परमेश्वर में सच्चा सहारा और शक्ति
सहारा और शक्ति
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए भजन संहिता 37:4, सभोपदेशक 4:9-10, गलातियों 5:17 and भजन संहिता 62:5-6.
☀ सुबह का पल
यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। (मत्ती 6:33)
भजन संहिता 37:4
दाऊद यह गीत तब लिखता है जब वह दुष्टों को फूलते-फलते देखता है, और उसका मन बेचैन होने लगता है। पर वह अपने भीतर की हलचल को दबाता नहीं, वह उसे यहोवा की ओर मोड़ देता है। वह बदला लेने या तुलना करने में नहीं उलझता, वह आनन्द लेने की बात करता है।
शनिवार की सुबह अक्सर हल्की होती है, पर मन में हिसाब-किताब भी उतनी ही जल्दी आ जाता है, वह काम जो अभी पूरा नहीं हुआ, वह इच्छा जो अभी पूरी नहीं हुई। दाऊद की बात कोई सस्ता आश्वासन नहीं है, वह एक दिशा है, अपनी इच्छाओं को लेकर परमेश्वर के पास आना, उसमें आनन्दित होना, और फिर देखना कि वह उन्हें कैसे आकार देता है।
यह वादा जादू की छड़ी नहीं है कि जो चाहो वह मिल जाए। यह इससे गहरा है, जब हमारा मन यहोवा में आनन्द लेने लगता है, तो हमारी इच्छाएं भी धीरे-धीरे उसकी इच्छा के करीब आने लगती हैं।
आज का दिन खुला है, परिवार के साथ, आराम के साथ, या किसी शौक के साथ। इसे यहोवा के सामने रखो, उसमें आनन्दित होकर शुरू करो, बिना जल्दबाजी के।
आज
आज कोई एक छोटा काम या शौक चुनो जिसे तुम बहुत दिनों से टालते आ रहे हो, जैसे कोई किताब पढ़ना, बागवानी करना, या संगीत सुनना, और उसे शुरू करने से पहले ऊँची आवाज़ में कहो, यहोवा, इस दिन में मेरा आनन्द तू ही है।
✦ दोपहर का पल
एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो।
सभोपदेशक 4:9-10
शनिवार का मतलब है अपने लिए समय, अकेले सुकून पाना, हेडफोन लगाकर बाकी सबको भूल जाना। यही सोच आज हर तरफ फैली है, आराम यानी अकेलापन। लेकिन आज का वचन इस सोच में एक दरार डाल देता है, अकेला आराम भी अधूरा रह सकता है।
सभोपदेशक का लेखक जीवन को बहुत गौर से देखता है, और वह पाता है कि मेहनत, गिरना, उठना, ये सब अकेले सहना भारी पड़ता है। दो साथ हों तो गिरने पर एक दूसरे को उठा सकता है। यह कोई बड़ा उपदेश नहीं, बस एक सीधी सच्चाई है जो हर घर में दिखती है।
दोपहर का यह पल अक्सर घर में ही आता है, थाली सामने है, कोई अपना पास बैठा है। पर मोबाइल स्क्रॉल करते हुए वह पल भी अकेला बीत सकता है, भले ही शरीर पास हो।
रविवार की तैयारी सिर्फ कपड़े प्रेस करने या बाइबल निकालने में नहीं है, बल्कि उन रिश्तों को सींचने में भी है जिनके साथ हम कल परमेश्वर के सामने बैठेंगे। जो पास है, उसे आज देख लेना अच्छा है।
आज
आज दोपहर के भोजन में फोन को थाली से दूर रख दें और घर के किसी सदस्य से एक सीधा सवाल पूछें, आजकल तुम कैसा महसूस कर रहे हो। जवाब सुनें, बिना जल्दबाज़ी के।
◐ दोपहर का पल
क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिए कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
गलातियों 5:17
दोपहर के ढाई बजे, सोफे पर लेटे हुए मोबाइल की स्क्रीन बार-बार स्क्रॉल हो रही है, पर मन का एक हिस्सा जानता है कि बेटी ने आधे घंटे पहले साथ में लूडो खेलने के लिए पूछा था और अब भी दरवाज़े के पास इंतज़ार में बैठी है।
यही वह जगह है जहां पौलुस की बात सच उतरती है। भीतर एक खिंचाव चलता रहता है, आराम चाहने वाला मन और प्रेम करने के लिए बुलाया गया मन आपस में लड़ते हैं। यह कोई शर्म की बात नहीं, यह वही युद्ध है जिसे पौलुस खुद अनुभव करता था।
यहां कोई तुरंत हल नहीं दिया गया। पद यह नहीं कहता कि आत्मा हमेशा जीत जाएगी, वह सिर्फ इतना बताता है कि यह खिंचाव सच है, और वह जो तुम चाहते हो, अक्सर वह नहीं कर पाते जो सही जानते हो।
शायद आज की चुनौती यही है, इस खिंचाव को झूठ न मानना, न ही उसे ढांक देना। बल्कि उसे परमेश्वर के सामने खुला रखना, यह मान लेना कि अकेले अपनी ताकत से यह लड़ाई जीती नहीं जाएगी।
आज
अभी मोबाइल नीचे रख दो और बेटी के पास जाकर दस मिनट लूडो खेलो, बिना फोन उठाए।
☾ संध्या का क्षण
हे मेरे मन, परमेश्वर के सामने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है। सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; इसलिए मैं न डिगूँगा।
भजन संहिता 62:5-6
आज पूरे दिन तुम किस बात के पीछे भागते रहे, और अब जब घर के काम-काज खत्म हो चुके हैं, तो मन अब भी शांत क्यों नहीं होता?
शनिवार की शाम में एक अजीब खिंचाव होता है। दिनभर की छुट्टी थी, फिर भी अंदर कहीं बेचैनी बाकी रह जाती है, जैसे कुछ अधूरा छूट गया हो। दाऊद भी ऐसी ही घड़ी में बैठा था, चारों ओर से घिरा हुआ, फिर भी उसने अपने मन को आदेश दिया, चुपचाप ठहर जा। यह बेबसी नहीं थी, यह भरोसे का चुनाव था।
परमेश्वर तुमसे यह उम्मीद नहीं करता कि तुम आज की हर उलझन सुलझा लो इससे पहले कि सो जाओ। वह बस इतना चाहता है कि तुम अपनी आत्मा को उसके सामने चुप कर दो, बिना जवाब मांगे, बिना हल ढूंढे।
सोचो, तुम्हारी चट्टान कौन है, कल की योजनाएं, या वह जो कभी नहीं टलता? जब तुम उसी पर टिक जाते हो, तो नींद भी हल्की हो जाती है, क्योंकि भार अब तुम्हारे कंधे पर नहीं रहता।
आज
आज रात सोने से पहले फोन एक तरफ रख दो, पांच मिनट चुपचाप बैठो और धीरे से कहो, हे परमेश्वर, मेरी आत्मा तुझ ही में विश्राम पाती है।
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4यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। (मत्ती 6:33)
9एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है।
10क्योंकि यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो।
17क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिए कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
5हे मेरे मन, परमेश्वर के सामने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है।
6सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; इसलिए मैं न डिगूँगा।
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