यशायाह 53:5
पाठ
पाँचवाँ पद यशायाह 53 के मोड़ पर खड़ा है। पिछले पद में लोग सोच रहे थे कि यह दुःखी पुरुष अपने ही किसी अपराध के कारण "परमेश्वर का मारा-कूटा" है। अब वह भ्रम टूटता है: "वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया।" उसकी पीड़ा उसका दण्ड नहीं थी, हमारा था। और उसका परिणाम भी उलटा है: उसकी ताड़ना से हमारी शान्ति, उसके कोड़ों से हमारी चंगाई।
मूल बात
इस पद का पूरा भार दो छोटे शब्दों पर टिका है: "हमारे ही"। यशायाह यह नहीं कहता कि वह दास हमारे साथ दुःख उठाता है, न कि वह हमें दुःख सहना सिखाता है। वह कहता है कि वह हमारी जगह पर खड़ा हुआ। इब्रानी में जिस शब्द का अनुवाद "घायल" हुआ है, उसका अर्थ है छेदा जाना, आर-पार बेधा जाना; और "कुचला गया" का अर्थ है पीस दिया जाना। यह कोई प्रतीकात्मक चोट नहीं है। यहाँ परमेश्वर की पवित्रता को हल्का नहीं किया जाता, पाप को माफ़ करने योग्य छोटी भूल नहीं कहा जाता। अपराध का दण्ड चुकाया जाता है, केवल किसी दूसरे के शरीर पर। अनुग्रह मुफ़्त है, पर सस्ता नहीं।
बड़ी कहानी का सूत्र
इस्राएल के पास पहले से एक भाषा थी जिससे वे इसे समझ सकते थे: बलिदान। हर बार जब कोई याजक पशु के सिर पर हाथ रखता था, तब यह कहा जा रहा था कि दोष एक से दूसरे पर सरक सकता है। पद 10 इसे खुलकर कहता है: "जब वह अपना प्राण दोषबलि करे।" पर यहाँ पशु नहीं, एक व्यक्ति है; और वह चुप रहकर स्वेच्छा से जाता है। यही सूत्र यूहन्ना के मुँह में आता है जब वह यीशु को परमेश्वर का मेम्ना कहता है, और पौलुस के शब्दों में जब वह लिखता है कि मसीह हमारे अपराधों के लिये सौंपा गया और हमारे धर्मी ठहराए जाने के लिये जिलाया गया (रोमियों 4:25)। यशायाह 53 वह पुल है जिस पर होकर वेदी क्रूस तक पहुँचती है।
दर्पण
हम अपने पापों को श्रेणियों में बाँटना पसंद करते हैं: कुछ गम्भीर, कुछ केवल स्वभाव की बात। पर यह पद श्रेणियाँ नहीं जानता। जिस तीखे शब्द से आपने कल रात अपने जीवनसाथी को चुप कराया, जिस हिसाब में आपने चालाकी से थोड़ा घुमाव दिया, जिस सहकर्मी के बारे में आपने वह बात फैलाई जो आपको पक्की भी नहीं मालूम थी: यही "हमारे अधर्म के काम" हैं जिनके कारण वह कुचला गया। और साथ ही, यह पद उस थकान को भी छूता है जो आप अपने भीतर ढोते हैं, यह भावना कि आपको अपनी शान्ति खुद कमानी है। नहीं। "हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी।" शान्ति पहले ही खरीदी जा चुकी है।
आज एक काम कीजिए: कागज़ के एक टुकड़े पर अपना कोई एक ठोस पाप लिखिए, सामान्य शब्दों में नहीं बल्कि नाम और घटना के साथ। फिर ज़ोर से कहिए, "इसके कारण वह कुचला गया," और उस कागज़ को फाड़ दीजिए।
शास्त्र के भीतर गूँज
इस पद की सबसे साफ़ गूँज 1 पतरस 2:24 में सुनाई देती है, जहाँ पतरस लगभग यशायाह के शब्द दोहराता है: मसीह ने हमारे पापों को अपनी देह पर लेकर काठ पर उठा लिया, और उसके मार खाने से हम चंगे हुए। ध्यान दीजिए कि पतरस यह किन्हें लिखता है: दुःख भोगते, अन्याय सहते विश्वासियों को। वह यशायाह 53 को सान्त्वना और आदर्श दोनों बनाता है। पद 6 इसे और गहरा करता है: "यहोवा ने हम सभी के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।" यहाँ सक्रिय हाथ परमेश्वर का है, रोमी सिपाहियों का नहीं। और इसी से एक तनाव उठता है: व्यवस्था कहती है कि पिता के पाप के लिये पुत्र न मारा जाए, फिर यहाँ निर्दोष क्यों? उत्तर पद 10 और 12 में छिपा है: यह थोपा हुआ दण्ड नहीं, उण्डेला गया प्राण है।
कठिन प्रश्न
"तो भी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले" (पद 10) पढ़कर मन सिहर उठता है। क्या परमेश्वर को अपने निर्दोष दास को पीसने में आनन्द आया? यह वाक्य सरल नहीं होता चाहे हम कितना भी उसे नरम करें। जो बात मुझे सन्तोष देती है, वह यह नहीं कि पहेली सुलझ जाती है, बल्कि यह कि दास अनिच्छुक बलि नहीं है। वह "अपना मुँह न खोला" और "अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया।" पिता की इच्छा और पुत्र की इच्छा यहाँ टकराती नहीं, मिलती हैं। फिर भी यह आराम का सत्य नहीं है। क्रूस के सामने खड़े होकर हम व्याख्या से अधिक चुप्पी सीखते हैं।
पहले सुननेवाले
बेबीलोन की बँधुआई से लौटे या उसमें बैठे लोग इसे सुनते थे: टूटा हुआ राष्ट्र, गिरा हुआ मन्दिर, यह प्रश्न कि क्या परमेश्वर ने हमें छोड़ दिया। उनके लिये यह "कुचला गया" कोई अनजानी भाषा नहीं थी; वे स्वयं कुचले गए थे। पद 1 का प्रश्न, "जो समाचार हमें दिया गया, उसका किसने विश्वास किया?" उनकी थकी हुई आत्मा से निकला है। उन्होंने पहले सोचा था कि यह दास इस्राएल ही है। पर धीरे-धीरे यह स्पष्ट होता जाता है कि वह जाति के बदले खड़ा एक व्यक्ति है, जो उस दण्ड को उठाता है जिसे जाति सहन नहीं कर सकी। यही आशा उन्हें दी गई: परमेश्वर ने त्याग नहीं दिया, उन्होंने उठा लिया।
चिंतन के प्रश्न
"हमारे ही अपराधों के कारण" पढ़ते समय आपका मन किस अपराध पर सबसे जल्दी रुकता है, और किस पर आप रुकना नहीं चाहते?
आप अपनी शान्ति किन तरीकों से खुद कमाने की कोशिश करते हैं, जबकि यह पद कहता है कि वह मूल्य पहले ही चुकाया जा चुका है?
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Isaiah 53:5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यशायाह 53:5 का क्या अर्थ है?
यशायाह 53:5 किस विषय में है?
यशायाह 53:5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यशायाह 53:5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यशायाह 53:5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Isaiah 53 में आपको क्या स्पर्श करता है?
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