1 इतिहास 5
पाठ
अध्याय की शुरुआत एक खोए हुए अधिकार से होती है: रूबेन इस्राएल का जेठा था, पर उसने "अपने पिता के बिछौने को अशुद्ध किया," और जेठे का अधिकार यूसुफ के पुत्रों को मिला, जबकि प्रधानता यहूदा के वंश को। फिर यरदन के पूर्व बसे तीन गोत्रों, रूबेन, गाद और मनश्शे के आधे गोत्र, की वंशावली, उनकी चरागाहें, और हग्रियों पर उनकी बड़ी जीत आती है, जो इसलिए मिली "कि इन्होंने उस पर भरोसा रखा था।" और अध्याय उसी सांस में समाप्त होता है कि इन्हीं लोगों ने "अपने पितरों के परमेश्वर से विश्वासघात किया," और परमेश्वर ने अश्शूर के राजाओं का मन उभारा, और वे बन्धुआई में चले गए।
मर्म
इस अध्याय में दो पद आपस में टकराते हैं: पद 20 और पद 25। एक ही गोत्र, एक ही भूमि, एक ही परमेश्वर। एक बार वे युद्ध में दुहाई देते हैं और सुने जाते हैं; दूसरी बार वे उन्हीं देशों के देवताओं के पीछे हो लेते हैं जिन्हें परमेश्वर ने उनके सामने से हटाया था। इतिहास का लेखक हमें यह सिखाता है कि वाचा का सम्बन्ध जीवित है, यन्त्र नहीं। अनुग्रह का अर्थ यह नहीं कि परमेश्वर हमारी निष्ठा के प्रति उदासीन हो गए। जो हाथ हग्रियों को उनके वश में कर देता है, वही हाथ अश्शूर के राजा का मन उभारता है। सहायता और न्याय एक ही परमेश्वर की एक ही पवित्रता से निकलते हैं। यही इस सूखी वंशावली का धड़कता हृदय है।
सूत्र
पद 1 और 2 बाइबल की पूरी कहानी का सार हैं। जेठा अपना अधिकार खो देता है; प्रधानता उस भाई को मिलती है जो जन्म से चौथा था। परमेश्वर का चुनाव जन्म-क्रम, योग्यता या परम्परा से बँधा नहीं है। यहूदा में से "प्रधान" आता है, और उस वंश-रेखा के अन्त में दाऊद, और दाऊद के बाद वह जिसे प्रकाशितवाक्य "यहूदा के गोत्र का वह सिंह" कहता है। इतिहास की पुस्तक बन्धुआई से लौटे लोगों के लिए लिखी गई थी, और यह वंशावली उन्हें बताती है: तुम्हारी आशा तुम्हारे पूर्वजों की निष्ठा पर नहीं, परमेश्वर के चुनाव पर टिकी है। जहाँ रूबेन अपनी वासना से अधिकार खोता है, वहाँ यहूदा से आया प्रधान अपनी आज्ञाकारिता से अनेकों के लिए अधिकार कमाता है।
आत्मदर्शन
पद 20 को ध्यान से पढ़िए: उन्होंने युद्ध के बीच दुहाई दी और भरोसा रखा, और जीत गए। हमारे भीतर एक चालाक सौदेबाज़ बैठा है जो ठीक यही करता है। बीमारी की रिपोर्ट आने पर, नौकरी छूटने पर, बच्चे के बिगड़ने पर हम गिड़गिड़ाते हैं, ईमानदारी से। और जब संकट टल जाता है, जब पशु बढ़ जाते हैं और चरागाहें फैल जाती हैं, तब हमारी प्रार्थना ठंडी पड़ जाती है और हम चुपचाप उस देश के देवताओं की ओर सरक जाते हैं, सुरक्षा, प्रतिष्ठा, बैंक का शेष। पद 24 इन्हें "बड़े वीर और नामी" कहता है, और अगला ही पद कहता है: विश्वासघात। नाम और सामर्थ्य किसी को नहीं बचाते। आज ही, दस मिनट के भीतर, अपनी डायरी में वह एक प्रार्थना लिखिए जो पिछले वर्ष सुनी गई, और उसके नीचे लिखिए: "इसके बाद मैंने क्या बदला?" उत्तर परमेश्वर के सामने ऊँची आवाज़ में पढ़िए।
संदर्भ
यह अध्याय भूगोल से भरा है, और वह भूगोल मायने रखता है। रूबेन, गाद और मनश्शे का आधा गोत्र यरदन के पूर्व बसे थे, गिलाद और बाशान में, वादे की भूमि की सीमा पर, नहीं उसके हृदय में। उन्होंने यही चुना था क्योंकि उनके पशुओं के लिए चरागाह वहाँ अच्छी थी। यह क्षेत्र खुला था, अरामी और अश्शूरी सेनाओं के रास्ते पर, मन्दिर और यरूशलेम की उपासना से दूर। पद 17 बताता है कि यह गणना योताम और यारोबाम के दिनों में हुई, अर्थात् अश्शूर के तूफ़ान से कुछ ही दशक पहले। और पद 26 के तिग्लत्पिलेसेर इतिहास का वास्तविक सम्राट है, जिसने ईसा पूर्व 734 के आसपास इन्हीं गोत्रों को उखाड़ा। किनारे पर बसे लोग सबसे पहले बहते हैं।
बारीकी
पद 25 का एक शब्द चुभता है: वे उन देवताओं के पीछे "व्यभिचारिणी के समान" हो लिए। यह इब्रानी शब्द ज़ानाह, वेश्यावृत्ति, मूर्तिपूजा के लिए भविष्यद्वक्ताओं की प्रिय भाषा है। और ध्यान दीजिए कि अध्याय कहाँ से शुरू हुआ था: रूबेन ने "अपने पिता के बिछौने को अशुद्ध किया।" आरम्भ में एक व्यक्ति का यौन विश्वासघात, अन्त में पूरे गोत्र का आत्मिक विश्वासघात। लेखक ने ये दो चित्र संयोग से नहीं जोड़े। वाचा एक अनुबन्ध नहीं, विवाह है। इसीलिए मूर्तिपूजा को नियम-भंग नहीं बल्कि बेवफ़ाई कहा जाता है। परमेश्वर का क्रोध किसी अपमानित अधिकारी का क्रोध नहीं; वह उस पति का दुख है जिसका प्रेम ठुकराया गया है।
प्रश्न
पद 22 सहज नहीं है: "बहुत से मरे पड़े थे क्योंकि वह लड़ाई परमेश्वर की ओर से हुई," और एक लाख लोग बन्धुआ बनाकर ले जाए गए। और पद 26 में वही परमेश्वर अश्शूर के राजा का मन उभारते हैं कि वे अपने ही लोगों को उखाड़ें। क्या परमेश्वर हिंसा के पीछे खड़े हैं? इस पर सस्ती राहत देना बेईमानी होगी। इतिहास का लेखक इसे नहीं छिपाता, और न ही समझाता है। वह केवल यह कहता है कि इतिहास आँधी नहीं, न्याय है, और उसी परमेश्वर के हाथ में है जो दुहाई सुनते हैं। मुझे यहाँ दो बातें साथ थामकर रखनी पड़ती हैं: कि परमेश्वर सब पर प्रभुता करते हैं, और कि उन्होंने अन्ततः अपने पुत्र को न्याय करने नहीं, न्याय सहने भेजा। इसका पूरा मेल मेरे पास नहीं है। क्रूस के सामने खड़ा होकर ही मैं पद 26 को झेल पाता हूँ।
चिंतन
कौन-सी प्रार्थना परमेश्वर ने आपके जीवन में सुनी, और उस उत्तर के बाद आपकी भक्ति गहरी हुई या ढीली पड़ी?
आपके जीवन में कौन-सी चीज़ "अच्छी चरागाह" है, यानी व्यावहारिक रूप से लाभदायक, पर आत्मिक रूप से सीमान्त पर बसा देने वाली?
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1 Chronicles 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
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1 इतिहास 5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
1 इतिहास 5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
1 Chronicles 5 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
इस्राएल के जेठे रूबेन के पुत्र ये थे: हनोक, पल्लू, हेस्रोन और कर्मी।" रूबेन ने अपना पहलौठे का अधिकार खो दिया था, फिर भी परमेश्वर ने उसके बेटों के नाम लिखवाए। जो गिर गया, वह वंशावली से मिटाया नहीं गया। तेरी सबसे बड़ी असफलता भी तेरा नाम उसकी किताब से नहीं काटती। वह अब भी तुझे जानता है, और तेरे बाद आने वालों को भी।
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