासों के बाद आपने "और दासों को भेजा, जो पहले से अधिक थे।" मेरे साथ भी आपने यही किया, बार बार अपने वचन और अपने लोगों के द्वारा मुझे बुलाते रहे। आपके इस धीरज के लिए मैं आपका आभारी हूँ।
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