कुलुस्सियों 2:10
पाठ
"तुम मसीह में भरपूर हो गए हो" — यह वाक्य बीत चुके किसी काम की घोषणा है, कोई भविष्य का वादा नहीं। पौलुस अभी-अभी कह चुका है कि मसीह में "ईश्वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है" (पद 9), और अगली ही साँस में वह उस परिपूर्णता को कुलुस्से के विश्वासियों की झोली में डाल देता है: जो कुछ उसमें पूरा-पूरा है, उसमें जुड़े होने के कारण तुम्हारे पास भी कम नहीं है। और फिर वह इस मसीह का परिचय देता है, "जो सारी प्रधानता और अधिकार का शिरोमणि है" — यानी हर उस शक्ति के ऊपर, जिससे ये लोग डरकर स्वर्गदूतों की पूजा और खान-पान के नियमों की शरण ले रहे थे।
मूल बात
यहाँ मुद्दा यह नहीं कि विश्वासी के पास कुछ और भी होना चाहिए, बल्कि यह कि उसके पास पहले से सब कुछ है। कुलुस्से के झूठे शिक्षक लोगों को यह समझा रहे थे कि मसीह तो शुरुआत है, पूर्णता कहीं और, ऊँचे रहस्यों और कठोर तपस्या में मिलती है। पौलुस इस पूरी सीढ़ी को तोड़ देता है। यूहन्ना के सुसमाचार की भूमिका में वही बात दूसरे शब्दों में है: उसकी परिपूर्णता में से हम सबने अनुग्रह पर अनुग्रह पाया। यहाँ कोई आध्यात्मिक वर्गभेद नहीं, कोई ऊपरी श्रेणी के मसीही नहीं। और यह भरपूरी हमारी उपलब्धि नहीं, किसी और में होने का परिणाम है — "मसीह में", सदा उसी में। जो सिर है, वही देह को भरता है।
सूत्र
पुराने नियम में परमेश्वर की उपस्थिति किसी जगह को "भर" देती है: मिलापवाले तम्बू में महिमा उतरती है और मूसा भीतर नहीं जा पाता, और सुलैमान के मन्दिर में बादल भर जाने पर याजक सेवा रोक देते हैं। वह भरा जाना हमेशा एक इमारत में होता था, पत्थर और पर्दों के भीतर। पौलुस कहता है कि अब वह परिपूर्णता "सदेह" वास करती है, एक शरीर में, और उस शरीर से जुड़े लोगों में। मन्दिर की छाया हट गई, मूल वस्तु आ गई; पौलुस स्वयं कुछ पदों बाद यही तर्क करता है कि पर्व और सब्त आनेवाली बातों की छाया थे, मूल वस्तुएँ मसीह की हैं। छुटकारे की कहानी इसी दिशा में बहती है: परमेश्वर दूर से उतरकर पास आते हैं, और अन्त में हमारे भीतर बसते हैं।
आइना
यह पद उस बेचैनी पर उँगली रखता है जो हममें से बहुतों को चैन नहीं देती: यह अहसास कि मेरा मसीही जीवन अधूरा है, कि कोई और गहरा अनुभव, कोई और अनुशासन, कोई और सेमिनार बाकी है। कभी यह बेचैनी धार्मिक कपड़े पहन लेती है, कभी दफ्तर की पदोन्नति या बच्चों की उपलब्धियों की भाषा बोलती है, पर जड़ एक ही है: मैं जैसा हूँ, काफी नहीं हूँ। पौलुस इसका जवाब आपकी कोशिश बढ़ाकर नहीं, आपकी जगह बदलकर देता है। आप किसी में हैं। भरपूरी आपके प्रदर्शन का प्रमाणपत्र नहीं, आपके पते का नाम है। आज एक कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जिसके मिलने पर आपको लगता है कि तब आप आध्यात्मिक रूप से पूरे होंगे, और उसके नीचे यह वाक्य लिखकर ज़ोर से पढ़िए: "मैं मसीह में भरपूर हो गया हूँ।"
एक बारीकी
"शिरोमणि" शब्द पर रुकिए। यूनानी में यह केफाले, सिर है, और पौलुस इसे दो बार इस अध्याय में इस्तेमाल करता है: यहाँ मसीह प्रधानताओं और अधिकारों का सिर है, और पद 19 में वही सिर देह को जोड़ों और पट्ठों के द्वारा पालन-पोषण देता है। एक ही शब्द, दो रिश्ते। शक्तियों के ऊपर वह अधिकारी है, अपने लोगों के लिए वह जीवन-स्रोत है। इसका अर्थ यह है कि आपके ऊपर जो भी सत्ता खुद को अन्तिम बताती है, बाज़ार, बीमारी, परम्परा, डर, वह उसके अधीन है जो आपको पोषण देता है। ऊपर बैठा सिर पराया नहीं, वह आपकी ही देह का सिर है।
संदर्भ
कुलुस्से फ्रूगिया की एक ढलती हुई व्यापारिक नगरी थी, लौदीकिया के पड़ोस में, जहाँ यहूदी परम्परा, स्थानीय देवी-देवता और रहस्यमय धार्मिक धाराएँ आपस में घुली-मिली थीं। पौलुस ने यह कलीसिया न लगाई थी और उनका "शारीरिक मुँह" तक नहीं देखा था; वह बंदी अवस्था से लिख रहा है। ऐसे माहौल में कोई पढ़ा-लिखा शिक्षक आकर कहे कि मसीह पर विश्वास तो पहली सीढ़ी है, असली सुरक्षा के लिए स्वर्गदूतों को मनाना, विशेष दर्शन पाना और खान-पान के कड़े नियम निभाना ज़रूरी है, तो यह डरे हुए लोगों को तर्कसंगत लगता। अदृश्य शक्तियों से घिरी दुनिया में जीने वाले किसान और कारीगर के लिए यह ताबीज़ जैसा भरोसा था। पौलुस उस ताबीज़ को छीनकर उनके हाथ में मसीह का नाम रखता है।
मुख्य पात्र
इस पद का केन्द्र मसीह है, और जो चित्र उभरता है वह दोहरा है। एक ओर वह इतना ऊँचा है कि हर प्रधानता और अधिकार उसके नीचे है; भजन 110 की वह पंक्ति, जिसमें प्रभु अपने चुने हुए को अपने दाहिने बिठाकर शत्रुओं को उसके पाँवों तले करते हैं, नए नियम में बार-बार यीशु पर लागू होती है, और पौलुस उसी सिंहासन-दृश्य को यहाँ मान लेता है। दूसरी ओर यह राजा अपनी परिपूर्णता जमा नहीं रखता, वह बाँट देता है; और कुछ ही पदों बाद पता चलता है कि उसने यह विजय क्रूस पर पाई, हथियार से नहीं। जो सबसे ऊपर है, वह सबसे नीचे उतरा। इसीलिए उसकी भरपूरी हमें दबाती नहीं, भरती है।
चिंतन
मेरे जीवन में वह कौन-सी "जरूरी चीज़" है जिसे मैं चुपचाप मसीह के साथ जोड़कर अपनी पूर्णता का हिस्सा बना लेता हूँ?
अगर मसीह सचमुच हर अधिकार का सिर है, तो इस सप्ताह किस डर के सामने मुझे झुकना बंद करना चाहिए?
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Colossians 2:10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
कुलुस्सियों 2:10 का क्या अर्थ है?
कुलुस्सियों 2:10 किस विषय में है?
कुलुस्सियों 2:10 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
कुलुस्सियों 2:10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
कुलुस्सियों 2:10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Colossians 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
इसलिए भोजन या पेय, या पर्व, या नये चाँद, या सब्त के विषय में कोई तुम पर दोष न लगाए।" पौलुस जानता था कि लोग किस तरह नियमों से तौलते हैं। सोचो, कितनी बार तुमने किसी की नज़र में खरा उतरने के लिए कुछ किया? मसीह ने तुम्हें अपनाया है, यही तुम्हारी पहचान है। छाया को छोड़ो, शरीर को थामे रहो।
पिता, आप जानते हैं कि मेरे भीतर कितना कुछ है जिसे मैं खुद नहीं बदल सकता। बाहर से सब ठीक दिखाना आसान है, पर दिल की गहराई में काम आप ही करते हैं। मसीह में मेरा पुराना स्वभाव उतार दीजिए, और जो नया है उसे मुझमें बढ़ने दीजिए।
न छूना," "न चखना," "हाथ भी न लगाना।" कितने छोटे से वाक्य, पर इनका बोझ कितना भारी। पौलुस इन्हें दोहराता है ताकि तू सुन सके कि ये कितने खोखले हैं। मसीह ने तुझे क्रूस पर आज़ाद किया, और तू फिर से सूची बनाकर जीना चाहता है? नियमों से डर मिटता नहीं, बस छिप जाता है। जो हृदय मसीह से भरा है, उसे ताले की ज़रूरत नहीं।
मत छू," "मत चख," "हाथ मत लगा," ये नियम सुनने में पवित्र लगते हैं, पर पौलुस कहता है कि ये "काम में लाते-लाते नाश हो जाएँगी।" जो चीज़ें मिट जाने वाली हैं, उन पर तेरी पवित्रता कैसे टिकेगी? ज़रा सोच, तू मसीह से जुड़ा है या सिर्फ़ अपनी बनाई सूची से? जीवन नियमों से नहीं, जीवित मसीह से आता है।
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