भजन संहिता 94
पाठ
भजन 94 एक चीख से शुरू होता है: "हे यहोवा, हे पलटा लेनेवाले परमेश्वर… अपना तेज दिखा!" दुष्ट डींग मार रहे हैं, विधवा, परदेशी और अनाथ मारे जा रहे हैं, और अपराधी यह मानकर निश्चिन्त हैं कि "यहोवा न देखेगा।" बीच में भजनकार पलटकर उन्हीं मूर्खों से तर्क करता है: जिसने कान बनाया, वह सुनता नहीं? और अन्त में वह अपने डगमगाते पाँव, अपनी बहुत सी चिन्ताएँ, और अपने गढ़ को एक साथ रख देता है: "यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है।"
मर्म
पद 20 इस भजन का सबसे तीखा वाक्य है: वे "कानून की आड़ में उत्पात मचाते हैं।" यहाँ अन्याय गली के गुंडे का नहीं, सिंहासन का है, कागज़ों और मुहरों वाला अन्याय, जो नियम की भाषा बोलकर निर्दोष का प्राण लेता है। और भजनकार पूछता है कि क्या परमेश्वर के सिंहासन और उस सिंहासन के बीच कोई संधि हो सकती है। उत्तर स्पष्ट है: नहीं। परमेश्वर तटस्थ मध्यस्थ नहीं हैं जो दोनों पक्षों को थोड़ा-थोड़ा संतुष्ट कर दें। वे "पृथ्वी के न्यायी" हैं, और न्याय "फिर धर्म के अनुसार किया जाएगा।" इसका अर्थ है: व्यवस्था का सही ढंग से पालन करके भी आप परमेश्वर के विरुद्ध खड़े हो सकते हैं। यह बात हमारे दफ़्तरों, हमारी अदालतों और हमारी कलीसिया की समितियों तक पहुँचती है।
सूत्र
पद 5 में परमेश्वर की प्रजा को "पीसा" जा रहा है, और पद 14 उत्तर देता है: "यहोवा अपनी प्रजा को न तजेगा।" यही तनाव पूरे बाइबल की कहानी का तनाव है, और यह यीशु मसीह में अपने चरम पर पहुँचता है। पद 21 का वाक्य, "वे धर्मी का प्राण लेने को दल बाँधते हैं, और निर्दोष को प्राणदण्ड देते हैं," गुड फ्राइडे का ठीक-ठीक वर्णन है: एक मुक़दमा, गवाह, राज्यपाल, और कानून की आड़ में मारा गया निर्दोष। पौलुस ने पद 11 को उठाकर 1 कुरिन्थियों 3:20 में रखा है, यह दिखाने के लिए कि मनुष्य की सारी चतुर योजनाएँ क्रूस के सामने मिथ्या ठहरती हैं। जो परमेश्वर अपने ही पुत्र के साथ हुए न्यायिक अपराध को नहीं भूले, वे आपके साथ हुए अन्याय को भी याद रखते हैं।
आइना
यह भजन दो तरह से चुभता है। पहला: आप कहाँ "यहोवा न देखेगा" की मान्यता पर जी रहे हैं? वह बिल जो थोड़ा बढ़ाकर भेजा गया, वह कर्मचारी जिसे नियम के अनुसार निकाला गया पर जिसका घर आपने नहीं सोचा, वह मज़दूरी जो महीनों से अटकी है, वह रिश्तेदार जिसकी ज़मीन कागज़ी दाँव से आपके नाम हो गई। पद 9 आपको छोड़ता नहीं: जिसने आँख रची, वह देखता है। दूसरा: यह भजन उन्हें भी छूता है जो पिस रहे हैं। पद 16 का अकेलापन असली है, "मेरी ओर कौन खड़ा होगा?", और उत्तर तुरन्त हाथ नहीं देता, करुणा देता है: "तेरी करुणा ने मुझे थाम लिया।" ध्यान दें, भजनकार बदला अपने हाथ में नहीं लेता; वह उसे परमेश्वर के हाथ में सौंपकर स्वयं खड़ा रहता है।
आज, दस मिनट में: उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिसके साथ आपके काम, परिवार या मोहल्ले में अन्याय हुआ है और जिसके पक्ष में कोई खड़ा नहीं है, और आज ही उसे फोन करके एक वाक्य कहिए: "मैंने देखा कि आपके साथ ठीक नहीं हुआ।"
प्रश्न
"दुष्ट लोग कब तक?" भजन इस प्रश्न का उत्तर नहीं देता। वह कहता है कि न्याय आएगा, पर कब, यह नहीं बताता। यह चुप्पी ईमानदार है, और क्रूर भी। विधवा और अनाथ जो पद 6 में मारे गए, उन्हें इस भजन के गाए जाने से जीवन नहीं मिला। हम इसे मुलायम नहीं कर सकते। जो हम कह सकते हैं वह इतना है: पद 13 देरी को अर्थ देता है, "तू उसको विपत्ति के दिनों में उस समय तक चैन देता रहता है।" परमेश्वर देरी के भीतर सहारा देते हैं, देरी को मिटाते नहीं। यह कम लगता है। कभी-कभी यही सब होता है जो हमारे हाथ में रहता है, और भजनकार इसी पर अपना पूरा भार डाल देता है।
पृष्ठभूमि
इसे गानेवाले लोग किसी शक्तिशाली साम्राज्य की प्रजा नहीं थे। शायद यह निर्वासन के बाद का इस्राएल है, या किसी भ्रष्ट राजा के अधीन बीता समय, जब न्याय नगर के फाटक पर बिकता था और विधवा-अनाथ-परदेशी, समाज के वे तीन वर्ग जिनका कोई कानूनी संरक्षक नहीं था, सबसे पहले पिसते थे। व्यवस्था में इन तीनों की विशेष रक्षा का आदेश था, इसलिए पद 6 केवल क्रूरता नहीं, परमेश्वर की व्यवस्था का सीधा उल्लंघन है। ये लोग यह भजन मन्दिर में सामूहिक रूप से गाते थे, अपने शासकों के कानों की पहुँच में। इसे गाना स्वयं एक साहस का काम था: सार्वजनिक रूप से यह घोषित करना कि असली सिंहासन कहीं और है।
मुख्य पात्र
इस भजन के केन्द्र में परमेश्वर हैं, और उनका चित्र दो हाथों वाला है। एक हाथ "पलटा लेनेवाले परमेश्वर" का है, वह जो घमण्डियों को बदला देता है और उनका अनर्थ काम उन्हीं पर लौटाता है। दूसरा हाथ पद 18 का है, वह जो फिसलते पाँव को थाम लेता है। हमें इन दोनों को अलग करने की आदत है, जैसे न्याय पुराने नियम का हो और करुणा नए नियम की। यह भजन इसकी अनुमति नहीं देता। वही परमेश्वर जो चट्टान बनकर शरण देते हैं, वही तोड़नेवाले भी हैं, क्योंकि जो प्रेम करता है वह तटस्थ नहीं रह सकता। और ध्यान दीजिए: वे ताड़ना देनेवाले भी हैं, और भजनकार उसे धन्यता कहता है, क्योंकि ताड़ना के साथ "अपनी व्यवस्था" सिखाना जुड़ा है।
चिन्तन
आपके जीवन में वह कौन-सी जगह है जहाँ आप नियमों के भीतर रहकर भी किसी को पीस रहे हैं?
"मेरी ओर कौन खड़ा होगा?" किसी के लिए यह प्रश्न आप बन सकते हैं, यह इस सप्ताह कहाँ सम्भव है?
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Psalms 94 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 94 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 94 किस विषय में है?
भजन संहिता 94 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 94 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 94 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 94 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि तू मुझे विपत्ति के दिनों में विश्राम देता है। जब चारों ओर से मुसीबतें घेर लेती हैं, तब तेरे वचन से मिली शान्ति मेरे मन को थाम लेती है। धन्यवाद कि दुष्टता सदा टिकी नहीं रहेगी, तेरा न्याय निश्चित है और मेरा इंतज़ार व्यर्थ नहीं।
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