बाइबल व्याख्या

2 शमूएल 1

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

सिकलग में लौटे दाऊद के पास तीसरे दिन एक आदमी आता है, कपड़े फाड़े, सिर पर धूल डाले, गिलबो के युद्धक्षेत्र से। वह खबर लाता है कि इस्राएल हार गया, शाऊल और योनातान मारे गए, और दावा करता है कि मरते हुए राजा को उसी ने अंतिम प्रहार से मारा, प्रमाण में मुकुट और कंगन। दाऊद उसे सम्मानित नहीं करता, मरवा देता है, और फिर शाऊल और योनातान के लिए वह विलापगीत रचता है जिसमें एक भी शब्द विजय का नहीं है।

मर्म

इस अध्याय की धड़कन एक ही वाक्य में है: "तू यहोवा के अभिषिक्त को नष्ट करने के लिये हाथ बढ़ाने से क्यों नहीं डरा?" यह वही दाऊद है जो गुफा में शाऊल के वस्त्र का कोना काटकर काँप उठा था (1 शमूएल 24), और जिसने सोते हुए शाऊल के सिरहाने खड़े होकर भी भाला नहीं चलाया (1 शमूएल 26)। दाऊद का धर्मशास्त्र सरल और कठोर है: अभिषेक परमेश्वर का काम है, और अभिषिक्त को हटाना भी परमेश्वर का ही काम है। सिंहासन जिसे परमेश्वर देते हैं, उसे मनुष्य के खून से छीना नहीं जाता। यहाँ सत्ता का एक पूरा सिद्धांत खड़ा है, और आज भी हर उस महत्वाकांक्षा के आर-पार जाता है जो अपने हक को खुद छीनना चाहती है।

मुख्य सूत्र

ध्यान दीजिए कि हत्यारा होने का दावा करनेवाला कौन है: "मैं तो परदेशी का बेटा अर्थात् अमालेकी हूँ।" शाऊल का पतन ठीक वहीं से शुरू हुआ था जब उसने अमालेकियों पर परमेश्वर की आज्ञा को अधूरा माना (1 शमूएल 15), और दाऊद इसी अध्याय के पहले वाक्य में अमालेकियों को मारकर लौटा है। जिस शत्रु को शाऊल ने बख्शा, उसी जाति का एक आदमी उसके मुकुट का सौदागर बनकर आता है। बीज और फसल का यह नियम पूरे पवित्रशास्त्र में चलता है। और आगे की दिशा भी यहीं तय होती है: अभिषिक्त राजा, जिसके लिए दाऊद रोता है, उस "अभिषिक्त" की छाया है जिसे मसीह कहते हैं, जिसका राज्य भी तलवार से नहीं, बल्कि उसकी अपनी मृत्यु और परमेश्वर की प्रतिज्ञा से आया।

दर्पण

हम अपने प्रतिद्वंद्वी की गिरावट पर चुपचाप खुश होना जानते हैं। जिस सहकर्मी ने आपका रास्ता रोका, जिस रिश्तेदार ने आपकी बदनामी की, जिस अगुवे ने आपको दरकिनार किया, उसकी बुरी खबर आने पर मन में जो हल्की-सी गरमाहट उठती है, वह असली है और हम उसे धार्मिक शब्दों से ढक लेते हैं। दाऊद के पास शाऊल की मौत पर खुश होने के सौ जायज कारण थे। उसने उपवास किया, छाती पीटी, और मरे हुए शत्रु के भले को गिनवाया: "वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहनाकर सुख देता।" यह अभिनय नहीं, अनुशासित प्रेम है। आज ही उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसकी असफलता आपको भीतर से अच्छी लगी थी, और उस नाम के साथ जोड़कर एक वाक्य लिखिए जो उसमें सचमुच भला है।

पृष्ठभूमि

गिलबो की हार इस्राएल के लिए राष्ट्रीय आपदा थी। पलिश्ती उत्तर के मैदानों तक घुस आए थे, राजा और उसका उत्तराधिकारी दोनों मारे गए, सेना बिखर गई। दाऊद उस समय सिकलग में था, पलिश्ती राजा का आश्रित, अपने ही देश से निर्वासित, और दो दिन पहले ही उसने अमालेकी लुटेरों से अपना लूटा हुआ नगर और परिवार छुड़ाया था। यानी वह ठीक उसी क्षण में खबर पाता है जब वह सबसे कमजोर और सबसे संदिग्ध है। पूर्वी दरबारों में खबर लानेवाला इनाम पाता था, खासकर अगर खबर नए दावेदार के पक्ष में हो। वह अमालेकी मुकुट और कंगन लेकर आया, राजचिह्न, यानी सत्ता-हस्तांतरण का प्रस्ताव। दाऊद ने उसे राजनीतिक अवसर नहीं, परीक्षा समझा।

श्रोताओं का चेहरा

यह अध्याय उन पाठकों के लिए लिखा गया जो दाऊद के वंश के राज्य में जी रहे थे और जिनके कानों में यह आरोप गूँजता रहा होगा कि दाऊद ने सिंहासन खून से हथियाया। शमूएल की पुस्तक इस आरोप का जवाब बार-बार देती है: दाऊद ने शाऊल को नहीं मारा, दाऊद ने अबनेर की हत्या पर विलाप किया, दाऊद ने ईशबोशेत के हत्यारों को मरवा दिया (2 शमूएल 4)। पहले श्रोता यहाँ सिर्फ शोकगीत नहीं, बल्कि वैधता की गवाही सुनते थे। और यह भी सुनते थे कि उनका राष्ट्रीय गीत, "धनुष", पराजय का गीत है, विजय का नहीं। एक ऐसा राष्ट्र जो अपनी हार को गाकर याद रखता है, वह अपने बारे में झूठ बोलना कठिन बना देता है।

एक बारीकी

"गत में यह न बताओ, और न अश्कलोन की सड़कों में प्रचार करना।" यह पंक्ति इतनी गहरी बैठी कि सदियों बाद मीका भविष्यद्वक्ता ने यरूशलेम पर आनेवाले न्याय की घोषणा में इसी को दोहराया। दाऊद की चिंता यह नहीं कि पलिश्ती सच जान जाएँगे, वे तो जानते ही हैं; चिंता यह है कि परमेश्वर की प्रजा की लज्जा शत्रु के उत्सव का ईंधन बने। यह वही भावना है जो हर उस विश्वासी को परखती है जो कलीसिया की कमजोरी को मंच से चटखारे लेकर बाँटता है। सच छिपाना और सच को हथियार बनाना, दोनों अलग बातें हैं। दाऊद का गीत शाऊल के पापों को झुठलाता नहीं, बस उन्हें शत्रु के हाथ में नहीं देता।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन है जिसके पतन से आपको लाभ होगा, और क्या आप उसके लिए सचमुच शोक कर पाएँगे?

परमेश्वर के लोगों की कमजोरी की जो बात आप जानते हैं, उसे आप किसके सामने और किस मन से कहते हैं?

2 Samuel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

2 Samuel: Out of Every Adversity

Dale Ralph Davis

Follows David's reign with honesty about sin and wonder at grace.

The Message of Samuel

Mary Evans

One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

2 Samuel For You

Tim Chester

David's kingdom, David's failures and God's unshakable promise.

1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

Joyce Baldwin

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Samuel

Bill Arnold

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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2 Samuel 1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

2 शमूएल 1 का क्या अर्थ है?
सिकलग में लौटे दाऊद के पास तीसरे दिन एक आदमी आता है, कपड़े फाड़े, सिर पर धूल डाले, गिलबो के युद्धक्षेत्र से। वह खबर लाता है कि इस्राएल हार गया, शाऊल और योनातान मारे गए, और दावा करता है कि मरते हुए राजा को उसी ने अंतिम प्रहार से मारा, प्रमाण में मुकुट और कंगन। दाऊद उसे सम्मानित नहीं करता, मरवा देता है, और फिर शाऊल और योनातान के लिए वह विलापगीत रचता है जिसमें एक भी शब्द विजय का नहीं है।
2 शमूएल 1 किस विषय में है?
ध्यान दीजिए कि हत्यारा होने का दावा करनेवाला कौन है: "मैं तो परदेशी का बेटा अर्थात् अमालेकी हूँ।" शाऊल का पतन ठीक वहीं से शुरू हुआ था जब उसने अमालेकियों पर परमेश्वर की आज्ञा को अधूरा माना (1 शमूएल 15), और दाऊद इसी अध्याय के पहले वाक्य में अमालेकियों को मारकर लौटा है। जिस शत्रु को शाऊल ने बख्शा, उसी जाति का एक आदमी उसके मुकुट का सौदागर बनकर आता है। बीज और फसल का यह नियम पूरे पवित्रशास्त्र में चलता है। और आगे की दिशा भी यहीं तय होती है: अभिषिक्त राजा, जिसके लिए दाऊद रोता है, उस "अभिषिक्त" की छाया है जिसे मसीह कहते हैं, जिसका राज्य भी तलवार से नहीं, बल्कि उसकी अपनी मृत्यु और परमेश्वर की प्रतिज्ञा से आया।
2 शमूएल 1 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
गिलबो की हार इस्राएल के लिए राष्ट्रीय आपदा थी। पलिश्ती उत्तर के मैदानों तक घुस आए थे, राजा और उसका उत्तराधिकारी दोनों मारे गए, सेना बिखर गई। दाऊद उस समय सिकलग में था, पलिश्ती राजा का आश्रित, अपने ही देश से निर्वासित, और दो दिन पहले ही उसने अमालेकी लुटेरों से अपना लूटा हुआ नगर और परिवार छुड़ाया था। यानी वह ठीक उसी क्षण में खबर पाता है जब वह सबसे कमजोर और सबसे संदिग्ध है। पूर्वी दरबारों में खबर लानेवाला इनाम पाता था, खासकर अगर खबर नए दावेदार के पक्ष में हो। वह अमालेकी मुकुट और कंगन लेकर आया, राजचिह्न, यानी सत्ता-हस्तांतरण का प्रस्ताव। दाऊद ने उसे राजनीतिक अवसर नहीं, परीक्षा समझा।
2 शमूएल 1 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"गत में यह न बताओ, और न अश्कलोन की सड़कों में प्रचार करना।" यह पंक्ति इतनी गहरी बैठी कि सदियों बाद मीका भविष्यद्वक्ता ने यरूशलेम पर आनेवाले न्याय की घोषणा में इसी को दोहराया। दाऊद की चिंता यह नहीं कि पलिश्ती सच जान जाएँगे, वे तो जानते ही हैं; चिंता यह है कि परमेश्वर की प्रजा की लज्जा शत्रु के उत्सव का ईंधन बने। यह वही भावना है जो हर उस विश्वासी को परखती है जो कलीसिया की कमजोरी को मंच से चटखारे लेकर बाँटता है। सच छिपाना और सच को हथियार बनाना, दोनों अलग बातें हैं। दाऊद का गीत शाऊल के पापों को झुठलाता नहीं, बस उन्हें शत्रु के हाथ में नहीं देता।
2 शमूएल 1 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
परमेश्वर के लोगों की कमजोरी की जो बात आप जानते हैं, उसे आप किसके सामने और किस मन से कहते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

2 Samuel 1 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

शाऊल ने दाऊद का बरसों पीछा किया, उसे मारना चाहा। और जब वह मर गया, दाऊद ने जश्न नहीं मनाया। "वे शाऊल, और उसके पुत्र योनातान, और यहोवा की प्रजा, और इस्राएल के घराने के लिये छाती पीटने और रोने लगे, और सांझ तक उपवास किया।" जिसने तुझे दुख दिया, उसके गिरने पर तेरे मन में क्या उठता है? दाऊद का शोक बताता है कि उसका दिल कड़वाहट से नहीं, परमेश्वर की करुणा से भरा था।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 4

पिता, जब कोई ख़बर दिल को चीर देती है और सुनते ही सब कुछ थम जाता है, तब तू हमारे साथ बैठ जा। जो हार गए, जो चले गए, उनका शोक हम छिपाना नहीं चाहते। हमें रोने की जगह दे, और उस रोने में अपनी शांति भी।

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