बाइबल व्याख्या

निर्गमन 20:7

बाइबल

यह वचन

दस आज्ञाओं के बीच में एक ऐसी आज्ञा खड़ी है जिसमें कोई हाथ-पाँव नहीं चलता, कोई हथियार नहीं उठता, कोई सम्पत्ति नहीं छीनी जाती। सिर्फ मुँह खुलता है। परमेश्वर कहते हैं: "तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।" यानी जिस नाम से परमेश्वर ने स्वयं को इस्राएल पर प्रकट किया, उसे खोखले ढंग से, बेमतलब, अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल मत करना। और फिर एक चेतावनी जुड़ती है जो बाकी किसी आज्ञा के साथ इस रूप में नहीं आती: ऐसा करनेवाले को परमेश्वर बरी नहीं करेंगे। आज्ञा छोटी है, उसका पिछला हिस्सा भारी है।

मूल बात

जिस इब्रानी शब्द का अनुवाद "व्यर्थ" हुआ है, वह है शव, जिसका अर्थ है खालीपन, झूठ, वह चीज़ जिसमें कुछ भी नहीं। आज्ञा मुख्य रूप से गाली-गलौज के बारे में नहीं है, बल्कि खोखलेपन के बारे में। परमेश्वर ने जलती हुई झाड़ी में अपना नाम बताया था, अपने आप को पकड़ में आने योग्य बनाया था, ताकि उनके लोग उन्हें पुकार सकें। नाम देना अपने आप को सौंपना है। और ठीक यही आत्मसमर्पण मनुष्य के हाथ में एक औज़ार बन जाता है: कसम खाकर धोखा देना, परमेश्वर का नाम लेकर अपनी बात का वज़न बढ़ाना, उनके नाम पर लोगों को डराना या पैसा जुटाना। परमेश्वर यहाँ अपनी प्रतिष्ठा की नहीं, अपने रिश्ते की रक्षा कर रहे हैं। और "निर्दोष न ठहराएगा" वह अदालती भाषा है जो बाद में शुभ समाचार का दिल बनेगी: सवाल यही रहेगा कि दोषी को निर्दोष ठहराया कैसे जा सकता है।

सूत्र

ध्यान दीजिए कि इसी अध्याय के अंत में परमेश्वर कहते हैं: "जहाँ-जहाँ मैं अपने नाम का स्मरण कराऊँ वहाँ-वहाँ मैं आकर तुम्हें आशीष दूँगा।" नाम खोखला नहीं है; नाम वह जगह है जहाँ वेदी बनती है, बलि चढ़ती है और आशीष उतरती है। यही सूत्र मसीह तक जाता है। यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु अपनी पूरी सेवा को इसी एक बात में समेटते हैं कि उन्होंने पिता का नाम लोगों पर प्रकट किया, और उसे कभी व्यर्थ नहीं किया। जो नाम हमारे मुँह में खोखला हो गया था, वह एक व्यक्ति में देह बनकर भर गया। और वह चेतावनी, "निर्दोष न ठहराएगा", क्रूस पर जाकर ही हल होती है: परमेश्वर दोष को अनदेखा नहीं करते, वे उसे अपने ऊपर उठा लेते हैं।

दर्पण

यह आज्ञा उस पल पर उँगली रखती है जब आप बहस जीतने के लिए कहते हैं, "मुझे तो परमेश्वर ने यही दिखाया है।" या जब मंडली की प्रार्थना में आपकी आवाज़ गहरी हो जाती है और शब्द अपने ही कानों को झूठे लगते हैं। या जब आपने विवाह की वेदी पर परमेश्वर के सामने जो वचन दिए थे, वे अब सिर्फ काग़ज़ पर बचे हैं। नाम का दुरुपयोग शोर नहीं मचाता; वह धीरे-धीरे आपके भीतर परमेश्वर को एक औज़ार में बदल देता है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर उठाया और फिर रख दिया जाता है। आज यह कीजिए: जिस एक व्यक्ति से आपने परमेश्वर का नाम लेकर कोई वादा किया और निभाया नहीं, उसे अभी एक संदेश भेजकर साफ़-साफ़ मानिए कि वह वादा अधूरा रहा।

श्रोतागण

जो लोग सीनै की तलहटी में खड़े थे, वे मिस्र से निकले दास थे। उन्होंने वहाँ देखा था कि देवताओं के नाम जादू-टोने के मंत्रों में, ताबीज़ों में, शापों में इस्तेमाल होते हैं, मानो नाम जानना देवता पर अधिकार पाना हो। यहोवा ने अपना नाम बताया था, पर वे उसे उसी तरह मुट्ठी में नहीं ले सकते थे। दूसरी बात और भी ठोस थी: उनके समाज में न पुलिस थी, न दस्तावेज़। ज़मीन का झगड़ा, उधार का हिसाब, चोरी का आरोप, सब परमेश्वर के नाम की शपथ पर तय होता था। इसलिए यह आज्ञा उनके लिए धर्म की नहीं, रोटी और पड़ोस की बात थी।

मुख्य पात्र

यहाँ मुख्य पात्र वह परमेश्वर हैं जिन्होंने अपने आप को सुरक्षित नहीं रखा। वे "जलन रखनेवाला परमेश्वर" कहलाते हैं, पर उसी साँस में हज़ारों पर करुणा करने की बात करते हैं। यह किसी सनकी शासक की छवि नहीं है, यह उस पति-जैसे प्रेम की है जो धोखा सह नहीं सकता क्योंकि वह सच में जुड़ा हुआ है। नाम देकर वे पुकारे जाने योग्य बने, और इसी में उन्होंने अपने आप को हमारे दुरुपयोग के लिए खोल दिया। परमेश्वर का यह जोखिम उठाना ही उनके चरित्र की सबसे गहरी बात है, और वही अंत में देहधारण तक ले जाता है।

पृष्ठभूमि

मिस्र से निकले तीन महीने हो चुके हैं। जगह है सीनै पर्वत, समय है उस संधि का जिसमें एक राजा अपनी प्रजा से शर्तें बाँधता है। पर यहाँ शुरुआत शर्त से नहीं, उद्धार से होती है: "मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूँ, जो तुझे दासत्व के घर से निकाल लाया है।" पहले छुड़ाना, फिर आज्ञा। माहौल डरावना है, गरजना, बिजली, नरसिंगे का शब्द, और लोग काँपकर दूर खड़े हो जाते हैं और मूसा से कहते हैं कि परमेश्वर सीधे हमसे बात न करें। यह आज्ञा उस काँपते हुए समुदाय को दी गई है, जिसे अभी सीखना था कि छुड़ाए हुए लोग बोलते कैसे हैं।

मनन

आपके मुँह में परमेश्वर का नाम पिछले सप्ताह किन-किन जगहों पर आया, और उनमें से कहाँ वह सचमुच भरा हुआ था और कहाँ खोखला?

यदि क्रूस पर दोषी को निर्दोष ठहराया जाता है, तो यह आज्ञा आपके लिए डर की बात रह जाती है या कृतज्ञता की?

पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें

आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।

स्वीकारोक्ति

स्वीकारोक्ति

संत अगस्तीन

अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।

उद्देश्य भरा जीवन

उद्देश्य भरा जीवन

रिक वॉरेन

चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

भाई लॉरेन्स

रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।

जंगल का छिपने का स्थान

जंगल का छिपने का स्थान

कोरी टेन बूम

नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।

जीसस कॉलिंग

जीसस कॉलिंग

सारा यंग

प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।

एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Exodus 20:7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

निर्गमन 20:7 का क्या अर्थ है?
दस आज्ञाओं के बीच में एक ऐसी आज्ञा खड़ी है जिसमें कोई हाथ-पाँव नहीं चलता, कोई हथियार नहीं उठता, कोई सम्पत्ति नहीं छीनी जाती। सिर्फ मुँह खुलता है। परमेश्वर कहते हैं: "तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।" यानी जिस नाम से परमेश्वर ने स्वयं को इस्राएल पर प्रकट किया, उसे खोखले ढंग से, बेमतलब, अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल मत करना। और फिर एक चेतावनी जुड़ती है जो बाकी किसी आज्ञा के साथ इस रूप में नहीं आती: ऐसा करनेवाले को परमेश्वर बरी नहीं करेंगे। आज्ञा छोटी है, उसका पिछला हिस्सा भारी है।
निर्गमन 20:7 किस विषय में है?
ध्यान दीजिए कि इसी अध्याय के अंत में परमेश्वर कहते हैं: "जहाँ-जहाँ मैं अपने नाम का स्मरण कराऊँ वहाँ-वहाँ मैं आकर तुम्हें आशीष दूँगा।" नाम खोखला नहीं है; नाम वह जगह है जहाँ वेदी बनती है, बलि चढ़ती है और आशीष उतरती है। यही सूत्र मसीह तक जाता है। यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु अपनी पूरी सेवा को इसी एक बात में समेटते हैं कि उन्होंने पिता का नाम लोगों पर प्रकट किया, और उसे कभी व्यर्थ नहीं किया। जो नाम हमारे मुँह में खोखला हो गया था, वह एक व्यक्ति में देह बनकर भर गया। और वह चेतावनी, "निर्दोष न ठहराएगा", क्रूस पर जाकर ही हल होती है: परमेश्वर दोष को अनदेखा नहीं करते, वे उसे अपने ऊपर उठा लेते हैं।
निर्गमन 20:7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
जो लोग सीनै की तलहटी में खड़े थे, वे मिस्र से निकले दास थे। उन्होंने वहाँ देखा था कि देवताओं के नाम जादू-टोने के मंत्रों में, ताबीज़ों में, शापों में इस्तेमाल होते हैं, मानो नाम जानना देवता पर अधिकार पाना हो। यहोवा ने अपना नाम बताया था, पर वे उसे उसी तरह मुट्ठी में नहीं ले सकते थे। दूसरी बात और भी ठोस थी: उनके समाज में न पुलिस थी, न दस्तावेज़। ज़मीन का झगड़ा, उधार का हिसाब, चोरी का आरोप, सब परमेश्वर के नाम की शपथ पर तय होता था। इसलिए यह आज्ञा उनके लिए धर्म की नहीं, रोटी और पड़ोस की बात थी।
निर्गमन 20:7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मिस्र से निकले तीन महीने हो चुके हैं। जगह है सीनै पर्वत, समय है उस संधि का जिसमें एक राजा अपनी प्रजा से शर्तें बाँधता है। पर यहाँ शुरुआत शर्त से नहीं, उद्धार से होती है: "मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूँ, जो तुझे दासत्व के घर से निकाल लाया है।" पहले छुड़ाना, फिर आज्ञा। माहौल डरावना है, गरजना, बिजली, नरसिंगे का शब्द, और लोग काँपकर दूर खड़े हो जाते हैं और मूसा से कहते हैं कि परमेश्वर सीधे हमसे बात न करें। यह आज्ञा उस काँपते हुए समुदाय को दी गई है, जिसे अभी सीखना था कि छुड़ाए हुए लोग बोलते कैसे हैं।
निर्गमन 20:7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि क्रूस पर दोषी को निर्दोष ठहराया जाता है, तो यह आज्ञा आपके लिए डर की बात रह जाती है या कृतज्ञता की?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Exodus 20 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।" यह आज्ञा अदालत की भाषा में दी गई थी, जहाँ एक झूठे शब्द से किसी का जीवन छिन सकता था। आज वह अदालत तुम्हारे फोन में बैठी है। बिना पूरी बात जाने जो संदेश तुमने आगे भेजा, जो अधूरा सच तुमने कहा, उससे किसी का नाम मरा। सोचो, कल किसके बारे में तुम चुप रह सकते थे?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

छ: दिन तो तू परिश्रम करके अपना सब काम-काज करना।" ध्यान दे, आज्ञा केवल विश्राम की नहीं, परिश्रम की भी है। परमेश्वर तेरे सोमवार को भी उतनी ही गंभीरता से देखता है जितना सब्त को। और "सब काम-काज" कहकर वह तुझसे कहता है, अपना काम पूरा कर, ताकि सातवें दिन तू उसे मन में ढोता न फिरे। थका नहीं, हल्का होकर उसके सामने आ।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल की व्याख्याएँ तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडल का उपयोग करता है। हम धर्मशास्त्रीय दृष्टि से सही रहने का पूरा प्रयास करते हैं, फिर भी यह सॉफ़्टवेयर त्रुटि कर सकता है। इस साधन को अपने निजी बाइबल अध्ययन और कलीसिया के संगति जीवन का स्थान लेने वाला न समझें, बल्कि उनके सहायक के रूप में प्रयोग करें।

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

कंपनी?