बाइबल व्याख्या

लूका 10

पढ़ें
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

प्रभु यीशु सत्तर शिष्यों को दो-दो करके उन नगरों में आगे भेजते हैं जहाँ वे स्वयं जाने वाले हैं: बिना बटुए, बिना झोली, बिना जूतों के, भेड़ों की तरह भेड़ियों के बीच, इस एक संदेश के साथ कि "परमेश्वर का राज्य तुम्हारे निकट आ पहुँचा है।" वे आनन्द से लौटते हैं कि दुष्टात्माएँ भी वश में हुईं, और यीशु उनका आनन्द दूसरी जगह मोड़ देते हैं, फिर पिता के सामने उल्लास में फूट पड़ते हैं। इसके बाद अध्याय दो दृश्यों में उतरता है: एक व्यवस्थापक पूछता है "मेरा पड़ोसी कौन है?" और उत्तर में यरीहो की सड़क पर पड़े अधमरे आदमी और उस सामरी की कहानी आती है; और अंत में मार्था के घर में, जहाँ सेवा और सुनना आपस में टकराते हैं।

मूल बात

यह पूरा अध्याय एक ही प्रश्न के इर्द-गिर्द घूमता है: परमेश्वर का राज्य पास आ जाए, तो जीवन का ढाँचा कैसे बदलता है? पहले शिष्यों की जेबें खाली की जाती हैं, क्योंकि जो राज्य की घोषणा करता है उसे स्वयं भी उसी दया पर जीना पड़ता है जिसकी वह घोषणा कर रहा है। फिर सफलता की खुशी को काटा जाता है: "इससे आनन्दित मत हो, कि आत्मा तुम्हारे वश में हैं, परन्तु इससे आनन्दित हो कि तुम्हारे नाम स्वर्ग पर लिखे हैं।" पहचान उपलब्धि से नहीं, अनुग्रह से आती है। और यही अनुग्रह तुरन्त नैतिक रूप लेता है: पड़ोसी कोई श्रेणी नहीं, बल्कि वह व्यक्ति है जिसके पास आप रुकते हैं। परमेश्वर का राज्य यहाँ सिद्धान्त नहीं, समय, तेल, पट्टियाँ और दो दीनार माँगता है।

सूत्र

ध्यान दीजिए कि सत्तर को कहाँ भेजा जाता है: "जिस-जिस नगर और जगह को वह आप जाने पर था।" वे अग्रदूत हैं, अंतिम शब्द नहीं। जो आ रहा है, वही असली बात है। और यही पूरे अध्याय का सूत्र है: परमेश्वर कोई सन्देश नहीं भेजते, वे स्वयं आते हैं। यरीहो की सड़क पर पड़ा आदमी अपनी मदद नहीं कर सकता; उसके पास न कपड़े हैं, न आवाज़, न सौदेबाजी की ताकत। जो उसे बचाता है वह वही है जिससे उसे कोई उम्मीद न थी, और जो अपनी जेब से कीमत चुकाता है। व्यवस्थापक ने ठीक उत्तर दिया था, पर व्यवस्था उसे सड़क तक नहीं ले जा सकी। मसीह ले जाते हैं। पद 22 इसे खोल देता है: पिता को कोई नहीं जानता, "केवल पुत्र के और वह जिस पर पुत्र उसे प्रकट करना चाहे।" पहले प्रकाशन, फिर पट्टियाँ।

दर्पण

याजक और लेवी बुरे लोग नहीं थे। उनके पास कारण थे: समय, नियम, जोखिम, शायद यह डर कि सड़क पर पड़ा शरीर एक जाल हो। हमारे कारण भी उतने ही समझदार लगते हैं। कॉल बाद में कर लूँगा। यह मेरा विभाग नहीं। पैसे देने से वह और निर्भर हो जाएगा। मेरे पास इस महीने बिल्कुल जगह नहीं है। "कतराकर चला गया" कोई नाटकीय पाप नहीं है, यह बस थोड़ा-सा रास्ता बदलना है, इतना थोड़ा कि आप खुद इसे पाप कहेंगे भी नहीं। और मार्था का दर्पण दूसरी तरफ से चुभता है: आप व्यस्त हैं यीशु के लिए, और उसी व्यस्तता में उनकी बात सुनने का समय नहीं। "तू बहुत बातों के लिये चिन्ता करती और घबराती है।" यह डाँट नहीं, निदान है।

आज करने के लिए एक काम: उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिससे आप इस हफ्ते जानबूझकर कतरा गए, और अभी उसे एक संदेश भेजिए या फोन कीजिए, बिना बहाने के, सिर्फ यह पूछने के लिए कि वह कैसा है।

मुख्य पात्र

इस अध्याय का यीशु शान्त और तटस्थ नहीं है। वह खुराजीन और बैतसैदा पर "हाय" कहता है, कफरनहूम से कहता है "तू तो अधोलोक तक नीचे जाएगा," और उसी साँस में पवित्र आत्मा में "आनन्द से भर गया" (यूनानी में ऐसा उल्लास जो लगभग नाचने जैसा है) क्योंकि पिता ने बालकों पर सब कुछ प्रकट किया। वह व्यवस्थापक के सवाल को टालता नहीं, उसे उलट देता है। और थकी हुई, चिढ़ी हुई मार्था से वह ठंडेपन से नहीं, बल्कि नाम दोहराकर बात करता है: "मार्था, हे मार्था।" यही उसका स्वभाव है: जहाँ आत्मसंतोष है वहाँ कठोर, जहाँ थकान है वहाँ कोमल। जो उसे सिर्फ मीठा बनाना चाहते हैं, उन्हें यह अध्याय पढ़ना कठिन लगेगा।

पहले सुननेवाले

लूका के पाठकों के लिए "सामरी" कोई तटस्थ शब्द नहीं था। एक अध्याय पहले ही एक सामरी गाँव ने यीशु को ठुकराया था। दो जातियाँ जो एक-दूसरे को धर्मभ्रष्ट मानती थीं, जो एक-दूसरे के बर्तन में नहीं खाती थीं। कहानी सुनते हुए श्रोता उम्मीद कर रहा था कि तीसरा आदमी एक साधारण इस्राएली होगा, याजक और लेवी के मुकाबले आम आदमी। यीशु ने उस उम्मीद को तोड़ दिया, और नायक वह बनाया जिससे सुननेवाला घृणा करता था। इसीलिए व्यवस्थापक उत्तर में "सामरी" शब्द भी नहीं बोल पाता; वह कहता है "वही जिसने उस पर तरस खाया।" और मार्था के घर में: एक स्त्री का गुरु के पाँवों के पास शिष्य की तरह बैठना उस समय अटपटा था। यीशु कहते हैं, यही उत्तम भाग है।

एक बारीकी

"अपनी सवारी पर चढ़ाकर" पर रुकिए। इसका मतलब है कि सामरी खुद पैदल चला। उसने न सिर्फ तेल, दाखरस और दो दीनार दिए, उसने अपनी जगह दी और अपनी गति धीमी की। घायल आदमी होश में आता तो शायद उसके स्पर्श से भी घिन करता; सामरी को यह पता था और उसने फिर भी उसे उठाया। यहीं दया और मदद के बीच का फर्क दिखता है। मदद दूर से भेजी जा सकती है, दया में आपको उतरना पड़ता है, अपनी सुविधा से नीचे। और सराय में वह खुला खाता छोड़ जाता है: "जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे दे दूँगा।" प्रेम जो पहले से हिसाब नहीं लगाता कि कितना महँगा पड़ेगा।

चिंतन

पिछले सात दिनों में आप किससे "कतराकर" निकले, और आपने अपने मन में उसके लिए कौन-सा उचित लगने वाला कारण गढ़ा?

आपका आनन्द किस पर टिका है: इस पर कि आपकी सेवा में कुछ काम कर रहा है, या इस पर कि आपका नाम स्वर्ग पर लिखा है? इन दोनों में फर्क आपके बुरे दिनों में कैसे दिखता है?

पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें

आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।

स्वीकारोक्ति

स्वीकारोक्ति

संत अगस्तीन

अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।

उद्देश्य भरा जीवन

उद्देश्य भरा जीवन

रिक वॉरेन

चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

भाई लॉरेन्स

रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।

जंगल का छिपने का स्थान

जंगल का छिपने का स्थान

कोरी टेन बूम

नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।

जीसस कॉलिंग

जीसस कॉलिंग

सारा यंग

प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।

एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Luke 10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

लूका 10 का क्या अर्थ है?
प्रभु यीशु सत्तर शिष्यों को दो-दो करके उन नगरों में आगे भेजते हैं जहाँ वे स्वयं जाने वाले हैं: बिना बटुए, बिना झोली, बिना जूतों के, भेड़ों की तरह भेड़ियों के बीच, इस एक संदेश के साथ कि "परमेश्वर का राज्य तुम्हारे निकट आ पहुँचा है।" वे आनन्द से लौटते हैं कि दुष्टात्माएँ भी वश में हुईं, और यीशु उनका आनन्द दूसरी जगह मोड़ देते हैं, फिर पिता के सामने उल्लास में फूट पड़ते हैं। इसके बाद अध्याय दो दृश्यों में उतरता
लूका 10 किस विषय में है?
ध्यान दीजिए कि सत्तर को कहाँ भेजा जाता है: "जिस-जिस नगर और जगह को वह आप जाने पर था।" वे अग्रदूत हैं, अंतिम शब्द नहीं। जो आ रहा है, वही असली बात है। और यही पूरे अध्याय का सूत्र है: परमेश्वर कोई सन्देश नहीं भेजते, वे स्वयं आते हैं। यरीहो की सड़क पर पड़ा आदमी अपनी मदद नहीं कर सकता; उसके पास न कपड़े हैं, न आवाज़, न सौदेबाजी की ताकत। जो उसे बचाता है वह वही है जिससे उसे कोई उम्मीद न थी, और जो अपनी जेब से कीमत चुकाता है। व्यवस्थापक ने ठीक उत्तर दिया था, पर व्यवस्था उसे सड़क तक नहीं ले जा सकी। मसीह ले जाते हैं। पद 22 इसे खोल देता है: पिता को कोई नहीं जानता, "केवल पुत्र के और वह जिस पर पुत्र उसे प्रकट करना चाहे।" पहले प्रकाशन, फिर पट्टियाँ।
लूका 10 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज करने के लिए एक काम: उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिससे आप इस हफ्ते जानबूझकर कतरा गए, और अभी उसे एक संदेश भेजिए या फोन कीजिए, बिना बहाने के, सिर्फ यह पूछने के लिए कि वह कैसा है।
लूका 10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
लूका के पाठकों के लिए "सामरी" कोई तटस्थ शब्द नहीं था। एक अध्याय पहले ही एक सामरी गाँव ने यीशु को ठुकराया था। दो जातियाँ जो एक-दूसरे को धर्मभ्रष्ट मानती थीं, जो एक-दूसरे के बर्तन में नहीं खाती थीं। कहानी सुनते हुए श्रोता उम्मीद कर रहा था कि तीसरा आदमी एक साधारण इस्राएली होगा, याजक और लेवी के मुकाबले आम आदमी। यीशु ने उस उम्मीद को तोड़ दिया, और नायक वह बनाया जिससे सुननेवाला घृणा करता था। इसीलिए व्यवस्थापक उत्तर में "सामरी" शब्द भी नहीं बोल पाता; वह कहता है "वही जिसने उस पर तरस खाया।" और मार्था के घर में: एक स्त्री का गुरु के पाँवों के पास शिष्य की तरह बैठना उस समय अटपटा था। यीशु कहते हैं, यही उत्तम भाग है।
लूका 10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पिछले सात दिनों में आप किससे "कतराकर" निकले, और आपने अपने मन में उसके लिए कौन-सा उचित लगने वाला कारण गढ़ा?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Luke 10 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 36

व्यवस्थापक ने पूछा था, "मेरा पड़ोसी कौन है?" पर यीशु ने सवाल उलट दिया, "इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन हुआ?" ध्यान दे, वह पूछते हैं कौन पड़ोसी *बना*। पड़ोसी कोई श्रेणी नहीं, एक फैसला है। सड़क किनारे पड़े उस आदमी की सूची में तू है या नहीं, यह तेरे रुकने से तय होगा।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल की व्याख्याएँ तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडल का उपयोग करता है। हम धर्मशास्त्रीय दृष्टि से सही रहने का पूरा प्रयास करते हैं, फिर भी यह सॉफ़्टवेयर त्रुटि कर सकता है। इस साधन को अपने निजी बाइबल अध्ययन और कलीसिया के संगति जीवन का स्थान लेने वाला न समझें, बल्कि उनके सहायक के रूप में प्रयोग करें।

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

कंपनी?