बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 72:12

बाइबल

पाठ

बारहवाँ पद एक छोटे से शब्द "क्योंकि" से शुरू होता है, और वही शब्द इस पूरे भजन का भार उठाता है। ऊपर के पदों में राजा समुद्र से समुद्र तक राज कर रहा है, तर्शीश और शेबा के राजा भेंट ला रहे हैं, जाति-जाति के लोग झुक रहे हैं; और फिर अचानक कारण बताया जाता है: "क्योंकि वह दुहाई देनेवाले दरिद्र का, और दुःखी और असहाय मनुष्य का उद्धार करेगा।" यानी वह इसलिए पूजा के योग्य नहीं कि उसकी सीमाएँ चौड़ी हैं, बल्कि इसलिए कि जिसके पास कोई सहायक नहीं, उसकी पुकार उस तक पहुँचती है और वह उसे छुड़ाता है। राज्य की विशालता का औचित्य सबसे छोटे आदमी की चीख में छिपा है।

मर्म

यह पद परमेश्वर के राज्य को नापने का एक अलग ही पैमाना हमारे हाथ में रख देता है। हम शक्ति को ऊपर से नापते हैं: कितना बड़ा, कितना दूर तक, कितने लोग झुके। यह भजन नीचे से नापता है: क्या सबसे असहाय आदमी की आवाज़ सिंहासन तक पहुँची? ध्यान दीजिए कि दरिद्र के पास देने को कुछ नहीं है, न भेंट, न सोना, न राजनीतिक उपयोगिता। उसके पास केवल "दुहाई" है, और वही उसका पूरा दावा है। यहाँ परमेश्वर अपने बारे में कुछ ऐसा प्रकट करते हैं जो असहज करता है: उनकी दृष्टि में अधिकार का अर्थ है सुनने की ज़िम्मेदारी। और यदि यह सच है, तो हर वह सत्ता जो चीख से बहरी हो चुकी है, चाहे कितनी भी धार्मिक दिखे, उस सिंहासन से बहुत दूर खड़ी है।

जोड़ने वाला सूत्र

यह भजन दाऊद की प्रार्थना है, अपने बेटे के लिए, और कोई भी बेटा इस प्रार्थना का बोझ नहीं उठा सका। सुलैमान ने महल बनाए और बेगार भी लगाई; बाद के राजाओं ने दरिद्र की दुहाई को दरबार के बाहर ही छोड़ दिया। तब यह पद क्या बन जाता है? एक अधूरी माँग, जो पीढ़ियों तक इस्राएल की प्रार्थना-पुस्तक में पड़ी रही और हर राजतिलक पर फिर से पढ़ी गई, और हर बार थोड़ी और खोखली लगी। मत्ती अपने सुसमाचार की शुरुआत में पूर्व के ज्ञानियों को सोना और भेंट लाते हुए दिखाता है, ठीक इस भजन के दसवें पद की तस्वीर, पर जिसके सामने वे झुकते हैं वह एक गरीब माँ की गोद में है। राजा ने दरिद्र को केवल सुना नहीं, वह स्वयं दुहाई देनेवालों के बीच खड़ा हो गया। सूत्र यही है, और यह सोचने में देर लगती है।

दर्पण

पूछिए अपने आप से, बिना जल्दबाज़ी के: पिछली बार किसी की पुकार आप तक पहुँची थी और आपने उसे टाल दिया, कब? हममें से अधिकांश क्रूर नहीं हैं, बस व्यस्त हैं। ऑफिस का वह सहकर्मी जिसकी आवाज़ में कुछ टूटा हुआ था और आपने "बाद में बात करते हैं" कह दिया। घर में वह बुज़ुर्ग जिसकी शिकायतें अब पृष्ठभूमि का शोर बन चुकी हैं। यह पद हमारी बहरी होती जा रही सुनवाई पर उँगली रखता है, पर उससे पहले एक और जगह छूता है: शायद आप ही वह "असहाय मनुष्य" हैं, जिसके पास न सिफ़ारिश है, न सौदेबाज़ी की ताक़त, केवल दुहाई। यह भजन कहता है कि वही काफ़ी है। आज अपने फ़ोन की सूची खोलिए, उस एक व्यक्ति को ढूँढिए जिसने हाल में मदद माँगी थी और जिसे आपने टाला था, और अभी उसे संदेश भेजकर पूछिए कि अब क्या हाल है।

मुख्य पात्र

इस पद का राजा अजीब तरह से चुप है। वह भाषण नहीं देता, सेना नहीं गिनाता, अपने नाम की घोषणा नहीं करता। जो बताया जाता है वह केवल यह है कि वह झुककर सुनता है और फिर हाथ बढ़ाता है। तेरहवाँ पद जोड़ता है, "वह कंगाल और दरिद्र पर तरस खाएगा", और चौदहवाँ इससे भी आगे जाता है: "उनका लहू उसकी दृष्टि में अनमोल ठहरेगा।" यह किसी सम्राट की सामान्य भाषा नहीं है; सम्राटों के लिए गरीबों का खून सस्ता होता है, इतना सस्ता कि हिसाब भी नहीं रखा जाता। यहाँ राजा का भीतरी परिदृश्य करुणा से बना है, और करुणा उसकी कमज़ोरी नहीं, उसके अधिकार का स्रोत है। क्या हम ऐसे परमेश्वर की कल्पना करने को तैयार हैं जिसकी महानता उसकी कोमलता में दिखती है?

पृष्ठभूमि

प्राचीन पूर्व में राजा से यही अपेक्षा थी कि वह विधवा, अनाथ और दरिद्र का रक्षक हो; मिस्र से लेकर बाबुल तक के शिलालेख यही दावा करते हैं। पर वहाँ यह दावा प्रायः प्रचार था, राजा की मूर्ति के नीचे खुदा हुआ विज्ञापन। इस्राएल में यही अपेक्षा वाचा से जुड़ी थी: राजा परमेश्वर का प्रतिनिधि था, और परमेश्वर ने स्वयं को गुलामों की चीख सुननेवाले के रूप में प्रकट किया था। भजन 72 संभवतः राजतिलक के अवसर पर गाया जाता था, जब दरबार भरा होता, भेंटें रखी जातीं, और तभी यह पंक्ति गाई जाती कि असली कसौटी सबसे नीचे खड़ा आदमी है। कल्पना कीजिए उस भीड़ में खड़े किसी कर्ज़दार किसान की, जो यह सुन रहा है।

एक बारीकी

"असहाय" शब्द पर रुकिए। इब्रानी में इसके पीछे एक पूरा वाक्यांश है: "जिसका कोई सहायक नहीं" (एन-ओज़ेर लो)। यह किसी की स्थायी पहचान नहीं, एक क्षण का विवरण है, वह क्षण जब सारे दरवाज़े बंद मिलते हैं और कोई नाम याद नहीं आता जिसे पुकारा जा सके। भजन नहीं कहता कि यह आदमी नेक है, या कि उसने प्रार्थना सही ढंग से की। उसकी एकमात्र योग्यता यह है कि उसके पास कुछ नहीं है। यहीं इस पद का रहस्य खुलता है और साथ ही गहरा होता है: अनुग्रह का द्वार वहीं है जहाँ हमारे पास दिखाने को कुछ नहीं बचता। और शायद इसीलिए हम उस द्वार से इतना कतराते हैं।

चिंतन के प्रश्न

आपके जीवन में इस समय कौन "दुहाई देनेवाला" है जिसकी आवाज़ आप तक तो पहुँचती है, पर भीतर तक नहीं?

यदि परमेश्वर के सामने आपकी एकमात्र योग्यता आपका खालीपन है, तो आप किन चीज़ों को अब भी अपनी सिफ़ारिश की तरह पकड़े हुए हैं?

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Psalms 72:12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 72:12 का क्या अर्थ है?
बारहवाँ पद एक छोटे से शब्द "क्योंकि" से शुरू होता है, और वही शब्द इस पूरे भजन का भार उठाता है। ऊपर के पदों में राजा समुद्र से समुद्र तक राज कर रहा है, तर्शीश और शेबा के राजा भेंट ला रहे हैं, जाति-जाति के लोग झुक रहे हैं; और फिर अचानक कारण बताया जाता है: "क्योंकि वह दुहाई देनेवाले दरिद्र का, और दुःखी और असहाय मनुष्य का उद्धार करेगा।" यानी वह इसलिए पूजा के योग्य नहीं कि उसकी सीमाएँ चौड़ी हैं, बल्कि इसलिए कि जिसके पास कोई सहायक नहीं, उसकी पुकार उस तक पहुँचती है और वह उसे छुड़ाता है। राज्य की विशालता का औचित्य सबसे छोटे आदमी की चीख में छिपा है।
भजन संहिता 72:12 किस विषय में है?
यह भजन दाऊद की प्रार्थना है, अपने बेटे के लिए, और कोई भी बेटा इस प्रार्थना का बोझ नहीं उठा सका। सुलैमान ने महल बनाए और बेगार भी लगाई; बाद के राजाओं ने दरिद्र की दुहाई को दरबार के बाहर ही छोड़ दिया। तब यह पद क्या बन जाता है? एक अधूरी माँग, जो पीढ़ियों तक इस्राएल की प्रार्थना-पुस्तक में पड़ी रही और हर राजतिलक पर फिर से पढ़ी गई, और हर बार थोड़ी और खोखली लगी। मत्ती अपने सुसमाचार की शुरुआत में पूर्व के ज्ञानियों को सोना और भेंट लाते हुए दिखाता है, ठीक इस भजन के दसवें पद की तस्वीर, पर जिसके सामने वे झुकते हैं वह एक गरीब माँ की गोद में है। राजा ने दरिद्र को केवल सुना नहीं, वह स्वयं दुहाई देनेवालों के बीच खड़ा हो गया। सूत्र यही है, और यह सोचने में देर लगती है।
भजन संहिता 72:12 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इस पद का राजा अजीब तरह से चुप है। वह भाषण नहीं देता, सेना नहीं गिनाता, अपने नाम की घोषणा नहीं करता। जो बताया जाता है वह केवल यह है कि वह झुककर सुनता है और फिर हाथ बढ़ाता है। तेरहवाँ पद जोड़ता है, "वह कंगाल और दरिद्र पर तरस खाएगा", और चौदहवाँ इससे भी आगे जाता है: "उनका लहू उसकी दृष्टि में अनमोल ठहरेगा।" यह किसी सम्राट की सामान्य भाषा नहीं है; सम्राटों के लिए गरीबों का खून सस्ता होता है, इतना सस्ता
भजन संहिता 72:12 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"असहाय" शब्द पर रुकिए। इब्रानी में इसके पीछे एक पूरा वाक्यांश है: "जिसका कोई सहायक नहीं" (एन-ओज़ेर लो)। यह किसी की स्थायी पहचान नहीं, एक क्षण का विवरण है, वह क्षण जब सारे दरवाज़े बंद मिलते हैं और कोई नाम याद नहीं आता जिसे पुकारा जा सके। भजन नहीं कहता कि यह आदमी नेक है, या कि उसने प्रार्थना सही ढंग से की। उसकी एकमात्र योग्यता यह है कि उसके पास कुछ नहीं है। यहीं इस पद का रहस्य खुलता है और साथ ही गहरा होता है: अनुग्रह का द्वार वहीं है जहाँ हमारे पास दिखाने को कुछ नहीं बचता। और शायद इसीलिए हम उस द्वार से इतना कतराते हैं।
भजन संहिता 72:12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि परमेश्वर के सामने आपकी एकमात्र योग्यता आपका खालीपन है, तो आप किन चीज़ों को अब भी अपनी सिफ़ारिश की तरह पकड़े हुए हैं?
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Psalms 72 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 4

पिता, तू जानता है कि कौन दबा हुआ है और किसकी पुकार किसी ने नहीं सुनी। गरीबों के बच्चों को बचा, और जो उन्हें कुचलते हैं उनके हाथ रोक दे। मुझे भी ऐसा दिल दे जो चुप न रहे, बल्कि तेरे न्याय के पक्ष में खड़ा हो।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 12

धन्यवाद, प्रभु, कि तू दोहाई देनेवाले दरिद्र को और दुःखी और असहाय मनुष्य को छुड़ाता है। जब मेरे पास न ताकत थी न सहारा, तब तूने मेरी पुकार सुनी और मुझे उठाया। तेरे राज्य में कोई भी अनसुना नहीं रह जाता, यही मेरे मन की शांति है।

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