बाइबल व्याख्या

इफिसियों 2

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

पौलुस अपने पाठकों को एक कब्रिस्तान में खड़ा करके शुरू करता है, और वह कब्र उनकी अपनी है: "तुम भी… अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।" कोई बीमार नहीं, कोई कमज़ोर नहीं, मरे हुए। और फिर, ठीक वहीं जहाँ वाक्य टूटने वाला था, आता है वह मोड़ जिस पर पूरा अध्याय घूमता है: "परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है…" आगे वह कहता है कि जो अन्यजाति पहले "दूर थे", वे मसीह के लहू के द्वारा "निकट हो गए", और यहूदी-अन्यजाति के बीच की दीवार गिराकर परमेश्वर ने दोनों से एक नई जाति, एक देह, एक जीवित मन्दिर बना दिया।

मर्म

ध्यान दीजिए कि पौलुस "मरे हुए" शब्द चुनता है, और यह चुनाव सब कुछ तय करता है। बीमार आदमी दवा माँग सकता है; डूबता आदमी हाथ बढ़ा सकता है; मरा हुआ आदमी कुछ नहीं कर सकता, सिर्फ़ जिलाया जा सकता है। इसीलिए वाक्य के तीनों क्रिया-रूप परमेश्वर के हैं: जिलाया, उठाया, बैठाया। हमारा योगदान शून्य है, और पौलुस इसे छिपाता नहीं: "यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है; और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।" फिर भी यह आलस का न्योता नहीं। पद 10 तुरंत जोड़ता है कि हम "भले कामों के लिये सृजे गए"। कर्म उद्धार की जड़ नहीं, फल हैं। अनुग्रह पहले, आज्ञाकारिता उसके पीछे चलती हुई।

जोड़ने वाला सूत्र

पद 12 एक ठंडी सूची है: मसीह से अलग, इस्राएल की प्रजा से अलग, प्रतिज्ञा की वाचाओं में हिस्सा नहीं, आशाहीन, ईश्वर रहित। यह अन्यजातियों की कहानी है, और यह पूरे पुराने नियम की पृष्ठभूमि है, जहाँ परमेश्वर ने एक कुल चुना, एक जाति बनाई, एक मन्दिर में बसना चुना। पौलुस कहता नहीं कि वह इतिहास बेकार था; वह कहता है कि वह इतिहास अब खुल गया है। कोने का पत्थर रखा जा चुका है, और यशायाह 28:16 की वह भविष्यवाणी, जिसमें परमेश्वर सिय्योन में एक नींव का पत्थर रखते हैं, मसीह में आकार लेती है। मन्दिर अब पत्थर का नहीं; "सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।" परमेश्वर का निवास-स्थान अब लोग हैं।

दर्पण

यह अध्याय दो घमंडों को नंगा करता है। पहला, धार्मिक रिज़्यूमे का घमंड: मेरी सेवा, मेरा दान, मेरी नियमितता। पद 9 उस पर सीधा हाथ रखता है। दूसरा घमंड और भी गहरा है, वह जो कहता है कि "हमारे लोग" और "वे लोग"। कलीसिया में जाति, भाषा, गाँव-शहर, पुराने और नए विश्वासी, पढ़े और अनपढ़, हम बहुत महीन दीवारें बनाते हैं और उन्हें मर्यादा कहते हैं। पौलुस के अनुसार मसीह ने दीवार "ढा दी"; अगर हम उसे फिर चिनते हैं, तो हम क्रूस के काम को उलट रहे हैं। और अगर आप वह हैं जो हमेशा बाहरी महसूस करते हैं, जिसे मंडली में कोई नाम से नहीं जानता, तो पद 19 आपके लिए है: "परदेशी और मुसाफिर नहीं", बल्कि घर के सदस्य।

अंतर्पाठ

यहेजकेल 37 में भविष्यद्वक्ता एक घाटी में सूखी हड्डियों के बीच खड़ा है, और परमेश्वर पूछते हैं कि क्या ये जी सकती हैं। वहाँ भी हड्डियाँ अपने बल पर कुछ नहीं करतीं; परमेश्वर का श्वास उन्हें जिलाता है। पौलुस वही दृश्य व्यक्तिगत बनाकर इफिसुस के पाठकों के सामने रखता है। और पद 17 में जब वह कहता है कि मसीह ने आकर "दूर" और "निकट", दोनों को शान्ति का सुसमाचार सुनाया, तो पतरस की पिन्तेकुस्त की बात गूँजती है, जहाँ प्रतिज्ञा "दूर के लोगों" तक फैली हुई कही गई (प्रेरितों 2:39)। एक ही सुसमाचार, दो बहुत अलग श्रोता, और वही खून जो दोनों को एक मेज़ पर बिठाता है।

कठिन प्रश्न

पद 3 खटकता है: "स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।" यह हमारे कानों को अन्याय लगता है, क्योंकि हम सोचते हैं कि दोष केवल चुने हुए कामों का होता है। पौलुस यह नहीं कह रहा कि परमेश्वर बच्चों से नाराज़ पैदा होते हैं; वह कह रहा है कि हमारी दिशा ही टेढ़ी है, और वह कहीं बाहर से नहीं, हमारे भीतर से आती है। ईमानदारी से देखें: क्या आपको स्वार्थ सिखाना पड़ा था, या क्षमा? इस प्रश्न को मीठा करने की ज़रूरत नहीं। पौलुस भी नहीं करता। वह सिर्फ़ इतना करता है कि तुरंत "परन्तु परमेश्वर" कहता है, और वहीं इस भारी वाक्य का एकमात्र उत्तर मिलता है, तर्क में नहीं, दया में।

एक बारीकी

"अलग करनेवाले दीवार" कोई रूपक नहीं थी। यरूशलेम के मन्दिर में एक पत्थर की जालीदार दीवार थी, और उस पर लिखा था कि इससे आगे कोई अन्यजाति गया तो मृत्यु उसका दंड है। हर तीर्थयात्री उसे देखता था। पौलुस यह पत्र क़ैद में लिखता है, और उसकी क़ैद की जड़ में यही आरोप था कि वह एक अन्यजाति को मन्दिर में ले आया। यानी जो आदमी लिख रहा है कि दीवार गिर गई, वह उसी दीवार के कारण ज़ंजीरों में है। और वह शिकायत नहीं करता। वह कहता है, वही दीवार अब ढह चुकी है, और उसकी जगह एक नया मन्दिर उठ रहा है, जिसकी ईंटें हम हैं।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन सी दीवार है जिसे मसीह ने ढा दिया, पर आप उसे बनाए रखना चाहते हैं?

अगर "जिलाया, उठाया, बैठाया" सब परमेश्वर का काम है, तो आपकी सेवा किस चीज़ से चल रही है: कृतज्ञता से या साबित करने की भूख से?

Ephesians में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Ephesians

John Stott

God's new society: Stott at his very best on church and calling.

Paul For Everyone: The Prison Letters

N.T. Wright

Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.

Ephesians For You

Richard Coekin

Grace, church and spiritual battle made wonderfully practical.

Ephesians: An Introduction and Commentary

Francis Foulkes

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Ephesians

Klyne Snodgrass

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Ephesians 2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

इफिसियों 2 का क्या अर्थ है?
पौलुस अपने पाठकों को एक कब्रिस्तान में खड़ा करके शुरू करता है, और वह कब्र उनकी अपनी है: "तुम भी... अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।" कोई बीमार नहीं, कोई कमज़ोर नहीं, मरे हुए। और फिर, ठीक वहीं जहाँ वाक्य टूटने वाला था, आता है वह मोड़ जिस पर पूरा अध्याय घूमता है: "परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है.
इफिसियों 2 किस विषय में है?
पद 12 एक ठंडी सूची है: मसीह से अलग, इस्राएल की प्रजा से अलग, प्रतिज्ञा की वाचाओं में हिस्सा नहीं, आशाहीन, ईश्वर रहित। यह अन्यजातियों की कहानी है, और यह पूरे पुराने नियम की पृष्ठभूमि है, जहाँ परमेश्वर ने एक कुल चुना, एक जाति बनाई, एक मन्दिर में बसना चुना। पौलुस कहता नहीं कि वह इतिहास बेकार था; वह कहता है कि वह इतिहास अब खुल गया है। कोने का पत्थर रखा जा चुका है, और यशायाह 28:16 की वह भविष्यवाणी, जिसमें परमेश्वर सिय्योन में एक नींव का पत्थर रखते हैं, मसीह में आकार लेती है। मन्दिर अब पत्थर का नहीं; "सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।" परमेश्वर का निवास-स्थान अब लोग हैं।
इफिसियों 2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यहेजकेल 37 में भविष्यद्वक्ता एक घाटी में सूखी हड्डियों के बीच खड़ा है, और परमेश्वर पूछते हैं कि क्या ये जी सकती हैं। वहाँ भी हड्डियाँ अपने बल पर कुछ नहीं करतीं; परमेश्वर का श्वास उन्हें जिलाता है। पौलुस वही दृश्य व्यक्तिगत बनाकर इफिसुस के पाठकों के सामने रखता है। और पद 17 में जब वह कहता है कि मसीह ने आकर "दूर" और "निकट", दोनों को शान्ति का सुसमाचार सुनाया, तो पतरस की पिन्तेकुस्त की बात गूँजती है, जहाँ प्रतिज्ञा "दूर के लोगों" तक फैली हुई कही गई (प्रेरितों 2:39)। एक ही सुसमाचार, दो बहुत अलग श्रोता, और वही खून जो दोनों को एक मेज़ पर बिठाता है।
इफिसियों 2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"अलग करनेवाले दीवार" कोई रूपक नहीं थी। यरूशलेम के मन्दिर में एक पत्थर की जालीदार दीवार थी, और उस पर लिखा था कि इससे आगे कोई अन्यजाति गया तो मृत्यु उसका दंड है। हर तीर्थयात्री उसे देखता था। पौलुस यह पत्र क़ैद में लिखता है, और उसकी क़ैद की जड़ में यही आरोप था कि वह एक अन्यजाति को मन्दिर में ले आया। यानी जो आदमी लिख रहा है कि दीवार गिर गई, वह उसी दीवार के कारण ज़ंजीरों में है। और वह शिकायत नहीं करता। वह कहता है, वही दीवार अब ढह चुकी है, और उसकी जगह एक नया मन्दिर उठ रहा है, जिसकी ईंटें हम हैं।
इफिसियों 2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अगर "जिलाया, उठाया, बैठाया" सब परमेश्वर का काम है, तो आपकी सेवा किस चीज़ से चल रही है: कृतज्ञता से या साबित करने की भूख से?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ephesians 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 13

पिता, धन्यवाद कि मैं जो पहले दूर था, अब मसीह यीशु में उसके लहू के द्वारा निकट हो गया हूँ। धन्यवाद कि अब मुझे तेरे सामने आने से डरना नहीं पड़ता, क्योंकि दूरी मिटाने की कीमत यीशु ने अपने लहू से चुकाई।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 21

जिसमें सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।" ध्यान दे, पौलुस कहता है "बनती जाती है", बन चुकी नहीं। तू अभी अधूरा लगता है, तो यही तो सच है। और एक पत्थर अकेले मन्दिर नहीं बनता। जिन लोगों से तू दूरी बनाए रखता है, परमेश्वर उन्हीं के साथ तुझे जोड़कर अपना घर खड़ा कर रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

जिनमें तुम पहले इस संसार की रीति पर... चलते थे।" ध्यान दे, पौलुस ने "चलते थे" कहा, "चलते हो" नहीं। वह बहाव जो तुझे बहाए लिए जा रहा था, अब तेरे पीछे है। पर सच कह, क्या कुछ पुरानी आदतें अब भी तुझे खींचती हैं? मसीह ने तुझे उस धारा से निकाला है। अब बहने की नहीं, चलने की बारी है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

ताकि वह आनेवाले युगों में मसीह यीशु में हम पर दया के द्वारा अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।" सोचो, परमेश्वर ने तुम्हें सिर्फ बचाया ही नहीं, उसने तुम्हें अपने अनुग्रह का नमूना बना दिया। जो कल तक अपराधों में मरा हुआ था, वही अब युगों तक यह गवाही देगा कि उसकी दया कितनी बड़ी है। तुम्हारी कहानी उसकी महिमा का सबूत है।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल की व्याख्याएँ तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडल का उपयोग करता है। हम धर्मशास्त्रीय दृष्टि से सही रहने का पूरा प्रयास करते हैं, फिर भी यह सॉफ़्टवेयर त्रुटि कर सकता है। इस साधन को अपने निजी बाइबल अध्ययन और कलीसिया के संगति जीवन का स्थान लेने वाला न समझें, बल्कि उनके सहायक के रूप में प्रयोग करें।

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

कंपनी?