यूहन्ना 14:12
पाठ
यीशु अपने डरे हुए शिष्यों से कहते हैं: जो मुझ पर विश्वास रखता है, वह वही काम करेगा जो मैं करता हूँ, बल्कि उनसे भी बड़े काम करेगा। और इसका कारण कोई मानवीय योग्यता नहीं, बल्कि एक घटना है: "क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ।" जो जाने की बात उन्हें तोड़ रही थी, वही उनके भविष्य के काम की नींव बन जाती है।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि वाक्य कहाँ टिका है। यीशु यह नहीं कहते, "क्योंकि तुम में बड़ी शक्ति है," और न यह कि "क्योंकि तुम अधिक विश्वास करोगे।" वे कहते हैं: क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ। बड़े काम शिष्यों की उन्नति नहीं, मसीह की विजय का परिणाम हैं। यूहन्ना में "काम" शब्द का एक निश्चित अर्थ है, जो अभी दो पद पहले खुला था: "पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।" यीशु के चिह्न कभी स्वतंत्र प्रदर्शन नहीं थे, वे पिता का कार्य थे जो पुत्र के भीतर से बहा। अब वही धारा आगे बढ़ती है: पिता पुत्र के द्वारा, और पुत्र आत्मा के द्वारा उन लोगों में काम करता है जो उस पर भरोसा रखते हैं। इसलिए "बड़े" का अर्थ अधिक चमत्कारी नहीं, बल्कि अधिक व्यापक और अधिक अंतिम है।
जुड़ा हुआ सूत्र
यूनानी शब्द मेइज़ोना (बड़े) यहाँ मात्रा से ज़्यादा युग की बात करता है। यीशु की सेवकाई गलील और यहूदिया तक सीमित थी, तीन साल, कुछ हज़ार लोग। सलीब से पहले वे किसी से यह नहीं कह सके थे: तेरे पाप क्षमा हुए, क्योंकि मैंने तेरे लिए मरकर फिर जी उठकर तुझे धर्मी ठहराया। पिन्तेकुस्त के दिन पतरस एक ही उपदेश में तीन हज़ार लोगों को उस पूरे किए गए उद्धार में ले आता है, जिसे यीशु स्वयं अपनी देह में अभी उठा ही रहे थे। यही "बड़ा" काम है। उद्धार की पूरी कहानी यहाँ मुड़ती है: जो अब्राहम से लेकर भविष्यद्वक्ताओं तक एक जाति के भीतर संकुचित था, वह क्रूस, पुनरुत्थान और आत्मा के बाद संसार भर में फैलता है। शिष्य कुछ नया नहीं करते; वे मसीह के पूर्ण किए हुए काम को फैलाते हैं।
दर्पण
यह पद हमें दो तरफ से चुभता है। एक तरफ वह हमारी शर्म को छूता है: आप रविवार को उपदेश सुनकर सोचते हैं कि असली काम तो प्रचारकों और मिशनरियों का है, और आपकी नौकरी, आपके बच्चे, आपका बीमार शरीर बस बचा हुआ समय है। यीशु कहते हैं, जो मुझ पर विश्वास रखता है, वह भी। कोई अपवाद नहीं। दूसरी तरफ वह हमारे घमंड को काटता है: यदि सब कुछ इस पर टिका है कि वे पिता के पास गए, तो आपके "बड़े काम" की गिनती आपके नाम के नीचे नहीं लिखी जाती। मंत्रालय की सफलता आपकी उपलब्धि नहीं, मसीह की जीत का विस्तार है।
आज ही किसी एक व्यक्ति को, जो मसीह से दूर है, दो वाक्य का संदेश भेजिए जिसमें आप बताएँ कि यीशु ने आपके लिए ठोस रूप से क्या किया है।
संदर्भ
यह ऊपरी कमरे की रात है। यहूदा जा चुका है, पतरस को उसका इनकार बताया जा चुका है, और यीशु घंटों के भीतर पकड़े जाएँगे। शिष्य ऐसे लोग हैं जिन्होंने तीन साल अपना घर, धंधा और सामाजिक सुरक्षा छोड़ दी थी, और अब उनका गुरु कह रहा है कि वह जा रहा है। उस समाज में गुरु का जाना केवल भावनात्मक हानि नहीं थी, वह पूरे समूह का अंत होता था। अध्याय की शुरुआत यही सँभालती है: "तुम्हारा मन व्याकुल न हो।" पद 12 इसी सांत्वना का हिस्सा है, कोई सफलता का सूत्र नहीं। यह उन लोगों से कहा गया वादा है जो अगले चौबीस घंटों में भाग खड़े होंगे।
मुख्य पात्र
यीशु यहाँ अजीब रूप से शांत हैं। जिसे गिरफ़्तारी सामने दिख रही है, वह अपने अनुयायियों के भविष्य की योजना बना रहा है। यह उनके चरित्र की गहरी परत खोलता है: उनका ध्यान अपनी पीड़ा पर नहीं, उन लोगों पर है जो पीछे रह जाएँगे। और उनका आत्मविश्वास स्वयं पर आधारित नहीं है, बल्कि पिता के साथ उस अटूट संबंध पर, जिसे वे बार-बार दोहराते हैं: "मैं पिता में हूँ, और पिता मुझ में है।" इसीलिए वे बिना घबराए अपना काम दूसरों के हाथ में सौंप सकते हैं। जो अपने आप से नहीं, बल्कि पिता से जीता है, वह जाने से नहीं डरता, और अपने शिष्यों से ईर्ष्या भी नहीं करता।
पहली श्रोता-मंडली
यूहन्ना यह पहली सदी के अंत की उन कलीसियाओं के लिए लिखता है जो छोटी, संदिग्ध और कभी-कभी सभाघर से निकाली हुई थीं। उनके पास न मंदिर था, न प्रतिष्ठा, न वह गुरु जिसे वे छू सकें। उनके कानों में "इनसे भी बड़े काम" एक चुनौती नहीं, एक ढाँढ़स था: तुम्हारी कमज़ोर, बिखरी हुई सेवा उस काम की सीधी निरंतरता है जो यीशु ने शुरू किया था। जब उन्होंने रोम में, इफिसुस में, अन्ताकिया में लोगों को मसीह की ओर आते देखा, तो उन्होंने जाना कि यह वादा झूठा नहीं था। हम अक्सर इस पद को व्यक्तिगत सामर्थ्य का वादा पढ़ते हैं; उन्होंने इसे कलीसिया के अस्तित्व का औचित्य सुना।
चिंतन
आप अपने जीवन के किस हिस्से को "असली काम" नहीं मानते, जबकि यीशु उसे अपने काम की निरंतरता कहते हैं?
यदि "बड़े काम" इसलिए संभव हैं क्योंकि यीशु पिता के पास गए, तो आपकी असफलताओं और थकान का हिसाब कौन उठाता है?
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John 14:12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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