यूहन्ना 13
पाठ
कमरे में खाने की गंध है, और कोई उठता है। कपड़े उतरते हैं, कमर पर अँगोछा बँधता है, पानी बर्तन में गिरता है। जो गुरु और प्रभु कहलाता है, वह घुटनों पर बैठकर बारह जोड़ी गंदे पाँव धोता है, उस आदमी के पाँव भी जो उसे बेचने जा रहा है। पतरस विरोध करता है और हार जाता है। फिर यीशु मसीह लौटकर बैठते हैं, कहते हैं "मैंने तुम्हें नमूना दिखा दिया है", विश्वासघात की ओर इशारा करते हैं, यहूदा रात में निकल जाता है, और पीछे रह जाती है एक नई आज्ञा और एक भविष्यवाणी कि पतरस तीन बार इन्कार करेगा।
मर्म
ध्यान दीजिए कि यूहन्ना पाँव धोने से ठीक पहले क्या बताता है: "पिता ने सब कुछ उसके हाथ में कर दिया है।" यानी यीशु मसीह झुके इसलिए नहीं कि उनके पास और कोई चारा न था, बल्कि इसलिए कि उनके हाथ में सब कुछ था। यही इस अध्याय का धमाका है। परमेश्वर की सामर्थ्य का असली चेहरा एक तौलिया है। और यह केवल विनम्रता का पाठ नहीं है; पतरस से कहा गया वाक्य इसे शुद्धिकरण बना देता है: "यदि मैं तुझे न धोऊँ, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी भाग नहीं।" धुलना कोई वैकल्पिक सेवा नहीं, वह प्रवेश की शर्त है। मसीह के साथ हिस्सा उन्हें मिलता है जो सेवा लेना स्वीकार करते हैं, इससे पहले कि वे सेवा करना सीखें।
सूत्र
भजन संहिता 41:9 का वह वाक्य, "जो मेरी रोटी खाता है, उसने मुझ पर लात उठाई", दाऊद के मुँह से निकला था जब उसके अपने ही साथी ने उसे छोड़ा। यीशु मसीह उसे अपने ऊपर लागू करते हैं, और इस तरह विश्वासघात कोई दुर्घटना नहीं रहता; वह उस लंबी कहानी का हिस्सा बनता है जिसमें परमेश्वर अपने ही लोगों के हाथों ठुकराए जाते हैं और फिर भी उद्धार करते हैं। फसह का पर्व सिर पर है, वह पर्व जिसमें मेम्ना मरता है ताकि लोग बचें। यूहन्ना जानबूझकर घड़ी बताता है। जो झुककर पाँव धो रहा है, वही कुछ घंटों बाद अपने लोगों के लिए मारा जाएगा। तौलिया और क्रूस एक ही हरकत के दो हिस्से हैं।
दर्पण
हम सेवा करना पसंद करते हैं क्योंकि उसमें हम ऊपर बने रहते हैं। सेवा लेना हमें असहज करता है, और पतरस का "तू मेरे पाँव कभी न धोने पाएगा" दरअसल घमंड की सबसे धार्मिक किस्म है। सोचिए: वह बीमारी जिसमें आपको किसी और पर निर्भर होना पड़ा, वह कर्ज जो आप चुका नहीं सके, वह माफी जो आपने माँगी नहीं थी पर आपको दे दी गई। और दूसरी तरफ यहूदा के पाँव भी धुले गए। जिस सहकर्मी ने आपकी पीठ पीछे बात की, जिस रिश्तेदार ने घर तोड़ा, उसके पाँव भी इस बर्तन के पानी में हैं। आज, दस मिनट के भीतर: उस एक व्यक्ति को फोन करके या संदेश भेजकर धन्यवाद कहिए जिसने आपके लिए कुछ ऐसा किया जिसका बदला आप कभी नहीं चुका पाए, और नाम लेकर कहिए कि आप उस कर्ज में हैं।
पहले सुननेवाले
यूहन्ना की कलीसिया के लोग जानते थे कि पाँव धोना किसका काम था: घर के सबसे नीचे दर्जे के दास का, और यहूदी दासों से तो यह काम कराया भी नहीं जाता था, वह गैर-यहूदी नौकरों पर छोड़ा जाता था। सड़कों पर धूल, गोबर, कीचड़ था; चप्पलें खुली थीं। जब उन्होंने सुना कि प्रभु ने कपड़े उतारकर अँगोछा बाँधा, तो उनके कानों में यह शालीन प्रतीक नहीं, बल्कि शर्मनाक उलटफेर था। और वे खुद ऐसे समाज में रहते थे जहाँ मसीही होने की कीमत नौकरी, परिवार और इज्जत थी। उनके लिए "इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो" कोई भावुक वाक्य नहीं था। आपस का प्रेम ही उनका एकमात्र दिखाई देने वाला प्रमाण-पत्र था।
प्रश्न
सबसे काँटेदार वाक्य यह है: "जो तू करनेवाला है, तुरन्त कर।" यीशु मसीह यहूदा को रोकते नहीं। वे उसे रोटी का टुकड़ा देते हैं, जो उस मेज़ पर सम्मान और दोस्ती का इशारा था, और उसी पल शैतान उसमें समा जाता है। क्या यह मजबूरी थी, या अंतिम निमंत्रण जो ठुकरा दिया गया? पाठ दोनों को खुला छोड़ता है। वह न कहता है कि यहूदा के पास चुनाव नहीं था, न यह कि परमेश्वर हैरान रह गए। मुझे लगता है पाठ यह सिखाता है कि प्रेम जबरदस्ती नहीं करता, और इसीलिए वह ठुकराया जा सकता है। "रात्रि का समय था", यूहन्ना लिखता है, और वह सिर्फ घड़ी नहीं बता रहा। यह वाक्य सांत्वना नहीं देता, और शायद उसे देना भी नहीं चाहिए।
पृष्ठभूमि
यह यरूशलेम है, फसह से ठीक पहले वाली शाम, शायद मंगलवार या बुधवार की रात। शहर तीर्थयात्रियों से ठसाठस भरा है, महायाजक और रोमी अधिकारी भीड़ को लेकर बेचैन हैं, और यीशु मसीह के खिलाफ फैसला पहले ही हो चुका है। वे एक किराए के ऊपरी कमरे में हैं, गद्दों पर टेककर लेटे हुए, इसलिए "छाती की ओर झुका हुआ बैठा था" का मतलब है कि वह चेला यीशु मसीह के ठीक बगल में था, सम्मान की जगह पर। यहूदा के पास थैली थी, यानी समूह का पैसा उसके हाथ में था, वह भरोसेमंद माना जाता था। इसी भरोसे और इसी नज़दीकी के बीच से विश्वासघात निकलता है, और इसी के बीच यीशु मसीह घुटनों पर बैठते हैं।
चिंतन
आप किससे सेवा लेना सबसे ज्यादा टालते हैं, और उस इन्कार के नीचे कौन सा डर छिपा है?
यदि बाहर के लोग आपकी मंडली को सिर्फ आपसी प्रेम से पहचानें, तो वे आज क्या पहचानेंगे?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।
अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।
नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।
प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
John 13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यूहन्ना 13 का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 13 किस विषय में है?
यूहन्ना 13 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यूहन्ना 13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यूहन्ना 13 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
John 13 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि यीशु ने पहले ही कह दिया, "अब मैं उसके होने से पहले तुम्हें जता देता हूँ, कि जब वह हो जाए तो तुम विश्वास करो कि मैं वही हूँ।" धन्यवाद कि दुख की घड़ी भी आपके लिए अचानक नहीं है, और आपका कहा सच निकलता है, इसलिए मेरा भरोसा डगमगाता नहीं।
पिता, अभी बहुत कुछ समझ नहीं आता। जो हो रहा है, उसका मतलब मुझसे छिपा है और मन बेचैन है। फिर भी मैं तेरे हाथों पर भरोसा रखना चाहता हूँ, क्योंकि तू कहता है कि आगे चलकर सब साफ हो जाएगा। तब तक मुझे धीरज दे, और यह विश्वास कि तेरा प्रेम मेरे साथ है।
प्रभु, तूने झुककर पैर धोए और मुझे दिखाया कि बड़ा होना क्या है। मुझे माफ कर, जब मैं खुद को दूसरों से ऊपर समझ बैठता हूँ। मेरा मन ऐसा बना दे जो सेवा करने में खुशी पाए, क्योंकि तेरा भेजा हुआ तुझसे बड़ा नहीं।
प्रभु, पतरस की तरह मैं भी झिझकता हूँ जब तू मेरे सामने झुकता है। मुझे लगता है मैं इस प्रेम के लायक नहीं। पर तू फिर भी मेरे पास आता है। मेरा घमंड और शर्म हटा दे, ताकि मैं तेरी सेवा को चुपचाप स्वीकार कर सकूँ।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
