यिर्मयाह 9
पाठ
यिर्मयाह चाहता है कि उसका सिर पानी और आँखें आँसुओं का सोता बन जाएँ, या फिर वह जंगल की किसी सराय में जाकर अपने ही लोगों से छिप जाए। कारण साफ है: यहूदा में भाषा टूट चुकी है, जीभ झूठ के लिए तनी हुई धनुष है, भाई भाई पर भरोसा नहीं कर सकता। परमेश्वर कहते हैं कि वे इस प्रजा को तपाकर परखेंगे; पहाड़ जल जाएँगे, यरूशलेम गीदड़ों का बसेरा होगा, और मृत्यु खिड़कियों से होकर महलों में घुस आएगी। अध्याय के अन्त में अचानक स्वर बदलता है: बुद्धि, वीरता और धन पर घमण्ड करना छोड़ो; घमण्ड इस एक बात पर करो कि तुम उस यहोवा को जानते हो जो करुणा, न्याय और धार्मिकता करते हैं।
मर्म
पूरे अध्याय की धुरी एक ही वाक्य है: "वे मुझ को जानते ही नहीं।" ध्यान दें, यह अज्ञान बौद्धिक नहीं है; यहूदा के लोग मन्दिर जानते थे, व्यवस्था की चर्चा करते थे। परमेश्वर को न जानना यहाँ इस रूप में दिखता है कि पड़ोसी से बोला गया वाक्य भरोसे के लायक नहीं रहा। जहाँ परमेश्वर सचमुच जाना नहीं जाता, वहाँ समाज का सबसे नाज़ुक हिस्सा, भाषा, सबसे पहले सड़ता है। और परमेश्वर इसका उत्तर पद 24 में देते हैं: मुझे जानने का अर्थ यह जानना है कि मैं "करुणा, न्याय और धार्मिकता के काम" करता हूँ। परमेश्वर का ज्ञान कोई निजी अनुभव नहीं, बल्कि उस चरित्र में साझेदारी है जो सड़कों और अदालतों में दिखता है।
मूल सूत्र
पद 23 और 24 बाइबल में यहीं नहीं रुकते। पौलुस इन्हें उठाकर कुरिन्थ की उस कलीसिया के सामने रखते हैं जो वाक्पटुता और हैसियत पर फूली हुई थी: "जो घमण्ड करे वह प्रभु में घमण्ड करे" (1 कुरिन्थियों 1:31)। पौलुस के लिए क्रूस वही काम करता है जो यिर्मयाह की भविष्यवाणी करती है, यानी बुद्धिमान, बलवन्त और धनी को उनके आधार से उतार देना। और यिर्मयाह के आँसू भी अकेले नहीं रहते: सदियों बाद एक और भविष्यद्वक्ता यरूशलेम को देखकर रोता है और उसके उजड़ने की बात कहता है। यीशु मसीह में वह आँसू और वह न्याय एक ही व्यक्ति में मिल जाते हैं, और वहीं करुणा हारती नहीं, बल्कि स्वयं दण्ड उठा लेती है।
दर्पण
यह अध्याय हमारे उस हिस्से को छूता है जिसे हम शालीनता कहते हैं: "मुँह से तो एक दूसरे से मेल की बात बोलते हैं पर मन ही मन एक दूसरे की घात में लगे रहते हैं।" दफ़्तर की वह मीटिंग जहाँ आपने मुस्कुराकर सहमति दी और बाहर निकलकर उसी आदमी की छवि गिराई। परिवार का वह रिश्ता जहाँ फ़ोन पर सब ठीक है और भीतर हिसाब खुला पड़ा है। और घमण्ड की तीन सूचियाँ, बुद्धि, वीरता, धन, आज भी वही हैं: डिग्री, प्रभाव, बैंक बैलेंस। यिर्मयाह नहीं पूछता कि आप क्या मानते हैं, वह पूछता है कि आपकी जीभ किसकी सेवा करती है।
आज ही एक काम कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम काग़ज़ पर लिखिए जिससे आपने मीठा बोला पर मन में घात रखी, और उसी काग़ज़ को हाथ में लेकर ऊँचे स्वर में परमेश्वर से उसके भले के लिए प्रार्थना कीजिए।
एक बारीकी
पद 4 का "अड़ंगा मारना" हिन्दी में एक साधारण मुहावरा लगता है, पर इब्रानी में यहाँ आक़ब की क्रिया है, वही जड़ जिससे "याक़ोब" नाम बना है, यानी एड़ी पकड़नेवाला, लंगड़ी मारनेवाला। यिर्मयाह वस्तुतः कहता है: हर भाई याक़ोब-गिरी कर रहा है। यह अपने पूर्वज के नाम पर तंज़ है। उत्पत्ति में एसाव कराहता है कि याकूब ने उसे दो बार छला; परमेश्वर ने फिर उसी छली को अपने अनुग्रह से इस्राएल बना दिया। अब पूरी जाति अपने नए नाम को छोड़कर पुराने नाम की आदत में लौट आई है। पाप यहाँ नई ईजाद नहीं, बल्कि वंश-परम्परा है, जैसे पद 14 कहता है कि बाल के पीछे चलना उन्हें उनके पुरखाओं ने ही सिखाया था।
कठिन प्रश्न
पद 7 में एक वाक्य है जिसे हम आसानी से पढ़ जाते हैं: "अपनी प्रजा के कारण मैं उनसे और क्या कर सकता हूँ?" यह सर्वशक्तिमान के मुँह से निकला विकल्पहीनता का स्वर है। और पद 16 इससे भी कड़ा है: तलवार तब तक पीछे पड़ी रहेगी "जब तक उनका अन्त न हो जाए।" यहाँ कोई बचे हुए शेष का वादा नहीं है, कोई राहत का पिछला दरवाज़ा नहीं। हम जानते हैं कि यिर्मयाह की पुस्तक आगे नई वाचा तक पहुँचती है, पर इस अध्याय में वह सान्त्वना उपलब्ध नहीं है, और उसे यहाँ जबरन डाल देना पाठ के साथ बेईमानी है। कभी परमेश्वन का प्रेम आग की तरह आता है, और तपाने वाला यह नहीं बताता कि सोना कितना बचेगा।
मुख्य पात्र
पद 1 में कौन रो रहा है, यह जानबूझकर धुँधला है, क्योंकि पद 10 में वही स्वर परमेश्वर का है: "मैं पहाड़ों के लिये रो उठूँगा और शोक का गीत गाऊँगा।" यही इस अध्याय का सबसे चौंकाने वाला चित्र है। जो न्यायाधीश दण्ड की घोषणा करता है, वही अपने फ़ैसले के परिणाम पर विलाप गीत गाता है। वह चराइयों के सन्नाटे को गिनता है, पशु-पक्षियों की अनुपस्थिति को नोट करता है, बच्चों और जवानों को सड़कों पर देखता है। परमेश्वर यहाँ ठंडा नहीं, आहत हैं; और उनका अन्तिम शब्द दण्ड नहीं बल्कि निमंत्रण है, कि लोग उन्हें उस रूप में जानें जो उन्हें प्रसन्न करता है: करुणा, न्याय, धार्मिकता।
चिंतन
आपकी जीभ पिछले हफ़्ते किसके लिए धनुष बनी, और किसके लिए आश्रय?
पद 24 के अनुसार परमेश्वर को जानने का प्रमाण आपके जीवन में कहाँ दिखाई देता है, और कहाँ आप अब भी बुद्धि, ताक़त या पैसे पर घमण्ड कर रहे हैं?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
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Jeremiah 9 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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यिर्मयाह 9 का क्या अर्थ है?
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Jeremiah 9 में आपको क्या स्पर्श करता है?
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