2 तीमुथियुस 1:7
पाठ
पौलुस अपने युवा साथी तीमुथियुस को याद दिलाता है कि उसमें जो वरदान परमेश्वर ने रखा है, उसे वह फिर से धधका दे, और इसका कारण वह इस एक वाक्य में रखता है: "क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ्य, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।" यह वाक्य किसी सामान्य प्रोत्साहन की तरह नहीं, बल्कि एक तर्क की तरह आता है, "क्योंकि" शब्द के साथ। तीमुथियुस के भीतर कुछ सिकुड़ रहा था, कुछ पीछे हट रहा था, और पौलुस उसे यह नहीं कहता कि "हिम्मत रख", बल्कि यह कहता है कि जो आत्मा तुझे मिली है, उसका स्वभाव ही डरपोक नहीं है।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि पौलुस यहाँ तीमुथियुस के स्वभाव की बात नहीं कर रहा, बल्कि परमेश्वर के दान की बात कर रहा है। वाक्य का कर्ता तीमुथियुस नहीं, परमेश्वर हैं: उन्होंने दी है। यह मसीही जीवन की पूरी संरचना है। हम अपने भीतर साहस खोजकर उसे बढ़ाते नहीं; हमें एक आत्मा दी गई है, और उस आत्मा का चरित्र हमारे भीतर आकार लेता है। और यह चरित्र तीन शब्दों में खुलता है जो एक साथ शायद ही कभी मिलते हैं: सामर्थ्य, जो कुचलती नहीं क्योंकि उसके साथ प्रेम है; प्रेम, जो कमज़ोर नहीं पड़ता क्योंकि उसके साथ सामर्थ्य है; और संयम, यानी वह स्वस्थ, ठहरा हुआ मन जो न घबराहट में बहता है न उत्तेजना में। यही यीशु मसीह का अपना स्वभाव है, और आत्मा उसी को हममें बोती है।
सूत्र
यह वचन हवा में नहीं लटका है; पौलुस अगले ही वाक्यों में बताता है कि यह आत्मा कहाँ से आती है। वह लिखता है कि परमेश्वर ने "हमारा उद्धार किया, और पवित्र बुलाहट से बुलाया, और यह हमारे कामों के अनुसार नहीं", और फिर कहता है कि यह अनुग्रह "अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रगट होने के द्वारा प्रकाशित हुआ, जिसने मृत्यु का नाश किया"। यही पूरी कड़ी है। भय का सबसे गहरा स्रोत मृत्यु है, और हर छोटा डर उसी बड़े डर की परछाईं है: खो देने का डर, मिट जाने का डर। मसीह ने मृत्यु को तोड़ा, इसलिए भय की आत्मा का शासन-पत्र रद्द हो चुका है। तीमुथियुस को जो आत्मा मिली है, वह उस खाली कब्र से बहकर आती है। सामर्थ्य, प्रेम और संयम केवल गुण नहीं, वे पुनरुत्थान के फल हैं।
दर्पण
हम अपने डर को शायद ही कभी डर कहते हैं। हम उसे समझदारी कहते हैं, व्यावहारिकता कहते हैं, "सही समय की प्रतीक्षा" कहते हैं। दफ़्तर में वह बातचीत जहाँ आप चुप रह गए क्योंकि मसीही होने का ठप्पा भारी पड़ता; वह रिश्तेदार जिससे आप वर्षों से बचते हैं क्योंकि उसका सवाल आपके विश्वास को हिला देता है; वह सेवा जो आपने छोड़ दी क्योंकि आलोचना सहना कठिन था। पौलुस इसे नरम नाम नहीं देता। वह तीमुथियुस से यह भी कहता है, "हमारे प्रभु की गवाही से, और मुझसे जो उसका कैदी हूँ, लज्जित न हो"। लज्जा और भय एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। और उत्तर आत्म-प्रेरणा नहीं है, बल्कि यह याद करना है कि आपके भीतर कौन बसा है। आज उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसके सामने आप मसीह का नाम लेने से कतराते हैं, और उस नाम पर उँगली रखकर ऊँची आवाज़ में कहिए: परमेश्वर ने मुझे भय की आत्मा नहीं दी।
एक बारीकी
"भय" के लिए पौलुस जो यूनानी शब्द चुनता है, वह देइलिया है, और यह वह शब्द नहीं जो परमेश्वर के भय के लिए इस्तेमाल होता है। यह कायरता है, वह सिकुड़न जो सैनिक को युद्ध के मैदान से पीछे खींचती है। बाइबल परमेश्वर के भय की भरपूर प्रशंसा करती है; वह भय आदमी को सीधा खड़ा करता है। देइलिया उल्टा करती है: वह आदमी को छोटा कर देती है, आवाज़ दबा देती है, हाथ रोक देती है। पौलुस का तर्क इसलिए तीखा है। वह नहीं कहता कि तेरा डर स्वाभाविक है, थोड़ा संभल जा। वह कहता है कि यह सिकुड़न उस आत्मा से आ ही नहीं सकती जो तुझे दी गई है। इसका मतलब यह भी है कि जब हम डर के आगे झुकते हैं, हम किसी और आवाज़ की मानते हैं, अपनी नहीं।
मुख्य पात्र
इस वचन का असली पात्र परमेश्वर हैं, देनेवाले के रूप में। और उनके देने का ढंग ध्यान देने योग्य है: उन्होंने तीमुथियुस को नियम नहीं दिया, चेतावनी नहीं दी, बल्कि अपनी आत्मा दी। छठे पद में पौलुस उस वरदान को हाथ रखने से जोड़ता है, यानी एक ठोस, शारीरिक, याद रखने योग्य क्षण से। परमेश्वर हवा में आशीष नहीं उछालते; वे इतिहास में, समय में, दूसरे लोगों के हाथों से देते हैं। और जो वे देते हैं, वह उनका अपना स्वभाव है। सामर्थ्य उनकी है, प्रेम उनका है, ठहराव उनका है। इसीलिए पौलुस बारहवें पद में कह सकता है, "जिस पर मैंने विश्वास रखा है, जानता हूँ"। उसका भरोसा अपनी दृढ़ता पर नहीं, उस व्यक्ति पर है जिसने दिया।
अन्तर्पाठ
यशायाह ने मसीह के विषय में कहा था कि यिशै के ठूँठ से निकली उस डाली पर प्रभु की आत्मा ठहरेगी, बुद्धि और सामर्थ्य और परमेश्वर के भय की आत्मा। जो आत्मा यीशु पर उतरी, वही अब उनके लोगों में बाँटी जाती है; तीमुथियुस को कोई दूसरी, छोटी आत्मा नहीं मिली। और रोमियों में पौलुस इसी बात को दूसरे कोण से कहता है: हमें दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भय करें, बल्कि लेपालकपन की आत्मा, जिससे हम परमेश्वर को पिता पुकारते हैं। दोनों जगह तर्क एक है। भय गुलाम की भाषा है; बेटे-बेटियों की भाषा अलग है। तीमुथियुस के आँसुओं का उत्तर इसलिए यह नहीं कि वह मज़बूत बने, बल्कि यह कि वह याद करे कि वह किसका है।
मनन
आप अपने किस डर को अब तक "समझदारी" कहकर उचित ठहराते आए हैं, और यदि आप उसे उसका असली नाम दें तो क्या बदलेगा?
सामर्थ्य, प्रेम और संयम में से कौन-सा इस समय आपके जीवन में सबसे कमज़ोर है, और वह कमी आपके बारे में नहीं, बल्कि आपके परमेश्वर के बारे में आपकी किस धारणा को उजागर करती है?
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2 Timothy 1:7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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2 तीमुथियुस 1:7 का क्या अर्थ है?
2 तीमुथियुस 1:7 किस विषय में है?
2 तीमुथियुस 1:7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
2 तीमुथियुस 1:7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
2 तीमुथियुस 1:7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Timothy 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पौलुस जंजीरों में बैठा है, और फिर भी लिखता है, "मैं उसे जिस पर मैंने विश्वास किया है, जानता हूँ।" ध्यान दे, उसने यह नहीं कहा कि मुझे सब कुछ मालूम है। उसे अपने हालात की समझ नहीं थी, पर अपने प्रभु की पहचान थी। तेरे पास भी शायद जवाब न हों। पर क्या तू उसे जानता है, जिसके हाथ में तेरी धरोहर सुरक्षित है?
पौलुस जंजीरों में था, वह उनेसिफुरुस को कुछ भी लौटा नहीं सकता था। बस इतना ही कह सका, "प्रभु करे कि उस दिन उस पर प्रभु की दया हो।" सोचो, जिस इंसान ने तुम्हें थका हुआ पाकर ताज़गी दी थी, उसके लिए तुम्हारी प्रार्थना ही सबसे बड़ा धन्यवाद है। क्या आज किसी का नाम तुम्हारे होंठों पर है?
तू जानता है, कि आसिया के सब लोग मुझ से फिर गए हैं, जिनमें फूगिलुस और हिरमुगिनेस हैं।" पौलुस ने जिन्हें मसीह तक पहुँचाया था, वही जंजीरों के दिनों में दूर खड़े रहे। उसने नाम तक लिख दिए, क्योंकि दर्द असली था। क्या तुम किसी ऐसे को जानते हो जो अभी अकेला पड़ा है? आज उसके पास जाओ, नाम भूलने के लिए नहीं, साथ देने के लिए।
और मुझे तेरे उस निष्कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहले तेरी नानी लोइस, और तेरी माता यूनीके में थी।" पौलुस जेल से लिखते हुए दो स्त्रियों का नाम याद रखता है। कोई मंच नहीं, कोई उपाधि नहीं, बस एक घर जहाँ तीमुथियुस ने विश्वास करना सीखा। आज कोई तुम्हें देख रहा है। तुम्हारा शांत, सच्चा विश्वास ही उसकी विरासत बनेगा।
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