नई भोर, मीठे वचन, सच्चा सहारा
दया और सहारा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए विलापगीत 3:22-23, नीतिवचन 16:24, यिर्मयाह 20:7 and भजन संहिता 121:1-2.
☀ सुबह का पल
हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है।
विलापगीत 3:22-23
हर सुबह हमें लगता है कि आज का दिन कल जैसा ही होगा, वही थकान, वही चिंताएँ, वही अधूरे काम जो पिछले दिन से चले आ रहे हैं। मन यही मान लेता है कि नयापन बस एक भ्रम है।
लेकिन यह वचन कुछ और कहता है। यहोवा की करुणा हर सुबह नई है। कल की असफलता, कल की थकावट, कल का डर, कोई भी बात परमेश्वर की दया को घटा नहीं सकती। वह हर सुबह नए सिरे से आपके साथ चलने को तैयार हैं।
यह इसलिए संभव है क्योंकि परमेश्वर स्वयं अपरिवर्तनशील और विश्वासयोग्य हैं। उनकी करुणा आपके प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करती। वह आपके भीतर के हौसले पर निर्भर नहीं करती। वह परमेश्वर के चरित्र से निकलती है, इसलिए वह कभी चुकती नहीं।
तो आज जब आप घर से निकलें, दफ्तर जाएँ, या दिन की पहली फोन कॉल उठाएँ, याद रखें कि यह दिन कल की नकल नहीं है। यह एक नई सुबह है, जिसमें परमेश्वर की करुणा फिर से ताज़ा होकर आपके सामने खड़ी है।
आप शायद अभी भी थके हुए हों, या मन में कुछ चिंता लिए हों। पर उसी थकान में यह वचन थाम लीजिए, उनकी विश्वासयोग्यता महान है, और वह आज भी उतनी ही सच है जितनी कल थी।
यह दिन समर्पित करें →✦ दोपहर का पल
मनभावने वचन मधु भरे छत्ते के समान प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं।
नीतिवचन 16:24
एक शब्द ध्यान से देखो, 'हड्डियों'। यह पद कह सकता था कि मीठे शब्द कानों को अच्छे लगते हैं, या मन को शांति देते हैं। पर यह सीधे हड्डियों तक जाता है, उस गहराई तक जहाँ दिनभर की थकान जमा होती रहती है।
दोपहर का यह समय अक्सर वही जगह है जहाँ हड्डियाँ बोलती हैं। सुबह की मीटिंग, फोन कॉल्स, ग्राहक का गुस्सा, सहकर्मी की जल्दबाज़ी, सब कुछ शरीर में उतरता है। और फिर कोई एक वाक्य कहता है, 'आज खाना खाया?' या 'तुमने अच्छा किया वो काम', और अचानक कुछ ढीला पड़ जाता है भीतर।
यह पद सिखाता है कि शब्दों का असर सिर्फ भावना नहीं, शरीर भी है। जो तुम अभी किसी से कहोगे, चाहे कैंटीन में हो या व्हाट्सएप पर, वह किसी की हड्डियों तक पहुँच सकता है। मीठा शब्द कोई झूठी तारीफ नहीं है, यह वह वाक्य है जो सच्चाई से भरा हो और थकान को थोड़ा हल्का करे।
अभी, इस छोटी सी सांस में, सोचो किसे एक ऐसा वाक्य चाहिए। और यह भी सोचो कि परमेश्वर का वचन तुम्हारे लिए वही शहद है, जो थकी हड्डियों को आराम देता है इससे पहले कि तुम फिर काम पर लौटो।
यह दिन समर्पित करें →◐ दोपहर का पल
हे यहोवा, तूने मुझे धोखा दिया, और मैंने धोखा खाया; तू मुझसे बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हँसी होती है; सब कोई मुझसे ठट्ठा करते हैं।
यिर्मयाह 20:7
बाज़ार की गली में उसकी बात सुनकर लोग ठहाका लगाते हैं। कोई उसकी बात की नकल करके दोहराता है, बच्चे उसके पीछे-पीछे चिल्लाते हुए दौड़ते हैं, और यिर्मयाह अपना सिर झुकाए चला जाता है। यही वह आदमी है जिसने कभी परमेश्वर का बुलावा पाया था, और अब वही बुलावा उसे हर दिन का मज़ाक बना चुका है।
यह शिकायत नहीं, आरोप है। यिर्मयाह सीधे परमेश्वर से कहता है कि उसने उसे बहका दिया, फुसलाकर एक ऐसे रास्ते पर डाल दिया जिसका बोझ अब वह उठा नहीं पा रहा। यह वह भाषा नहीं है जो हम चर्च में इस्तेमाल करते हैं। पर यह बाइबल में है, परमेश्वर के अपने वचन में छपी है।
दोपहर के इस समय शायद तुम्हारे भीतर भी कोई ऐसी बात दबी हो जो कहने की हिम्मत नहीं होती। कोई निर्णय, कोई बुलावा, कोई रास्ता जिसे तुमने विश्वास से चुना था और अब वह भारी, अकेला, हास्यास्पद लगता है।
यिर्मयाह को उस पल कोई जवाब नहीं मिलता। पन्ना आगे बढ़ता है, और वह फिर भी बोलता रहता है, क्योंकि परमेश्वर का वचन उसकी हड्डियों में आग की तरह बंद है।
शायद आज का सवाल यही है, क्या तुम अपनी सच्ची शिकायत परमेश्वर के सामने ला सकते हो, बिना उसे मधुर बनाए।
यह दिन समर्पित करें →☾ संध्या का क्षण
मैं अपनी आँखें पर्वतों की ओर उठाऊँगा। मुझे सहायता कहाँ से मिलेगी? मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
भजन संहिता 121:1-2
यरूशलेम की ओर जाने वाला एक यात्री शाम ढलते ही उन्हीं पहाड़ियों को देखता है, जहाँ से डाकू अचानक निकल आते थे। उसके पैर थके हुए हैं, और उसकी आँखें पहाड़ों की सुंदरता नहीं, बल्कि खतरे की तलाश में हैं। वह खुद से पूछता है, मेरी सहायता कहाँ से आएगी।
आज का दिन भी अपने ही पहाड़ जैसा रहा होगा, काम की समय-सीमाएँ, थकान भरी सड़कें, न सुलझे हुए सवाल। शाम होते ही मन बार-बार पीछे मुड़कर देखता है, कहीं कुछ छूट तो नहीं गया, कहीं कोई खतरा तो नहीं बचा।
पर भजनकार अपनी नज़र पहाड़ों पर टिका नहीं रहता। वह आगे बढ़कर उत्तर पाता है, मेरी सहायता यहोवा से आती है, जिसने आकाश और पृथ्वी को बनाया। जिसने इतनी बड़ी सृष्टि रची, वह आज की छोटी सी शाम को भी सम्भाल सकता है।
यह विश्वास शांति देने वाला है। आपकी परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, वह उससे बड़ा है। आज का दिन अब बीत रहा है, और उसकी जिम्मेदारी अब आपकी नहीं रही।
अपनी आँखें आज की उलझनों से हटाकर उसकी ओर उठाइए। जिसने पहाड़ बनाए, वह आपकी रात भी सम्भालेगा। आराम से सो जाइए, आपकी सहायता सुरक्षित हाथों में है।
यह दिन समर्पित करें →इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
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22हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है।
23प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है।
24मनभावने वचन मधु भरे छत्ते के समान प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं।
7हे यहोवा, तूने मुझे धोखा दिया, और मैंने धोखा खाया; तू मुझसे बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हँसी होती है; सब कोई मुझसे ठट्ठा करते हैं।
1मैं अपनी आँखें पर्वतों की ओर उठाऊँगा। मुझे सहायता कहाँ से मिलेगी?
2मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
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