भजन संहिता 58:8
पाठ
घोंघा और गर्भपात, ये दो चित्र दाऊद प्रार्थना में परमेश्वर के सामने रखते हैं। वह अन्यायी न्यायियों के विषय में माँगते हैं: "वे घोंघे के समान हो जाएँ जो घुलकर नाश हो जाता है, और स्त्री के गिरे हुए गर्भ के समान हो जिसने सूरज को देखा ही नहीं।" घोंघा चलते-चलते अपनी ही लीक में पिघलता जाता है, जैसे प्राचीन लोग समझते थे; और वह शिशु जो कभी प्रकाश देखे बिना ही चला गया। दोनों चित्रों का अर्थ एक ही है: जो हिंसा और झूठ से अपनी ताकत बनाते हैं, उनका नाम, उनका प्रभाव, उनकी विरासत, सब कुछ बिना निशान छोड़े मिट जाए। यह कोमल प्रार्थना नहीं है। यह उस आदमी की पुकार है जिसने अदालत में सच को बिकते देखा है।
मूल बात
इस आयत का धार्मिक केंद्र यह नहीं है कि दाऊद कितने क्रोधित हैं, बल्कि यह कि वे अपना क्रोध कहाँ ले जाते हैं। वे तलवार नहीं उठाते; वे परमेश्वर से माँगते हैं। बदले का हक उन्होंने अपने हाथ में नहीं, परमेश्वर के हाथ में छोड़ा है, और यही इस पूरे भजन को हिंसक प्रतिशोध से अलग करता है। इसके पीछे एक गहरी धारणा है: बुराई की कोई स्थायी सत्ता नहीं। जो अन्याय पर टिका है, वह भीतर से खोखला है, घोंघे की तरह अपने ही रास्ते में घुलता हुआ। परमेश्वर के जगत में झूठ की कोई भविष्यवाणी नहीं, कोई संतान नहीं, कोई सूरज नहीं। यह न्याय का वादा है, और उत्पीड़ितों के लिए यह वादा ही आशा की एकमात्र ज़मीन है।
जोड़ने वाला सूत्र
यह प्रार्थना अनुत्तरित नहीं रही, पर उसका उत्तर उस जगह आया जहाँ दाऊद ने नहीं सोचा था। सदियों बाद यरूशलेम में फिर एक अदालत बैठी, फिर वही न्यायी जो "मन ही मन में कुटिल काम" करते हैं, और इस बार कठघरे में वह धर्मी खड़ा था जिसके मुँह में कोई छल न था। जिस दण्ड की माँग भजन 58 करता है, वह क्रूस पर उतरा, पर दोषियों पर नहीं, निर्दोष पर। और वहाँ वे दोनों चित्र उलट गए: वह जो घुलकर मिट गया, वह वही था जिसने स्वयं को खाली किया; और जिसने सूरज नहीं देखा, वह वही था जिस पर दोपहर को अंधकार छा गया। मसीह ने बुराई का अंजाम अपने ऊपर ले लिया, ताकि हम पर से वह टल जाए। परमेश्वर का न्याय झूठा नहीं निकला; वह अपने ही पुत्र पर गिरा।
दर्पण
आपके भीतर भी एक अदालत लगी हुई है। वह सहकर्मी जिसने आपका काम अपने नाम कर लिया, वह रिश्तेदार जिसने संपत्ति में धोखा दिया, वह अधिकारी जिसने बिना रिश्वत फाइल नहीं बढ़ाई। रात में आप जो सुनवाई मन में चलाते हैं, उसमें आप ही वकील, आप ही जज, और फैसला हमेशा एक जैसा। यह भजन आपसे यह नहीं कहता कि गुस्सा गलत है। यह कहता है कि गुस्सा किसी और की मेज़ पर रखना है। जब तक आप न्याय अपने पास रखेंगे, आप ही उस कड़वाहट में घुलते जाएँगे, घोंघे की तरह। मसीह ने अपना मुकदमा उसको सौंप दिया जो सच्चा न्याय करता है, और इसी में उनकी स्वतंत्रता थी।
आज एक कागज़ पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए, ऊँची आवाज़ में कहिए, "न्याय आपका है, मेरा नहीं," और वह कागज़ फाड़ दीजिए।
संदर्भ
भजन का शीर्षक इसे दाऊद से जोड़ता है, और इसकी दुनिया राजदरबार की नहीं, अदालत की है। प्राचीन इस्राएल में न्याय नगर के फाटक पर होता था, खुले में, बुज़ुर्गों के सामने। वहाँ गवाह खड़े होते, वहाँ ज़मीन के झगड़े और खून के मुकदमे तय होते। जिसके पास ताकत या रिश्ते थे, वह गवाही खरीद सकता था; विधवा और परदेशी के पास कुछ नहीं था। पद 1 का सवाल, "क्या तुम सचमुच धार्मिकता की बात बोलते हो?" किसी दार्शनिक बहस का हिस्सा नहीं, बल्कि उन लोगों पर सीधा आरोप है जो ओढ़ने-बिछाने के लिए धर्म का नाम लेते थे और फैसले पैसे से बेचते थे। दाऊद के पास अपील की कोई ऊँची अदालत नहीं थी। इसीलिए वे सीधे स्वर्ग जाते हैं।
पहले सुनने वाले
जिन्होंने यह भजन पहली बार मंदिर में गाया, वे शालीन श्रोता नहीं थे। वे वे लोग थे जिनकी ज़मीन छिन चुकी थी, जिनके बेटे किसी और के झूठ में मारे गए थे। उनके लिए ये कठोर शब्द राहत थे, प्रार्थना में वह कहने की जगह जो वे बाज़ार में नहीं कह सकते थे। और गौर कीजिए, यह गीत मंडली के गाने के लिए था, निजी डायरी नहीं। इस्राएल की उपासना में क्रोध को छिपाया नहीं जाता था, उसे परमेश्वर के सामने लाया जाता था। जो सभा यह गाती थी, वह अपने हाथ खाली रखती थी और अपना मुँह खोलती थी। हमने अक्सर उलटा सीखा है: मुँह बंद, हाथ भरे हुए।
कठिन प्रश्न
क्या मरे हुए शिशु का चित्र अभिशाप के रूप में इस्तेमाल करना ठीक है? यह आयत उन लोगों को चोट पहुँचा सकती है जिन्होंने गर्भ खोया है, और उस चोट को मीठे शब्दों से ढाँकना बेईमानी होगी। दाऊद यहाँ किसी माँ के दुख को हथियार नहीं बना रहे, वे मानव जीवन के सबसे दर्दनाक अनुभव से एक ही बात उधार ले रहे हैं: पूरी तरह मिट जाना, बिना निशान। फिर भी सवाल टिका रहता है, और मैं उसे बंद नहीं करूँगा। शायद यही इस भजन की सच्चाई है: क्रोध सुंदर शब्द नहीं चुनता। परमेश्वर ने ऐसी प्रार्थना को अपनी पवित्र पुस्तक में जगह दी, बिना संपादन के, क्योंकि वे हमसे साफ-सुथरा दिल नहीं, असली दिल चाहते हैं।
चिंतन
आपके मन की किस अदालत में आप अब भी जज की कुर्सी पर बैठे हैं, और उसे छोड़ने में सबसे ज़्यादा डर किस बात का है?
यदि आपके शत्रु के लिए भी मसीह ने वही दण्ड उठाया जो आपके लिए उठाया, तो आपकी प्रार्थना का स्वर कहाँ बदलना चाहिए?
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Psalms 58:8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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भजन संहिता 58:8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 58 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
दाऊद यह नहीं कहता कि मैं इनसे बदला लूँगा। वह प्रार्थना करता है, "वे बहते हुए जल के समान बह जाएँ," और यह कि उनके तीर चलते समय टूट जाएँ। ध्यान दो, तीर तोड़ने का काम उसने परमेश्वर के हाथ में छोड़ दिया। जो गुस्सा तुम्हारे भीतर उबल रहा है, उसे दबाना ज़रूरी नहीं, पर उसे किसी के सिर पर उतारने से पहले परमेश्वर के सामने उतार दो। क्या तुम अपना तीर उसके हाथ में देने को तैयार हो?
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