अय्यूब 16
पाठ
एलीपज बोल चुका है, और अय्यूब राख के ढेर पर से सिर उठाता है। उसका उत्तर थका हुआ है, कड़वा है: "ऐसी बहुत सी बातें मैं सुन चुका हूँ, तुम सब के सब निकम्मे शान्तिदाता हो।" फिर वह मित्रों से मुड़कर परमेश्वर की ओर देखता है और उन पर सीधा आरोप लगाता है, एक शिकारी, एक योद्धा, एक धनुर्धर की भाषा में। और ठीक उसी साँस में, जहाँ से हम कम से कम उम्मीद करते हैं, वह पुकारता है: "अब भी स्वर्ग में मेरा साक्षी है।"
मर्म
यही इस अध्याय का विस्फोट है। अय्यूब परमेश्वर पर मुकदमा चला रहा है और परमेश्वर से ही गवाही माँग रहा है। वह उन्हें आरोपी भी मानता है और एकमात्र न्यायी भी। धर्मशास्त्र की साफ-सुथरी पंक्तियाँ यहाँ टूट जाती हैं, और बाइबल इसे सुधारती नहीं, दर्ज करती है। अय्यूब दो चीज़ें छोड़ने से इनकार करता है: अपनी निर्दोषता ("मेरी प्रार्थना पवित्र है") और अपना परमेश्वर। मित्र उससे कहते हैं, एक छोड़ दो, तर्क आसान हो जाएगा। वह दोनों थामे रहता है, और इसी असहनीय तनाव में सच्चा विश्वास साँस लेता है। परमेश्वर ऐसे विश्वास से नाराज़ नहीं होते; अध्याय 42 में वे इसी अय्यूब को सही ठहराते हैं।
सूत्र
पद 10 पढ़िए और रुकिए: "अब लोग मुझ पर मुँह पसारते हैं, और मेरी नामधराई करके मेरे गाल पर थप्पड़ मारते, और मेरे विरुद्ध भीड़ लगाते हैं।" यह कोई छिपी भविष्यवाणी नहीं, पर यह वही आकार है जो सदियों बाद यरूशलेम के आँगन में पूरा हुआ: थूकना, थप्पड़, भीड़। बाइबल में निर्दोष पीड़ित का एक चेहरा बार-बार उभरता है, और अंत में वह चेहरा मसीह का निकलता है। और अय्यूब की सबसे गहरी तड़प, पद 21, कि कोई हो जो "परमेश्वर के सामने सज्जन का" मुकदमा लड़े, वह प्रार्थना खुली छोड़ दी गई थी। उत्तर एक सिद्धांत नहीं, एक व्यक्ति है, जो परमेश्वर के सामने हमारा पक्ष रखता है।
दर्पण
"निकम्मे शान्तिदाता" शब्द चुभते हैं क्योंकि हम अक्सर वही रहे हैं। अस्पताल के गलियारे में, अंतिम संस्कार के बाद, तलाक की खबर पर, हमने सही बात गलत समय पर कही। अय्यूब का ताना सटीक है: "यदि तुम्हारी दशा मेरी सी होती, तो मैं भी तुम्हारी सी बातें कर सकता।" सलाह देना सस्ता है जब दर्द किसी और का हो। दूसरी ओर, शायद आप अय्यूब की कुर्सी पर हैं, और आपको डर है कि परमेश्वर से नाराज़ होना अविश्वास है। यह अध्याय कहता है, नहीं; आँसू भी प्रार्थना का रूप हैं। आज एक काम कीजिए: जिस व्यक्ति का दुःख आप जानते हैं, उसे अभी एक संदेश भेजिए जिसमें कोई सलाह, कोई वचन, कोई समाधान न हो, केवल यह कि आप उसके साथ हैं।
अंतर्पाठ
"हे पृथ्वी, तू मेरे लहू को न ढाँपना" उत्पत्ति 4 की गूँज है, जहाँ हाबिल का लहू भूमि से पुकारता है। अय्यूब खुद को एक मारे गए निर्दोष की तरह देखता है जिसका मामला अभी बंद नहीं हुआ; ज़मीन उसे दफ़ना दे, पर उसकी दुहाई नहीं दफ़नाई जा सकती। दूसरी ओर, नया नियम उस "साक्षी ऊपर" को नाम देता है: यूहन्ना का पहला पत्र कहता है कि पिता के पास हमारा एक सहायक है, यीशु मसीह, धर्मी। अय्यूब अँधेरे में हाथ बढ़ाकर किसी को टटोल रहा था; इंजील उस हाथ को थाम लेती है। दोनों पाठ मिलकर दिखाते हैं कि अनसुनी पुकार परमेश्वर के जगत में कभी सचमुच अनसुनी नहीं रहती।
कठिन प्रश्न
अय्यूब कहता है, "परमेश्वर ने मुझे कुटिलों के वश में कर दिया।" हम पाठक जानते हैं कि पहले दो अध्यायों में हमला शैतान ने किया था। तो क्या अय्यूब गलत है? समस्या यह है कि परमेश्वर उसे बाद में सुधारते नहीं, बल्कि उसके मित्रों को फटकारते हैं। बाइबल यहाँ हमें एक असुविधाजनक सत्य के सामने बिठा देती है: परमेश्वर ने अनुमति दी, और अय्यूब के लिए अनुमति और कार्य में फ़र्क करना निरर्थक था। सस्ती राहत मत खोजिए। पवित्रशास्त्र इस प्रश्न को सुलझाता नहीं, उसे परमेश्वर की उपस्थिति में ले जाता है, और अंत में अय्यूब को उत्तर नहीं, स्वयं परमेश्वर मिलते हैं।
पृष्ठभूमि
यह दृश्य कुलपिताओं के युग जैसा है, शहर के बाहर राख के ढेर पर, जहाँ अशुद्ध और रोगी रहते थे। अय्यूब कभी नगर-द्वार पर बैठने वाला सम्मानित व्यक्ति था; अब वही द्वार उसके विरुद्ध भीड़ लगाता है। उस संसार में इज़्ज़त जीवन से कम कीमती नहीं थी, और सार्वजनिक अपमान सामाजिक मृत्यु था। टाट को खाल पर सी लेना शोक की चरम सीमा है, मानो मातम अब कपड़ा नहीं, दूसरी त्वचा हो। अदालत की भाषा भी यहीं से आती है: गवाह, मुकदमा, पड़ोसी के विरुद्ध दावा, ये सब द्वार पर होने वाली न्याय-सभा के शब्द हैं। और पद 22 याद दिलाता है कि पुनरुत्थान की स्पष्ट आशा अभी दूर है; समय कम है, और मार्ग एकतरफ़ा।
मनन के प्रश्न
किसके दुःख के सामने मैंने हाल ही में "सही" बात कही, जबकि चुप्पी अधिक सच्ची होती?
जब परमेश्वर मुझे विरोधी जैसे लगे, क्या मैं फिर भी उन्हीं को अपना साक्षी पुकार सकता हूँ, या मैं चुपचाप दूर हट जाता हूँ?
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Job 16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि जब लोग मुझे गलत समझते हैं और मेरे पास सफाई देने को शब्द नहीं बचते, तब भी मेरा साक्षी स्वर्ग में है और मेरा गवाह ऊँचे पर है। तू मेरे आँसुओं को देखता है, मेरी सच्चाई जानता है, और यही मेरे मन को चैन देता है।
मैंने अपनी खाल पर टाट को सी लिया है, और अपने सींग को मिट्टी में मिला दिया है।" गौर कर, अय्यूब ने टाट पहना नहीं, सी लिया। दुःख अब कपड़े की तरह उतारा नहीं जा सकता, वह त्वचा से जुड़ गया है। और सींग, यानी उसका सम्मान, धूल में। तू भी शायद ऐसे दिन जानता है। अय्यूब इसे छिपाता नहीं, परमेश्वर के सामने रखता है। तेरा दुःख भी छिपाने की चीज़ नहीं।
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