बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 124

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

एक अगुवा भीड़ के सामने खड़ा होकर पुकारता है, और पूरी जमात उसके पीछे दोहराती है: "यदि हमारी ओर यहोवा न होता।" वाक्य अधूरा छोड़ा गया है, जैसे बोलनेवाले की साँस अटक गई हो। फिर वह चित्र खींचता है: क्रोध से भड़के हुए मनुष्य, निगल जाने को खुला मुँह, उमड़ता हुआ पानी जो बहा ले जाता है। और अंत में राहत की साँस, एक चिड़िया जो चिड़ीमार के फटे जाल से फुर्र से उड़ जाती है। भजन का समापन एक ठोस वाक्य पर होता है: हमारी सहायता उसी परमेश्वर के नाम से होती है जिसने आकाश और पृथ्वी बनाए।

मूल बात

ध्यान दीजिए कि यह भजन अपनी बहादुरी नहीं गिनाता। कोई तलवार नहीं, कोई रणनीति नहीं, कोई वीर योद्धा नहीं। केवल एक "यदि" और उसका भयानक उत्तर। बचाव का पूरा श्रेय एक ही ओर जाता है, और इसीलिए यह भजन इतना साफ है। इस्राएल यह नहीं कह रहा कि हम काफी मजबूत निकले; वह कह रहा है कि हम निगले ही जा चुके होते, पानी हमारे सिर के ऊपर से बह चुका होता, अगर परमेश्वर हमारी ओर न होते। अनुग्रह की परिभाषा इससे अधिक सटीक शायद ही कहीं मिले: बचा हुआ व्यक्ति जानता है कि वह अपने बल पर नहीं बचा। और यही जानना ही उपासना का जन्मस्थान है।

मुख्य सूत्र

"हमारी ओर यहोवा" का अर्थ केवल सहायता नहीं, पक्षधरता है। परमेश्वर तटस्थ दर्शक नहीं, वे एक पक्ष लेते हैं, और वह पक्ष कमजोर का है। यही सूत्र पूरे बाइबल में खिंचता चला जाता है: लाल समुद्र पर उमड़ता पानी, निर्वासन से लौटना, और अंत में वह जिसके विषय पौलुस पूछता है, "यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन?" फर्क यह है कि मसीह में परमेश्वर हमारी ओर केवल खड़े नहीं हुए, वे हमारी जगह खड़े हुए। उमड़ता जल उन्हें मिला, दाँत उन्हीं पर पड़े, और जाल क्रूस पर फटा। इस्राएल के मुँह से निकली यह राहत की साँस ईस्टर की सुबह में पूरी होती है।

दर्पण

हम में से अधिकांश को शत्रु सेना का सामना नहीं करना पड़ता, पर उमड़ते पानी का अनुभव जाना-पहचाना है। वह ईमेल जिसने नौकरी हिला दी, वह रिपोर्ट जिसमें डॉक्टर की आवाज धीमी हो गई, वह बेटा जो फोन नहीं उठाता, वह कर्ज जो हर महीने थोड़ा और ऊपर चढ़ता है। ऐसे समय में हम हिसाब लगाना शुरू करते हैं: मैंने क्या किया, मैं और क्या कर सकता था। यह भजन उस हिसाब को तोड़ता है, पर सस्ती तसल्ली देकर नहीं। यह आपसे कहता है: पीछे मुड़कर देखिए और गिनिए कि आप कितनी बार निगले ही जा चुके होते। आज दस मिनट निकालिए और कागज पर एक ऐसी घटना लिखिए जिससे आप बच निकले, और उसके नीचे लिखिए: "यदि हमारी ओर यहोवा न होता।"

एक बारीकी

सातवें पद में चिड़िया का चित्र सबसे कोमल है और सबसे सटीक भी। चिड़ीमार का जाल जमीन पर बिछा होता है, छिपा हुआ, और पक्षी को पता तक नहीं चलता कि वह कब फँसा। फँसने के बाद उसका फड़फड़ाना किसी काम का नहीं; जाल जितना हिलता है उतना कसता है। इसलिए भजनकार यह नहीं कहता कि हमने जाल तोड़ा। वह कहता है, "जाल फट गया और हम बच निकले।" क्रिया निष्क्रिय है, बचाव बाहर से आया। जो कभी किसी व्यसन, किसी अवसाद, किसी रिश्ते के फंदे में रहा है, वह जानता है कि यह चित्र कितना ईमानदार है: हम फड़फड़ाते हैं, परमेश्वर जाल फाड़ते हैं।

अंतर्पाठ

पद 8 कोई धार्मिक तुक नहीं, बल्कि जानबूझकर चुना गया वाक्य है: सहायता उसी के नाम से आती है "जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।" यह उत्पत्ति 1 की ओर इशारा है। जिस परमेश्वर ने अराजक जल को सीमा दी, वही अब उमड़ते जल से अपने लोगों को निकालते हैं; सृष्टि और छुटकारा एक ही हाथ का काम हैं। दूसरी गूँज भजन 121 में है, जो इसी यात्रा-गीतों की श्रृंखला का हिस्सा है और लगभग यही वाक्य दोहराता है। तीर्थयात्री एक ही बात बार-बार गाते थे, क्योंकि वे जानते थे कि डर भूलने से नहीं, दोहराने से हारता है।

पृष्ठभूमि

यह भजन "यात्रा के गीतों" में गिना जाता है, वे गीत जो तीर्थयात्री यरूशलेम की चढ़ाई पर गाते थे। कल्पना कीजिए धूल भरी सड़क, परिवार, गधे, बच्चे, और बीच-बीच में एक आवाज जो गीत उठाती है और बाकी सब साथ देते हैं। गानेवाले कोई साम्राज्य नहीं थे; बेबीलोन से लौटा हुआ एक छोटा, कमजोर समुदाय, जिसकी दीवारें टूटी थीं और जिसके पड़ोसी दोस्त नहीं थे। उनके लिए "मनुष्यों ने हम पर चढ़ाई की" कोई रूपक नहीं था, वह स्मृति थी। इसीलिए यह भजन सामूहिक है: "इस्राएल यह कहे।" यह अकेले बिस्तर पर फुसफुसाने के लिए नहीं, मिलकर ऊँची आवाज में कहने के लिए लिखा गया।

चिंतन

आपके जीवन का कौन-सा "जाल" आपने खुद तोड़ा मान लिया है, जबकि सच यह है कि वह आपके लिए फाड़ा गया था?

आपका विश्वास-समुदाय किन बातों के लिए मिलकर ऊँची आवाज में धन्यवाद कहता है, और क्या आप उस आवाज में शामिल होते हैं या चुप रहते हैं?

Psalms में और गहराई से जानें

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The Songs of Jesus

Timothy Keller

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Psalms 1-72

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Psalms 73-150

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Reflections on the Psalms

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Psalms 124 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 124 का क्या अर्थ है?
एक अगुवा भीड़ के सामने खड़ा होकर पुकारता है, और पूरी जमात उसके पीछे दोहराती है: "यदि हमारी ओर यहोवा न होता।" वाक्य अधूरा छोड़ा गया है, जैसे बोलनेवाले की साँस अटक गई हो। फिर वह चित्र खींचता है: क्रोध से भड़के हुए मनुष्य, निगल जाने को खुला मुँह, उमड़ता हुआ पानी जो बहा ले जाता है। और अंत में राहत की साँस, एक चिड़िया जो चिड़ीमार के फटे जाल से फुर्र से उड़ जाती है। भजन का समापन एक ठोस वाक्य पर होता है: हमारी सहायता उसी परमेश्वर के नाम से होती है जिसने आकाश और पृथ्वी बनाए।
भजन संहिता 124 किस विषय में है?
"हमारी ओर यहोवा" का अर्थ केवल सहायता नहीं, पक्षधरता है। परमेश्वर तटस्थ दर्शक नहीं, वे एक पक्ष लेते हैं, और वह पक्ष कमजोर का है। यही सूत्र पूरे बाइबल में खिंचता चला जाता है: लाल समुद्र पर उमड़ता पानी, निर्वासन से लौटना, और अंत में वह जिसके विषय पौलुस पूछता है, "यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन?
भजन संहिता 124 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
सातवें पद में चिड़िया का चित्र सबसे कोमल है और सबसे सटीक भी। चिड़ीमार का जाल जमीन पर बिछा होता है, छिपा हुआ, और पक्षी को पता तक नहीं चलता कि वह कब फँसा। फँसने के बाद उसका फड़फड़ाना किसी काम का नहीं; जाल जितना हिलता है उतना कसता है। इसलिए भजनकार यह नहीं कहता कि हमने जाल तोड़ा। वह कहता है, "जाल फट गया और हम बच निकले।" क्रिया निष्क्रिय है, बचाव बाहर से आया। जो कभी किसी व्यसन, किसी अवसाद, किसी रिश्ते के फंदे में रहा है, वह जानता है कि यह चित्र कितना ईमानदार है: हम फड़फड़ाते हैं, परमेश्वर जाल फाड़ते हैं।
भजन संहिता 124 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह भजन "यात्रा के गीतों" में गिना जाता है, वे गीत जो तीर्थयात्री यरूशलेम की चढ़ाई पर गाते थे। कल्पना कीजिए धूल भरी सड़क, परिवार, गधे, बच्चे, और बीच-बीच में एक आवाज जो गीत उठाती है और बाकी सब साथ देते हैं। गानेवाले कोई साम्राज्य नहीं थे; बेबीलोन से लौटा हुआ एक छोटा, कमजोर समुदाय, जिसकी दीवारें टूटी थीं और जिसके पड़ोसी दोस्त नहीं थे। उनके लिए "मनुष्यों ने हम पर चढ़ाई की" कोई रूपक नहीं था, वह स्मृति थी। इसीलिए यह भजन सामूहिक है: "इस्राएल यह कहे।" यह अकेले बिस्तर पर फुसफुसाने के लिए नहीं, मिलकर ऊँची आवाज में कहने के लिए लिखा गया।
भजन संहिता 124 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपका विश्वास-समुदाय किन बातों के लिए मिलकर ऊँची आवाज में धन्यवाद कहता है, और क्या आप उस आवाज में शामिल होते हैं या चुप रहते हैं?

Psalms 124 में आपको क्या स्पर्श करता है?

इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।

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