यूहन्ना 21:15
पाठ
कोयले की आग बुझ चुकी है, रोटी और मछली खाई जा चुकी है, और तभी यीशु चुप्पी तोड़ते हैं। वे पतरस को उसके पुराने नाम से पुकारते हैं, "हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र", मानो वह चट्टान वाला नाम अभी फिर से कमाना बाकी हो, और पूछते हैं, "क्या तू इनसे बढ़कर मुझसे प्रेम रखता है?" पतरस बड़े दावे नहीं करता; वह केवल इतना कहता है कि प्रभु स्वयं जानते हैं कि वह उनसे प्रीति रखता है। इसके उत्तर में कोई क्षमा-घोषणा नहीं आती, कोई उपदेश नहीं, बल्कि एक काम सौंपा जाता है: "मेरे मेम्नों को चरा।" जिस आदमी ने भेड़ों को छोड़कर भागने की गवाही दी थी, उसी के हाथ में मेमने थमा दिए जाते हैं।
मूल बात
यह प्रश्न बेतुका लगता है जब तक आप यह न याद करें कि पतरस ने कभी दावा किया था कि बाकी सब ठोकर खाएँ तो खाएँ, वह प्राण तक दे देगा। "इनसे बढ़कर" उसी घमंड की गूँज है, और यीशु उसे मिटाते नहीं, उसे सामने रखते हैं। यहाँ मुक्ति का ढाँचा दिखता है: परमेश्वर पाप को भुलाकर नहीं, उसे नाम लेकर सामने रखकर चंगा करते हैं। ध्यान दीजिए कि यीशु पतरस से यह नहीं पूछते कि वह भविष्य में क्या करेगा, बल्कि यह कि वह अभी किससे प्रेम रखता है। सेवा का आधार योग्यता नहीं, प्रेम है, और वह प्रेम भी पतरस की घोषणा पर नहीं, मसीह के जानने पर टिका है। "तू तो जानता है" यही टूटे हुए विश्वास की सबसे ईमानदार नींव है, और उसी नींव पर कलीसिया की चरवाही सौंपी जाती है।
सूत्र
यहेजकेल 34 को याद कीजिए: वहाँ परमेश्वर इस्राएल के चरवाहों पर क्रोधित हैं, क्योंकि वे भेड़ों को नहीं, अपने आप को चराते थे; और वहीं वे प्रतिज्ञा करते हैं कि वे स्वयं अपनी भेड़ों को ढूँढ़ेंगे और दाऊद जैसा एक चरवाहा खड़ा करेंगे। यूहन्ना 10 में यीशु उस प्रतिज्ञा को अपने ऊपर ले लेते हैं: अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। और अब, प्राण देकर लौटे हुए उसी चरवाहे के मुँह से यह वाक्य निकलता है, "मेरे मेम्नों को चरा।" यह सत्ता का हस्तांतरण नहीं, हिस्सेदारी है। पतरस बाद में स्वयं बुज़ुर्गों को यही लिखेगा कि परमेश्वर के झुंड की रखवाली करो, दबाव से नहीं, प्रभुता जताकर नहीं। जो उसे झील किनारे सौंपा गया, वही वह जीवन भर आगे बढ़ाता रहा। मुक्ति की कहानी का यह ढंग है: गिरा हुआ आदमी उठाया जाता है, और उठते ही उसे किसी और की ज़िम्मेदारी थमा दी जाती है।
दर्पण
"इनसे बढ़कर" वह काँटा है जो चुभता है। हम में से बहुतों की भक्ति चुपचाप तुलना पर चलती है: मैं उससे ज़्यादा नियमित हूँ, मैंने ज़्यादा दिया, मैं उस बैठक में टिका रहा जब बाकी छोड़ गए। यीशु उस तुलना को न पुरस्कृत करते हैं, न ही उसे नज़रअंदाज़ करते हैं; वे उसे पतरस के मुँह पर रख देते हैं और फिर उसे वहीं गिरने देते हैं। दूसरी ओर वह डर है जो और गहरा है: कि मेरी असफलता ने मुझे स्थायी रूप से अयोग्य कर दिया है, कि वह रात, वह झूठ, वह चुप्पी जब बोलना था, मेरे नाम के आगे हमेशा लिखी रहेगी। यह पद कहता है कि मसीह जानते हैं, और फिर भी काम सौंपते हैं। आज ही एक कागज़ पर वह एक बात लिखिए जिसे आप सबसे ज़्यादा छिपाते हैं, और उसे सामने रखकर ज़ोर से कहिए: "तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।"
श्रोता
यूहन्ना का यह अंतिम अध्याय उन कलीसियाओं तक पहुँचा जब पतरस मारा जा चुका था; अगले ही पदों में उसकी मृत्यु का संकेत है। यानी पहले पाठक एक ऐसे व्यक्ति की बहाली पढ़ रहे थे जिसकी वफ़ादारी का अंत वे पहले से जानते थे। उनके लिए यह कोई भावुक कहानी नहीं थी, बल्कि आश्वासन: दबाव में टूट जाना अंतिम शब्द नहीं है। उनमें से कई स्वयं जाँच के क्षणों में मुकर चुके थे, कुछ ने रोमी अधिकारियों के सामने नाम छिपाया था, कुछ ने आराधना छोड़ दी थी। जब उन्होंने सुना कि प्रभु ने उस मुकरने वाले को चरवाही सौंप दी, तो उन्होंने अपनी कलीसिया के अगुवों को भी नई नज़र से देखा होगा, और शायद अपने आप को भी।
मुख्य पात्र
पतरस इस अध्याय में पूरा का पूरा दिखता है: वही आदमी जो पहचानते ही झील में कूद पड़ता है, वही जो तीसरी बार पूछे जाने पर उदास हो जाता है। उसकी शब्दावली बदल गई है। पहले वह बोलता था कि सब गिरें तो गिरें, मैं नहीं; अब वह अपने प्रेम की मात्रा नापने से इनकार करता है और गवाही का भार यीशु के जानने पर डाल देता है। यह विनम्रता है, पर यह उसका स्वभाव नहीं बदलती। कुछ ही पदों बाद वह फिर मुड़कर पूछेगा, "हे प्रभु, इसका क्या हाल होगा?" तुलना करने की आदत मरी नहीं, बस अब उसे सुधारा जाता है। बहाली किसी को दूसरा आदमी नहीं बनाती; वह उसी आदमी को नई दिशा में जोत देती है।
एक बारीकी
पहली बार यीशु "भेड़" नहीं, "मेम्नों" कहते हैं। यूनानी क्रिया यहाँ बोस्के है, यानी चराना, घास तक ले जाना, खिलाना। मेमने वे हैं जो अपने बल पर झुंड के साथ चल नहीं सकते, जो सबसे पहले खो जाते हैं और सबसे आसानी से मारे जाते हैं। जिस आदमी ने अभी-अभी अपनी कमज़ोरी को नाम दिया है, उसे सबसे कमज़ोरों के पास भेजा जाता है। और दोनों बार सर्वनाम पर ध्यान दीजिए: "मेरे मेम्नों", "मेरी भेड़ों"। झुंड कभी पतरस का नहीं होता। हर अगुवा, हर माता-पिता, हर शिक्षक जो इसे भूलता है, वह चराना छोड़कर मालिकी करने लगता है, और यहेजकेल का वही पुराना अभियोग फिर से लागू हो जाता है।
मनन के प्रश्न
आपकी सेवा या भक्ति में वह "इनसे बढ़कर" कहाँ छिपा है, और अगर वह तुलना हट जाए तो क्या बचेगा?
आपके आसपास कौन सा "मेम्ना" है, कोई ऐसा जो अपने बल पर चल नहीं सकता, और आप उसे किसका मानकर सँभालते हैं, अपना या प्रभु का?
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John 21:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यूहन्ना 21:15 का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 21:15 किस विषय में है?
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यूहन्ना 21:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
John 21 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
यूहन्ना अपनी पुस्तक खत्म करते हुए लिखता है, "और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक-एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं।" सोचो, जो तुम पढ़ते हो वह सिर्फ़ एक झलक है। जितना तुम उसे जानते हो, उससे कहीं ज़्यादा वह है। आज उसके बारे में जो तुम्हें अभी पता नहीं, उसे जानने की भूख रखो।
यूहन्ना अपनी पूरी किताब के अंत में खुद को नाम से नहीं, गवाही से पहचानता है, "यह वही चेला है, जो इन बातों की गवाही देता है और जिसने इन बातों को लिखा है।" जो सीना यीशु से सटा था, वही हाथ अब कलम पकड़े है। तुम्हारे जीवन की कौन सी बात ऐसी है जिसे तुम कह सको, मैंने खुद देखा है? गवाही सुनी हुई नहीं, जी हुई होती है।
प्रभु, तूने पहले ही किनारे पर आग जलाकर सब तैयार रखा था, फिर भी तूने कहा कि जो हमने पकड़ा है, उसमें से कुछ ले आएँ। मेरे पास जो थोड़ा सा है, वह तेरे सामने रखता हूँ। तू मेरी छोटी सी मेहनत को भी अपने काम में शामिल कर लेता है, इसके लिए धन्यवाद।
पिता, मैं बार-बार दूसरों की ओर देखता हूँ और पूछता हूँ कि उनका रास्ता मेरे से आसान क्यों है। मुझे तुलना की इस आदत से बचा। जो राह तूने मेरे लिए रखी है, उसी पर चलने की सादगी और भरोसा मुझे दे। तेरे पीछे चलना ही मेरे लिए काफ़ी हो।
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