बाइबल व्याख्या

अय्यूब 19:28

बाइबल

पाठ

राख के ढेर पर बैठा अय्यूब अभी-अभी वह वाक्य बोल चुका है जिसने सदियों को थामे रखा है: "मेरा छुड़ानेवाला जीवित है।" और फिर, उसी साँस में, वह मुड़कर अपने तीनों मित्रों की ओर देखता है, जिनके चेहरे पत्थर हैं। वह उनकी फुसफुसाहट पकड़ लेता है, वह बात जो वे आपस में कहते हैं: इसके भीतर ही कहीं जड़ है, कोई छिपा पाप, इसीलिए तो हम इसे दबाते हैं। अय्यूब उनकी भाषा उन्हीं पर लौटा देता है: हाँ, मुझमें जड़ पाई जाती है, पर वह धर्म की जड़ है, तुम्हारे अनुमानों की नहीं। और फिर आती है चेतावनी: तलवार से डरो, क्योंकि न्याय होता है।

मूल बात

यह पद उस सबसे पुरानी धार्मिक हिंसा को उघाड़ता है जो हथियार नहीं, व्याख्या से की जाती है। मित्र परमेश्वर को मानते हैं, पर उनका परमेश्वर एक हिसाब-किताब की मशीन है: दुःख है, तो पाप होगा; जड़ खोजो, खोदो, निकालो। अय्यूब इनकार करता है, और उसका इनकार अहंकार नहीं, विश्वास है। वह कहता है कि उसके भीतर जो जड़ है, वह परमेश्वर के साथ उसके सच्चे रिश्ते की जड़ है, और उसे उखाड़ने का अधिकार किसी मनुष्य को नहीं। यहाँ परमेश्वर के बारे में एक कठोर सच्चाई खुलती है: वे अपने भक्तों की रक्षा उन लोगों से भी करते हैं जो उन्हीं के नाम पर न्यायाधीश बन बैठते हैं। पद 29 की तलवार मित्रों की ओर घूमती है, अय्यूब की ओर नहीं।

सूत्र

अय्यूब की शिकायत एक ऐसे व्यक्ति की है जो निर्दोष है और फिर भी सबके सामने दोषी ठहराया जा रहा है, जिसके शरीर पर लोग परमेश्वर के दण्ड के चिह्न पढ़ते हैं और जिसके मित्र उसकी पीड़ा को उसके पाप का प्रमाण बना देते हैं। यह आकृति बाइबल में बार-बार लौटती है, और अन्ततः क्रूस पर पूरी होती है, जहाँ खड़े लोग कहते हैं कि यह मारा गया, इसलिए परमेश्वर का शापित होगा। परन्तु वहाँ भी हिसाब उलटा था। यीशु मसीह पर जो पड़ा, वह उनके अपने पाप का फल नहीं था। अय्यूब की अकेली आवाज़ उस दिन की ओर इशारा करती है जब एक निर्दोष सचमुच दुःख उठाएगा और उसका "छुड़ानेवाला जीवित है" कहना कब्र से बाहर निकलकर प्रमाणित होगा। अय्यूब छाया है; मसीह वस्तु हैं।

दर्पण

हम यह करते हैं। किसी का विवाह टूटता है और हम मन ही मन फाइल खोलते हैं: कहीं कुछ तो रहा होगा। किसी की नौकरी जाती है, किसी का बच्चा भटक जाता है, किसी को कैंसर निकलता है, और भीतर वह पुराना यंत्र चालू हो जाता है जो कारण ढूँढ़ता है, क्योंकि कारण मिल जाए तो हमें डर नहीं लगता। जड़ खोज लेने से हम सुरक्षित महसूस करते हैं: मैंने वह गलती नहीं की, इसलिए मेरे साथ ऐसा नहीं होगा। यह दया नहीं, आत्मरक्षा है, और पीड़ित इसे तुरन्त भाँप लेता है। अय्यूब ने भाँप लिया था। उसने अपने मित्रों की फुसफुसाहट सुन ली थी। आज किसी एक व्यक्ति का नाम लीजिए जिसके दुःख के बारे में आपने चुपचाप कोई कारण गढ़ लिया था, और उसे एक संदेश भेजिए जिसमें कोई सलाह, कोई "शायद" न हो, केवल यह कि आप उसे याद करते हैं।

प्रश्न

पर क्या अय्यूब स्वयं भी अति नहीं कर रहा? वह पद 29 में मित्रों पर तलवार की धमकी डालता है, लगभग उसी लहजे में जिस लहजे का वह विरोध कर रहा है। जो आदमी कहता है कि तुम मेरे भीतर जड़ मत खोजो, वही उनके भीतर दण्ड का कारण खोज लेता है। क्या पीड़ित होना हमें दूसरों को दोषी ठहराने का अधिकार दे देता है? पुस्तक इसका सीधा उत्तर नहीं देती। अन्त में परमेश्वर मित्रों को डाँटते हैं, तो अय्यूब सही ठहरता है; पर परमेश्वर अय्यूब को भी चुप कराते हैं, और अय्यूब को उन्हीं मित्रों के लिये प्रार्थना करनी पड़ती है। शायद यही उत्तर है: सही होना और चंगा होना एक बात नहीं। सही आदमी को भी अन्त में प्रार्थना करनी पड़ती है, वरना उसका सही होना ही उसकी नई कठोरता बन जाता है।

बारीकी

"जड़" शब्द पर रुकिए। मित्रों की भाषा में यह खेती की भाषा है: पाप एक जड़ है, ज़मीन के नीचे छिपी, ऊपर से न दिखने वाली, और दुःख उसका फल है। इसलिए वे कहते हैं, "हम इसको क्यों सताएँ", यानी दबाव डालते रहो, खोदते रहो, जड़ सामने आ जाएगी। अय्यूब वही शब्द उठाकर उसका अर्थ पलट देता है: जड़ तो सचमुच है, पर वह "धर्म का मूल" है, परमेश्वर के प्रति उसकी खराई। ध्यान दीजिए कि पद 10 में वह पहले ही कह चुका है कि परमेश्वर ने उसकी आशा को "वृक्ष के समान उखाड़" डाला है। ऊपर का पेड़ गिर चुका है, पत्ते, फल, नाम, सब गया। पर नीचे, अँधेरे में, जड़ जीवित है। और जड़ ही तय करती है कि आदमी कौन है।

अन्य शास्त्र-सम्बन्ध

यूहन्ना 9 में शिष्य जन्म से अंधे मनुष्य को देखकर वही प्रश्न पूछते हैं जो अय्यूब के मित्र पूछते थे: किसने पाप किया, इसने या इसके माता-पिता ने? यीशु उस पूरे समीकरण को तोड़ देते हैं। यह वही तलवार है जो अय्यूब यहाँ अपने मित्रों की ओर घुमाता है, केवल मसीह के हाथ में वह तलवार निंदा नहीं, मुक्ति करती है। और अय्यूब 42 में परमेश्वर एलीपज से कहते हैं कि तुमने मेरे विषय में ठीक बात नहीं कही, जैसा मेरे दास अय्यूब ने कही है। पुस्तक का अन्त उन्हीं मित्रों को न्यायोचित धर्मशास्त्र के बावजूद दोषी ठहराता है, और अय्यूब को, जो चिल्लाया और झगड़ा, सही। परमेश्वर सही उत्तरों से अधिक सच्ची आवाज़ों को पहचानते हैं।

चिंतन

आपके भीतर जो "जड़" है, वह किससे बनी है: परमेश्वर के साथ आपकी असली खराई से, या उस प्रतिष्ठा से जो दूसरों की नज़र में आपने बनाई है? यदि ऊपर का पेड़ कट जाए, तो नीचे क्या बचेगा?

किस व्यक्ति के दुःख को आपने चुपचाप समझा लिया है, और उस समझ ने आपको उसके पास जाने से कैसे रोका है?

Job में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Job: The Wisdom of the Cross

Christopher Ash

The most pastoral full length walk through suffering and the God who answers.

The Message of Job

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Job 19:28 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

अय्यूब 19:28 का क्या अर्थ है?
राख के ढेर पर बैठा अय्यूब अभी-अभी वह वाक्य बोल चुका है जिसने सदियों को थामे रखा है: "मेरा छुड़ानेवाला जीवित है।" और फिर, उसी साँस में, वह मुड़कर अपने तीनों मित्रों की ओर देखता है, जिनके चेहरे पत्थर हैं। वह उनकी फुसफुसाहट पकड़ लेता है, वह बात जो वे आपस में कहते हैं: इसके भीतर ही कहीं जड़ है, कोई छिपा पाप, इसीलिए तो हम इसे दबाते हैं। अय्यूब उनकी भाषा उन्हीं पर लौटा देता है: हाँ, मुझमें जड़ पाई जाती है, पर वह धर्म की जड़ है, तुम्हारे अनुमानों की नहीं। और फिर आती है चेतावनी: तलवार से डरो, क्योंकि न्याय होता है।
अय्यूब 19:28 किस विषय में है?
अय्यूब की शिकायत एक ऐसे व्यक्ति की है जो निर्दोष है और फिर भी सबके सामने दोषी ठहराया जा रहा है, जिसके शरीर पर लोग परमेश्वर के दण्ड के चिह्न पढ़ते हैं और जिसके मित्र उसकी पीड़ा को उसके पाप का प्रमाण बना देते हैं। यह आकृति बाइबल में बार-बार लौटती है, और अन्ततः क्रूस पर पूरी होती है, जहाँ खड़े लोग कहते हैं कि यह मारा गया, इसलिए परमेश्वर का शापित होगा। परन्तु वहाँ भी हिसाब उलटा था। यीशु मसीह पर जो पड़ा, वह उनके अपने पाप का फल नहीं था। अय्यूब की अकेली आवाज़ उस दिन की ओर इशारा करती है जब एक निर्दोष सचमुच दुःख उठाएगा और उसका "छुड़ानेवाला जीवित है" कहना कब्र से बाहर निकलकर प्रमाणित होगा। अय्यूब छाया है; मसीह वस्तु हैं।
अय्यूब 19:28 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पर क्या अय्यूब स्वयं भी अति नहीं कर रहा? वह पद 29 में मित्रों पर तलवार की धमकी डालता है, लगभग उसी लहजे में जिस लहजे का वह विरोध कर रहा है। जो आदमी कहता है कि तुम मेरे भीतर जड़ मत खोजो, वही उनके भीतर दण्ड का कारण खोज लेता है। क्या पीड़ित होना हमें दूसरों को दोषी ठहराने का अधिकार दे देता है?
अय्यूब 19:28 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यूहन्ना 9 में शिष्य जन्म से अंधे मनुष्य को देखकर वही प्रश्न पूछते हैं जो अय्यूब के मित्र पूछते थे: किसने पाप किया, इसने या इसके माता-पिता ने? यीशु उस पूरे समीकरण को तोड़ देते हैं। यह वही तलवार है जो अय्यूब यहाँ अपने मित्रों की ओर घुमाता है, केवल मसीह के हाथ में वह तलवार निंदा नहीं, मुक्ति करती है। और अय्यूब 42 में परमेश्वर एलीपज से कहते हैं कि तुमने मेरे विषय में ठीक बात नहीं कही, जैसा मेरे दास अय्यूब ने कही है। पुस्तक का अन्त उन्हीं मित्रों को न्यायोचित धर्मशास्त्र के बावजूद दोषी ठहराता है, और अय्यूब को, जो चिल्लाया और झगड़ा, सही। परमेश्वर सही उत्तरों से अधिक सच्ची आवाज़ों को पहचानते हैं।
अय्यूब 19:28 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
किस व्यक्ति के दुःख को आपने चुपचाप समझा लिया है, और उस समझ ने आपको उसके पास जाने से कैसे रोका है?
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Job 19 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 2

हे प्रभु, कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो भीतर तक तोड़ देते हैं। जब अपने ही लोग मेरा दुख बढ़ाते हैं, तब मेरा मन थक जाता है। तू मेरी थकी हुई आत्मा को संभाल, और मुझे ऐसा दिल दे जो कड़वा न हो, बल्कि तुझ पर भरोसा रखे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

अय्यूब अपने मित्रों से कहता है, "तुम क्यों परमेश्वर के समान मुझे सताते हो? और मेरे माँस से क्यों तृप्त नहीं हुए?" घाव पहले से खुला है, और शब्द उसमें नमक भर रहे हैं। सोचो, कहीं तुम्हारी सही बात किसी टूटे हुए इंसान पर परमेश्वर का हाथ बनकर तो नहीं गिर रही? कभी-कभी दुखी व्यक्ति को उत्तर नहीं, बस साथ बैठा कोई चाहिए।

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