थकान में परमेश्वर की शांति
चैन का भरोसा
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए रोमियों 8:31, सभोपदेशक 4:6, रोमियों 7:24 and भजन संहिता 4:6-7.
☀ सुबह का पल
तो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? (भज. 118:6)
रोमियों 8:31
पौलुस यह पत्र उस कलीसिया को लिख रहा था जो रोम के बीच, सम्राट के साये में, हर दिन डर के साथ जीती थी। नौकरी छूटने का डर, पहचाने जाने का डर, कल क्या होगा इसका डर। उसके पास कोई गारंटी नहीं थी कि हालात बदलेंगे, फिर भी उसने यह प्रश्न लिखा जो एक चुनौती से ज़्यादा एक विश्राम है।
आज सुबह जब आप उठे हैं, शायद मन में पहले से ही किसी मीटिंग, किसी परीक्षा, किसी अधूरे काम की चिंता बैठ गई हो। दिन अभी शुरू भी नहीं हुआ और थकान पहले से महसूस हो रही है। ऐसे में पौलुस का यह वाक्य किसी सस्ती दिलासा नहीं, बल्कि एक ठोस नींव है।
यह प्रश्न इस बात से शुरू नहीं होता कि हालात कैसे हैं, बल्कि इस बात से कि परमेश्वर किस ओर है। वह आपके विरुद्ध नहीं, आपके पक्ष में खड़ा है। इसका मतलब यह नहीं कि आज कोई कठिनाई नहीं आएगी, पर इसका मतलब है कि आप उस कठिनाई का सामना अकेले नहीं करेंगे।
जो लोग या हालात आज आपके सामने बड़े दिखें, उन्हें इस सच्चाई के सामने रखिए। परमेश्वर की उपस्थिति आपके डर से बड़ी है।
तो अपने दिन को इस भरोसे के साथ शुरू करें, न इस उम्मीद में कि सब आसान होगा, बल्कि इस निश्चय में कि आप उस परमेश्वर के साथ चल रहे हैं जो आपकी ओर है।
यह दिन समर्पित करें →✦ दोपहर का पल
चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और वायु को पकड़ना हो।
सभोपदेशक 4:6
क्या इतनी मेहनत करने का सचमुच कोई मतलब है? यह सवाल आपने शायद रात को अकेले सोचा हो, जब थकान शरीर से ज़्यादा मन में उतर आई हो। और अब, दोपहर के इस छोटे से ब्रेक में, वही सवाल फिर से सिर उठाता है।
सुबह से आपके हाथ में दो मुट्ठियाँ भरी हैं, काम की, ज़िम्मेदारियों की, उम्मीदों की। हर मुट्ठी और भर लेने की चाह में मन कभी शांत नहीं रहता। एक और मीटिंग, एक और ईमेल, एक और लक्ष्य, और फिर भी लगता है कि हवा को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
यह वचन किसी आलस्य की वकालत नहीं करता। यह बस एक सच्चाई सामने रखता है, कि भरी हुई मुट्ठियाँ हमेशा भरा हुआ मन नहीं देतीं। शान्ति के साथ एक मुट्ठी, बिना बेचैनी के थोड़ा सा, दौड़ते हुए दो मुट्ठियों से बेहतर है।
यह भोजन का समय है, प्लेट भरने से पहले एक साँस लेने का भी। शायद आज आपको सब कुछ पूरा करने की ज़रूरत नहीं है। जो हाथ में है, उसे शांति से थाम लीजिए।
ईश्वर आपसे दो मुट्ठियों की माँग नहीं करता, वे आपकी अपनी बेचैनी की माँग हैं। उसके पास लौटिए, जो थके हुओं को थोड़ी देर के लिए भी सुकून देता है, और फिर बाकी दिन के लिए आगे बढ़ जाइए।
यह दिन समर्पित करें →◐ दोपहर का पल
मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?
रोमियों 7:24
दफ्तर की कुर्सी अभी भी वही है, पर शरीर अब थकने लगा है।
शुक्रवार की दोपहर अक्सर एक अजीब हिसाब लेकर आती है। हफ्ते भर की मेहनत, वही गलतियाँ, वही आदतें जिनसे बचना चाहा था पर फिर भी लौट आईं। पौलुस का यह वचन किसी सुंदर आशीष से शुरू नहीं होता, यह एक चीख से शुरू होता है। "मैं क्या ही दुखी मनुष्य हूँ!" यह कोई सैद्धांतिक बात नहीं, यह एक ऐसे व्यक्ति की पुकार है जो अपने ही भीतर की लड़ाई से थक चुका है।
शायद आज दोपहर तुम भी वही थकान महसूस कर रहे हो, जो पापों की गिनती से नहीं बल्कि खुद से आती है। तुमने ठान लिया था कि आज गुस्सा नहीं करोगे, पर फिर वही हुआ। तुमने सोचा था कि आज प्रार्थना करोगे, पर समय निकल गया। यह चक्र कभी खत्म नहीं होता लगता।
यह वचन जवाब देने में जल्दी नहीं करता। यह सवाल को हवा में लटका रहने देता है, "कौन मुझे छुड़ाएगा?" कोई सस्ता उत्तर नहीं, कोई तुरंत राहत नहीं। बस एक ईमानदार स्वीकार, कि खुद अपनी ताकत से यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती।
शायद आज की दोपहर का काम यही है, इस सवाल को दबाना नहीं, बल्कि इसे सामने रखना। स्वीकार करना कि तुम खुद अपने उद्धारकर्ता नहीं बन सकते।
जवाब कल आ सकता है, आज सिर्फ सवाल को सुनने दो।
यह दिन समर्पित करें →☾ संध्या का क्षण
बहुत से हैं जो कहते हैं, “कौन हमको कुछ भलाई दिखाएगा?” हे यहोवा, तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका! तूने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उनको अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता है।
भजन संहिता 4:6-7
दुनिया मानती है कि दिन का हिसाब उसकी उपलब्धियों से होता है। कितना काम निपटा, कितना पैसा आया, कितनी चीज़ें भंडार में जुड़ीं। शुक्रवार की शाम खासकर यही तराज़ू लेकर आती है, हफ्ते भर की मेहनत का हिसाब। पर दाऊद के ये शब्द इस तराज़ू को हल्के से हिला देते हैं।
वह उन लोगों की बात करता है जो पूछते रहते हैं, "हमें कौन भलाई दिखाएगा?" यह सवाल हर उस व्यक्ति का है जो सोचता है कि संतोष अभी हाथ में नहीं है, बल्कि कहीं आगे मिलेगा। पर दाऊद खुद इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढता, वह सीधे प्रार्थना करता है, यहोवा से मुख का प्रकाश माँगता है।
और फिर वह कहता है कि उसके हृदय में ऐसा हर्ष है जो अन्न और दाखमधु की बढ़ती से भी बढ़कर है। यानी उसका आनंद उस चीज़ पर टिका नहीं जो आज इकट्ठा हुई, बल्कि उस पर टिका है जो परमेश्वर ने उसके भीतर रखा है।
आज का दिन कैसा भी रहा हो, चाहे लक्ष्य पूरे हुए या नहीं, यह वचन तुम्हें याद दिलाता है कि सच्चा संतोष किसी उपलब्धि से नहीं आता। वह परमेश्वर के मुख के प्रकाश से आता है, जो हर शाम फिर से तुम पर चमकने को तैयार है।
आज रात इसी प्रकाश में विश्राम करो। हिसाब छोड़ दो, हर्ष थाम लो।
यह दिन समर्पित करें →इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
31तो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? (भज. 118:6)
6चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और वायु को पकड़ना हो।
24मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?
6बहुत से हैं जो कहते हैं, “कौन हमको कुछ भलाई दिखाएगा?” हे यहोवा, तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका!
7तूने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उनको अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता है।
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें