थोड़े में परमेश्वर की भरपूर देखभाल
प्रावधान और उदारता
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 91:11, प्रेरितों 16:14, यूहन्ना 6:9 and लैव्यव्यवस्था 19:9-10.
☀ सुबह का पल
क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहाँ कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।
भजन संहिता 91:11
तेरा पैर कभी भी लड़खड़ा सकता है। सीढ़ी पर, पहाड़ी रास्ते पर, या बस थकान में जब पैर मन का साथ नहीं देते।
यही डर उन यात्रियों को भी होता था जो साल में तीन बार यरूशलेम की ओर चढ़ाई करते थे। भजन संहिता 121 उन्हीं के लिए लिखा गया, एक यात्रा का गीत। रास्ते में पहाड़ थे, और पहाड़ों पर डाकू भी छिपते थे और झूठे देवताओं की ऊँची पूजा-स्थली भी खड़ी थीं। इसलिए जब यात्री पहाड़ों की ओर आँखें उठाता था, तो सवाल असली था, डर भरा था: मेरी सहायता कहाँ से आएगी।
यही गीत का मोड़ है। सवाल से यह सीधे विश्वास के वचन में बदल जाता है, सहायता उन पहाड़ों से नहीं, उनके बनानेवाले से आती है। और आगे यह गीत उस परमेश्वर को दिखाता है जो सोता नहीं, न दिन में न रात में, जो घर से निकलने और घर लौटने तक साथ रहता है।
यही वही रखवाली है जिसकी बात भजन संहिता 91 भी करता है, स्वर्गदूत जिन्हें आज्ञा दी गई है कि वे राह में साथ चलें। यह कोई दूर का वादा नहीं, हर आम सोमवार की सुबह के लिए भी है।
तू आज जिस रास्ते पर निकलेगा, वह पहाड़ों जैसा कठिन न भी हो, फिर भी अनजाना है। पर यह गीत तुझे शब्द देता है, अकेला मत चल, यह जानकर चल कि कोई तेरी रखवाली कर रहा है।
आज
आज घर से निकलते वक्त दरवाज़े पर एक पल रुक और धीरे से बोल: यहोवा मेरी रखवाली करे। फिर चल पड़।
✦ दोपहर का पल
और लुदिया नाम की एक स्त्री, जो बैंगनी कपड़े बेचनेवाली और थूआतीरा नगर की रहनेवाली और परमेश्वर की भक्त थी, सुन रही थी; प्रभु ने उसका मन खोला, कि पौलुस की बातों पर ध्यान दे।
प्रेरितों 16:14
क्या परमेश्वर मुझे तभी मिलेगा जब मैं सब कुछ छोड़कर चुप बैठूं, या वह मेरे हिसाब-किताब के बीच, मेरे लंच ब्रेक की भागदौड़ में भी आ सकता है?
लुदिया कोई खाली समय वाली स्त्री नहीं थी। वह बैंगनी कपड़े की व्यापारी थी, थूआतीरा से, एक ऐसा शहर जो महंगे रंगाई के काम के लिए जाना जाता था। यह माल आम आदमी के बस का नहीं था, राजाओं और धनवानों के लिए था। लुदिया व्यापार के सिलसिले में फिलिप्पी में थी, परदेश में, अपने काम के बीच। शहर में यहूदी आराधनालय नहीं था, इसलिए कुछ स्त्रियाँ नदी किनारे प्रार्थना के लिए इकट्ठी होती थीं। लुदिया उन्हीं में से एक थी।
वहीं, किसी साधारण दोपहर में, पौलुस बोलने लगा। और प्रभु ने उसका मन खोला। यह कोई नाटकीय दर्शन नहीं था, न कोई मंदिर का अनुभव, बल्कि एक व्यापारी स्त्री का हृदय, नदी किनारे, काम के बीच खुला।
इसके बाद उसने अपना घर खोल दिया, पौलुस और सिलास को ठहराया। उसकी व्यापारिक सूझबूझ और उदारता फिलिप्पी की पहली कलीसिया की नींव बनी।
तुम्हारा कार्यस्थल, तुम्हारा लंच ब्रेक, पवित्र आत्मा के काम की सीमा के बाहर नहीं है। परमेश्वर वहीं मिल सकता है जहाँ तुम्हारा हिसाब-किताब चल रहा है।
आज
आज दोपहर भोजन के समय डेस्क छोड़कर पांच मिनट बाहर जाओ, और किसी एक सहकर्मी को यह संदेश भेजो, क्या हम कल कुछ मिनट साथ बैठकर प्रार्थना कर सकते हैं।
◐ दोपहर का पल
“यहाँ एक लड़का है, जिसके पास जौ की पाँच रोटी और दो मछलियाँ हैं, परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं।”
यूहन्ना 6:9
जब हिसाब लगाया जाता है, तो अंक झूठ नहीं बोलते। पाँच हज़ार पेट, पाँच रोटियाँ, दो मछलियाँ, यह गणित पहले से हार चुका है। फिलिप्पुस ने यही सोचा था, यह सोचना गलत भी नहीं था। संसाधन कम थे, यह एक तथ्य था। परन्तु यह पूरी सच्चाई नहीं थी।
जो लड़का अपना भोजन लाया था, उसने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उसकी छोटी सी थैली का यूँ इस्तेमाल होगा। जौ की रोटी गरीबों का भोजन थी, महंगी नहीं, फिर भी उसने वह जो था, वह दे दिया। भीड़ में बहुतों के पास कुछ न कुछ छिपा हुआ रहा होगा, पर उन्होंने रोक लिया। इस लड़के ने नहीं रोका।
जो लोग खाकर तृप्त हुए, उन्होंने चिन्ह देखा, पर उसे समझा नहीं। अगले दिन वे फिर आए, रोटी के लिए, उस व्यक्ति के लिए नहीं जिसने रोटी दी थी। पेट भरना आसान है समझना कठिन। यीशु ने आगे कहा कि वे उसे इसलिए ढूंढ रहे थे क्योंकि उन्होंने रोटियाँ खाईं और तृप्त हुए, चिन्ह के कारण नहीं।
यह चिन्ह किसी जादू का प्रदर्शन नहीं था। यह दिखा रहा था कि परमेश्वर के हाथ में थोड़ा भी बहुत हो जाता है, और वह हाथ यीशु का हाथ था। बारह टोकरियाँ बचीं, हर चेले के लिए एक, मानो कहा जा रहा हो, तुम्हारे लिए भी बचा है।
आज
आज अपने दोपहर के भोजन में से थोड़ा हिस्सा किसी और के साथ बाँटो, बिना यह सोचे कि तुम्हारे पास इतना कम है कि इससे कुछ नहीं होगा।
☾ संध्या का क्षण
“फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो, तब अपने खेत के कोने-कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना। और अपनी दाख की बारी का दाना-दाना न तोड़ लेना, और अपनी दाख की बारी के झड़े हुए अंगूरों को न बटोरना; उन्हें दीन और परदेशी लोगों के लिये छोड़ देना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।
लैव्यव्यवस्था 19:9-10
रूत सांझ के धुंधलके में खेत की मेढ़ों पर झुकी हुई थी, अपने हाथों से बिखरी बालियाँ बीन रही थी, एक विधवा और परदेशी, जिसके पास अपनी कोई भूमि न थी। जो कुछ बोअज़ के खेत के कोनों में छूट गया था, उसी पर उसका जीवन टिका था।
यह कोई दुर्घटना नहीं थी। यह वह व्यवस्था थी जो परमेश्वर ने बहुत पहले अपनी प्रजा को दी थी, खेत के कोने पूरी तरह न काटो, गिरी हुई बालियाँ न बीनो, उन्हें छोड़ दो। एक किसान की मेहनत में जानबूझकर एक जगह ऐसी छोड़ी गई जहाँ वह अपना हक न जताए।
यह आज्ञा किसी को कमज़ोर सिद्ध करने के लिए नहीं थी, बल्कि किसी को गिरने से बचाने के लिए थी। गरीब और परदेशी को भीख नहीं, काम मिला, अपने हाथों से बीनने का अवसर, थोड़ी गरिमा के साथ। इसके पीछे वह परमेश्वर दिखता है जो खेत की उपज गिनता है, पर उस कोने को भी नहीं भूलता जो हमारी नज़र से छूट जाता है।
आज का दिन जो कुछ तुझे मिला, वह पूरी तरह तेरा नहीं है, ऐसा सोचना कठिन है, पर यही व्यवस्था कहती है। दिन के अंत में हाथ पूरी तरह मुट्ठी बंद न करना, कुछ हमेशा छोड़ने के लिए बचा रहे।
आज
आज रात सोने से पहले अपनी अलमारी या रसोई से एक चीज़, खाना, कपड़ा, या कुछ रुपये, अलग रखो और उसे कल किसी ज़रूरतमंद तक पहुँचाने का निश्चय लिखकर रख दो।
इन अंशों को IRV Hindi 2019 में पढ़ें
पूरा पाठ यहीं पढ़ने के लिए किसी अंश पर टैप करें।
11क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहाँ कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।
9“यहाँ एक लड़का है, जिसके पास जौ की पाँच रोटी और दो मछलियाँ हैं, परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं।”
9“फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो, तब अपने खेत के कोने-कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना।
10और अपनी दाख की बारी का दाना-दाना न तोड़ लेना, और अपनी दाख की बारी के झड़े हुए अंगूरों को न बटोरना; उन्हें दीन और परदेशी लोगों के लिये छोड़ देना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।
और गहराई में जाना चाहते हैं?
इन मननों की हर आयत के लिए आप संदर्भ, पृष्ठभूमि और अनुप्रयोग सहित विस्तृत बाइबल व्याख्या पा सकते हैं।
गहन अध्ययन आरंभ करें