लूका 9:23
पाठ
यीशु ने यह बात केवल बारह चेलों से नहीं कही। लूका सावधानी से लिखता है: "उसने सबसे कहा" (9:23) — भीड़ से, उन सबसे जो उसके पीछे चल रहे थे। और जो शर्त वे सुनते हैं, वह किसी विशेष बुलाहट की नहीं, बल्कि साधारण शिष्यता की है: जो कोई मेरे पीछे आना चाहे, वह पहले अपने आप से इन्कार करे, फिर प्रतिदिन अपना क्रूस उठाए, और तब मेरे पीछे हो ले। तीन क्रियाएँ, एक ही क्रम में, और तीनों एक ही दिशा में मुड़ी हुई हैं। ध्यान दें कि यह वाक्य ठीक उस घोषणा के बाद आता है जिसमें यीशु ने अपने दुःख उठाने, तुच्छ समझे जाने और मारे जाने की बात कही थी (9:22)। पहले उसका मार्ग, फिर हमारा।
मर्म
"अपने आप से इन्कार करे" का अर्थ आत्म-घृणा नहीं है, न ही किसी छोटी-सी सुविधा का त्याग। यह उस अधिकार को छोड़ना है जिससे मनुष्य स्वयं अपने जीवन का स्वामी बना बैठा है। और "क्रूस" यहाँ कोई काव्यात्मक चित्र नहीं था; लूका के पहले पाठक जानते थे कि क्रूस उठाकर चलनेवाला आदमी वापस नहीं लौटता। रोमी सैनिक दोषी को अपनी ही मृत्यु का काठ उठवाकर नगर से बाहर ले जाते थे। यीशु कहते हैं: वही चाल, वही दिशा, और लूका जोड़ता है, "प्रतिदिन" — एक बार की वीरता नहीं, रोज़ की मृत्यु। यहीं अनुग्रह छिपा है: यह मार्ग हम बनाते नहीं, हम उस पर चलते हैं जो पहले चल चुका है। शिष्य का क्रूस उद्धार नहीं कमाता; वह उस उद्धार के पीछे-पीछे चलने का रूप है।
सूत्र
यह वाक्य अचानक आसमान से नहीं गिरा। पवित्रशास्त्र में एक पुराना दृश्य है जिसमें एक पुत्र अपनी ही बलि की लकड़ी पीठ पर लादकर पहाड़ पर चढ़ता है, और पिता उसके साथ चलता है; मोरिय्याह पर उस लकड़ी के नीचे मेढ़ा मिल गया, गोलगोथा पर नहीं मिला। यशायाह का वह दास जिसे लोग तुच्छ जानते हैं, लूका 9:22 में लगभग शब्दशः लौट आता है: "उसे तुच्छ समझकर मार डालें।" यानी क्रूस मसीह के जीवन में कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि परमेश्वर के उस लम्बे उद्धार-मार्ग की मंज़िल है जो बलिदान, दास और राजा के चित्रों में सदियों से बुना जा रहा था। और शिष्यता इस सूत्र का अगला धागा है: जो उद्धारकर्ता के पीछे चलता है, वह उसी दिशा में चलता है जिस दिशा में परमेश्वर की बचानेवाली प्रीति सदा चलती रही है, नीचे की ओर, अपने आप से बाहर की ओर।
दर्पण
"अपने आप से इन्कार" वहाँ चुभता है जहाँ हमारा अधिकार सबसे मीठा लगता है। दफ़्तर में वह पद जिसे आपने वर्षों में कमाया और अब उसे किसी युवा को सौंपना पड़ रहा है। घर में वह बहस जिसमें आप सही हैं, बिल्कुल सही, और फिर भी जीतना आपकी बेटी की आत्मा से महँगा पड़ेगा। पैसा, जिसका हिसाब आप किसी को नहीं देते। बीमार शरीर, जिसने आपकी सारी योजनाएँ रद्द कर दीं और आपसे वह छीन लिया जो आप समझते थे आपका है। "प्रतिदिन" शब्द इसीलिए है: क्रूस अक्सर एक बड़ी शहादत नहीं, बल्कि रोज़ सुबह उठकर फिर से हार मान लेना है कि मैं अपने जीवन का मालिक नहीं हूँ। आज सोने से पहले एक कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जिस पर आप सबसे ज़्यादा अपना हक़ जताते हैं, उसे ऊँची आवाज़ में प्रभु के हाथ में सौंपिए, और वह कागज़ फाड़ दीजिए।
प्रसंग
यह बात गलील के अंतिम दिनों में कही गई, जब भीड़ चरम पर थी। अभी-अभी पाँच हज़ार पुरुष रोटी से तृप्त हुए थे, हेरोदेस बेचैन था, और लोग यीशु में एलिय्याह या कोई पुनर्जीवित भविष्यद्वक्ता ढूँढ़ रहे थे। ऐसे माहौल में "मसीह" का मतलब अधिकांश सुननेवालों के लिए एक ही था: वह जो रोम को उखाड़ फेंकेगा। और रोम का सबसे परिचित औज़ार यही क्रूस था, जिस पर वह विद्रोहियों को सड़क किनारे लटकाता था, ताकि गाँव देखे और डरे। यीशु उसी शब्द को उठाकर अपने अनुयायियों की पहचान बना देते हैं। यह सम्मान और लज्जा की संस्कृति में सबसे अपमानजनक निमंत्रण था, इसीलिए आगे 9:26 में लज्जा की बात आती है। भीड़ जय-जयकार सुनना चाहती थी; उसे फाँसी का काठ थमाया गया।
मुख्य पात्र
ध्यान दीजिए कि यीशु यह माँग कब रखते हैं। एकान्त में प्रार्थना करने के तुरंत बाद (9:18), और अपनी मृत्यु की घोषणा के तुरंत बाद। वे किसी से वह नहीं माँग रहे जो वे स्वयं नहीं दे रहे। उनके भीतर का दृढ़ निश्चय लूका आगे एक वाक्य में पकड़ता है: "उसने यरूशलेम को जाने का विचार दृढ़ किया" (9:51)। यह किसी उदास शहीद की थकी हुई स्वीकृति नहीं, बल्कि एक चुनाव है, आँखें खुली रखकर। साथ ही वे पतरस को चुप रहने का आदेश देते हैं, क्योंकि "मसीह" शब्द तब तक ग़लत समझा जाएगा जब तक क्रूस उसकी परिभाषा न बन जाए। यही परमेश्वर का स्वभाव है: सामर्थ्य को छिपाकर नहीं, बल्कि उसे प्रेम की दिशा में मोड़कर प्रकट करना।
अंतर्पाठ
लूका इस वाक्य को अपनी पुस्तक में दो बार गूँजाता है, और दोनों बार कुछ खुलता है। इसी अध्याय के अंत में वह आदमी आता है जो पहले घरवालों से विदा लेना चाहता है (9:61); पाठ के हाशिये पर 1 राजा 19 खड़ा है, जहाँ एलीशा को यही अनुमति मिली थी। यीशु नहीं देते। यह तनाव जान-बूझकर है: राज्य की माँग भविष्यद्वक्ता की बुलाहट से भी तात्कालिक है, "जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं" (9:62)। दूसरी गूँज पीड़ादायक और कोमल है: जब यीशु स्वयं क्रूस के भार तले गिरते हैं, तो कुरेनी शमौन को पकड़कर वह काठ उसके कंधे पर रखा जाता है, और वह यीशु के पीछे-पीछे चलता है। जो 9:23 में रूपक था, वह 23:26 में एक अनजान आदमी के कंधे पर देह धारण कर लेता है। और यही सांत्वना है: क्रूस उठाना अकेले चलना नहीं, किसी के पीछे चलना है।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन-सा एक क्षेत्र है जहाँ आप मसीह को "प्रभु" तो कहते हैं पर निर्णय अब भी स्वयं लेते हैं?
यदि क्रूस "प्रतिदिन" उठाना है, तो आज के दिन आपके लिए उसका ठोस आकार क्या था, और क्या आपने उसे पहचाना?
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Luke 9:23 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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लूका 9:23 का क्या अर्थ है?
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लूका 9:23 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
लूका 9:23 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Luke 9 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पहाड़ पर महिमा प्रगट हो रही थी, और चेले नींद से भरे थे। "जब पूरी तरह से जागे, तो उसकी महिमा" देखी। कितना करीब थे वे सब कुछ चूक जाने के। यही तीनों बाद में गतसमनी में भी सो गए। सोचो, तुम्हारे जीवन में यीशु कब से खड़े हैं, और तुम आधी नींद में हो? पूरी तरह जागो। उसकी महिमा देखने के लिए आँखें खोलनी पड़ती हैं।
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