बाइबल व्याख्या

कुलुस्सियों 3:15

बाइबल

पाठ

मसीह की जो शान्ति है, वही तुम्हारे भीतर फैसला करने वाली आवाज़ बने, वही तुम्हारे हृदय पर राज करे। यह कोई निजी मनोदशा नहीं, क्योंकि पौलुस तुरन्त जोड़ता है कि इसी शान्ति के लिये तुम "एक देह होकर बुलाए भी गए हो"। और इस राज्य का स्वाभाविक फल एक ही है: धन्यवाद। तीन बातें एक ही साँस में, एक शासन, एक शरीर, एक कृतज्ञ हृदय।

बाकी अध्याय की सूचियों के बीच यह वाक्य ठहराव जैसा लगता है, पर असल में यही उन सब आज्ञाओं का इंजन है। करुणा, दीनता, क्षमा, प्रेम, ये सब तभी संभव हैं जब भीतर कोई और बैठा हो जो निर्णय ले रहा हो।

मूल बात

"राज्य करे" के पीछे जो यूनानी शब्द है, ब्राब्यूओ, वह खेल के मैदान से आता है: निर्णायक जो विवाद सुलझाता है और फैसला सुनाता है। यानी मसीह की शान्ति आपके भीतर सजावट नहीं, अधिकार है। जब आपके भीतर दो आवाज़ें लड़ रही हों, बदला लूँ या सह लूँ, बोलूँ या चुप रहूँ, तब फैसला वही शान्ति करेगी।

पर ध्यान दीजिए, यह "मसीह की शान्ति" है, आपकी नहीं। यह वही शान्ति है जो क्रूस के लहू से बनी, जब परमेश्वर ने बैर को मिटाकर शत्रुओं को अपने साथ मिलाया। इसलिए यह भावना नहीं, संधि है; युद्धविराम नहीं, नया राज्य है। और जहाँ यह राज्य चलता है, वहाँ मनुष्य अकेला नहीं रहता, क्योंकि बुलावा ही "एक देह" में मिला था। शान्ति का शासन और शरीर की एकता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसीलिए अन्त में धन्यवाद आता है: जो व्यक्ति अपनी शान्ति खुद गढ़ता है वह थकता है, जो उसे उपहार में पाता है वह गाता है।

सूत्र

शान्ति इस्राएल की सबसे पुरानी लालसा है। शालोम केवल लड़ाई का रुक जाना नहीं था, बल्कि वह पूर्णता जिसमें मनुष्य परमेश्वर के साथ, पड़ोसी के साथ और धरती के साथ ठीक बैठ जाता है। याजक हाथ उठाकर लोगों पर यही शान्ति उतारते थे, भविष्यद्वक्ता उसी की प्रतीक्षा करते थे, और वाचा का सारा उद्देश्य यही था कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच बसें और वहाँ बैर न रहे। पर वाचा टूटती रही, और शान्ति वादा बनी रही।

पौलुस कहता है कि वह वादा अब एक व्यक्ति का नाम पा चुका है। मसीह ने क्रूस पर वह बैर अपने शरीर में उठाया जो परमेश्वर और मनुष्य के बीच, और मनुष्य और मनुष्य के बीच खड़ा था। इसलिए यह शान्ति कोई नई नैतिक कोशिश नहीं, बल्कि पूरी हुई वाचा का फल है, जो अब एक नए समाज में, "एक देह" में, दिखाई देती है।

दर्पण

यह आयत वहीं चुभती है जहाँ हम सबसे अधिक सही होते हैं। कलीसिया की बैठक में जब कोई आपकी बात काट देता है, दफ़्तर में जब आपके काम का श्रेय दूसरा ले जाता है, घर में जब वही पुराना झगड़ा चौथी बार लौट आता है, तब भीतर एक अदालत लगती है और हम स्वयं ही न्यायाधीश बन बैठते हैं। पौलुस कहता है: वह कुर्सी आपकी नहीं है। निर्णायक मसीह की शान्ति है, और उसका पैमाना यह नहीं कि मैं जीतूँ, बल्कि यह कि देह जुड़ी रहे।

और धन्यवाद? वह जाँच है। जो हृदय शिकायत से भरा है, वह अभी भी अपनी शान्ति खुद गढ़ रहा है।

आज एक काम कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसके साथ आपके भीतर तनाव बना हुआ है, और तीन मिनट सिर्फ़ उसके लिये परमेश्वर को धन्यवाद दीजिए, कुछ माँगे बिना।

अन्तर्पाठ

यीशु ने विदाई की रात कहा था कि वे अपनी शान्ति शिष्यों को देकर जा रहे हैं, और वह संसार की देन जैसी नहीं है (यूहन्ना 14:27)। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह शान्ति उन्हें तब दी गई जब गिरफ़्तारी, बिखराव और इनकार सामने खड़े थे। यानी यह शान्ति हालात से नहीं, देने वाले से आती है।

दूसरा प्रतिध्वनि इफिसियों 2 में है, जहाँ पौलुस लिखता है कि मसीह स्वयं हमारी शान्ति हैं, जिन्होंने यहूदी और अन्यजाति के बीच की दीवार गिराकर दोनों को एक नया मनुष्य बना दिया। कुलुस्सियों 3:11 वही सूची दोहराता है: "न तो यूनानी रहा, न यहूदी… न दास और न स्वतंत्र।" शान्ति का शासन और दीवारों का गिरना एक ही घटना है, दो नहीं।

कठिन प्रश्न

पर क्या शान्ति को निर्णायक बनाना हर विवाद को दबा देना नहीं है? यदि मेरे भीतर बेचैनी है क्योंकि किसी के साथ अन्याय हुआ, तो क्या मैं "शान्ति बनी रहे" कहकर चुप हो जाऊँ?

पाठ यह सुविधा नहीं देता। जिस अध्याय में यह आयत खड़ी है, उसी में पौलुस झूठ, गाली और क्रोध को उतार फेंकने को कहता है, और यह भी कि "वहाँ किसी का पक्षपात नहीं।" जो शान्ति अन्याय पर पर्दा डाले, वह मसीह की नहीं, हमारी सुविधा की शान्ति है। सच्चा फ़ैसला कभी-कभी टकराव की ओर ले जाएगा, पर उस टकराव का लक्ष्य जीत नहीं, देह का जुड़ा रहना होगा। यह अन्तर पहचानना आसान नहीं, और पौलुस हमें कोई फ़ॉर्मूला नहीं देता; वह हमें एक शासक देता है जिससे रोज़ पूछना पड़ता है।

सन्दर्भ

कुलुस्से लुकुस घाटी का एक छोटा, ढलान पर उतरता हुआ नगर था, कभी ऊन के व्यापार से समृद्ध, अब पड़ोसी लौदीकिया की छाया में। वहाँ की कलीसिया पौलुस ने स्थापित नहीं की थी; वह किसी के घर के आँगन में जुटती थी, बीस-तीस लोग, जिनमें यहूदी और अन्यजाति, स्वतंत्र नागरिक और दास एक साथ बैठते थे। उसी कमरे में मालिक और उसका ग़ुलाम एक ही रोटी बाँटते थे, और यह रोमी समाज की सारी सीढ़ी को उलट देता था।

रोमी साम्राज्य अपनी "पैक्स रोमाना" पर गर्व करता था, वह शान्ति जो तलवार से थोपी जाती थी। पौलुस उन्हीं शब्दों के सामने दूसरी शान्ति रखता है, जो क्रूस से आती है और जिसका राजसिंहासन सम्राट का दरबार नहीं, बल्कि एक साधारण विश्वासी का हृदय है।

मनन

जब पिछली बार आपके भीतर "बोलूँ या सह लूँ" का द्वंद्व चला, तो असल में फ़ैसला किसने सुनाया: मसीह की शान्ति, या आपका घायल अभिमान?

आपकी मंडली में कौन-सी दीवार अब भी खड़ी है जिसे कुलुस्सियों 3:11 के अनुसार गिर जाना चाहिए था, और आप उसकी एक ईंट कैसे हटा सकते हैं?

Colossians में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Colossians and Philemon

Dick Lucas

Christ above everything: fullness in him against every substitute.

Paul For Everyone: The Prison Letters

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Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.

Colossians and Philemon: An Introduction and Commentary

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Colossians and Philemon

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Colossians 3:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

कुलुस्सियों 3:15 का क्या अर्थ है?
मसीह की जो शान्ति है, वही तुम्हारे भीतर फैसला करने वाली आवाज़ बने, वही तुम्हारे हृदय पर राज करे। यह कोई निजी मनोदशा नहीं, क्योंकि पौलुस तुरन्त जोड़ता है कि इसी शान्ति के लिये तुम "एक देह होकर बुलाए भी गए हो"। और इस राज्य का स्वाभाविक फल एक ही है: धन्यवाद। तीन बातें एक ही साँस में, एक शासन, एक शरीर, एक कृतज्ञ हृदय।
कुलुस्सियों 3:15 किस विषय में है?
शान्ति इस्राएल की सबसे पुरानी लालसा है। शालोम केवल लड़ाई का रुक जाना नहीं था, बल्कि वह पूर्णता जिसमें मनुष्य परमेश्वर के साथ, पड़ोसी के साथ और धरती के साथ ठीक बैठ जाता है। याजक हाथ उठाकर लोगों पर यही शान्ति उतारते थे, भविष्यद्वक्ता उसी की प्रतीक्षा करते थे, और वाचा का सारा उद्देश्य यही था कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच बसें और वहाँ बैर न रहे। पर वाचा टूटती रही, और शान्ति वादा बनी रही।
कुलुस्सियों 3:15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक काम कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसके साथ आपके भीतर तनाव बना हुआ है, और तीन मिनट सिर्फ़ उसके लिये परमेश्वर को धन्यवाद दीजिए, कुछ माँगे बिना।
कुलुस्सियों 3:15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पाठ यह सुविधा नहीं देता। जिस अध्याय में यह आयत खड़ी है, उसी में पौलुस झूठ, गाली और क्रोध को उतार फेंकने को कहता है, और यह भी कि "वहाँ किसी का पक्षपात नहीं।" जो शान्ति अन्याय पर पर्दा डाले, वह मसीह की नहीं, हमारी सुविधा की शान्ति है। सच्चा फ़ैसला कभी-कभी टकराव की ओर ले जाएगा, पर उस टकराव का लक्ष्य जीत नहीं, देह का जुड़ा रहना होगा। यह अन्तर पहचानना आसान नहीं, और पौलुस हमें कोई फ़ॉर्मूला नहीं देता; वह हमें एक शासक देता है जिससे रोज़ पूछना पड़ता है।
कुलुस्सियों 3:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपकी मंडली में कौन-सी दीवार अब भी खड़ी है जिसे कुलुस्सियों 3:11 के अनुसार गिर जाना चाहिए था, और आप उसकी एक ईंट कैसे हटा सकते हैं?
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Colossians 3 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 1

पिता, धन्यवाद कि आपने हमें मसीह के साथ जिलाया और अब वे आपके दाहिने विराजमान हैं। धन्यवाद कि हमारी नज़र अब मिट्टी पर नहीं, बल्कि स्वर्गीय वस्तुओं पर टिक सकती है, क्योंकि जहाँ मसीह हैं, वहीं हमारा सच्चा जीवन सुरक्षित है।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 25

धन्यवाद, प्रभु, कि आपके न्याय में किसी का पक्षपात नहीं। जहाँ दुनिया रसूख और पैसे देखकर फैसला करती है, वहाँ आप हर बुराई का सही हिसाब रखते हैं। इसलिए मुझे बदला लेने की ज़रूरत नहीं, मैं अपना दुख आपके हाथों में सौंपकर चैन से सो सकता हूँ।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 24

पिता, मेरे हर छोटे काम को तू देखता है, यह जानकर मन हल्का हो जाता है। जब लोग न सराहें, तब भी मुझे याद रहे कि मैं असल में तेरी सेवा कर रहा हूँ। मेरे दिल से कड़वाहट निकाल दे और वह आशा भर दे जो तेरे हाथों से मिलती है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 3

पिता, मेरा पुराना रूप अब बीत चुका है, और मेरा जीवन मसीह के साथ तेरे भीतर सुरक्षित है। जब मैं दूसरों की नज़रों में अपनी पहचान ढूँढ़ने लगूँ, तो याद दिला कि जो मैं हूँ, वह तुझ में छिपा है। आज इसी भरोसे में मुझे चैन से जीने दे।

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