यशायाह 31
पाठ
यशायाह देखता है कि यहूदा के दूत दक्षिण की ओर, मिस्र की ओर, जा रहे हैं, ताकि अश्शूर के विरुद्ध घोड़े और रथ मोल ले सकें, और उस पर वह "हाय" पुकारता है: मिस्री मनुष्य ही हैं, परमेश्वर नहीं; उनके घोड़े माँस हैं, आत्मा नहीं। फिर दृश्य पलटता है: यहोवा स्वयं सिय्योन पर उतरेंगे, एक ऐसे सिंह की तरह जो चरवाहों के शोर से नहीं डरता, और साथ ही पंख फैलाई हुई चिड़िया की तरह जो अपने घोंसले पर मँडराती है। अश्शूर उस तलवार से गिरेगा जो किसी मनुष्य की नहीं। और बीच में एक पुकार खड़ी है: लौट आओ, उसी की ओर, जिसके विरुद्ध तुमने बलवा किया है।
मर्म
कल्पना कीजिए वह काफ़िला: सोने-चाँदी से लदे खच्चर, नेगेब की तपती रेत, और यरूशलेम में बैठे मंत्री जो हिसाब लगा रहे हैं कि कितने रथ चाहिए। यह मूर्खता नहीं थी, यह अच्छी कूटनीति थी। यशायाह की चोट ठीक यहीं पड़ती है: पाप हमेशा बेवकूफ़ी जैसा नहीं दिखता, कई बार वह समझदारी जैसा दिखता है। पद 2 में एक तीखा व्यंग्य है, "वह भी बुद्धिमान है" , मानो परमेश्वर कहें: तुम्हारे रणनीतिकारों के पास योजनाएँ हैं, मेरे पास भी हैं, और मैं अपने वचन नहीं टालता। असली विभाजन-रेखा माँस और आत्मा के बीच खिंची है। जो कुछ श्वास लेता है और मर जाता है, वह सुरक्षा नहीं दे सकता, चाहे वह कितना भी बलवान दिखे।
सूत्र
पद 4 और 5 की दो छवियाँ जानबूझकर टकराती हैं। सिंह अपने शिकार पर गुर्राता है और चरवाहों की भीड़ से नहीं दबता; चिड़िया अपने पंख फैलाकर घोंसले पर मँडराती है। परमेश्वर सिय्योन पर "युद्ध करने को उतरेगा" , और वही उतरना बचाव है। यह वही दोहरा स्वर है जो बाद में देहधारण में सुनाई देता है: यहूदा का सिंह, जो एक वधशाला के मेम्ने की तरह चलता है। और वह मुक्ति "बिन छूए ही" आती है, बिना यहूदा की तलवार के। यही पूरे बाइबल की धारा है: उद्धार वह चीज़ है जो हमें दी जाती है, कमाई नहीं जाती। यीशु मसीह के क्रूस पर भी बचाने वालों की भीड़ नहीं थी; परमेश्वर ने अकेले काम किया।
दर्पण
आपका मिस्र कहाँ है? वह जगह जहाँ आप संकट में सबसे पहले फ़ोन करते हैं, इससे पहले कि आप घुटने टेकें। शायद वह बचत खाता है, या वह प्रभावशाली परिचित, या नौकरी में वह सुरक्षा-जाल जिसे आप वर्षों से बुन रहे हैं। ध्यान दीजिए, यशायाह यह नहीं कहता कि रथ बेकार हैं; वह कहता है कि वे परमेश्वर नहीं हैं। समस्या साधनों में नहीं, आसरे में है। और पद 1 का सबसे चुभने वाला हिस्सा अंत में है: "पर इस्राएल के पवित्र की ओर दृष्टि नहीं करते।" पाप यहाँ सक्रिय विद्रोह से ज़्यादा एक चूक है, एक नज़र जो कभी ऊपर उठी ही नहीं। बीमारी की रिपोर्ट, बच्चे की चिंता, दफ़्तर की राजनीति: हम सलाह इकट्ठा करते हैं और प्रार्थना बाद के लिए बचा रखते हैं।
पृष्ठभूमि
701 ईसा पूर्व के आसपास अश्शूर की सेना लाकीश तक पहुँच चुकी थी और यहूदा के छियालीस नगर उजड़ चुके थे। यरूशलेम में लोग जानते थे कि दीवार के बाहर क्या हो रहा है, उन्होंने शरणार्थियों को देखा था। ऐसे में मिस्र जाना डूबते हुए आदमी का तिनका पकड़ना था, और उन्हें यह ताना सुनना पड़ा कि उनका सहारा "माँस" है। "इस्राएल का पवित्र" यशायाह का प्रिय नाम है, और यह ठंडा नहीं, डरावना है: वह परमेश्वर जो अलग है, जिसे खरीदा नहीं जा सकता। पद 9 की छवि उनके लिए स्पष्ट थी, यहोवा की "अग्नि" और "भट्ठा" सिय्योन में मन्दिर की वेदी है, जो अब शत्रु के लिए भस्म करने वाली आग बन जाती है।
प्रश्न
तब क्या हम मूर्ख बनकर बैठे रहें? यदि परमेश्वर बचाते हैं, तो क्या हमें डॉक्टर, बीमा, या तैयारी नहीं करनी चाहिए? पाठ इसका आसान उत्तर नहीं देता, और मैं उसे चिकना नहीं करूँगा। हिजकिय्याह ने सुरंग खोदी और दीवारें मज़बूत कीं, और यशायाह ने उस पर हाय नहीं पुकारी। अंतर सूक्ष्म है और इसीलिए ख़तरनाक: वही काम विश्वास से भी किया जा सकता है और अविश्वास से भी। कठिनाई यह है कि हम अपने भीतर से यह अंतर हमेशा नहीं पहचान पाते। शायद एकमात्र ईमानदार जाँच यह है: जब वह सहारा टूट जाए, तो क्या मेरा परमेश्वर भी टूट जाता है? यदि हाँ, तो वह सहारा नहीं, मिस्र था।
अंतर्पाठ
भजन 20 में यही स्वर गूँजता है, कि कुछ लोग रथों पर और कुछ घोड़ों पर भरोसा रखते हैं, पर हम अपने परमेश्वर के नाम का स्मरण करेंगे; यशायाह उसी पुरानी आराधना की पंक्ति को राजनीति के कमरे में ले आता है। और पंखों की छवि व्यवस्थाविवरण 32 से आती है, जहाँ परमेश्वर उकाब की तरह अपने बच्चों पर मँडराते हैं, यानी यरूशलेम की रक्षा कोई नई कृपा नहीं, वही निर्गमन वाली कृपा है जो अब भी जागी हुई है। दोनों जगह बात एक है: छुड़ाने वाला वही है जो पहले भी छुड़ा चुका है। इसलिए पद 6 की पुकार, "उसी की ओर फिरो", सज़ा की धमकी नहीं, घर लौटने का निमंत्रण है।
चिंतन
आपके जीवन में इस समय वह "घोड़ा और रथ" क्या है, जिसकी गिनती करके आप रात को चैन से सोते हैं?
पद 6 कहता है "उसी की ओर फिरो" , उसी की ओर जिसके विरुद्ध बलवा किया गया। क्या आपके लौटने में कोई ऐसी जगह है जहाँ आपको लगता है कि परमेश्वर आपका स्वागत नहीं करेंगे?
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हे इस्राएलियों, जिसके विरुद्ध तुमने बड़ा बलवा किया है उसकी ओर फिरो।"
इस्राएल मदद के लिए मिस्र भागा था, परमेश्वर को छोड़कर घोड़ों और रथों पर भरोसा किया। और फिर भी बुलावा यही है: उसी के पास लौट आओ जिसे तुमने ठुकराया।
सोच, तू किससे मुँह मोड़कर आया है? वही तुझे पुकार रहा है। लौटने की जगह कोई और नहीं, वही है।
अश्शूर की ताकत के पीछे भी कोई "चट्टान" थी, कोई भरोसा, कोई सहारा। पर यशायाह कहता है, "उसकी चट्टान भी भय के मारे जाती रहेगी।" जिस पर तू टिका है, क्या वह डरने पर टिक पाएगा? यहोवा की आग सिय्योन में है, वही आग शत्रु को भस्म करती है और अपनों को शुद्ध। सोच, तेरी चट्टान कौन है।
यशायाह यहूदा से कह रहा है कि वे मिस्र के घोड़ों पर भरोसा छोड़ें। और फिर यह वचन आता है: "क्योंकि उस समय तुम में से हर एक अपनी चाँदी और सोने की मूरतों को जिन्हें तुम्हारे हाथों ने पाप करने के लिये बनाया है, फेंक देगा।"
गौर कर, मूरतें अपने ही हाथों से बनी थीं। जिस चीज़ पर तू टिका है, कहीं वह तेरी ही बनाई हुई तो नहीं? फेंकने का दिन आता है। आज ही क्यों नहीं?
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