बाइबल पुस्तक

भजन संहिता की पुस्तक: प्रार्थना और स्तुति का खज़ाना

परिचय

रात के दो बजे अस्पताल के गलियारे में एक बहन बैठी है। डॉक्टर ने अभी-अभी कहा है कि "अगले चौबीस घंटे भारी हैं।" वह प्रार्थना करना चाहती है, पर मन में शब्द नहीं बनते। जो बनता है वह सुंदर नहीं है, वह शिकायत है, डर है, आधा-अधूरा विश्वास है। तब कोई उसके हाथ में बाइबल थमा देता है और पन्ने अपने आप बीच में खुल जाते हैं, ठीक उस पुस्तक पर जो बाइबल के हृदय में रखी हुई है।

वहाँ उसे अपने ही शब्द मिलते हैं, पर परमेश्वर के दिए हुए। कोई तीन हज़ार साल पहले किसी और ने भी यही घबराहट महसूस की थी, और पवित्र आत्मा ने उसकी आह को शास्त्र बना दिया।

भजन संहिता ऐसी ही पुस्तक है। इस पृष्ठ पर आप जानेंगे कि यह पुस्तक किसने लिखी, कब लिखी गई, कैसे रची गई, इसके मुख्य विषय क्या हैं, यह बाइबल में कहाँ खड़ी है, और सबसे बढ़कर, इसे अपने रोज़ के जीवन में कैसे प्रार्थना बनाया जाए।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

यह मार्गदर्शिका भजन संहिता को "सुंदर आयतों का संग्रह" मानकर नहीं पढ़ती। यहाँ हम इसे एक सीढ़ी की तरह पढ़ेंगे, जो ईमानदार विलाप से शुरू होकर खुली स्तुति तक पहुँचती है। पहले भजन में एक अकेला मनुष्य व्यवस्था पर ध्यान करता है, और एक सौ पचासवें भजन में हर प्राणी परमेश्वर की स्तुति करता है। बीच में एक सौ अड़तालीस भजन हैं, जिनमें आँसू, गुस्सा, पश्चाताप, अकेलापन और भरोसा सब कुछ है। और इस पूरी सीढ़ी पर हमसे आगे-आगे कोई चल चुका है: यीशु मसीह, जिन्होंने यही भजन गाए, यही भजन क्रूस पर पुकारे, और यही भजन जी उठकर पूरे किए।

भजन संहिता आपको सजी-धजी प्रार्थना नहीं, सच्ची प्रार्थना सिखाती है

बाइबल भजन संहिता के बारे में क्या कहती है?

भजन संहिता अपनी पहचान अपने पहले शब्दों से ही करा देती है। यह पुस्तक हमें सीधे स्तुति में नहीं धकेलती, वह हमें पहले एक चुनाव के सामने खड़ा करती है। भजन 1:1-3 कहता है: "क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और पापियों के मार्ग में खड़ा नहीं होता, और ठट्ठा करनेवालों की सभा में नहीं बैठता! परन्तु वह यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है। वह उस वृक्ष के समान होगा, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है, और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुर्झाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।"

यह प्रवेश-द्वार है। इससे पहले कि हम परमेश्वर से बोलें, परमेश्वर हमसे बोलते हैं। भजन संहिता की सारी प्रार्थनाएँ उसी जड़ से पानी पीती हैं जो वचन के किनारे लगी है। इसीलिए बीच में हमें भजन 119:105 जैसा पद मिलता है: "तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।" ध्यान दें, दीपक सूरज नहीं होता। वह पूरा रास्ता नहीं दिखाता, बस अगला कदम दिखाता है। भजन संहिता आपको भविष्य का नक्शा नहीं देती, वह अंधेरे में अगले कदम के लिए रोशनी देती है।

फिर इस सीढ़ी पर हम चढ़ना शुरू करते हैं। भजन 23:1 में हमें सबसे कोमल स्वर सुनाई देता है: "यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।" यह किसी आराम में बैठे आदमी का वाक्य नहीं है। यह उस चरवाहे का वाक्य है जिसने जंगल में भेड़ों को सिंह और भालू से बचाया, और जो खुद राजा शाऊल से भागता हुआ गुफाओं में छिपा। "मुझे कुछ घटी न होगी" का अर्थ यह नहीं कि मेरे पास सब कुछ है, बल्कि यह कि जिसके पास चरवाहा है उसे और किसी चीज़ की कमी नहीं।

अंधेरा गहराता है, तो भजन 27:1 में विश्वास लड़ना सीखता है: "यहोवा मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है, मैं किस से डरूँ? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस से भय खाऊँ?" यह प्रश्न-चिह्न बहुत कीमती है। भजन लिखने वाला अपने डर से बहस कर रहा है। वह डर को झूठ कहकर दबा नहीं रहा, वह उसे परमेश्वर के नाम के सामने खड़ा कर रहा है।

जब मन के भीतर का पाप उजागर होता है, भजन संहिता वहाँ भी शब्द देती है। भजन 51:10 पुकारता है: "हे परमेश्वर, मुझ में शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।" यहाँ जो हिब्रू क्रिया "उत्पन्न कर" के लिए इस्तेमाल हुई है, वही उत्पत्ति के पहले अध्याय में है, जब परमेश्वर ने शून्य से सृष्टि रची। दाऊद अपने मन की मरम्मत नहीं माँग रहा, वह नई सृष्टि माँग रहा है।

और जब आदमी टूटकर छिपने की जगह ढूँढ़ता है, तो भजन 91:1-2 उसे गोद में बिठा देता है: "जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा। मैं यहोवा के विषय कहूँगा, वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखता हूँ।"

सीढ़ी का आखिरी पायदान भजन 150:6 है: "जितने प्राणी हैं सब के सब यहोवा की स्तुति करें! याह की स्तुति करो!" जो पुस्तक एक अकेले धन्य मनुष्य से शुरू हुई थी, वह सारी सृष्टि के गान पर खत्म होती है। यही भजन संहिता का संदेश है: परमेश्वर हमारी सबसे टूटी हुई आवाज़ को भी उस गीत में शामिल कर लेते हैं जिसका अंत स्तुति है।

बाइबल में चलने वाला सूत्र

भजन संहिता आकाश से नहीं गिरी, वह इस्राएल के इतिहास की धूल और खून में से निकली। दाऊद के गीत भेड़शालाओं, युद्धभूमि और महल के पापों से जन्मे। आसाप और कोरहवंशियों के भजन मंदिर की सेवा में गाए गए, जहाँ गायकों के दल बाजों के साथ सुबह-शाम स्तुति करते थे। भजन 90 मूसा के नाम से जुड़ा है, यानी यह परंपरा मंदिर से भी पुरानी है। और भजन 137 में हम बेबीलोन की नदियों के किनारे बैठे बंधुओं को सुनते हैं, जो पूछते हैं कि पराए देश में यहोवा का गीत कैसे गाया जाए।

यही सूत्र पूरे पुराने नियम में चलता है। जब मंदिर का समर्पण हुआ, गीत गाए गए। जब यहोशापात युद्ध में गया, गायक सेना के आगे चले। जब लौटे हुए बंधुओं ने नींव डाली, तो हल्लेलूयाह गूँजा। इस्राएल का धर्मशास्त्र केवल पढ़ा नहीं जाता था, वह गाया जाता था। और यह गाने की आदत ही उसे नए नियम तक ले आई।

नए नियम में भजन संहिता सबसे अधिक उद्धृत की जाने वाली पुरानी नियम की पुस्तक है। पर इससे बड़ी बात यह है कि यीशु मसीह ने इसे अपनी प्रार्थना-पुस्तिका बनाया। जब क्रूस पर उनके होंठ खुले, तो भजन 22 का पहला वाक्य निकला, "हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?" और अंतिम श्वास के साथ भजन 31 का वाक्य, "मैं अपनी आत्मा तेरे हाथ में सौंप देता हूँ।" जिस सीढ़ी की बात हम कर रहे हैं, मसीह उसके सबसे नीचे के पायदान तक उतरे। उन्होंने विलाप को केवल पढ़ा नहीं, जीया।

पुनरुत्थान के बाद उन्होंने अपने चेलों से कहा कि व्यवस्था, भविष्यद्वक्ताओं और भजनों में जो उनके विषय में लिखा था, वह पूरा होना ही था (लूका 24:44)। पेन्तिकुस्त के दिन पतरस ने भीड़ के सामने भजन 16 और भजन 110 खोलकर समझाया कि दाऊद का वंशज कब्र में नहीं छोड़ा गया। इब्रानियों की पत्री में मसीह की महिमा भजन 2, भजन 8, भजन 40 और भजन 110 से सिद्ध की गई है। पौलुस कलीसिया को भजन, स्तुतिगान और आत्मिक गीतों से एक दूसरे को सिखाने के लिए कहता है (कुलुस्सियों 3:16)। और प्रकाशितवाक्य में स्वर्ग का दृश्य क्या है? एक नया गीत, अनगिनत आवाज़ें, मेम्ने की स्तुति। भजन 150:6 का "जितने प्राणी हैं सब के सब" वहाँ पूरा होता है।

हर विलाप अंत में मेम्ने के गीत में मिल जाता है।

इसलिए भजन संहिता पुराने और नए नियम के बीच का पुल है। पुराने में यह इस्राएल की आवाज़ है, मसीह में यह उद्धारकर्ता की आवाज़ बनती है, और कलीसिया में यह हमारी आवाज़ बन जाती है, जो सिर के पीछे-पीछे गाने वाले शरीर की आवाज़ है।

रचना और मुख्य विषय

भजन संहिता के हिब्रू नाम का अर्थ है "स्तुतियाँ", और यूनानी अनुवाद में इसे "तार वाले बाजे के साथ गाए जाने वाले गीत" कहा गया। हिंदी में "भजन संहिता" यानी भजनों का संग्रह। और यह वाकई एक संग्रह है, एक ही व्यक्ति की डायरी नहीं। इसमें एक सौ पचास भजन हैं, जो लगभग एक हज़ार साल के फैलाव से इकट्ठे किए गए।

शीर्षकों के अनुसार तिहत्तर भजन दाऊद के नाम से जुड़े हैं, बारह आसाप के, ग्यारह कोरहवंशियों के, दो सुलैमान के, एक मूसा का, एक हेमान का और एक एतान का। लगभग पचास भजनों पर कोई नाम नहीं है, जिन्हें परंपरा में "अनाथ भजन" कहा जाता है। यानी लेखक एक नहीं, अनेक हैं, और वे राजा से लेकर मंदिर के गायक तक, हर तबके से आते हैं। समय की दृष्टि से मूसा का भजन सबसे पुराना है और बंधुआई के बाद के भजन सबसे नए। पूरे संग्रह का अंतिम रूप बंधुआई से लौटने के बाद, एज्रा के युग के आसपास, दूसरे मंदिर की आराधना के लिए तैयार किया गया।

सबसे दिलचस्प बात इसकी बनावट है। भजन संहिता पाँच पुस्तकों में बँटी है: पहली भजन 1 से 41, दूसरी भजन 42 से 72, तीसरी भजन 73 से 89, चौथी भजन 90 से 106, और पाँचवीं भजन 107 से 150। हर पुस्तक "आमीन" और स्तुति के एक छोटे गीत पर समाप्त होती है। यहूदी परंपरा में कहा जाता था कि जैसे मूसा ने इस्राएल को व्यवस्था की पाँच पुस्तकें दीं, वैसे ही दाऊद ने पाँच पुस्तकों में भजन दिए। एक तरफ परमेश्वर का वचन हमारे लिए, दूसरी तरफ हमारे शब्द परमेश्वर के लिए, और दोनों ही परमेश्वर की ओर से आए।

इस बनावट में वही सीढ़ी दिखती है जिसकी हम बात कर रहे हैं। शुरुआती पुस्तकों में विलाप भारी हैं। तीसरी पुस्तक तो भजन 89 पर खत्म होती है, जहाँ दाऊद की वंश-वाचा टूटी हुई लगती है और सवाल अनुत्तरित रह जाता है। चौथी पुस्तक जवाब देती है: यहोवा ही राजा है, राजा का सिंहासन डगमगाया तो भी परमेश्वर का सिंहासन नहीं। और पाँचवीं पुस्तक धन्यवाद, आरोहण के गीत और अंत में पाँच हल्लेलूयाह भजनों तक चढ़ जाती है। संग्रह जानबूझकर इस तरह सजाया गया कि पाठक विलाप से होकर स्तुति तक पहुँचे, और रास्ता छोड़कर छलाँग न लगाए।

भजनों के प्रकार भी समझने लायक हैं। सबसे बड़ी श्रेणी विलाप की है, व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों। फिर स्तुति के भजन, धन्यवाद के भजन, भरोसे के भजन, राजकीय और मसीही भजन, सियोन के गीत, ज्ञान और व्यवस्था के भजन, तीर्थयात्रा के आरोहण गीत (भजन 120 से 134), और पश्चाताप के भजन जिनमें भजन 51 सबसे जाना-पहचाना है।

हिब्रू कविता की सुंदरता तुक में नहीं, विचारों के जोड़े में है। एक पंक्ति कुछ कहती है, दूसरी उसे दोहराती, गहरा करती या उलट देती है। भजन 119 वर्णमाला के क्रम में लिखा गया है, बाईस खंड, हर खंड में आठ पद। इस तरह वचन के प्रति प्रेम को "अ" से "ज्ञ" तक गाया गया। बीच-बीच में "सेला" जैसे संगीत के संकेत हैं, जो शायद ठहराव या स्वर बढ़ाने का इशारा थे।

बाइबल के क्रम में भजन संहिता हिब्रू बाइबल के तीसरे भाग की शुरुआत करती है, और यही कारण है कि प्रभु यीशु ने पूरे पुराने नियम को "व्यवस्था, भविष्यद्वक्ता और भजन" कहा। हमारी बाइबलों में यह अय्यूब के बाद और नीतिवचन से पहले खड़ी है, दुख की पुस्तक और बुद्धि की पुस्तक के ठीक बीच में, जहाँ उसका घर होना ही चाहिए।

इस पुस्तक के मुख्य पद

भजन 23:1 इस पूरी पुस्तक का सबसे छोटा धर्मशास्त्र है: "यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।" प्राचीन पूर्व में "चरवाहा" राजा का पद-नाम था, पर दाऊद इसे मीठा और निजी बना देता है। "मेरा" शब्द यहाँ सब कुछ बदल देता है। यह विश्वास का सिद्धांत नहीं, रिश्ते का दावा है। और "घटी न होगी" का वादा परिस्थितियों के बारे में नहीं है, चरवाहे की योग्यता के बारे में है। इसी भजन में आगे मृत्यु की छाया की तराई आती है, यानी कमी का न होना दुख का न होना नहीं है। यह वादा है कि तराई में भी लाठी और सोंटा साथ रहेंगे। जब यीशु मसीह ने कहा कि वे अच्छे चरवाहे हैं और भेड़ों के लिए अपना प्राण देते हैं, तो उन्होंने इस पद पर अपना हस्ताक्षर कर दिया।

भजन 51:10 उस जगह से आता है जहाँ हम सबसे कम जाना चाहते हैं: "हे परमेश्वर, मुझ में शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।" दाऊद ने बतशेबा के साथ पाप किया, उसे छिपाने के लिए हत्या करवाई, और महीनों तक सब सामान्य दिखाया। जब नातान भविष्यद्वक्ता ने पर्दा हटाया, तो दाऊद ने सफाई नहीं दी। उसने यह भजन लिखा। ध्यान दें, वह "मुझे माफ कर दो" पर नहीं रुकता, वह भीतर की मशीन बदलवाना चाहता है। पापी को क्षमा तो चाहिए, पर उससे अधिक नया हृदय चाहिए। यह प्रार्थना यहेजकेल की उस भविष्यवाणी की ओर इशारा करती है जहाँ परमेश्वर पत्थर का हृदय निकालकर माँस का हृदय देने का वादा करते हैं, और नए नियम में नई सृष्टि बनने के अनुभव में पूरी होती है। पश्चाताप का असली फल नया हृदय माँगना है।

और भजन 150:6 पूरे संग्रह की मंज़िल है: "जितने प्राणी हैं सब के सब यहोवा की स्तुति करें! याह की स्तुति करो!" पहले भजन में एक व्यक्ति था, यहाँ हर श्वास लेने वाला प्राणी है। स्तुति के लिए योग्यता यहाँ कोई पद, कोई सफलता, कोई शुद्ध रिकॉर्ड नहीं है, बस साँस लेना है। जिसने आपको साँस दी, उसी के लिए वह साँस लौटानी है। यही सीढ़ी का शिखर है, और यही कारण है कि भजन संहिता कभी शिकायत पर खत्म नहीं होती। परमेश्वर हमें विलाप से शुरू करने की छूट देते हैं, पर वे हमें वहीं छोड़ने का इरादा नहीं रखते।

भजन संहिता पढ़ने की व्यावहारिक मार्गदर्शिका

भजन संहिता को पहले पन्ने से आखिरी पन्ने तक तेज़ी से पढ़ना ठीक नहीं बैठता, क्योंकि यह पुस्तक जानकारी देने के लिए नहीं, प्रार्थना करने के लिए लिखी गई है। सबसे सरल तरीका यह है कि आप हर दिन एक भजन लें, उसे धीरे-धीरे दो बार पढ़ें, और दूसरी बार पढ़ते समय उसकी पंक्तियों को अपने शब्दों में परमेश्वर से कहें। जहाँ भजन कहता है "यहोवा मेरा चरवाहा है", वहाँ आप जोड़ सकते हैं कि आज किस बात में आपको चरवाहे की जरूरत है।

शुरुआत करने के लिए एक अच्छा रास्ता यह है कि आप पहले भजन 1 पढ़ें, फिर भजन 23, भजन 27, भजन 51, भजन 91, भजन 103, भजन 121, भजन 130 और भजन 150 पढ़ें। ये नौ भजन आपको पूरी सीढ़ी का अनुभव दे देंगे, नींव से शिखर तक। उसके बाद पाँच पुस्तकों के क्रम से पढ़ना शुरू करें, हर महीने पाँच-पाँच भजन।

तीस दिन में पूरी पुस्तक पढ़ने का पुराना तरीका भी बहुत उपयोगी है: हर दिन पाँच भजन, यानी महीने की तारीख के हिसाब से। पहली तारीख को भजन 1 से 5, दूसरी को भजन 6 से 10, और इसी तरह। भजन 119 इतना लंबा है कि उसे कई दिनों में बाँटना बेहतर होगा, आठ-आठ पदों के खंडों में।

पढ़ते समय तीन सवाल साथ रखें। पहला, यह भजन परमेश्वर के बारे में क्या कहता है, यानी उनका कौन सा नाम, कौन सा गुण, कौन सा काम यहाँ सामने आता है। दूसरा, यह भजन मनुष्य के बारे में क्या स्वीकार करता है, उसका डर, उसका पाप, उसकी आशा। तीसरा, यह भजन यीशु मसीह की ओर कैसे इशारा करता है, क्योंकि कुछ भजन उन्हीं के बारे में हैं, कुछ उन्होंने खुद गाए, और कुछ हम उनके नाम में गाते हैं।

जो भजन कठिन लगें, जैसे वे जिनमें शत्रुओं पर न्याय की गुहार है, उन्हें छोड़ न दें। उन्हें इस तरह पढ़ें कि आप अपना बदला परमेश्वर के हाथ में सौंप रहे हैं, अपने हाथ में नहीं ले रहे। यही उन भजनों की असली शिक्षा है।

और एक अंतिम सलाह: कुछ भजन कंठस्थ कर लें। भजन 23, भजन 27:1, भजन 91:1-2 और भजन 121 ऐसे पद हैं जो अस्पताल के गलियारे में, थाने के बाहर, नौकरी छूटने की खबर के बाद, या बच्चे की चिंता में रात के अंधेरे में आपके साथ बोलेंगे। तब बाइबल खोलने का समय नहीं होता, तब याद किया हुआ वचन प्रार्थना बन जाता है।

दर्पण

आपने कभी गौर किया है कि आप परमेश्वर के सामने कितनी सफाई से बात करते हैं? आप कलीसिया में जो प्रार्थना करते हैं, उसमें आपका असली सोमवार कहाँ है? वह डर जो आपको ऑफिस में बॉस के मैसेज देखकर होता है, वह हिसाब जो आपको महीने के आखिर में बैंक बैलेंस देखकर सताता है, वह गुस्सा जो अपने ही घर के किसी सदस्य के प्रति आपके मन में सालों से जमा है, वह अकेलापन जिसे आप किसी को बताने में शरमाते हैं, क्या इनमें से कुछ भी आपकी प्रार्थना में आता है?

भजन संहिता आपके इस पर्दे को खींच देती है। वह आपको दिखाती है कि परमेश्वर ने अपने वचन में उन प्रार्थनाओं को जगह दी है जिन्हें हम शायद कलीसिया में बोलने से डरें। "हे यहोवा, तू कब तक?" यह शास्त्र में लिखा है। "मैं गहरे स्थान में से तुझ को पुकारता हूँ" यह शास्त्र में लिखा है। इसका मतलब आप बेईमान प्रार्थना करके परमेश्वर का आदर नहीं कर रहे, आप उन्हें अपने भीतर आने से रोक रहे हैं।

और दूसरी तरफ, यह पुस्तक आपको वहाँ रुकने भी नहीं देती। आप शायद ऐसे व्यक्ति हैं जिसने विलाप में घर बना लिया है। सालों की कड़वाहट, वह चोट जो किसी ने दी और आपने उसे अपनी पहचान बना लिया। भजन संहिता आपके दुख का सम्मान करती है, पर वह आपके हाथ पकड़कर आगे भी खींचती है, क्योंकि उसका आखिरी पन्ना हल्लेलूयाह है, शिकायत नहीं।

तो आज सच में क्या करें? आज रात सोने से पहले एक भजन खोलिए और उसे ज़ोर से पढ़िए, अपने नाम के साथ, अपनी परिस्थिति के साथ। बिना सजाए। अगर आँसू आते हैं तो उन्हें भी प्रार्थना मान लीजिए। और अंत में, चाहे मन न करे, एक वाक्य स्तुति का जोड़िए। यही वह छोटा कदम है जिससे सीढ़ी चढ़ना शुरू होता है।

बच्चों के लिए समझाया गया

बच्चों को भजन संहिता समझाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम इसे "परमेश्वर की गीत-पुस्तिका" कहें। बच्चे यह बात तुरंत पकड़ लेते हैं कि जब हम खुश होते हैं तो गाना गाते हैं, और जब हम रोते हैं तब भी हमारे मन में कुछ बजता रहता है। भजन संहिता में डेढ़ सौ गीत हैं, कुछ खुशी के, कुछ डर के, कुछ माफी माँगने के, और कुछ धन्यवाद के। और सबसे सुंदर बात यह है कि ये गीत परमेश्वर ने खुद अपनी किताब में रख दिए, ताकि हमें कभी सोचना न पड़े कि प्रार्थना में क्या कहें।

छोटे बच्चों के लिए भजन 23 का चरवाहा और भेड़ का चित्र सबसे उपयोगी है, क्योंकि उनके भीतर देखभाल की ज़रूरत का अनुभव पहले से है। थोड़े बड़े बच्चों को भजन 1 का पेड़ और नदी का चित्र भा जाता है, और वे समझ सकते हैं कि जड़ें कहाँ हैं इससे फल तय होता है। किशोरों के साथ भजन 51 और दाऊद की कहानी पर बात करना कीमती होता है, क्योंकि उस उम्र में शर्म और छिपाने की लड़ाई असली होती है।

घर पर एक छोटा अभ्यास शुरू कर सकते हैं: रात को एक भजन का एक ही पद पढ़िए और बच्चे से पूछिए कि आज उसका दिन खुशी वाला गीत था या शिकायत वाला। बच्चे की ईमानदारी को सुधारने की जल्दी न करें, पहले उसे सुनना सिखाइए कि परमेश्वर सुनते हैं।

हमारे यहाँ भजन संहिता की अलग-अलग उम्र के लिए तैयार व्याख्याएँ उपलब्ध हैं, नन्हे बच्चों (3 से 6 वर्ष) के लिए सरल चित्रात्मक कहानियाँ, स्कूली बच्चों (7 से 12 वर्ष) के लिए गहरी बातचीत वाले पाठ, और किशोरों (12 वर्ष से ऊपर) के लिए ऐसी सामग्री जो उनके सवालों से डरती नहीं। उन्हें अपने बच्चे की उम्र के अनुसार चुनिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भजन संहिता किसने लिखी?

भजन संहिता किसी एक लेखक की रचना नहीं है। शीर्षकों के अनुसार तिहत्तर भजन दाऊद से जुड़े हैं, बारह आसाप से, ग्यारह कोरहवंशियों से, दो सुलैमान से, एक मूसा से (भजन 90), एक हेमान से और एक एतान से। लगभग पचास भजनों में लेखक का नाम नहीं दिया गया। इसलिए इसे "दाऊद की पुस्तक" कहना आधा सच है; दाऊद इसका सबसे बड़ा योगदान देने वाला है, पर यह इस्राएल की कई पीढ़ियों की आराधना का साझा खज़ाना है, जिसे पवित्र आत्मा ने प्रेरित किया।

भजन संहिता में कितने भजन हैं और यह कब लिखी गई?

भजन संहिता में कुल एक सौ पचास भजन हैं। इनकी रचना लगभग एक हज़ार साल के फैलाव में हुई। सबसे पुराना संभवतः मूसा का भजन 90 है, दाऊद और सुलैमान के भजन ईसा पूर्व दसवीं शताब्दी के आसपास के हैं, और भजन 137 जैसे भजन बेबीलोन की बंधुआई के समय के हैं। पूरे संग्रह को अंतिम रूप बंधुआई से लौटने के बाद, दूसरे मंदिर की आराधना के लिए दिया गया, जिसे परंपरा एज्रा के युग से जोड़ती है।

भजन संहिता की पाँच पुस्तकें कौन सी हैं?

पहली पुस्तक भजन 1 से 41 तक, दूसरी भजन 42 से 72 तक, तीसरी भजन 73 से 89 तक, चौथी भजन 90 से 106 तक और पाँचवीं भजन 107 से 150 तक है। हर पुस्तक स्तुति और "आमीन" के एक छोटे गीत पर समाप्त होती है, जिससे यह बाँट स्पष्ट होती है। यहूदी परंपरा में इन पाँच पुस्तकों को मूसा की पाँच पुस्तकों के समानांतर देखा जाता था। यह बनावट संयोग नहीं है; इससे पाठक विलाप की भारी शुरुआत से होकर हल्लेलूयाह की खुली स्तुति तक क्रम से पहुँचता है।

भजन 23 का अर्थ क्या है?

भजन 23 का हृदय भजन 23:1 है: "यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।" इसका अर्थ यह नहीं कि विश्वासी को कभी दुख नहीं होगा, क्योंकि उसी भजन में मृत्यु की छाया की तराई का ज़िक्र है। इसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति के पास परमेश्वर हैं, उसे किसी और चीज़ की कमी नहीं। चरवाहा भेड़ को तराई से बचाकर नहीं, तराई में साथ रहकर सुरक्षित रखता है। नए नियम में यीशु मसीह ने खुद को अच्छा चरवाहा कहकर इस भजन को अपने ऊपर पूरा किया।

"सेला" शब्द का मतलब क्या है?

"सेला" भजन संहिता में लगभग इकहत्तर बार आता है और इसका ठीक-ठीक अर्थ आज निश्चित रूप से नहीं जाना जाता। सबसे स्वीकार्य समझ यह है कि यह संगीत या पाठ का कोई संकेत था, संभवतः थोड़ी देर ठहरने, बाजों के स्वर को ऊँचा करने या मंडली को ध्यान करने का इशारा। पढ़ने वाले के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ सुंदर है: यहाँ रुकिए, इस बात को दिल में उतरने दीजिए, अगली पंक्ति पर जल्दबाज़ी में मत जाइए।

क्या शत्रुओं पर न्याय माँगने वाले भजन पढ़ना ठीक है?

हाँ, वे भी परमेश्वर के वचन का हिस्सा हैं और उन्हें छोड़ना नुकसान है। ये भजन हमें सिखाते हैं कि क्रोध और अन्याय के दर्द को दबाना नहीं, बल्कि उसे परमेश्वर के न्याय-आसन पर रख देना है। ध्यान दें कि इन भजनों में लिखनेवाला अपने हाथ से बदला नहीं लेता, वह न्याय परमेश्वर को सौंपता है। मसीह में हम इन्हें और गहराई से पढ़ते हैं, क्योंकि हमारे बदले का हिसाब क्रूस पर पूरा हुआ और हम शत्रुओं के लिए प्रार्थना करना सीखते हैं।

सबसे लंबा और सबसे छोटा भजन कौन सा है?

सबसे लंबा भजन 119 है, जिसमें एक सौ छिहत्तर पद हैं, और यह पूरी बाइबल का सबसे लंबा अध्याय भी है। यह हिब्रू वर्णमाला के क्रम में बाईस खंडों में लिखा गया है, हर खंड में आठ पद, और लगभग हर पद परमेश्वर के वचन की महिमा गाता है। सबसे छोटा भजन 117 है, जिसमें केवल दो पद हैं और जिसमें सब जातियों को यहोवा की स्तुति करने का बुलावा है। दोनों मिलकर दिखाते हैं कि स्तुति लंबी भी हो सकती है और बहुत छोटी भी।

नए नियम में भजन संहिता का इतना उल्लेख क्यों होता है?

क्योंकि भजन संहिता मसीह की प्रार्थना-पुस्तिका थी और आदि कलीसिया की गीत-पुस्तिका बनी। प्रभु यीशु ने क्रूस पर भजन 22 और भजन 31 के शब्द पुकारे, और पुनरुत्थान के बाद कहा कि भजनों में उनके विषय में लिखा हुआ पूरा होना था (लूका 24:44)। पतरस ने पेन्तिकुस्त के उपदेश में भजन 16 और भजन 110 खोले, और इब्रानियों की पत्री मसीह की महिमा भजनों से सिद्ध करती है। इसीलिए यह नए नियम में सबसे अधिक उद्धृत पुरानी नियम की पुस्तक है।

भजन 51 किस अवसर पर लिखा गया?

भजन 51 का शीर्षक बताता है कि दाऊद ने इसे उस समय लिखा जब नातान भविष्यद्वक्ता ने बतशेबा के साथ उसके पाप का पर्दा खोला। यह पश्चाताप का सबसे गहरा भजन है, क्योंकि दाऊद यहाँ बहाने नहीं बनाता और परिस्थितियों को दोष नहीं देता। भजन 51:10 में वह केवल क्षमा नहीं माँगता, वह नया मन माँगता है: "हे परमेश्वर, मुझ में शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।" यही सच्चे पश्चाताप की पहचान है।

भजन संहिता पढ़ना कहाँ से शुरू करूँ?

शुरुआत भजन 1 से कीजिए, क्योंकि वह पूरी पुस्तक का प्रवेश-द्वार है और बताता है कि आशीष कहाँ से आती है। उसके बाद भजन 23, भजन 27, भजन 51, भजन 91, भजन 103, भजन 121, भजन 130 और भजन 150 पढ़िए। ये भजन आपको भरोसा, डर, पश्चाताप, शरण और स्तुति की पूरी यात्रा दिखा देंगे। फिर आप महीने के तीस दिनों में पाँच-पाँच भजन पढ़कर पूरी पुस्तक पूरी कर सकते हैं, और भजन 119 को कई दिनों में आठ-आठ पदों के खंडों में बाँट सकते हैं।

क्या भजन संहिता में यीशु मसीह के बारे में भविष्यवाणियाँ हैं?

हाँ, और वे आश्चर्यजनक रूप से स्पष्ट हैं। भजन 2 और भजन 110 परमेश्वर के अभिषिक्त राजा और याजक के बारे में बोलते हैं, भजन 22 क्रूस के कष्ट का ऐसा वर्णन देता है जिसे पढ़ते समय हाथों और पैरों के छेदे जाने का दृश्य सामने आ जाता है, भजन 16 कब्र में न छोड़े जाने की बात करता है, और भजन 118 का ठुकराया गया पत्थर यीशु मसीह ने अपने बारे में उद्धृत किया। नए नियम के लेखक इन्हीं भजनों से मसीह की मृत्यु, पुनरुत्थान और महिमा को समझाते हैं।

भजन 91 का वादा क्या हमें हर खतरे से बचाता है?

भजन 91:1-2 कहता है कि जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा। यह वादा जादुई कवच नहीं है, और ध्यान देने लायक बात है कि शैतान ने जंगल में यीशु मसीह के सामने इसी भजन को गलत तरीके से इस्तेमाल किया था। इसका सच्चा अर्थ यह है कि परमेश्वर की उपस्थिति में रहनेवाले के लिए कोई भी परिस्थिति परमेश्वर के हाथ से बाहर नहीं। बचाव कभी दुख से निकालकर होता है और कभी दुख के भीतर थामकर, पर दोनों में सुरक्षा एक ही है।

क्या भजन संहिता के भजन गाए जाने के लिए थे?

हाँ, और यह बात इसे समझने के लिए ज़रूरी है। हिब्रू में इस पुस्तक का नाम ही "स्तुतियाँ" है, और अनेक भजनों के शीर्षकों में संगीत के निर्देश, धुन के नाम और प्रधान गायक को संबोधन मिलते हैं। मंदिर में गायकों के दल इन्हें बाजों के साथ गाते थे। कलीसिया में भी पौलुस विश्वासियों को भजनों और आत्मिक गीतों से एक दूसरे को सिखाने के लिए कहता है (कुलुस्सियों 3:16)। इसलिए भजन संहिता को केवल पढ़ना अधूरा है, उसे गाना और बोलना उसका असली उपयोग है।

अंत में

भजन संहिता आपके सामने कोई परीक्षा नहीं रखती, वह आपके हाथ में शब्द रखती है। यह पुस्तक इसलिए बाइबल के बीच में रखी गई है कि हर पाठक को रास्ते में एक ऐसी जगह मिले जहाँ वह अपने असली रूप में खड़ा हो सके, वृक्ष की तरह वचन के किनारे लगा हुआ, चरवाहे की छाया में भरोसा करता हुआ, अपने पाप को छिपाए बिना नया मन माँगता हुआ, और आखिर में उस भीड़ में शामिल होता हुआ जिसमें हर श्वास लेनेवाला प्राणी स्तुति करता है।

यह सीढ़ी नीचे से शुरू होती है, इसलिए घबराइए नहीं कि आप कहाँ खड़े हैं। यीशु मसीह इस सीढ़ी के सबसे नीचे के पायदान तक उतर आए, विलाप के शब्द अपने होंठों पर लेकर, और वहीं से हमारे लिए रास्ता खोल दिया।

आगे के अध्ययन के लिए एक ही सुझाव: आज कोई एक भजन चुनिए, उसे धीरे-धीरे पढ़िए, और उसकी हर पंक्ति को अपने नाम, अपने घर, अपने काम और अपनी चिंताओं के साथ परमेश्वर के सामने दोहराइए। तीस दिन बाद आप पाएँगे कि आपकी प्रार्थना बदल गई है, और शायद आपके भीतर वह गीत जागने लगा है जिसका अंत हल्लेलूयाह है।

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