बाइबल व्याख्या

1 पतरस 4

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

पतरस अपने पाठकों को याद दिलाता है कि मसीह ने शरीर में दुःख उठाया, और अब वे भी उसी मनसा को हथियार की तरह पहन लें। पुराना जीवन, अन्यजातियों की अभिलाषाओं वाला, पीछे छूट गया है; बाकी समय परमेश्वर की इच्छा के लिए है। अन्त निकट है, इसलिए संयम, प्रार्थना, और सबसे बढ़कर आपस में गहरा प्रेम। और जब सताव की आग भड़के, तो अचम्भा मत करो, यह मसीह की सहभागिता है।

मर्म

पतरस दुःख को एक हथियार बनाता है। यह वाक्य ही चौंकाने वाला है, क्योंकि हमारी सहज प्रवृत्ति दुःख से बचने की है, उसे धारण करने की नहीं। पर वह लिखता है कि जिसने शरीर में दुःख उठाया, वह पाप से छूट गया। यह वैराग्य नहीं है, न ही मसोकिज़्म; यह मसीह के मार्ग की तर्कशैली है। जो व्यक्ति मसीह के लिए कष्ट सहने को तैयार है, उसके भीतर पाप की पकड़ ढीली पड़ चुकी होती है, क्योंकि उसने अपनी सुख-सुविधा को अंतिम मूल्य मानना छोड़ दिया है। परमेश्वर की इच्छा और मनुष्यों की अभिलाषाएँ, यही दो धाराएँ हैं जिनके बीच जीवन बहता है।

सूत्र

पतरस के शब्द पहाड़ी उपदेश की गूँज हैं। "मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्दा की जाती है, तो धन्य हो" सीधे मत्ती 5:11-12 से आ रहा है, जहाँ यीशु ने कहा था कि सताए हुए धन्य हैं। पतरस ने वह उपदेश स्वयं पहाड़ पर सुना था, और अब बुज़ुर्ग होकर उसे कलीसिया के लिए दोहरा रहा है। "प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है" (पद 8) नीतिवचन 10:12 से लिया गया है, यह दिखाता है कि पतरस के लिए पुराना नियम केवल छाया नहीं, जीवित ज्ञान है। और पद 17 में "न्याय का आरम्भ परमेश्वर के लोगों से" यहेजकेल 9:6 की भयानक दृष्टि की याद दिलाता है, जहाँ न्याय मंदिर से शुरू होता है। मसीह का क्रूस और परमेश्वर के लोगों का दुःख एक ही रेखा पर हैं।

दर्पण

यह पाठ हमारी सुविधावादी ईसाइयत पर सीधा प्रहार करता है। पतरस पद 4 में एक बहुत ही आधुनिक अनुभव का वर्णन करता है: पुराने साथी अचम्भा करते हैं कि तुम अब उनके साथ नहीं जुड़ते, और इसलिए बुरा-भला कहते हैं। दफ़्तर की पार्टी, पुराने दोस्तों की जमात, परिवार के वे अवसर जहाँ आपकी चुप्पी असहज कर देती है। पतरस यह नहीं कहता कि इससे बचो; वह कहता है इसे स्वीकार करो। और फिर पद 9 का धक्का: "बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का अतिथि-सत्कार करो।" कुड़कुड़ाहट, वही छोटी सी शिकायत जो सेवा को खोखला कर देती है। रसोई में थकान के साथ, बटुए पर दबाव के साथ, समय की तंगी में, बिना कुड़कुड़ाए।

प्रश्न

पद 6 एक पहेली है: "मरे हुओं को भी सुसमाचार इसलिए सुनाया गया।" यह वाक्य सदियों से पाठकों को उलझाता आया है। क्या मसीह ने मृत्यु और पुनरुत्थान के बीच उन आत्माओं को प्रचार किया जो पहले मर चुकी थीं? या यह उन विश्वासियों की बात है जो अब मर चुके हैं, पर जब जीवित थे तब उन्होंने सुसमाचार सुना था? पाठ स्पष्ट नहीं है, और मैं इसे बलपूर्वक स्पष्ट नहीं करूँगा। जो स्पष्ट है वह यह: शारीरिक मृत्यु परमेश्वर के न्याय और अनुग्रह की अंतिम सीमा नहीं है। "आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें", यह वाक्य आशा देता है, भले ही उसकी पूरी संरचना हमसे छिपी रहे। कुछ रहस्य श्रद्धा के लिए बचाए गए हैं।

विवरण

"हथियार के समान धारण करो" (पद 1)। यह सैनिक की भाषा है। ग्रीक शब्द hoplisasthe का अर्थ है युद्ध के लिए कवच पहनना। पतरस दुःख की मनसा को एक ढाल या तलवार बना देता है। यह सोचिए: संसार समझता है कि दुःख कमज़ोरी है, बचने की चीज़। पर पतरस के लिए, मसीह की तरह दुःख उठाने की तैयारी ही योद्धा का कवच है। एफिसियों 6 में पौलुस भी विश्वासी को कवच पहनाता है, पर पतरस यहाँ एक अलग टुकड़ा जोड़ता है: कष्ट सहने की मानसिकता स्वयं एक हथियार है। जिसने यह पहन लिया, उसे संसार तोड़ नहीं सकता, क्योंकि उसका सबसे बड़ा भय, दर्द का भय, पहले ही परास्त हो चुका है।

मुख्य पात्र

इस अध्याय का केंद्र मसीह है, पर पर्दे के पीछे से। पतरस उसका नाम बार-बार लेता है: उसने शरीर में दुःख उठाया (पद 1), उसके दुःखों में सहभागी होते हो (पद 13), उसके नाम के लिये निन्दा (पद 14), उसकी महिमा प्रगट होने वाली है (पद 13)। यह वही पतरस लिख रहा है जिसने कभी कहा था कि प्रभु को दुःख नहीं उठाना चाहिए, और जिसे यीशु ने "हे शैतान" कहकर डाँटा था। अब वृद्ध पतरस उसी दुःख को कलीसिया के लिए मार्ग बताता है। यह परिवर्तन देखने योग्य है: जो कभी दुःख से भागा, आँगन में तीन बार मुकर गया, वही अब लिखता है, "अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।" अनुग्रह ने भगोड़े को चरवाहा बनाया।

चिंतन

*पद 9 कहता है "बिना कुड़कुड़ाए अतिथि-सत्कार करो।" आपकी सेवा में वह कुड़कुड़ाहट कहाँ छिपी है,

1 Peter में और गहराई से जानें

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The Message of 1 Peter

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Hope for exiles: standing firm in grace under pressure.

Early Christian Letters For Everyone

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James, Peter, John and Jude in short accessible readings.

1 Peter: An Introduction and Commentary

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1 Peter 4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 पतरस 4 का क्या अर्थ है?
पतरस अपने पाठकों को याद दिलाता है कि मसीह ने शरीर में दुःख उठाया, और अब वे भी उसी मनसा को हथियार की तरह पहन लें। पुराना जीवन, अन्यजातियों की अभिलाषाओं वाला, पीछे छूट गया है; बाकी समय परमेश्वर की इच्छा के लिए है। अन्त निकट है, इसलिए संयम, प्रार्थना, और सबसे बढ़कर आपस में गहरा प्रेम। और जब सताव की आग भड़के, तो अचम्भा मत करो, यह मसीह की सहभागिता है।
1 पतरस 4 किस विषय में है?
पतरस दुःख को एक हथियार बनाता है। यह वाक्य ही चौंकाने वाला है, क्योंकि हमारी सहज प्रवृत्ति दुःख से बचने की है, उसे धारण करने की नहीं। पर वह लिखता है कि जिसने शरीर में दुःख उठाया, वह पाप से छूट गया। यह वैराग्य नहीं है, न ही मसोकिज़्म; यह मसीह के मार्ग की तर्कशैली है। जो व्यक्ति मसीह के लिए कष्ट सहने को तैयार है, उसके भीतर पाप की पकड़ ढीली पड़ चुकी होती है, क्योंकि उसने अपनी सुख-सुविधा को अंतिम मूल्य मानना छोड़ दिया है। परमेश्वर की इच्छा और मनुष्यों की अभिलाषाएँ, यही दो धाराएँ हैं जिनके बीच जीवन बहता है।
1 पतरस 4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पतरस के शब्द पहाड़ी उपदेश की गूँज हैं। "मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्दा की जाती है, तो धन्य हो" सीधे मत्ती 5:11-12 से आ रहा है, जहाँ यीशु ने कहा था कि सताए हुए धन्य हैं। पतरस ने वह उपदेश स्वयं पहाड़ पर सुना था, और अब बुज़ुर्ग होकर उसे कलीसिया के लिए दोहरा रहा है। "प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है" (पद 8) नीतिवचन 10:12 से लिया गया है, यह दिखाता है कि पतरस के लिए पुराना नियम केवल छाया नहीं, जीवित ज्ञान है। और पद 17 में "न्याय का आरम्भ परमेश्वर के लोगों से" यहेजकेल 9:6 की भयानक दृष्टि की याद दिलाता है, जहाँ न्याय मंदिर से शुरू होता है। मसीह का क्रूस और परमेश्वर के लोगों का दुःख एक ही रेखा पर हैं।
1 पतरस 4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह पाठ हमारी सुविधावादी ईसाइयत पर सीधा प्रहार करता है। पतरस पद 4 में एक बहुत ही आधुनिक अनुभव का वर्णन करता है: पुराने साथी अचम्भा करते हैं कि तुम अब उनके साथ नहीं जुड़ते, और इसलिए बुरा-भला कहते हैं। दफ़्तर की पार्टी, पुराने दोस्तों की जमात, परिवार के वे अवसर जहाँ आपकी चुप्पी असहज कर देती है। पतरस यह नहीं कहता कि इससे बचो; वह कहता है इसे स्वीकार करो। और फिर पद 9 का धक्का: "बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का अतिथि-सत्कार करो।" कुड़कुड़ाहट, वही छोटी सी शिकायत जो सेवा को खोखला कर देती है। रसोई में थकान के साथ, बटुए पर दबाव के साथ, समय की तंगी में, बिना कुड़कुड़ाए।
1 पतरस 4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पद 6 एक पहेली है: "मरे हुओं को भी सुसमाचार इसलिए सुनाया गया।" यह वाक्य सदियों से पाठकों को उलझाता आया है। क्या मसीह ने मृत्यु और पुनरुत्थान के बीच उन आत्माओं को प्रचार किया जो पहले मर चुकी थीं? या यह उन विश्वासियों की बात है जो अब मर चुके हैं, पर जब जीवित थे तब उन्होंने सुसमाचार सुना था?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Peter 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 9

पिता, मेरा दिल और मेरा दरवाज़ा दोनों खोल दे। जब कोई बिन बुलाए आ जाए, तो मेरे भीतर शिकायत नहीं, खुशी जागे। जो थोड़ा मेरे पास है, उसे बाँटने में मुझे कंजूस मत बनने दे। तेरा प्रेम मुझमें से होकर दूसरों तक पहुँचे।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 5

धन्यवाद है आपका, क्योंकि आप ही "जीवितों और मरे हुओं का न्याय करने को तैयार" हैं। जो ताने और गलतफहमियाँ मैं सह रहा हूँ, उनका हिसाब मुझे नहीं रखना पड़ता, क्योंकि आप सच्चा न्याय करेंगे। मेरा मन हल्का है, बदला लेने का बोझ आपने उतार दिया।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 7

पिता, धन्यवाद कि आपने हमें प्रार्थना का द्वार खुला दिया है और सचेत रहने की समझ दी है। धन्यवाद कि सब बातों का अन्त निकट है, यह जानकर हम भयभीत नहीं, बल्कि आपकी आस में स्थिर रहते हैं। संयमी मन के इस वरदान के लिए आपका आभार।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 10

पिता, जो कुछ तूने मुझे दिया है, वह मेरा अपना नहीं, तेरी दया का उपहार है। मुझे सिखा कि मैं इसे मुट्ठी में बंद करके न रखूँ, बल्कि खुले हाथों से दूसरों की भलाई में लगाऊँ। जहाँ मैं डरता हूँ या कंजूस हो जाता हूँ, वहाँ मेरा मन बदल दे।

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