बाइबल व्याख्या

उत्पत्ति 20

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

अब्राहम दक्षिण की ओर बढ़ते हैं, कादेश और शूर के बीच ठहरते हैं, और गरार में बस जाते हैं। वहाँ वे सारा के विषय में कहते हैं, "वह मेरी बहन है," और राजा अबीमेलेक दूत भेजकर उसे अपने घर बुलवा लेता है। रात को परमेश्वर स्वप्न में आकर अबीमेलेक को चेतावनी देते हैं कि वह स्त्री सुहागिन है और उसके कारण उसकी मृत्यु हो सकती है। अबीमेलेक अपनी निर्दोषता की दुहाई देता है, परमेश्वर उसे स्वीकार करते हैं, और सारा को लौटाने तथा अब्राहम से प्रार्थना करवाने का आदेश देते हैं। सुबह राजा भयभीत होकर अब्राहम को बुलाता है और पूछता है, "तूने हम से यह क्या किया है?" अब्राहम अपनी सफाई देते हैं, भेड़-बकरी और चाँदी के साथ सारा लौटाई जाती है, और अब्राहम की प्रार्थना पर परमेश्वर अबीमेलेक के घराने की बन्द कोखों को खोल देते हैं।

मर्म

इस अध्याय की सबसे कड़वी बात यह है कि जिसे परमेश्वर "नबी" कहते हैं, वही अध्याय का सबसे बड़ा नैतिक अपराधी है। अब्राहम झूठ को झूठ नहीं मानते; वे उसे एक सुविचारित नीति बताते हैं जो घर छोड़ने के दिन से ही तय थी। और उनका तर्क सुनिए: "मैंने यह सोचा था कि इस स्थान में परमेश्वर का कुछ भी भय न होगा।" यही वह अनुमान है जिसे यह पूरा अध्याय ध्वस्त करता है, क्योंकि परमेश्वर का भय उस अन्यजाति राजा में मिलता है, विश्वास के पिता में नहीं। परमेश्वर यहाँ दो काम एक साथ करते हैं: वे अब्राहम को त्यागते नहीं, और वे अब्राहम के शिकार को अनदेखा भी नहीं करते। कृपा योग्यता पर टिकी नहीं है, पर वह हमारी सुरक्षा-रणनीतियों से घायल हुए लोगों की ओर से चुप भी नहीं रहती। परमेश्वर कहते हैं, "मैंने तुझे रोक भी रखा": पाप न होने का श्रेय भी हमारा नहीं।

सूत्र

ध्यान दीजिए कि यह कहानी कहाँ रखी गई है: ठीक उस अध्याय से पहले जिसमें इसहाक का जन्म होता है। वादे का पुत्र आने ही वाला है, और उसी घड़ी सारा एक विदेशी राजा के घर में पहुँच जाती है। अगर अबीमेलेक उसे छूता, तो इसहाक के जन्म पर हमेशा एक प्रश्नचिह्न लटका रहता। इसलिए परमेश्वर स्वयं बीच में आते हैं, स्वप्न में, रात में, इससे पहले कि कुछ बिगड़े। वंश की रक्षा अब्राहम की चतुराई नहीं करती, परमेश्वर करते हैं, और उसी वंश से आगे चलकर मसीह आते हैं। दूसरा सूत्र भी यहीं फूटता है: बाइबल में पहली बार कोई "नबी" कहा जाता है, और नबी का पहला काम भविष्यवाणी नहीं, प्रार्थना है, वह भी उस आदमी के लिए जिसे उसने नुकसान पहुँचाया। दोषी मध्यस्थ की प्रार्थना से बन्द कोखें खुलती हैं; एक निर्दोष मध्यस्थ की प्रार्थना से आगे और बड़ा कुछ खुलेगा।

दर्पण

अब्राहम का झूठ अचानक फूटी घबराहट नहीं था, वह एक नीति थी: "जहाँ-जहाँ जाएँ वहाँ-वहाँ तू मेरे विषय में कहना कि यह मेरा भाई है।" हमारे पास भी ऐसी स्थायी नीतियाँ होती हैं। दफ्तर में वह आधा सच जो आपको बचाता है और किसी जूनियर को फँसाता है। घर में वह चुप्पी जिसे आप शांति कहते हैं, पर जिसकी कीमत पत्नी या बच्चा चुकाता है। पैसों के मामले में वह जानकारी जो आपने "पूछा ही नहीं था" कहकर छिपाई। और हमारा तर्क भी अब्राहम जैसा ही होता है: वहाँ लोग भरोसेमंद नहीं हैं, वहाँ परमेश्वर का भय नहीं है, इसलिए मुझे खुद को बचाना पड़ा। यह अध्याय उस तर्क को तोड़ता है। आपकी आत्मरक्षा हमेशा किसी और के जोखिम पर चलती है, और आप अक्सर उसका चेहरा देखते तक नहीं।

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मुख्य पात्र

अब्राहम यहाँ विश्वास के पिता नहीं, डरे हुए यात्री हैं। जिस परमेश्वर ने उन्हें वंश का वादा दिया, उसी वादे को वे अपनी पत्नी सौंपकर खतरे में डाल देते हैं, और यह दूसरी बार है। पकड़े जाने पर उनका उत्तर और भी बेचैन करता है: पहले वे दूसरों को दोष देते हैं, फिर तकनीकी सफाई देते हैं कि सारा सचमुच उनकी सौतेली बहन है। सच का वह टुकड़ा जो पूरे झूठ को ढकने के लिए इस्तेमाल हो, झूठ से ज़्यादा फिसलन भरा होता है। और फिर भी अध्याय के अंत में यही आदमी प्रार्थना करता है और परमेश्वर उसकी सुनते हैं। यह अब्राहम को बरी नहीं करता; यह दिखाता है कि परमेश्वर की बुलाहट हमारी नैतिक सफलता पर नहीं, उनकी वफादारी पर टिकी है। पवित्रता बुलाहट की शर्त नहीं, उसका फल है, और यहाँ वह फल अभी कच्चा है।

प्रश्न

सबसे असहज सवाल यह है: झूठ बोलने वाला अमीर होकर निकलता है। भेड़-बकरी, गाय-बैल, दास-दासियाँ और चाँदी के एक हजार टुकड़े। जिसने गलती नहीं की, वह डरा हुआ है और भरपाई कर रहा है। पाठ इस विषमता को न समझाता है, न उस पर शर्मिंदा होता है। कोई दंड नहीं, कोई उपदेश नहीं। पर ध्यान दीजिए कि पाठ अब्राहम को नायक भी नहीं बनाता; उसे नंगा करके छोड़ देता है, अबीमेलेक के मुँह से, "तूने मेरे साथ वह काम किया है जो उचित न था।" कुछ बार परमेश्वर हमें हमारे पापों के परिणामों से बचा लेते हैं, और वह बचाव ही सबसे भारी न्याय बन जाता है, क्योंकि तब हमें अपने साथ जीना पड़ता है। इसे सुलझाने की जल्दी मत कीजिए। कृपा कभी-कभी बेइंसाफ़ लगती है, और उसी बेइंसाफ़ी में हम खड़े हैं।

श्रोता

पहले सुनने वाले वे लोग थे जो जानते थे कि छोटा होना क्या होता है। मिस्र में, कनान के बीच, बाद में निर्वासन में, इस्राएल हमेशा बड़ी शक्तियों के बीच एक कमज़ोर समुदाय था, और झूठ बोलकर बच जाना उनके लिए कोई अनोखा विचार नहीं, रोज़ की आज़माइश थी। उनके कान इस बात पर अटके होंगे कि परमेश्वर ने एक अन्यजाति राजा से सीधे बात की, और वह राजा नैतिक रूप से उनके पूर्वज से ऊँचा निकला। यह उनके धार्मिक गर्व पर सीधा प्रहार था। साथ ही चाँदी के हजार टुकड़ों वाली बात उनके लिए तकनीकी नहीं थी: यह सार्वजनिक रूप से सारा की इज़्ज़त बहाल करना था, ताकि हर कोई जान ले कि इसहाक की माँ बेदाग़ है। उनकी पूरी पहचान इसी बेदाग़ी पर टिकी थी।

चिंतन

आपकी कौन सी "स्थायी नीति" है, वह आदत जिससे आप खुद को बचाते हैं, और पिछली बार उसकी कीमत किसने चुकाई थी?

आपके जीवन में वह अबीमेलेक कौन है, यानी वह व्यक्ति जो विश्वास के बाहर होते हुए भी आपसे ज़्यादा सीधा और ईमानदार निकला, और उससे आप क्या सीखने को तैयार हैं?

Genesis में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Genesis

Derek Kidner

A beloved compact classic that opens up Genesis with warmth and precision.

The Message of Genesis 1-11

David Atkinson

Walks through creation, fall and flood and shows why these chapters still matter.

The Message of Genesis 12-50

Joyce Baldwin

Abraham to Joseph: the promises of God traced through one family.

Genesis: Beginning and Blessing

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Warm expository chapters that preach Genesis into everyday life.

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Genesis 20 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

उत्पत्ति 20 का क्या अर्थ है?
अब्राहम दक्षिण की ओर बढ़ते हैं, कादेश और शूर के बीच ठहरते हैं, और गरार में बस जाते हैं। वहाँ वे सारा के विषय में कहते हैं, "वह मेरी बहन है," और राजा अबीमेलेक दूत भेजकर उसे अपने घर बुलवा लेता है। रात को परमेश्वर स्वप्न में आकर अबीमेलेक को चेतावनी देते हैं कि वह स्त्री सुहागिन है और उसके कारण उसकी मृत्यु हो सकती है। अबीमेलेक अपनी निर्दोषता की दुहाई देता है, परमेश्वर उसे स्वीकार करते हैं, और सारा को लौटाने तथा
उत्पत्ति 20 किस विषय में है?
ध्यान दीजिए कि यह कहानी कहाँ रखी गई है: ठीक उस अध्याय से पहले जिसमें इसहाक का जन्म होता है। वादे का पुत्र आने ही वाला है, और उसी घड़ी सारा एक विदेशी राजा के घर में पहुँच जाती है। अगर अबीमेलेक उसे छूता, तो इसहाक के जन्म पर हमेशा एक प्रश्नचिह्न लटका रहता। इसलिए परमेश्वर स्वयं बीच में आते हैं, स्वप्न में, रात में, इससे पहले कि कुछ बिगड़े। वंश की रक्षा अब्राहम की चतुराई नहीं करती, परमेश्वर करते हैं, और उसी वंश से आगे चलकर मसीह आते हैं। दूसरा सूत्र भी यहीं फूटता है: बाइबल में पहली बार कोई "नबी" कहा जाता है, और नबी का पहला काम भविष्यवाणी नहीं, प्रार्थना है, वह भी उस आदमी के लिए जिसे उसने नुकसान पहुँचाया। दोषी मध्यस्थ की प्रार्थना से बन्द कोखें खुलती हैं; एक निर्दोष मध्यस्थ की प्रार्थना से आगे और बड़ा कुछ खुलेगा।
उत्पत्ति 20 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज दस मिनट निकालिए और उस एक व्यक्ति को फोन कीजिए या लिखिए जिससे आपने इस सप्ताह आधा सच कहा था, और वह वाक्य पूरा कीजिए जो आपने अधूरा छोड़ा था।
उत्पत्ति 20 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
सबसे असहज सवाल यह है: झूठ बोलने वाला अमीर होकर निकलता है। भेड़-बकरी, गाय-बैल, दास-दासियाँ और चाँदी के एक हजार टुकड़े। जिसने गलती नहीं की, वह डरा हुआ है और भरपाई कर रहा है। पाठ इस विषमता को न समझाता है, न उस पर शर्मिंदा होता है। कोई दंड नहीं, कोई उपदेश नहीं। पर ध्यान दीजिए कि पाठ अब्राहम को नायक भी नहीं बनाता; उसे नंगा करके छोड़ देता है, अबीमेलेक के मुँह से, "तूने मेरे साथ वह काम किया है जो उचित न था।" कुछ बार परमेश्वर हमें हमारे पापों के परिणामों से बचा लेते हैं, और वह बचाव ही सबसे भारी न्याय बन जाता है, क्योंकि तब हमें अपने साथ जीना पड़ता है। इसे सुलझाने की जल्दी मत कीजिए। कृपा कभी-कभी बेइंसाफ़ लगती है, और उसी बेइंसाफ़ी में हम खड़े हैं।
उत्पत्ति 20 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपकी कौन सी "स्थायी नीति" है, वह आदत जिससे आप खुद को बचाते हैं, और पिछली बार उसकी कीमत किसने चुकाई थी?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Genesis 20 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 9

पिता, धन्यवाद कि आपने अबीमेलेक को उस पाप से रोक लिया जो वह अनजाने में करने जा रहा था। आप मेरी अनजानी भूलों पर भी नज़र रखते हैं और समय रहते टोक देते हैं। धन्यवाद कि आप सच बोलने वाले लोग भेजते हैं, और अपने जनों की गलतियों के बावजूद अपनी वाचा नहीं छोड़ते।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 10

पिता, कभी कभी डर मुझसे ऐसे काम करवा देता है जिनका कोई सही कारण मैं नहीं बता पाता। जब तू पूछता है कि मैंने ऐसा क्यों किया, तो मेरे पास बहाने ही होते हैं। मुझे सच बोलने का साहस दे, और यह भरोसा भी कि तू मेरी हिफाज़त करने में समर्थ है।

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