बाइबल व्याख्या

हबक्कूक 1

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

हबक्कूक नबी परमेश्वर के सामने चिल्ला उठता है: चारों ओर उपद्रव, लूट-पाट, अन्याय, और आप चुप हैं। परमेश्वर उत्तर देते हैं, पर ऐसा उत्तर जो घाव को और गहरा करता है: मैं कसदियों को उठाने पर हूँ, वह क्रूर जाति जिनका बल ही उनका देवता है। तब नबी फिर पूछता है: हे पवित्र परमेश्वर, आप की आँखें तो ऐसी शुद्ध हैं कि बुराई देख नहीं सकतीं, फिर आप विश्वासघातियों को क्यों देखते रहते हैं जब वे निर्दोष को निगल जाते हैं?

मूल बात

यह अध्याय एक विश्वासी की सबसे कठिन प्रार्थना है: वह प्रार्थना जो उत्तर पाकर भी संतुष्ट नहीं होती। हबक्कूक की पहली शिकायत भीतरी है, यहूदा के भीतर का अन्याय। परमेश्वर का उत्तर बाहरी है, और भयानक है, कि इस अन्याय का इलाज एक और भी क्रूर जाति के हाथों होगा। यहाँ धर्मशास्त्र एक ऐसे प्रश्न को खोलता है जिसे हम प्रायः दबा देते हैं: क्या परमेश्वर बुराई को दूर करने के लिये और बड़ी बुराई का उपयोग कर सकते हैं? और यदि हाँ, तो उनकी पवित्रता और उनके कार्य में तालमेल कैसे बैठे? हबक्कूक इस विरोधाभास से मुँह नहीं मोड़ता, वह उसी में खड़ा रहता है।

जोड़ने वाला सूत्र

पद 5 को प्रेरितों 13:41 में पौलुस पिसिदिया के अन्ताकिया में उठाता है। जो चेतावनी कसदियों के आक्रमण के बारे में थी, वह अब मसीह के सुसमाचार को अस्वीकार करने की चेतावनी बन जाती है, क्योंकि परमेश्वर के "अविश्वसनीय काम" का चरम बिन्दु क्रूस है, जहाँ भी परमेश्वर ने बुराई का उपयोग करके सबसे बड़ी भलाई की। हबक्कूक की तड़प, "आप उद्धार नहीं करेंगे?", वहीं जाकर उत्तर पाती है, जहाँ धर्मी दुष्टों से घिरा हुआ है, न्याय का खून हो रहा है, और फिर भी परमेश्वर काम कर रहे हैं। पूरी बाइबल इस पैटर्न पर घूमती है: प्रतीक्षा में विश्वास, अंधकार में प्रकाश।

दर्पण

हम भी यही प्रार्थना करते हैं, पर मानने में शर्माते हैं। ऑफिस में जहाँ ईमानदारी हारती है और चापलूसी जीतती है। परिवार में जहाँ एक रिश्तेदार वर्षों से अन्याय करता आ रहा है और कुछ नहीं बदलता। समाचारों में जहाँ हत्यारे बच निकलते हैं। हम भी कहते हैं, "कब तक?" और फिर सबसे कठिन बात: जब परमेश्वर उत्तर देते हैं, तो वह उत्तर हमारी अपेक्षा से बड़ा और अजनबी होता है। कभी-कभी उनका उत्तर हमारी नौकरी छूटना है, बीमारी है, कोई ऐसा टूटना है जो हमें लगता है और भी बड़ा अन्याय है। हबक्कूक हमें सिखाता है कि उत्तर से असहमत होना अविश्वास नहीं, बल्कि गहरे विश्वास का चिन्ह हो सकता है, बशर्ते हम बात करना बंद न करें।

पहचान

हबक्कूक शायद यहोयाकीम के राज्यकाल में लिख रहा है, लगभग 605 ईसा पूर्व के आसपास। योशिय्याह का सुधार खत्म हो चुका है, यहूदा फिर से मूर्तिपूजा और अन्याय में डूब गया है। पहले सुननेवाले वे लोग थे जो मंदिर में आराधना तो करते थे, पर बाजारों में गरीबों को कुचलते थे। जब उन्होंने यह सुना कि कसदी, यानी बाबेल के लोग, आ रहे हैं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई होगी। ये वही लोग थे जो अश्शूर को हराकर उस समय की महाशक्ति बन चुके थे। नबी उनको सांत्वना नहीं, आईना दे रहा है। और साथ ही, उन थोड़े धर्मी लोगों को जो सचमुच परमेश्वर की प्रतीक्षा में थे, वह यह भी कह रहा है कि उनकी पीड़ा परमेश्वर से छिपी नहीं है।

संदर्भ

सातवीं शताब्दी के अंत का पश्चिमी एशिया एक उथल-पुथल में था। अश्शूर का साम्राज्य गिर रहा था, मिस्र और बाबेल एक-दूसरे से टकरा रहे थे, और छोटा यहूदा इन बड़ी शक्तियों के बीच पिस रहा था। कर्कमीश की लड़ाई (605 ईसा पूर्व) में नबूकदनेस्सर ने मिस्र को हराया और तब यहूदा पर उसकी छाया गिरी। इसी दौर में दानिय्येल और उसके साथियों को बंधुआ बनाकर ले जाया गया। हबक्कूक इस राजनीतिक भूकंप को ईश्वरीय दृष्टि से देख रहा है। पद 11 का वाक्य, "उनका बल ही उनका देवता है", कसदियों की संस्कृति का सटीक वर्णन है, जहाँ सैन्य विजय स्वयं आराधना का विषय बन गई थी।

एक विवरण

पद 16 पर रुकिए: "वह अपने जाल के सामने बलि चढ़ाता और अपने महाजाल के आगे धूप जलाता है।" यह चित्र भयानक भी है और सच्चा भी। कसदी मछुए जैसे हैं जो मनुष्यों को समुद्र की मछलियों की तरह पकड़ लेते हैं, पर उससे भी विचित्र बात यह है कि वे अपने ही औजार की पूजा करते हैं। जाल उनका देवता बन गया है, क्योंकि जाल ही उनकी समृद्धि लाता है। यह केवल प्राचीन बाबेल की तस्वीर नहीं है। हर वह चीज जो हमें सफलता देती है, वेतन का चेक, हमारी डिग्री, हमारा नेटवर्क, धीरे-धीरे "जाल" बन सकती है जिसके सामने हम धूप जलाते हैं। हबक्कूक इस बुतपरस्ती को नाम देता है। और परमेश्वर का उत्तर, अगले अध्याय में, यही होगा कि ऐसी हर मूर्ति अंत में गिरेगी।

चिंतन

*आपकी अपनी "कब तक?" वाली प्र

Habakkuk में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Joel, Micah and Habakkuk

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Jonah, Nahum, Habakkuk, Zephaniah

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Habakkuk 1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

हबक्कूक 1 का क्या अर्थ है?
हबक्कूक नबी परमेश्वर के सामने चिल्ला उठता है: चारों ओर उपद्रव, लूट-पाट, अन्याय, और आप चुप हैं। परमेश्वर उत्तर देते हैं, पर ऐसा उत्तर जो घाव को और गहरा करता है: मैं कसदियों को उठाने पर हूँ, वह क्रूर जाति जिनका बल ही उनका देवता है। तब नबी फिर पूछता है: हे पवित्र परमेश्वर, आप की आँखें तो ऐसी शुद्ध हैं कि बुराई देख नहीं सकतीं, फिर आप विश्वासघातियों को क्यों देखते रहते हैं जब वे निर्दोष को निगल जाते हैं?
हबक्कूक 1 किस विषय में है?
यह अध्याय एक विश्वासी की सबसे कठिन प्रार्थना है: वह प्रार्थना जो उत्तर पाकर भी संतुष्ट नहीं होती। हबक्कूक की पहली शिकायत भीतरी है, यहूदा के भीतर का अन्याय। परमेश्वर का उत्तर बाहरी है, और भयानक है, कि इस अन्याय का इलाज एक और भी क्रूर जाति के हाथों होगा। यहाँ धर्मशास्त्र एक ऐसे प्रश्न को खोलता है जिसे हम प्रायः दबा देते हैं: क्या परमेश्वर बुराई को दूर करने के लिये और बड़ी बुराई का उपयोग कर सकते हैं?
हबक्कूक 1 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पद 5 को प्रेरितों 13:41 में पौलुस पिसिदिया के अन्ताकिया में उठाता है। जो चेतावनी कसदियों के आक्रमण के बारे में थी, वह अब मसीह के सुसमाचार को अस्वीकार करने की चेतावनी बन जाती है, क्योंकि परमेश्वर के "अविश्वसनीय काम" का चरम बिन्दु क्रूस है, जहाँ भी परमेश्वर ने बुराई का उपयोग करके सबसे बड़ी भलाई की। हबक्कूक की तड़प, "आप उद्धार नहीं करेंगे?
हबक्कूक 1 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
हम भी यही प्रार्थना करते हैं, पर मानने में शर्माते हैं। ऑफिस में जहाँ ईमानदारी हारती है और चापलूसी जीतती है। परिवार में जहाँ एक रिश्तेदार वर्षों से अन्याय करता आ रहा है और कुछ नहीं बदलता। समाचारों में जहाँ हत्यारे बच निकलते हैं। हम भी कहते हैं, "कब तक?" और फिर सबसे कठिन बात: जब परमेश्वर उत्तर देते हैं, तो वह उत्तर हमारी अपेक्षा से बड़ा और अजनबी होता है। कभी-कभी उनका उत्तर हमारी नौकरी छूटना है, बीमारी है, कोई ऐसा टूटना है जो हमें लगता है और भी बड़ा अन्याय है। हबक्कूक हमें सिखाता है कि उत्तर से असहमत होना अविश्वास नहीं, बल्कि गहरे विश्वास का चिन्ह हो सकता है, बशर्ते हम बात करना बंद न करें।
हबक्कूक 1 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
हबक्कूक शायद यहोयाकीम के राज्यकाल में लिख रहा है, लगभग 605 ईसा पूर्व के आसपास। योशिय्याह का सुधार खत्म हो चुका है, यहूदा फिर से मूर्तिपूजा और अन्याय में डूब गया है। पहले सुननेवाले वे लोग थे जो मंदिर में आराधना तो करते थे, पर बाजारों में गरीबों को कुचलते थे। जब उन्होंने यह सुना कि कसदी, यानी बाबेल के लोग, आ रहे हैं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई होगी। ये वही लोग थे जो अश्शूर को हराकर उस समय की महाशक्ति बन चुके थे। नबी उनको सांत्वना नहीं, आईना दे रहा है। और साथ ही, उन थोड़े धर्मी लोगों को जो सचमुच परमेश्वर की प्रतीक्षा में थे, वह यह भी कह रहा है कि उनकी पीड़ा परमेश्वर से छिपी नहीं है।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Habakkuk 1 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

हे यहोवा, मैं कब तक तुझे पुकारता रहूँगा, और तू न सुनेगा?" हबक्कूक परमेश्वर से मुँह नहीं मोड़ता, वह उसी से शिकायत करता है। उसकी प्रार्थना में गुस्सा भी है और भरोसा भी। ध्यान दे, यह सवाल बाइबल में लिखा गया, मिटाया नहीं गया। तेरा थका हुआ "कब तक" भी परमेश्वर के सामने रखे जाने लायक है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 9

पिता, जब हिंसा आँधी की तरह बढ़ती आती है और लोग रेत के कणों जैसे बटोरे जाते हैं, मेरा मन डर से भर जाता है। जो कुचले गए हैं उन्हें थाम ले, और मुझे भी सिखा कि इस सब के बीच तुझ पर भरोसा कैसे रखूँ।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 4

पिता, धन्यवाद कि जब "व्यवस्था ढीली हो गई और न्याय कभी नहीं निकलता," तब भी आप सुनते हैं। धन्यवाद कि हबक्कूक की तरह हम अपनी शिकायत आपके सामने खुलकर रख सकते हैं, और आप धर्मी को घेरने वाली दुष्टता को देख रहे हैं। आपका न्याय कभी उलटा नहीं होता।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 13

धन्यवाद, पिता, कि तेरी आँखें ऐसी शुद्ध हैं कि तू बुराई को देख नहीं सकता। जो अन्याय दुनिया अनदेखा कर देती है, वह तेरी दृष्टि से नहीं छूटता। धन्यवाद कि तू हमारे कठिन सवाल भी सुनता है और हमें चुप रहने को नहीं कहता, बल्कि अपने सामने खड़े होने देता है।

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