परमेश्वर हमसे कभी दूर नहीं
परमेश्वर की निकटता
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए उत्पत्ति 18:17, भजन संहिता 22:1,22, लूका 15:20 and प्रेरितों के काम 7:59-60.
☀ सुबह का पल
तब यहोवा ने कहा, “यह जो मैं करता हूँ उसे क्या अब्राहम से छिपा रखूँ?
उत्पत्ति 18:17
तीन अजनबी अभी-अभी अब्राहम के तंबू में खाना खा चुके हैं, और अब वे सदोम की ओर चल पड़े हैं। अब्राहम उन्हें विदा करने के लिए उनके साथ कुछ दूर चलता है, धूप तेज़ है, रास्ता खुला है। और वहीं, चलते-चलते, याहवेह अपने आप से एक सवाल पूछते हैं।
यह सवाल किसी और से नहीं पूछा जा रहा, यह परमेश्वर का अपना विचार है, ज़ोर से बोला गया। सदोम पर जो न्याय आने वाला है, क्या उसे अब्राहम से छुपाना ठीक होगा? यह सवाल अपने आप में एक निर्णय है, इससे पहले कि उत्तर आए। परमेश्वर किसी को अपनी योजना बताने का फैसला लेते हैं, और वह व्यक्ति अब्राहम है, वही जिसे बाद में शास्त्र परमेश्वर का मित्र कहेगा।
यह एक असाधारण बात है। परमेश्वर जो करने वाले हैं, उसे किसी सेवक या दूत को बताने की ज़रूरत नहीं थी। पर वे अब्राहम को बताते हैं, क्योंकि उसके साथ एक वाचा है, एक भविष्य है, एक भरोसा है जो दोनों तरफ से बना है।
सोचिए, इस सोमवार की सुबह आप किसी अजनबी के घर के बाहर खड़े नहीं हैं, आप उस परमेश्वर के पास हैं जो अपनी योजनाएं छुपा कर नहीं रखते, जो अपने लोगों को दूर से हांकते नहीं, पास बुलाते हैं। यह जानना कि आप किसी योजना से बाहर नहीं, भीतर हैं, आज के दिन को हल्का कर सकता है।
आज
आज किसी करीबी व्यक्ति को फोन करें या संदेश भेजें, और उसे वह एक सच्ची बात बताएं जो आप अक्सर छुपा लेते हैं, कोई चिंता या उलझन जो आज सुबह आपके मन में है।
✦ दोपहर का पल
My God, my God, why have you forsaken me? Why are you so far from helping me, and from the words of my groaning? I will declare your name to my brothers. In the midst of the assembly, I will praise you.
भजन संहिता 22:1,22
तूने मैसेज भेजा, पर जवाब नहीं आया। तूने पुकारा, और सामने सिर्फ चुप्पी मिली। दोपहर के इस अकेले पल में यही सवाल उठता है, क्या मेरी पुकार कहीं तक पहुँच भी रही है?
यह भजन उस सवाल से ही शुरू होता है। यह कोई शांत भजन नहीं है, यह एक चीख है, जो सूली पर यीशु ने भी अपने मुँह से निकाली। सदियों तक इसे मंदिर में गाया गया, दुख के समय, जब उपासक को लगता था कि परमेश्वर दूर खड़ा है।
पर यह भजन वहीं नहीं रुकता। जो गीत अकेलेपन की चीख से शुरू होता है, वह धीरे धीरे मुड़ता है और भीड़ में आ खड़ा होता है। भजन 22:22 में लिखने वाला कहता है कि वह अपने भाइयों के बीच परमेश्वर का नाम बताएगा, सभा में स्तुति करेगा। सभा यानी वह जगह जहाँ लोग साथ इकट्ठा होकर परमेश्वर को याद करते हैं। जो अकेला था, वह अब गवाही देने वालों में शामिल है।
तेरी दोपहर की चुप्पी झूठी नहीं है, पर यह आखिरी शब्द नहीं है। जिस भजन ने त्याग की भाषा दी, उसी ने साक्षी देने की भाषा भी दी।
आज
अपने लंच ब्रेक में एक साथी या दोस्त को एक मैसेज भेज, जिसमें तू एक खास बात लिखे जो परमेश्वर ने इस हफ्ते तेरे लिए की है।
◐ दोपहर का पल
“तब वह उठकर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
लूका 15:20
धूल के बादल में एक बूढ़ा आदमी दौड़ रहा है, उनका अंगरखा घुटनों तक समेटा हुआ है, नंगी टाँगें दिख रही हैं, और साँस भारी हो रही है। यह दृश्य जितना कोमल लगता है, उतना ही चौंकाने वाला भी है।
उस समय के गाँव में कोई सम्माननीय बुजुर्ग यूँ नहीं दौड़ता था। दौड़ने के लिए वस्त्र ऊपर उठाना पड़ता, टाँगें खुलतीं, और यह किसी बुजुर्ग पिता के लिए लज्जा की बात मानी जाती थी। यही वह विवरण है जो अक्सर छूट जाता है, जब हम इस कहानी को सुनते हैं। पिता अपनी गरिमा भूल गए।
क्यों? क्योंकि गाँव के रास्ते में और भी लोग खड़े थे, वे लोग जो जानते थे कि यह बेटा घर की संपत्ति उड़ाकर लौटा है। ऐसे लौटे बेटे को गाँव के बुज़ुर्ग सरेआम शर्मिंदा भी कर सकते थे। पिता दौड़े ताकि गाँव का फैसला सुनाए जाने से पहले बेटा उनकी बाँहों में हो। शर्म पिता ने खुद ओढ़ ली, बेटे के पहुँचने से पहले ही।
यहीं यह कहानी मुड़ती है हम पर। हम अक्सर गिनते रहते हैं कि किसे कितनी माफ़ी मिलनी चाहिए, किसे पहले शर्मिंदा होना चाहिए। पर पिता किसी हिसाब का इंतज़ार नहीं करते। सवाल यह नहीं है कि बेटा क्या कहेगा, सवाल यह है कि क्या हम भी किसी के लिए अपनी गरिमा छोड़कर दौड़ने को तैयार हैं।
आज
आज किसी एक व्यक्ति का नाम लो, जिससे तुमने बोलचाल छोड़ रखी है, और उसे अभी एक संदेश भेजो, केवल इतना: मैं तुम्हें याद कर रहा हूँ। इसे भेज दो, जवाब की प्रतीक्षा किए बिना।
☾ संध्या का क्षण
और वे स्तिफनुस को पथराव करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा, “हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।” (भज. 31:5) फिर घुटने टेककर ऊँचे शब्द से पुकारा, “हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा।” और यह कहकर सो गया।
प्रेरितों के काम 7:59-60
पत्थर हल्के नहीं होते। जो पत्थर किसी को मार सकते हैं, वे मुट्ठी भर आकार के, नुकीले, भारी होते हैं। हाथ को दर्द होता है जब उन्हें उठाकर पूरे बल से फेंका जाता है। स्तिफनुस के चारों ओर वैसे ही हाथ खड़े थे, गुस्से से तने हुए, बार-बार उठते-गिरते।
और उस भीड़ के बीच, अपने ही खून से लथपथ, स्तिफनुस घुटनों पर झुका। उसने अपने मरने की भीख नहीं मांगी। उसने उन्हीं के लिए, जो उस पर पत्थर बरसा रहे थे, ऊँची आवाज़ में प्रार्थना की। यह कोई सामान्य आदमी नहीं कर सकता। यह वही आत्मा है जो सूली पर लटके यीशु में थी, जिसने अपने मारने वालों को क्षमा माँगी।
स्तिफनुस चर्च का पहला डीकन था, रोटी बाँटनेवाला, विधवाओं की सेवा करनेवाला। और वही आज इतिहास का पहला शहीद बना, जिसने मरते समय भी दूसरों के लिए दरवाजा खुला रखा।
आज तुम्हारे दिन में कोई इतना बड़ा पत्थर नहीं फेंका गया होगा। पर शायद किसी ने कड़वे शब्द फेंके, कोई अनुचित बात कही, कोई तुझे नीचा दिखाने की कोशिश की। स्तिफनुस दिखाता है कि दर्द के बीच भी प्रार्थना बदला नहीं, माफ़ी मांगती है।
आज
आज उस एक व्यक्ति का नाम लिख, जिसने तुझे आज दुखी किया या चोट पहुँचाई, और उसके लिए ऊँची आवाज़ में यह प्रार्थना कह, प्रभु, इसे उसके विरुद्ध मत ठहराना।
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17तब यहोवा ने कहा, “यह जो मैं करता हूँ उसे क्या अब्राहम से छिपा रखूँ?
20“तब वह उठकर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
59और वे स्तिफनुस को पथराव करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा, “हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।” (भज. 31:5)
60फिर घुटने टेककर ऊँचे शब्द से पुकारा, “हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा।” और यह कहकर सो गया।
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