बाइबल व्याख्या

कुलुस्सियों 1:15

बाइबल

पाठ

लुकुस नदी की घाटी के एक घर में, दीये की रोशनी में, कोई खड़ा होकर पौलुस की चिट्ठी पढ़ रहा है। अभी-अभी उसने पढ़ा था कि परमेश्वर ने "हमें अंधकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया"। और फिर, बिना किसी चेतावनी के, वाक्य की चाल बदल जाती है। गद्य अचानक गीत बन जाता है: "पुत्र तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्टि में पहलौठा है।" जो अदृश्य है, वह दिखाई दे गया; और जो सृष्टि से पहले है, वह सारी सृष्टि पर अधिकार रखता है। दो वाक्यांश, और पूरा ब्रह्मांड अपनी धुरी बदल लेता है।

मूल बात

सोचिए उस सुनने वाले के बारे में। वह यहूदी परंपरा से आया हो या मूर्तिपूजक मंदिरों से, एक बात उसे पक्की मालूम थी: परमेश्वर को कोई देख नहीं सकता। वह पर्दे के पीछे है, बादल में, धुंध में। और अब उससे कहा जा रहा है कि वह पर्दा हट गया है, और उसके पीछे एक चेहरा है, एक गलील का बढ़ई, जिसे रोमियों ने क्रूस पर टाँग दिया था। "प्रतिरूप" शब्द यहाँ नकल या छाया नहीं है। यह वह है जो मूल को सचमुच सामने ले आता है। यीशु परमेश्वर के बारे में सूचना नहीं देते; वे परमेश्वर की उपस्थिति हैं। इसका अर्थ यह भी है कि परमेश्वर के स्वभाव के बारे में हमारे मन में जो भी अंदाज़े हैं, वे सब उस एक चेहरे के सामने जाँचे जाएँगे।

जोड़ने वाला सूत्र

"प्रतिरूप" सुनते ही एक यहूदी कान उत्पत्ति के पहले पन्ने पर लौट जाता है, जहाँ मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में रचा गया। वह स्वरूप टूटा, धुँधला हुआ, पर मिटा नहीं। पौलुस कह रहा है कि जो आदम में धुँधला पड़ा था, वह मसीह में पूरी चमक के साथ खड़ा है। और "पहलौठा" शब्द इस्राएल की स्मृति में जन्म-क्रम से ज़्यादा उत्तराधिकार और पद का शब्द है; भजन 89 में दाऊद को परमेश्वर "पहलौठा" ठहराते हैं, यानी राजाओं में सबसे ऊँचा, जबकि दाऊद अपने घर में सबसे छोटा था। तो यह पद कहता है: सृष्टि की सारी संपत्ति, सारा वारिस-हक़, सारा अधिकार पुत्र का है। अगले ही पद में पौलुस इसे खोलकर रख देते हैं: सिंहासन, प्रभुताएँ, प्रधानताएँ, सब उसी के लिये सृजी गईं।

आईना

कुलुस्से के लोग डरे हुए थे। हवा में देवदूतों, तारों, अनदेखी शक्तियों की बातें थीं, और सवाल यह था कि इन सबको सँभालने के लिए और क्या-क्या करना पड़ेगा। आपका डर शायद अलग नाम रखता है: बैंक का बैलेंस, बच्चे का भविष्य, वह रिपोर्ट जो डॉक्टर ने अभी तक नहीं दी, दफ़्तर का वह आदमी जिसके मूड पर आपका महीना टिका है। हम सब किसी न किसी "प्रधानता" के आगे झुकते हैं। यह पद पूछता है: आपकी दुनिया के केंद्र में असल में कौन बैठा है? और यह भी: क्या आप परमेश्वर की एक ऐसी तस्वीर लेकर चल रहे हैं जो मसीह के चेहरे से मेल नहीं खाती, कोई कठोर हिसाब रखने वाला, जिसे खुश करना कभी पूरा नहीं होता?

पृष्ठभूमि

कुलुस्से कोई बड़ा शहर नहीं था, बल्कि ढलान पर उतरता एक पुराना कस्बा, जिसकी रौनक पड़ोसी लौदीकिया छीन चुका था। पौलुस वहाँ कभी गए नहीं थे; कलीसिया इपफ्रास के प्रचार से बनी थी, और पौलुस स्वयं क़ैद में हैं। यानी यह पद किसी सुरक्षित मंच से नहीं, बल्कि ज़ंजीरों में से लिखा गया है। और वहाँ रोमी हवा में सम्राट को "देवता का पुत्र" कहा जाता था, उसकी मूर्ति हर चौक में खड़ी थी, उसका "प्रतिरूप" सिक्कों पर चलता था। इस माहौल में यह कहना कि असली प्रतिरूप एक सूली चढ़ा यहूदी है, केवल धर्मशास्त्र नहीं था; यह राजनीतिक साहस था।

प्रश्न

"पहलौठा" शब्द सदियों से बहस का कारण रहा है। अगर वह सृष्टि में पहलौठा है, तो क्या वह भी बनाया हुआ है, बस सबसे पहला? यह सवाल टालने लायक नहीं है, और पौलुस इसे टालते भी नहीं। अगला पद ही कहता है कि "उसी में सारी वस्तुओं की सृष्टि हुई", यानी जो रचने वाला है वह रची हुई चीज़ों की सूची में नहीं गिना जा सकता। फिर भी बेचैनी बची रहती है, और शायद रहनी चाहिए। क्योंकि पौलुस एक ऐसे रहस्य के किनारे खड़े हैं जहाँ भाषा हाँफने लगती है: अनंत परमेश्वर, और एक शरीर जो भूख और थकान जानता था। इस रहस्य को सुलझाने की जल्दी अक्सर उसे छोटा कर देती है।

मुख्य पात्र

इस पद का पात्र नाम से नहीं, पद से पुकारा गया है: "पुत्र"। यह उसकी पहचान का सबसे गहरा तल है, कि वह पिता के साथ है, पिता से आया है, पिता को दिखाता है। और ध्यान दीजिए कि पौलुस यह महिमा-गान क्षमा की बात के तुरंत बाद रखते हैं। जिसमें "छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा" मिलती है, वही सृष्टि का पहलौठा है। यानी वह ऊँचाई जो हमें कुचल सकती थी, वह झुककर हमें उठाती है। यह परमेश्वर का स्वभाव है: सारा अधिकार हाथ में, और फिर भी क्रूस तक जाने वाला रास्ता चुना हुआ। महिमा और दया यहाँ दो अलग विषय नहीं, एक ही चेहरा हैं।

चिंतन

आप परमेश्वर की जो तस्वीर मन में लेकर प्रार्थना करते हैं, वह यीशु के चेहरे से कहाँ मेल नहीं खाती?

इस हफ़्ते कौन सी "प्रधानता" आपके फ़ैसलों पर राज कर रही थी, और उसे पुत्र के अधीन रखने का पहला ठोस क़दम क्या होगा?

Colossians में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Colossians and Philemon

Dick Lucas

Christ above everything: fullness in him against every substitute.

Paul For Everyone: The Prison Letters

N.T. Wright

Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.

Colossians and Philemon: An Introduction and Commentary

N.T. Wright

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Colossians and Philemon

David Garland

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Colossians 1:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

कुलुस्सियों 1:15 का क्या अर्थ है?
लुकुस नदी की घाटी के एक घर में, दीये की रोशनी में, कोई खड़ा होकर पौलुस की चिट्ठी पढ़ रहा है। अभी-अभी उसने पढ़ा था कि परमेश्वर ने "हमें अंधकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया"। और फिर, बिना किसी चेतावनी के, वाक्य की चाल बदल जाती है। गद्य अचानक गीत बन जाता है: "पुत्र तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्टि में पहलौठा है।" जो अदृश्य है, वह दिखाई दे गया; और जो सृष्टि से पहले है, वह सारी सृष्टि पर अधिकार रखता है। दो वाक्यांश, और पूरा ब्रह्मांड अपनी धुरी बदल लेता है।
कुलुस्सियों 1:15 किस विषय में है?
"प्रतिरूप" सुनते ही एक यहूदी कान उत्पत्ति के पहले पन्ने पर लौट जाता है, जहाँ मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में रचा गया। वह स्वरूप टूटा, धुँधला हुआ, पर मिटा नहीं। पौलुस कह रहा है कि जो आदम में धुँधला पड़ा था, वह मसीह में पूरी चमक के साथ खड़ा है। और "पहलौठा" शब्द इस्राएल की स्मृति में जन्म-क्रम से ज़्यादा उत्तराधिकार और पद का शब्द है; भजन 89 में दाऊद को परमेश्वर "पहलौठा" ठहराते हैं, यानी राजाओं में सबसे ऊँचा, जबकि दाऊद अपने घर में सबसे छोटा था। तो यह पद कहता है: सृष्टि की सारी संपत्ति, सारा वारिस-हक़, सारा अधिकार पुत्र का है। अगले ही पद में पौलुस इसे खोलकर रख देते हैं: सिंहासन, प्रभुताएँ, प्रधानताएँ, सब उसी के लिये सृजी गईं।
कुलुस्सियों 1:15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
कुलुस्से कोई बड़ा शहर नहीं था, बल्कि ढलान पर उतरता एक पुराना कस्बा, जिसकी रौनक पड़ोसी लौदीकिया छीन चुका था। पौलुस वहाँ कभी गए नहीं थे; कलीसिया इपफ्रास के प्रचार से बनी थी, और पौलुस स्वयं क़ैद में हैं। यानी यह पद किसी सुरक्षित मंच से नहीं, बल्कि ज़ंजीरों में से लिखा गया है। और वहाँ रोमी हवा में सम्राट को "देवता का पुत्र" कहा जाता था, उसकी मूर्ति हर चौक में खड़ी थी, उसका "प्रतिरूप" सिक्कों पर चलता था। इस माहौल में यह कहना कि असली प्रतिरूप एक सूली चढ़ा यहूदी है, केवल धर्मशास्त्र नहीं था; यह राजनीतिक साहस था।
कुलुस्सियों 1:15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इस पद का पात्र नाम से नहीं, पद से पुकारा गया है: "पुत्र"। यह उसकी पहचान का सबसे गहरा तल है, कि वह पिता के साथ है, पिता से आया है, पिता को दिखाता है। और ध्यान दीजिए कि पौलुस यह महिमा-गान क्षमा की बात के तुरंत बाद रखते हैं। जिसमें "छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा" मिलती है, वही सृष्टि का पहलौठा है। यानी वह ऊँचाई जो हमें कुचल सकती थी, वह झुककर हमें उठाती है। यह परमेश्वर का स्वभाव है: सारा अधिकार हाथ में, और फिर भी क्रूस तक जाने वाला रास्ता चुना हुआ। महिमा और दया यहाँ दो अलग विषय नहीं, एक ही चेहरा हैं।
कुलुस्सियों 1:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
इस हफ़्ते कौन सी "प्रधानता" आपके फ़ैसलों पर राज कर रही थी, और उसे पुत्र के अधीन रखने का पहला ठोस क़दम क्या होगा?
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Colossians 1 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 2

पिता, तेरा अनुग्रह और तेरी शांति आज मेरे मन में उतर आए। जहाँ बेचैनी है, वहाँ तू ठहराव दे। और जैसे तू मुझे अपना कहता है, वैसे ही मैं अपने आसपास के लोगों को भी अपने परिवार की तरह देख सकूँ। तेरी कृपा ही मेरा सहारा है।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 5

पिता, धन्यवाद कि जो आशा तुमने मेरे लिये स्वर्ग में रख छोड़ी है, वह न मिटती है, न चुराई जा सकती है। धन्यवाद कि सुसमाचार के सत्य वचन के द्वारा मैंने उसे सुना और जाना। जब यहाँ सब कुछ हिलता है, तब भी वह आशा सुरक्षित है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 23

पिता, मुझे उस नींव पर टिके रहना सिखा जो तूने रखी है। जब हालात हिलाते हैं और मन डगमगाता है, तब मेरी पकड़ ढीली न पड़े। जो आशा तूने मुझे दी है, उसे मैं थकान में भी न छोड़ूँ, बल्कि हर दिन तेरी सच्चाई में गहरी जड़ पकड़ता जाऊँ।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से।"

पौलुस अपने नाम के आगे अपनी मेहनत नहीं, परमेश्वर की इच्छा रखता है। उसकी पहचान उसकी कमाई हुई नहीं, दी हुई है। और साथ में एक नाम और है, तीमुथियुस, बिना किसी बड़ी उपाधि के, बस "भाई"।

तू अपने नाम के आगे क्या लिखता है? और तेरे साथ खड़ा भाई कौन है?

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