योएल 2:25
पाठ
परमेश्वर एक हिसाब खोलते हैं और उसे चुकाने का वादा करते हैं। टिड्डियों के झुंडों ने जो फसलें साल दर साल चट कर दी थीं, उन बरसों की पूरी उपज का नुकसान वे स्वयं भर देंगे। और बीच में एक चौंकाने वाला वाक्य: वह विनाशकारी झुंड "मेरे बड़े दल" था, "जिसको मैंने तुम्हारे बीच भेजा।"
मर्म
यह पद केवल खेतों के बारे में नहीं है, यह समय के बारे में है। "जिन वर्षों की उपज" खा ली गई थी, वे वर्ष लौटाए नहीं जा सकते; बीता हुआ समय किसी तिजोरी से निकालकर वापस नहीं दिया जा सकता। इसलिए परमेश्वर यहाँ जो वादा करते हैं, वह मुआवज़े से बड़ा कुछ है। वे कहते हैं कि वे इतिहास के उन हिस्सों को भी अर्थ दे सकते हैं जो केवल हानि थे। और ध्यान दें कि यह वादा किसी योग्य प्रजा को नहीं मिलता। पिछले पदों में लोग रोते हुए, अपने मन फाड़कर लौटे हैं (पद 13), और परमेश्वर की प्रतिक्रिया जलन और तरस है (पद 18)। बहाली न्याय की तुलना में असंगत रूप से बड़ी है। यही अनुग्रह का ढाँचा है: जो टूटा वह हमारा किया हुआ था, जो भरा जाता है वह उनका दिया हुआ है।
सूत्र
यह पद अकेला नहीं खड़ा है। तीन पद आगे वही परमेश्वर कहते हैं, "मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूँगा," और पिन्तेकुस्त के दिन पतरस ठीक इसी वचन को उठाकर कहता है कि यह आज पूरा हुआ है (प्रेरितों 2)। इसका अर्थ है कि योएल की बहाली का अंतिम रूप अन्न और तेल नहीं, बल्कि परमेश्वर की अपनी उपस्थिति है। और वह उपस्थिति मुफ़्त नहीं आई। पद 11 पूछता है, "यहोवा का दिन बड़ा और अति भयानक है; उसको कौन सह सकेगा?" उत्तर सुसमाचार में मिलता है: एक व्यक्ति ने उसे सहा। क्रूस पर वह अंधकार छाया जिसकी बात योएल करता है, सूर्य अंधियारा हुआ, और परमेश्वर की सेना उन पर टूटी जो निर्दोष थे। मसीह ने वह वर्ष झेला जो खा लिया गया, ताकि हमारे खाए हुए वर्ष भर दिए जाएँ।
दर्पण
आपके पास भी एक सूची है। वे साल जब आपने गलत नौकरी में खुद को खर्च कर दिया और अंत में कुछ नहीं बचा। वह दशक जो बीमारी ने, या किसी के शराब ने, या अपने ही क्रोध ने निगल लिया। वे बरस जब आप माता-पिता थे मगर मौजूद नहीं थे, और अब बच्चे बड़े हो गए हैं और लौटाने को कुछ नहीं है। इस पद की धार यहाँ है कि यह उन सालों को छोटा नहीं बताता। परमेश्वर सफाई नहीं देते कि "इतना बुरा भी नहीं था।" वे हानि को हानि कहते हैं और फिर उसे भरने का वचन देते हैं। साथ ही यह हमारे उस अहंकार को भी छूता है जो सोचता है कि बहाली हमारी मेहनत से आएगी; यहाँ क्रिया का कर्ता एक ही है, "मैं भर दूँगा।"
आज एक कागज़ लें और उस पर वह एक वर्ष या वह एक अवधि लिखें जो आपसे खा ली गई। उसके नीचे यही शब्द लिखें, "मैं उसकी हानि तुम को भर दूँगा," और उसे ऊँचे स्वर में पढ़कर कागज़ अपनी बाइबल में रख दें।
विस्तार
चार नाम गिने गए हैं: अर्बे, येलेक, हासील, गाजाम। अनुवादक इन्हें टिड्डी की किस्में या अवस्थाएँ कहते हैं, पर असल बात यह है कि योएल गिनता क्यों है। जो एक ही आपदा को चार नामों से पुकारता है, वह उसे भूला नहीं है। यह उस किसान की भाषा है जिसने हर लहर को अलग-अलग देखा और सहा। परमेश्वर उस पूरी गिनती को अपने ऊपर लेते हैं: "अर्थात् मेरे बड़े दल ने जिसको मैंने तुम्हारे बीच भेजा।" पद 11 में यही शब्द उनकी सेना के लिए आया था। यानी वह विनाश अंधा संयोग नहीं था, किसी दुष्ट शक्ति की स्वतंत्र जीत नहीं थी। और ठीक इसीलिए बहाली संभव है: जो हाथ भेज सकता है, वही लौटा भी सकता है।
प्रश्न
पर यह सहज नहीं उतरता। परमेश्वर उस नुकसान की भरपाई कर रहे हैं जो उन्होंने स्वयं भेजा। यह एक ऐसे पिता की तरह लगता है जो खिड़की तोड़कर फिर काँच लगवाता है। बाइबल इस असहजता को मिटाती नहीं। व्यवस्थाविवरण 28 में टिड्डी वाचा तोड़ने का चेतावनी-दंड है, यानी इस्राएल जानता था कि यह क्या था और क्यों आया; यह मनमानी नहीं, चेताई गई कड़वाहट थी। फिर भी पूरा उत्तर नहीं मिलता, क्योंकि दूधपीते बच्चे भी भूखे मरे थे (पद 16)। मैं यहाँ रुकना पसंद करता हूँ। जो हम कह सकते हैं वह यह है: वही परमेश्वर जिनका हाथ भारी पड़ा, स्वयं उस हानि को चुकाने के लिए आगे आए, और अंत में अपने पुत्र में स्वयं वह भारी हाथ झेल लिया। यह उत्तर तर्क को संतुष्ट नहीं करता, भरोसे को टिकाता है।
संदर्भ
योएल की तारीख अनिश्चित है, पर दृश्य साफ है: यहूदा, यरूशलेम, और एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो पूरी तरह अन्न, दाखमधु और तेल पर खड़ी थी। टिड्डियों का हमला केवल भूख नहीं लाया; उसने मंदिर की सेवा ठप कर दी, क्योंकि अन्नबलि और अर्घ के लिए अनाज और दाखरस ही नहीं बचा (पद 14 इसी की वापसी की आशा करता है)। यानी संकट आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक एक साथ था, और पड़ोसी जातियाँ ताना मार सकती थीं, "उनका परमेश्वर कहाँ रहा?" (पद 17)। इस माहौल में याजक आँगन और वेदी के बीच रोते हैं, दूल्हा-दुल्हन तक अपने कमरों से निकल आते हैं। भरपाई का वादा इस टूटे देश की धूल में बोला गया है, किसी समृद्धि के मंच से नहीं।
चिंतन
आपकी सूची में कौन-सा "खाया गया वर्ष" है जिसे आपने अभी तक परमेश्वर के सामने नाम लेकर नहीं रखा?
यदि योएल की बहाली का शिखर अन्न नहीं बल्कि परमेश्वर की उपस्थिति है, तो आप जिस भरपाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वह क्या उससे छोटी है?
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Joel 2:25 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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योएल 2:25 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
योएल 2:25 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
योएल 2:25 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Joel 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, जब भय के सामने सब के मुख मलिन हो जाते हैं, तब भी आप हमें थामे रखते हैं। धन्यवाद कि आपकी उपस्थिति में हमारा चेहरा फिर से उठ सकता है, और जो डर हमें कँपाता है, वही हमें दौड़कर आपकी शरण में ले आता है।
पिता, जब आसमान और धरती पर डरावनी बातें दिखती हैं, तब मेरा मन काँप उठता है। फिर भी मैं जानता हूँ कि हर चीज़ पर तेरा ही अधिकार है। उथल-पुथल के बीच मुझे थामे रख, और मेरा भरोसा तुझ पर बना रहे।
वह अंधियारे और घोर अंधकार का दिन होगा, वह बादलों और गहरे बादलों का दिन होगा!" फिर भी योएल कहता है कि यह सेना पहाड़ों पर फैली भोर की तरह आती है। भोर, जो आशा का चिन्ह है, यहाँ अंधकार लेकर आती है। कभी तुम्हारे जीवन में भी सुबह ऐसी ही लगी होगी। ठहरो, अगली आवाज़ यही है: पूरे मन से मेरी ओर फिरो।
पिता, मेरे भीतर सूखी ज़मीन जैसी जगहें हैं। अपना आत्मा मुझ पर उँडेल दे, जैसे तूने वादा किया है। मेरे बच्चों को, बूढ़ों को, और मुझ जैसे थके हुए लोगों को फिर से सपने देखने की हिम्मत दे। तेरी आवाज़ पहचानना सिखा दे।
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