यूहन्ना 1:18
यह पाठ
यूहन्ना अपनी पूरी भूमिका का अंत एक ऐसे वाक्य से करते हैं जो पहले तो दरवाज़ा बंद करता है और फिर उसे चौड़ा खोल देता है: "परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा।" किसी ने भी नहीं, न मूसा ने, न भविष्यद्वक्ताओं ने, न किसी दर्शन पाने वाले संत ने। और तुरंत उसके बाद: "एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।" यानी परमेश्वर अदृश्य तो हैं, पर गूँगे नहीं। जो सदा से पिता के सबसे निकट रहा है, वही बाहर आकर बताता है कि पिता कैसे हैं। यह पद वचन के देहधारी होने (पद 14) और मूसा तथा मसीह की तुलना (पद 17) के बाद आता है, और उन दोनों बातों पर मुहर लगा देता है।
मूल बात
यहाँ दो सच्चाइयाँ एक साथ रखी गई हैं जिन्हें हम आम तौर पर अलग-अलग रखना चाहते हैं। पहली: परमेश्वर हमारी पहुँच से परे हैं। हमारी धार्मिकता, हमारा अनुभव, हमारी कल्पना, कुछ भी हमें उन तक नहीं ले जाता। दूसरी: वही अपहुँच परमेश्वर स्वयं को बता देने के लिए बेचैन हैं। जिस क्रिया का अनुवाद "प्रगट किया" हुआ है, वह यूनानी में एक्सेगेओमाई है, जिससे अंग्रेज़ी का "exegesis" बना; इसका अर्थ है किसी को पूरा-पूरा खोलकर बयान कर देना। यीशु मसीह परमेश्वर के बारे में जानकारी नहीं देते; वे परमेश्वर की व्याख्या हैं। इसलिए यदि आप जानना चाहते हैं कि परमेश्वर क्रोध, पाप, बीमारी, बच्चों और शत्रुओं के प्रति कैसा बर्ताव करते हैं, तो अटकल छोड़िए और यीशु को देखिए। इससे बाहर परमेश्वर का कोई गुप्त, अलग चेहरा नहीं है।
सूत्र
यह पद पूरे पुराने नियम की एक पुरानी टीस का उत्तर है। मूसा ने सीनै पर्वत पर परमेश्वर की महिमा देखने की विनती की थी, और उन्हें केवल पीछे से एक झलक मिली, क्योंकि कोई मनुष्य परमेश्वर का मुख देखकर जीवित नहीं रह सकता। इस्राएल का पूरा इतिहास पर्दों, बादलों, धुएँ और परदे के पीछे रखे परमपवित्र स्थान का इतिहास है: परमेश्वर निकट हैं, पर ढके हुए। पद 14 कहता है कि वचन ने "हमारे बीच में डेरा किया", यानी वह तम्बू फिर से गड़ा, पर इस बार बकरे के चमड़े से नहीं, माँस और हड्डी से। और पद 18 उस तम्बू का पर्दा हटा देता है। छुटकारे की योजना का सूत्र यही है: परमेश्वर पर्दा उठाने वाले परमेश्वर हैं, और वह पर्दा अंततः पुत्र के शरीर में उठाया गया।
दर्पण
हम में से अधिकांश एक साथ दो परमेश्वरों को मानते हैं, बिना यह स्वीकार किए। एक वह जिसे हम रविवार को गाते हैं, अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण। और एक वह जिसकी कल्पना हम रात के दो बजे करते हैं, जब बच्चे का नतीजा बुरा आया हो, नौकरी की चिट्ठी आई हो, या डॉक्टर की रिपोर्ट टेबल पर पड़ी हो: एक हिसाब रखने वाला, ठंडा, दूर का परमेश्वर जो शायद हमसे ऊब चुका है। यह पद उस दूसरे परमेश्वर को झूठा घोषित करता है। पिता की गोद में रहने वाले पुत्र ने जो चेहरा दिखाया, वही असली है; बाकी सब हमारे डर का प्रक्षेपण है। आज ही एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक वाक्य लिखिए जो आप गुप्त रूप से सोचते हैं कि परमेश्वर आपके बारे में महसूस करते हैं, और फिर उसके नीचे लिखिए "अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण", और कागज़ को वहाँ रखिए जहाँ कल सुबह आपकी नज़र पड़े।
मुख्य पात्र
इस पद का केंद्र पुत्र हैं, और यूहन्ना उन्हें एक ऐसी मुद्रा में दिखाते हैं जो चौंकाती है: "पिता की गोद में"। यह सिंहासन की भाषा नहीं, भोजन की मेज़ और परिवार की भाषा है। जो अनंत काल से पिता के सीने से लगा रहा है, वही धूल भरे गलील में चलता है। इसका अर्थ है कि यीशु परमेश्वर के बारे में सुनी-सुनाई बात नहीं कहते; वे घर के भीतर से बोलते हैं। और यह भी कि उनका पूरा जीवन, आँसू, क्रोध, करुणा, सलीब, कोई भूमिका नहीं थी जो उन्होंने निभाई हो, बल्कि पिता के हृदय का सीधा अनुवाद था। जब वे कोढ़ी को छूते हैं, तब परमेश्वर छूते हैं। जब वे रोते हैं, तब परमेश्वर का दुख दिखता है।
एक बारीकी
"गोद" शब्द पर रुकिए। यूनानी शब्द कोल्पोस वही जगह है जहाँ भोजन के समय प्रिय शिष्य यीशु के पास टिका था, छाती के मोड़ पर। यह निकटता का सबसे शारीरिक शब्द है जो यूहन्ना चुन सकते थे, और उन्होंने इसे परमेश्वर के भीतर के सम्बन्ध के लिए चुना। ध्यान दीजिए कि यूहन्ना वर्तमान काल का प्रयोग करते हैं: पुत्र गोद में "हैं", थे नहीं। देहधारण ने उस निकटता को तोड़ा नहीं। मसीह पिता को छोड़कर हमारे पास नहीं आए, वे पिता को अपने साथ लाए। और यहीं से पद 12 की बात समझ में आती है: जिन्होंने उन्हें ग्रहण किया, उन्हें संतान होने का अधिकार मिला, यानी उसी गोद में जगह।
पहले सुननेवाले
पहली सदी के अंत में यह सुसमाचार पढ़ने वाले लोग दो तरफ से दबाव में थे। एक ओर आराधनालय से निकाले गए यहूदी विश्वासी, जिन्हें ताना मिलता था कि उन्होंने मूसा को छोड़ दिया; उनके कानों में पद 17 और 18 एक साथ गूँजते: व्यवस्था सच्ची थी, पर मूसा ने भी परमेश्वर का मुख नहीं देखा था, और अब जो देखा गया है वह मूसा से बड़ा है। दूसरी ओर यूनानी संसार, जहाँ दार्शनिक कहते थे कि परम सत्ता अदृश्य, अस्पर्श और संसार से अलिप्त है। उन्हें यह वाक्य लगभग अशोभनीय लगा होगा: वह अदृश्य सत्ता एक बढ़ई के रूप में खुद को खोलकर बता रही है। दोनों समूहों के लिए यह पद एक ही चुनौती था, और है।
चिंतन
आप परमेश्वर के जिस चेहरे की कल्पना अपने सबसे कठिन क्षणों में करते हैं, क्या वह चेहरा यीशु के जीवन से मेल खाता है, या कहीं और से आया है?
यदि पुत्र आज भी पिता की गोद में हैं और आपको वहीं जगह देते हैं, तो आपके इस सप्ताह के किस डर की पकड़ ढीली पड़नी चाहिए?
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John 1:18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यूहन्ना 1:18 का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 1:18 किस विषय में है?
यूहन्ना 1:18 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यूहन्ना 1:18 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यूहन्ना 1:18 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
John 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
धन्यवाद यीशु, कि तू मुड़कर देखता है। जब हम झिझकते हुए तेरे पीछे चलते हैं, तू हमें अनदेखा नहीं करता, बल्कि पूछता है, "तुम किस की खोज में हो?" धन्यवाद कि तू हमारे मन की प्यास जानता है और अपने घर का पता बताकर हमें पास बुलाता है।
पिता, अंद्रियास ने सबसे पहले अपने भाई को ढूँढ़ा और उसे तुझ तक ले आया। मुझे भी वैसा ही दिल दे। जिन्हें मैं हर दिन देखता हूँ, उनसे तेरे बारे में कहने का साहस दे। मेरी बातें बड़ी न हों, बस सच्ची हों।
पिता, कई बार मैं भी नहीं पहचान पाता कि आप कहाँ काम कर रहे हैं। मुझे वह नज़र दीजिए जो आपके आत्मा के ठहरने को देख सके। पानी से बढ़कर मुझे भीतर से धो दीजिए, और अपना आत्मा मुझ पर बना रहने दीजिए, ताकि मेरा जीवन आपकी ओर इशारा करे।
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