बाइबल व्याख्या

1 शमूएल 16

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

बैतलहम के पुरनिये थरथरा रहे हैं। "क्या तू मित्रभाव से आया है कि नहीं?" यह सवाल किसी श्रद्धालु गाँव का स्वागत नहीं, बल्कि डरे हुए लोगों की सावधानी है। एक बूढ़ा भविष्यद्वक्ता बिना बुलाए, बछिया लेकर, तेल का सींग लिए आ गया है, और सबको पता है कि जब शमूएल आते हैं तो कोई राजा गिरता है या उठता है।

परमेश्वर शमूएल से कहते हैं कि शाऊल के लिये विलाप बहुत हुआ, अब यिशै के घर चलो। सात बेटे सामने से गुज़रते हैं और हर बार वही उत्तर: नहीं। आख़िर में भेड़ें चराता सबसे छोटा बुलाया जाता है, और उसी का अभिषेक होता है। दूसरे भाग में शाऊल बेचैन है, और वही चरवाहा लड़का वीणा लेकर उसके दरबार में आ जाता है, उसका हथियार ढोनेवाला बनकर।

मर्म

आयत 7 इस अध्याय की धुरी है: "मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।" यह वाक्य कोई कोमल उपदेश नहीं, यह एक न्यायिक घोषणा है। शाऊल को इस्राएल ने उसकी ऊँचाई और रूप के कारण चुना था; परमेश्वर वही मापदंड तोड़ रहे हैं। ध्यान दें, विडंबना यह है कि दाऊद भी सुन्दर था, उसकी "लाली झलकती थी"। पाठ यह नहीं कहता कि परमेश्वर कुरूप को चुनते हैं। पाठ कहता है कि परमेश्वर के चुनाव का आधार वह है जो हमारी आँखों से छिपा है। चुनाव पूरी तरह उनका है, हमारे अनुमान से बाहर, और इसलिए हमारी योग्यता की सूची से भी बाहर। यही अनुग्रह की जड़ है।

सूत्र

बैतलहम का नाम यहाँ पहली बार राजसी अर्थ पाता है। एक छोटा गाँव, एक भेड़ चराता लड़का, एक गुप्त अभिषेक जिसे कोई राजदरबार मान्यता नहीं देता। सदियों बाद उसी गाँव में एक और अभिषिक्त जन्म लेगा, जिसे उसके अपने भी न पहचानेंगे, जिसका राज्य आँखों को दिखाई न देगा। "मसीह" शब्द का अर्थ ही है अभिषिक्त, और यह अध्याय हमें दिखाता है कि परमेश्वर का अभिषिक्त कैसा दिखता है: सत्ता के केंद्र से दूर, भेड़ों के बीच से बुलाया गया, आत्मा से भरा हुआ लेकिन तुरंत सिंहासन पर नहीं बैठाया गया। अभिषेक और राजगद्दी के बीच दाऊद के लिये वर्षों का जंगल है। मसीह के लिये क्रूस।

आईना

हम सब पुरनियों की तरह जीते हैं, हर आगमन को शक से देखते हुए: क्या यह मेरे भले के लिये है या नहीं? और हम यिशै की तरह जीते हैं, अपने आठवें बेटे को गिनना भूल जाते हैं क्योंकि वह घर के महत्वपूर्ण कामों में नहीं आता। सोचिए कि आपके दफ़्तर में, आपकी कलीसिया में, आपके परिवार में कौन "भेड़ चराने" गया हुआ है, जिसका नाम सूची बनाते समय आपके दिमाग़ में आता ही नहीं। और साथ ही यह भी सोचिए: आप ख़ुद कितनी बार अपनी क़ीमत अपने कद, अपनी उपलब्धियों, अपने वेतन, अपनी तस्वीर से नापते हैं। परमेश्वर की दृष्टि मन पर है, और यह डरावना भी है और मुक्त करने वाला भी।

आज ही उस एक व्यक्ति का नाम काग़ज़ पर लिखिए जिसे आप अपने समूह में सबसे कम गिनते हैं, और उसे एक छोटा संदेश भेजकर पूछिए कि वह कैसा है।

प्रसंग

यह इस्राएल के राजतंत्र का पहला, कच्चा दशक है। शाऊल का राज्य किसी महल से नहीं, गिबा के एक गढ़ से चलता है; उसके पास सेना है, जासूस हैं, और गहरी असुरक्षा है। शमूएल न्यायी हैं, भविष्यद्वक्ता हैं, और वही व्यक्ति जिसने शाऊल का अभिषेक किया था और फिर उसे ठुकराया। ऐसे आदमी का बैतलहम पहुँचना राजनीतिक विस्फोट है, इसलिए शमूएल का डर वास्तविक है: "यदि शाऊल सुन लेगा, तो मुझे घात करेगा।" बलिदान का भोज एक असली धार्मिक अवसर है, पर वह आवरण भी है। यिशै का परिवार गाँव का सम्मानित पर साधारण घर है, जहाँ सबसे छोटा बेटा भेड़ों के साथ रहता है, यानी वह जो घर के फ़ैसलों में शामिल नहीं होता।

प्रश्न

आयत 14 काँटे की तरह चुभती है: "यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा।" हम इसे मीठा नहीं कर सकते। इस्राएल की सोच में कोई भी शक्ति परमेश्वर के प्रभुत्व से बाहर नहीं है, इसलिए वे बुराई को भी उनकी अनुमति के दायरे में रखकर कहते हैं। यह पाठ यह नहीं कहता कि परमेश्वर बुरे हैं; यह कहता है कि जब आत्मा हट जाता है तो जो खालीपन बचता है वह तटस्थ नहीं रहता। शाऊल ने बार-बार परमेश्वर के वचन को अपनी सुविधा से बदला था, और अब उसे अपने ही भीतर का अंधेरा भोगना है। यह न्याय है, पर हमें यह समझाने के लिये कोई साफ़-सुथरा सिद्धांत नहीं मिलता। यहाँ रहस्य को स्वीकारना ही ईमानदारी है।

पाठक

पहले सुननेवाले वे इस्राएली थे जो दाऊद के घराने को जानते थे, और जिनके सामने यह सवाल खड़ा था: क्या यह वंश सचमुच परमेश्वर का चुना हुआ है, या यह एक सफल तख़्तापलट की कहानी है? उनके लिये यह अध्याय गवाही था कि दाऊद ने राज्य छीना नहीं, उसे बुलाया गया, तब भी जब वह भेड़ों के पीछे था। और निर्वासन में बैठे बाद के पाठकों के लिये इसमें एक और आवाज़ थी: जो परमेश्वर सात बड़े बेटों को छोड़कर आठवें को चुनते हैं, वे एक टूटी, छोटी, भुला दी गई जाति को भी छोड़ नहीं देते। यही उनकी उम्मीद थी, और यह हमारी भी होनी चाहिए।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन सा हिस्सा है जिसे आप छिपाते हैं क्योंकि "बाहर का रूप" ही आपकी पहचान बन गया है, और यह जानना कि परमेश्वर की दृष्टि मन पर है, आपको डराता है या राहत देता है?

अभिषेक और सिंहासन के बीच दाऊद को वर्षों इंतज़ार करना पड़ा; परमेश्वर के बुलावे और उसके पूरा होने के बीच आप किस अधूरे समय में जी रहे हैं, और उस समय में वफ़ादारी कैसी दिखती है?

1 Samuel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Samuel: Looking on the Heart

Dale Ralph Davis

Storytelling commentary at its best, from Hannah's prayer to David's rise.

The Message of Samuel

Mary Evans

One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

1 Samuel For You

Tim Chester

Accessible walk through Samuel, Saul and David with constant application.

1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

Joyce Baldwin

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Samuel

Bill Arnold

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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1 Samuel 16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 शमूएल 16 का क्या अर्थ है?
बैतलहम के पुरनिये थरथरा रहे हैं। "क्या तू मित्रभाव से आया है कि नहीं?" यह सवाल किसी श्रद्धालु गाँव का स्वागत नहीं, बल्कि डरे हुए लोगों की सावधानी है। एक बूढ़ा भविष्यद्वक्ता बिना बुलाए, बछिया लेकर, तेल का सींग लिए आ गया है, और सबको पता है कि जब शमूएल आते हैं तो कोई राजा गिरता है या उठता है।
1 शमूएल 16 किस विषय में है?
आयत 7 इस अध्याय की धुरी है: "मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।" यह वाक्य कोई कोमल उपदेश नहीं, यह एक न्यायिक घोषणा है। शाऊल को इस्राएल ने उसकी ऊँचाई और रूप के कारण चुना था; परमेश्वर वही मापदंड तोड़ रहे हैं। ध्यान दें, विडंबना यह है कि दाऊद भी सुन्दर था, उसकी "लाली झलकती थी"। पाठ यह नहीं कहता कि परमेश्वर कुरूप को चुनते हैं। पाठ कहता है कि परमेश्वर के चुनाव का आधार वह है जो हमारी आँखों से छिपा है। चुनाव पूरी तरह उनका है, हमारे अनुमान से बाहर, और इसलिए हमारी योग्यता की सूची से भी बाहर। यही अनुग्रह की जड़ है।
1 शमूएल 16 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
हम सब पुरनियों की तरह जीते हैं, हर आगमन को शक से देखते हुए: क्या यह मेरे भले के लिये है या नहीं? और हम यिशै की तरह जीते हैं, अपने आठवें बेटे को गिनना भूल जाते हैं क्योंकि वह घर के महत्वपूर्ण कामों में नहीं आता। सोचिए कि आपके दफ़्तर में, आपकी कलीसिया में, आपके परिवार में कौन "भेड़ चराने" गया हुआ है, जिसका नाम सूची बनाते समय आपके दिमाग़ में आता ही नहीं। और साथ ही यह भी सोचिए: आप ख़ुद कितनी बार अपनी क़ीमत अपने कद, अपनी उपलब्धियों, अपने वेतन, अपनी तस्वीर से नापते हैं। परमेश्वर की दृष्टि मन पर है, और यह डरावना भी है और मुक्त करने वाला भी।
1 शमूएल 16 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह इस्राएल के राजतंत्र का पहला, कच्चा दशक है। शाऊल का राज्य किसी महल से नहीं, गिबा के एक गढ़ से चलता है; उसके पास सेना है, जासूस हैं, और गहरी असुरक्षा है। शमूएल न्यायी हैं, भविष्यद्वक्ता हैं, और वही व्यक्ति जिसने शाऊल का अभिषेक किया था और फिर उसे ठुकराया। ऐसे आदमी का बैतलहम पहुँचना राजनीतिक विस्फोट है, इसलिए शमूएल का डर वास्तविक है: "यदि शाऊल सुन लेगा, तो मुझे घात करेगा।" बलिदान का भोज एक असली धार्मिक अवसर है, पर वह आवरण भी है। यिशै का परिवार गाँव का सम्मानित पर साधारण घर है, जहाँ सबसे छोटा बेटा भेड़ों के साथ रहता है, यानी वह जो घर के फ़ैसलों में शामिल नहीं होता।
1 शमूएल 16 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पहले सुननेवाले वे इस्राएली थे जो दाऊद के घराने को जानते थे, और जिनके सामने यह सवाल खड़ा था: क्या यह वंश सचमुच परमेश्वर का चुना हुआ है, या यह एक सफल तख़्तापलट की कहानी है? उनके लिये यह अध्याय गवाही था कि दाऊद ने राज्य छीना नहीं, उसे बुलाया गया, तब भी जब वह भेड़ों के पीछे था। और निर्वासन में बैठे बाद के पाठकों के लिये इसमें एक और आवाज़ थी: जो परमेश्वर सात बड़े बेटों को छोड़कर आठवें को चुनते हैं, वे एक टूटी, छोटी, भुला दी गई जाति को भी छोड़ नहीं देते। यही उनकी उम्मीद थी, और यह हमारी भी होनी चाहिए।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Samuel 16 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

दाऊद को भोज में बुलाया तक नहीं गया था। सात भाई पंक्ति में खड़े थे, और सबसे छोटा भेड़ों के पीछे खेत में था। पर परमेश्वर की नज़र वहीं टिकी थी। "उठकर इसका अभिषेक कर, क्योंकि यही है।" जहाँ तुझे कोई गिनती में नहीं लेता, वहाँ भी परमेश्वर तुझे जानता है। क्या तू उसकी बुलाहट सुनने को तैयार है?

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