बाइबल व्याख्या

नहेम्याह 4

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

मूल पाठ

"जो कुछ वे बना रहे हैं, यदि कोई गीदड़ भी उस पर चढ़े, तो वह उनकी बनाई हुई पत्थर की शहरपनाह को तोड़ देगा।" तोबियाह की इस हँसी से अध्याय शुरू होता है। सम्बल्लत और उसके साथी पहले ताने मारते हैं, फिर सामरिया, अरब, अम्मोन और अश्दोद की ताक़तें मिलकर यरूशलेम पर हमले की साज़िश रचती हैं। भीतर मज़दूरों का हौसला टूटता है, मलबा बहुत है और बल घट गया है। नहेमायाह प्रार्थना करता है, पहरे बिठाता है, घरानों के अनुसार लोगों को हथियार देकर खुले स्थानों में तैनात करता है, और काम ऐसे चलता है कि एक हाथ में बोझ और दूसरे में हथियार, जब तक तारे न निकल आएँ।

मर्म

इस अध्याय की धर्मशास्त्रीय रीढ़ चौदहवें पद में है: "उनसे मत डरो; प्रभु जो महान और भययोग्य है, उसी को स्मरण करके, अपने भाइयों, बेटों, बेटियों, स्त्रियों और घरों के लिये युद्ध करना।" डर मिटाया नहीं जाता, उसका पता बदल दिया जाता है। जो परमेश्वर के सामने काँपता है, वह सम्बल्लत के सामने सीधा खड़ा हो सकता है। और ध्यान दीजिए कि "हमारा परमेश्वर हमारी ओर से लड़ेगा" यह वाक्य उस आदमी के मुँह से निकलता है जो उसी साँस में बर्छियाँ बाँट रहा है। विश्वास यहाँ सावधानी का विरोधी नहीं; पद नौ में प्रार्थना और पहरुए एक ही वाक्य में बैठते हैं। परमेश्वर युक्ति निष्फल करते हैं, पर वे ऐसा जागते हुए लोगों के बीच करते हैं।

जोड़ने वाला धागा

यरूशलेम की दीवार कोई इंजीनियरिंग परियोजना भर नहीं थी। बिना दीवार का शहर उस ज़माने में शहर ही नहीं था, वह खुला गाँव था, जिस पर कोई भी टोली किसी भी रात उतर सकती थी। दीवार का अर्थ था: यह जाति फिर से है, और इसका परमेश्वर फिर से इसके बीच बसता है। सम्बल्लत की नाराज़गी राजनीतिक थी, पर उसके पीछे वह पुरानी लड़ाई है जो परमेश्वर के लोगों के अस्तित्व से ही चिढ़ती है। बेबीलोन ने जो जलाया, परमेश्वर उसे मिट्टी के ढेरों से उठाते हैं; यही ढर्रा आगे चलकर मसीह में अपनी चरम सीमा पाता है, जो पत्थरों की नहीं, जीवित पत्थरों की दीवार उठाते हैं और कहते हैं कि अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

दर्पण

आपकी अपनी दीवार शायद आधी ऊँचाई तक जुड़ चुकी है। शादी में वह बातचीत जो आपने शुरू तो की पर पूरी नहीं हुई। वह बच्चा जिसके लिए आप सालों से प्रार्थना कर रहे हैं। वह नौकरी जहाँ आपके ईमान को हँसी में उड़ाया जाता है, सीधे नहीं, बस उस हल्के मज़ाक से जो गीदड़ वाली चुटकी जैसा चुभता है। और सबसे ईमानदार पद दसवाँ है: "ढोनेवालों का बल घट गया, और मिट्टी बहुत पड़ी है।" थकान सबसे ख़तरनाक दुश्मन है, क्योंकि वह भीतर से बोलती है और सच लगती है। नहेमायाह ने उस शिकायत पर प्रवचन नहीं दिया, उसने लोगों को परिवार के पास, अपने-अपने घराने के साथ खड़ा कर दिया। आज एक काग़ज़ पर अपनी उस अधबनी दीवार का नाम लिखिए, और उसके नीचे यह वाक्य लिखकर उसे वहीं चिपका दीजिए जहाँ वह काम होता है: "हमारा परमेश्वर हमारी ओर से लड़ेगा।"

एक बारीकी

सम्बल्लत का सबसे तीखा ताना यह है: "क्या वे मिट्टी के ढेरों में के जले हुए पत्थरों को फिर नये सिरे से बनाएँगे?" इब्रानी में यहाँ जो क्रिया है, येहय्यू, उसका अर्थ "बनाना" नहीं, "जिलाना" है। वही शब्द जो मुर्दों के जी उठने के लिए इस्तेमाल होता है। सम्बल्लत असल में पूछ रहा है: क्या ये लोग राख को ज़िंदा करेंगे? वह व्यंग्य में बोल रहा है, पर अनजाने में उसने पूरे बाइबिल के परमेश्वर की परिभाषा कह दी है। क्योंकि यही तो वे करते हैं: बँधुआई से लौटाते हैं, जली हुई चीज़ों को फिर खड़ा करते हैं, कब्र से उठाते हैं। दुश्मन का मज़ाक अक्सर विश्वास की सबसे सटीक गवाही बन जाता है।

मुख्य पात्र

नहेमायाह कोई संत-मूर्ति नहीं है। वह फ़ारसी दरबार का अनुभवी अधिकारी है, जो ठेकेदार और सेनापति दोनों की तरह सोचता है: लोगों को घरानों के हिसाब से तैनात करता है, आधे को हथियार और आधे को औज़ार देता है, नरसिंगे वाले को अपने पास रखता है, गाँव वालों को रात शहर के भीतर बिताने का हुक्म देता है। और यही आदमी अपमान से तिलमिलाकर परमेश्वर के सामने गिड़गिड़ाता है। तेईसवें पद में उसकी आत्मा दिखती है: हफ़्तों तक कपड़े तक नहीं उतारता, पानी लेने भी हथियार के साथ जाता है। यह उस व्यक्ति की तस्वीर है जिसने अपनी देह को परियोजना में झोंक दिया। आस्था यहाँ भावना नहीं, नींद की कुर्बानी है।

कठिन प्रश्न

पद चार और पाँच की प्रार्थना को कोई कैसे पचाए? "उनका अधर्म तू न ढाँप, और न उनका पाप तेरे सम्मुख से मिटाया जाए।" यह वही बात है जिसका उलटा यीशु क्रूस पर कहते हैं। सस्ती सफ़ाई देने की ज़रूरत नहीं। हाँ, यह ध्यान देने लायक है कि नहेमायाह ने तलवार उठाकर बदला नहीं लिया, उसने मामला परमेश्वर के हाथ में सौंप दिया, और यही प्रार्थना और प्रतिशोध का अंतर है। फिर भी शब्द कड़वे हैं, और बाइबिल उन्हें मिटाती नहीं। शायद इसीलिए कि परमेश्वर हमारी असली आवाज़ सुनना पसंद करते हैं, सजी हुई नहीं। पर जब हम मसीह को जानते हैं, तो ऐसी प्रार्थना हमारे मुँह में पहले जैसी नहीं रहती। वह हमें असहज करती है, और वह असहजता ही शायद सही जगह है।

चिंतन

आपके जीवन में इस समय कौन सी "आधी ऊँचाई" है, और वहाँ आपका बल किस वजह से घट रहा है: विरोध की वजह से या मलबे की वजह से?

नहेमायाह ने नरसिंगे का इंतज़ाम इसलिए किया क्योंकि लोग दीवार पर एक दूसरे से दूर थे। आपकी दीवार पर आपके पास से कौन लापता है, और आज आप उसे किस तरह बुला सकते हैं?

Nehemiah में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Nehemiah

Raymond Brown

Leadership, prayer and perseverance while rebuilding broken walls.

Ezra and Nehemiah: An Introduction and Commentary

Derek Kidner

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Nehemiah For You

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Rebuilding with grit and grace, applied to church and city life today.

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Nehemiah 4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

नहेम्याह 4 का क्या अर्थ है?
"जो कुछ वे बना रहे हैं, यदि कोई गीदड़ भी उस पर चढ़े, तो वह उनकी बनाई हुई पत्थर की शहरपनाह को तोड़ देगा।" तोबियाह की इस हँसी से अध्याय शुरू होता है। सम्बल्लत और उसके साथी पहले ताने मारते हैं, फिर सामरिया, अरब, अम्मोन और अश्दोद की ताक़तें मिलकर यरूशलेम पर हमले की साज़िश रचती हैं। भीतर मज़दूरों का हौसला टूटता है, मलबा बहुत है और बल घट गया है। नहेमायाह प्रार्थना करता है, पहरे बिठाता है, घरानों के अनुसार लोगों को हथियार देकर खुले स्थानों में तैनात करता है, और काम ऐसे चलता है कि एक हाथ में बोझ और दूसरे में हथियार, जब तक तारे न निकल आएँ।
नहेम्याह 4 किस विषय में है?
यरूशलेम की दीवार कोई इंजीनियरिंग परियोजना भर नहीं थी। बिना दीवार का शहर उस ज़माने में शहर ही नहीं था, वह खुला गाँव था, जिस पर कोई भी टोली किसी भी रात उतर सकती थी। दीवार का अर्थ था: यह जाति फिर से है, और इसका परमेश्वर फिर से इसके बीच बसता है। सम्बल्लत की नाराज़गी राजनीतिक थी, पर उसके पीछे वह पुरानी लड़ाई है जो परमेश्वर के लोगों के अस्तित्व से ही चिढ़ती है। बेबीलोन ने जो जलाया, परमेश्वर उसे मिट्टी के ढेरों से उठाते हैं; यही ढर्रा आगे चलकर मसीह में अपनी चरम सीमा पाता है, जो पत्थरों की नहीं, जीवित पत्थरों की दीवार उठाते हैं और कहते हैं कि अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।
नहेम्याह 4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
सम्बल्लत का सबसे तीखा ताना यह है: "क्या वे मिट्टी के ढेरों में के जले हुए पत्थरों को फिर नये सिरे से बनाएँगे?" इब्रानी में यहाँ जो क्रिया है, येहय्यू, उसका अर्थ "बनाना" नहीं, "जिलाना" है। वही शब्द जो मुर्दों के जी उठने के लिए इस्तेमाल होता है। सम्बल्लत असल में पूछ रहा है: क्या ये लोग राख को ज़िंदा करेंगे?
नहेम्याह 4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद चार और पाँच की प्रार्थना को कोई कैसे पचाए? "उनका अधर्म तू न ढाँप, और न उनका पाप तेरे सम्मुख से मिटाया जाए।" यह वही बात है जिसका उलटा यीशु क्रूस पर कहते हैं। सस्ती सफ़ाई देने की ज़रूरत नहीं। हाँ, यह ध्यान देने लायक है कि नहेमायाह ने तलवार उठाकर बदला नहीं लिया, उसने मामला परमेश्वर के हाथ में सौंप दिया, और यही प्रार्थना और प्रतिशोध का अंतर है। फिर भी शब्द कड़वे हैं, और बाइबिल उन्हें मिटाती नहीं। शायद इसीलिए कि परमेश्वर हमारी असली आवाज़ सुनना पसंद करते हैं, सजी हुई नहीं। पर जब हम मसीह को जानते हैं, तो ऐसी प्रार्थना हमारे मुँह में पहले जैसी नहीं रहती। वह हमें असहज करती है, और वह असहजता ही शायद सही जगह है।
नहेम्याह 4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
नहेमायाह ने नरसिंगे का इंतज़ाम इसलिए किया क्योंकि लोग दीवार पर एक दूसरे से दूर थे। आपकी दीवार पर आपके पास से कौन लापता है, और आज आप उसे किस तरह बुला सकते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Nehemiah 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, चारों ओर से डराने वाली खबरें आती हैं और मन बार बार घबरा जाता है। मुझे इन आवाज़ों के बीच तेरी आवाज़ सुनना सिखा। जो काम तूने मेरे हाथ में दिया है, उसे डर के कारण छोड़ न दूँ। तू मेरे साथ है, यही मेरा भरोसा बने।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 9

पिता, जब चारों ओर से डर घेरता है, तो सबसे पहले मैं तेरी ओर मुड़ना चाहता हूँ। तू मुझे प्रार्थना करना भी सिखा और जागते रहना भी, ताकि मैं न तो लापरवाह बनूँ और न ही अपनी ताकत पर भरोसा करूँ। दिन हो या रात, तू ही मेरी सुरक्षा है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 17

पिता, मेरे हाथ काम में लगे हैं और मन डर से भरा है। मुझे वह भरोसा दे कि मैं बनाता भी रहूँ और सतर्क भी रहूँ। जो दीवार तूने मुझे सौंपी है, उसे विरोध के बीच भी खड़ा करने की ताकत दे। तेरा साथ ही मेरी सुरक्षा है।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 14

पिता, धन्यवाद कि आप महान और भययोग्य हैं, और आपको स्मरण करते ही मेरा डर छोटा पड़ जाता है। धन्यवाद कि आपने मुझे लड़ने योग्य कुछ दिया है: मेरे भाई, मेरे बच्चे, मेरा घर। आपकी सामर्थ्य से मैं उनके लिये खड़ा रह सकता हूँ।

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