नहूम 1
पाठ
नीनवे के विरुद्ध यह भारी वचन है। नहूम एक ऐसे परमेश्वर का चित्र खींचते हैं जो जलन रखनेवाला है, बदला लेनेवाला है, पर साथ ही विलम्ब से क्रोध करनेवाला और अपने शरणागतों के लिए दृढ़ गढ़ है। एक ओर पहाड़ काँपते हैं, नदियाँ सूखती हैं, चट्टानें फटती हैं; दूसरी ओर पहाड़ों पर शान्ति का शुभ समाचार सुनानेवाला आ रहा है। नीनवे का जूआ यहूदा की गर्दन से टूट रहा है।
मर्म
यह अध्याय एक ऐसी सच्चाई सामने रखता है जिसे हम आमतौर पर टुकड़ों में तोड़कर पचाना चाहते हैं: परमेश्वर की भलाई और उनका क्रोध एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। पद 7 में "यहोवा भला है" और पद 2 में "यहोवा जलन रखनेवाला" कोई विरोधाभास नहीं। जो परमेश्वर अपने लोगों के लिए दृढ़ गढ़ है, वही उन्हें कुचलनेवालों के विरुद्ध उठ खड़ा होता है। यदि परमेश्वर अन्याय के प्रति उदासीन होते, तो वे प्रेमी नहीं, केवल सहनशील होते। नहूम हमें दिखाते हैं कि पवित्रता का अर्थ है, बुराई को बुराई कहना, और उसका अन्त करना। यह भलाई की सबसे गहरी परत है।
सूत्र
पद 15 अचानक स्वर बदलता है: "पहाड़ों पर शुभ समाचार का सुनानेवाला और शान्ति का प्रचार करनेवाला आ रहा है!" यही वाक्य पौलुस रोमियों 10:15 में उठाकर मसीह के सुसमाचार पर लगाते हैं। नहूम के लिए यह शुभ समाचार था, नीनवे गिर गया है। पौलुस के लिए यह शुभ समाचार है, हमारा असली शत्रु, पाप और मृत्यु, गिर गया है। यहीं पुराना नियम नए में खुलता है। हर बार जब परमेश्वर किसी अत्याचारी शक्ति को तोड़ते हैं, वह क्रूस की ओर इशारा है, जहाँ सबसे बड़ी शक्तियों का जूआ हमारी गर्दन से उतारा गया। नहूम का "दृढ़ गढ़" अन्ततः मसीह में मूर्तिमान होता है।
दर्पण
यह अध्याय हमारी उस झूठी शान्ति को तोड़ता है जिसमें हम सोचते हैं कि परमेश्वर हर बात पर आँख मूँद लेंगे। जब कार्यस्थल पर कोई आपको वर्षों तक कुचलता है, जब परिवार में कोई शक्तिशाली व्यक्ति दूसरों को दबाकर रखता है, जब समाज में अन्यायी फलते-फूलते दिखते हैं, तब नहूम कहते हैं, परमेश्वर भूले नहीं हैं। "अपने शत्रुओं का पाप नहीं भूलता।" पर यही शब्द दूसरी ओर से भी काटता है। हम भी कहीं न कहीं किसी के लिए नीनवे हैं। जिस पद 7 को हम अपने लिए दावा करते हैं, उसी अध्याय का पद 6 हमसे पूछता है, क्या हम स्वयं उस क्रोध के सामने ठहर सकते हैं? यह प्रश्न हमें कृपा की ओर धकेलता है, आत्मसंतुष्टि से बाहर।
विवरण
पद 3 का एक वाक्य रुककर पढ़ने योग्य है: "बादल उसके पाँवों की धूल हैं।" कल्पना कीजिए, जब कोई सेना मार्च करती है, तो उसके पीछे धूल का बादल उठता है। यहाँ आकाश के बादल, वे विशाल घने बादल जिन्हें देखकर हम छोटे लगते हैं, परमेश्वर के चरणों की धूल मात्र हैं। यह चित्र नीनवे के अश्शूरी सम्राटों को सीधे संबोधित करता है, जो स्वयं को देवताओं जैसा घोषित करते थे और जिनकी सेनाएँ धूल उड़ाती हुई राष्ट्रों को रौंदती थीं। नहूम कहते हैं, तुम्हारी सारी सैन्य शक्ति परमेश्वर के लिए एक कदम की धूल है। यह अलंकार नहीं, यह राजनीतिक धर्मशास्त्र है।
संदर्भ
नहूम लगभग सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व में लिखते हैं, नीनवे के पतन (612 ई.पू.) से कुछ पहले। अश्शूर उस समय की महाशक्ति था, क्रूर, विजयी, अजेय दिखनेवाला। उन्होंने 722 ई.पू. में उत्तरी इस्राएल को नष्ट कर दिया था और यहूदा को दशकों तक कर देते हुए झुकाकर रखा। योना की पुस्तक याद कीजिए, वहाँ नीनवे ने पश्चाताप किया था। अब, पीढ़ियों बाद, वही नगर फिर अत्याचार में डूब चुका है। परमेश्वर की सहनशीलता अनन्त नहीं है। नहूम की भाषा उस युग की सैन्य कविता की भाषा है, पर उसका विषय उलटा है, अश्शूर विजेता नहीं, विजित है।
पात्र
नहूम के पहले सुननेवाले यहूदा के वे लोग थे जो दशकों से अश्शूर के जूए तले जीते आए थे। उन्होंने अपने भाइयों को उत्तर में मरते देखा था, अपने बच्चों को बंधुआई में जाते देखा था, अपने मन्दिर की दहलीज तक विदेशी सेनाओं को आते देखा था। उनके लिए पद 13 का यह वचन, "अब मैं उसका जूआ तेरी गर्दन पर से उतारकर तोड़ डालूँगा," कोई काव्यात्मक अलंकार नहीं था। यह साँस लेने की स्वतंत्रता थी। और पद 15 का "शुभ समाचार" उनके कानों में उस दौड़ते हुए दूत की छवि जगाता था जो युद्धभूमि से पहाड़ों को पार करता हुआ नगर की ओर विजय की खबर लेकर आता है। सुसमाचार शब्द का जन्म ऐसे ही क्षणों में हुआ।
चिंतन
क्या मैं परमेश्वर की भलाई को उनकी पवित्रता से अलग करके अपने लिए एक सुविधाजनक परमेश्वर तो नहीं गढ़ रहा, जो केवल आराम देता है पर कभी न्याय नहीं करता?
*पद 15 का "शुभ समाचार का सुनानेवाला" आज मेरे जीवन में किन ठोस परिस्थितियों में मुझे भेजा जा रहा है,
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Nahum 1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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नहूम 1 का क्या अर्थ है?
नहूम 1 किस विषय में है?
नहूम 1 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
नहूम 1 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
नहूम 1 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Nahum 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि अन्याय करनेवालों की ताकत हमेशा नहीं टिकती। जो काँटों से उलझे और मदिरा से मतवाले हैं, वे "सूखी खूँटी के समान भस्म हो जाएँगे।" धन्यवाद कि हमें बदला लेने की ज़रूरत नहीं, आप स्वयं न्याय करते हैं और हम चैन से सो सकते हैं।
नहूम की किताब नीनवे पर आती आग से भरी है, बादल, आँधी, पिघलते पहाड़। और उसी गर्जन के बीच अचानक यह पंक्ति आती है: "यहोवा भला है, संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ है, और अपने शरणागतों की सुधि रखता है।" ध्यान दे, वह भीड़ को नहीं, तुझे जानता है। जो उसकी ओट में दुबका है, उसका नाम उसे याद है। तेरा तूफान भी उसकी भलाई को नहीं मिटा सका।
पिता, तेरी पवित्रता के सामने मैं छोटा पड़ जाता हूँ। जो चट्टानें मुझे मजबूत लगती हैं, वे भी तेरे सामने टिक नहीं पातीं। मुझे डर नहीं, बल्कि सच्चा आदर सिखा। जहाँ मेरा दिल कठोर हुआ है, उसे नरम कर, और अपनी दया में मुझे थामे रख।
नीनवे ने सोचा था कि उसकी क्रूरता का हिसाब कोई नहीं रख रहा। पर नहूम कहता है, "यहोवा जलन रखनेवाला और बदला लेनेवाला परमेश्वर है।" यह जलन ठंडी नहीं, यह प्रेम की आग है, अपने लोगों के लिए। जो तुझे कुचलते हैं, वह उन्हें भूलता नहीं। तेरे आँसू उसके सामने दर्ज हैं। सवाल यह है, क्या तू हिसाब उसके हाथ में छोड़ पाएगा?
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