बाइबल व्याख्या

लूका 23

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

यह पाठ

महासभा यीशु को पिलातुस के पास ले जाती है, और आरोप राजनीतिक रंग में रंगा जाता है: कर देने से मना करना, अपने आपको राजा कहना। पिलातुस तीन बार कहता है कि उसे कोई दोष नहीं मिला, फिर भी भीड़ की चिल्लाहट के आगे झुक जाता है; बरअब्बा छूटता है, निर्दोष सौंपा जाता है। खोपड़ी नामक जगह पर दो कुकर्मियों के बीच उसे क्रूस पर चढ़ाया जाता है, दोपहर से तीसरे पहर तक अंधियारा छाया रहता है, मन्दिर का परदा फट जाता है, और यूसुफ नामक एक सदस्य उसका शव एक नई कब्र में रखता है।

मर्म

एक छोटा-सा वाक्य पूरे अध्याय का धर्मशास्त्र खोल देता है: "उसी दिन पिलातुस और हेरोदेस मित्र हो गए। इसके पहले वे एक दूसरे के बैरी थे।" रोमी सत्ता और यहूदी राजशाही, आपस में शत्रु, यीशु के सामने खड़े होकर दोस्त बन जाते हैं। मनुष्य की एकता अक्सर प्रेम से नहीं, साझे इनकार से बनती है। लूका यही दिखाना चाहता है: यहाँ किसी एक दुष्ट का अपराध नहीं, बल्कि मानवजाति की सामूहिक विद्रोह-प्रवृत्ति उजागर हो रही है। और ठीक उसी बिंदु पर परमेश्वर का अनुग्रह प्रकट होता है: "हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहें हैं?" न्याय और अनुग्रह एक ही क्रूस पर मिलते हैं, और अनुग्रह पहले बोलता है।

जोड़ने वाला सूत्र

"मन्दिर का परदा बीच से फट गया" यह केवल नाटकीय संयोग नहीं। वह परदा सदियों से कहता आया था: पवित्रता के पास बिना बुलाए मत आना, पाप और परमेश्वर के बीच दूरी है। साल में एक बार, लहू लेकर, एक ही याजक भीतर जाता था। अब वह परदा ऊपर से नीचे तक फट जाता है, यानी यह मनुष्य का काम नहीं, परमेश्वर का। जिस वाचा की छाया लैव्यव्यवस्था में थी, उसकी पूर्ति यहाँ होती है: बलिदान अब मन्दिर के भीतर नहीं, नगर के बाहर चढ़ाया गया, और उसने द्वार सदा के लिए खोल दिया। यीशु की मृत्यु मन्दिर-व्यवस्था की हार नहीं, उसका लक्ष्य है।

दर्पण

क्रूस पर लटके दो आदमी एक ही दूरी पर थे, एक ही दर्द में, एक ही घंटे में। फर्क सिर्फ इतना कि एक ने कहा, "हम तो न्यायानुसार दण्ड पा रहे हैं।" उसने अपने जीवन का हिसाब सुधारा नहीं, केवल सच कबूल किया। हम अक्सर सोचते हैं कि परमेश्वर के पास लौटने से पहले कुछ ठीक करना बाकी है: वह रिश्ता, वह आदत, वह हिसाब जो दफ्तर में या घर में गड़बड़ है। यह डाकू हाथ-पैर बंधे हुए, कुछ भी सुधारने की क्षमता के बिना, केवल याचना करता है, और उत्तर आज ही मिलता है। साथ ही यह अध्याय आपके भीतर के पिलातुस को भी दिखाता है: वह जो जानता है क्या सही है, पर भीड़ की आवाज़ प्रबल हो जाती है। आज एक काम कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसने आपको सचमुच चोट पहुँचाई है, और उस नाम पर उँगली रखकर ऊँची आवाज़ में कहिए, "हे पिता, इन्हें क्षमा कर।"

पहले सुननेवाले

लूका का पहला पाठक-वर्ग बड़ी हद तक गैर-यहूदी विश्वासी था, जो रोमी साम्राज्य में रहते हुए एक अजीब आरोप झेलता था: तुम्हारा गुरु राजद्रोही था, सूली पर चढ़ा अपराधी। लूका शांत सटीकता से जवाब देता है। पिलातुस तीन बार निर्दोषता की घोषणा करता है, हेरोदेस भी कुछ नहीं पाता, और अंत में एक रोमी सूबेदार ही कहता है, "निश्चय यह मनुष्य धर्मी था।" जिन कानों ने रोम की अदालतों की भाषा सुनी थी, उनके लिए यह गवाही भारी थी: साम्राज्य की अपनी आवाज़ से यीशु निर्दोष ठहरा। और सतायी जा रही कलीसिया के लिए संदेश साफ था कि निर्दोष होकर दुख उठाना मसीह के रास्ते से भटकना नहीं है।

मुख्य पात्र

इस पूरे अध्याय में यीशु सबसे कम बोलते हैं और सबसे अधिक भारी बोलते हैं। हेरोदेस के सामने पूरी चुप्पी, क्योंकि चमत्कार का तमाशा माँगनेवाले को उत्तर नहीं मिलता। पर रोती हुई स्त्रियों से वे मुड़कर बात करते हैं, अपनी पीड़ा के बीच में दूसरों के भविष्य की चिंता करते हुए: "जब वे हरे पेड़ के साथ ऐसा करते हैं, तो सूखे के साथ क्या कुछ न किया जाएगा?" यह करुणा है, पर भावुक नहीं, चेतावनी से भरी हुई। और अंतिम शब्द विजय की गर्जना नहीं, सौंपने का भरोसा है: "हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ।" यह वही भरोसा है जो पूरी सुसमाचार-कथा में उन्हें चलाता रहा।

पृष्ठभूमि

यह फसह के पर्व की तैयारी का दिन है, यरूशलेम तीर्थयात्रियों से भरा है, और रोमी हाकिम सामान्यतः कैसरिया में रहता था पर पर्व के दिनों में शहर में मौजूद रहता, क्योंकि भीड़ और बगावत साथ-साथ चलते थे। पिलातुस का डर धार्मिक नहीं, राजनीतिक था: दंगा हुआ तो रोम को जवाब देना पड़ेगा। इसीलिए बरअब्बा का छूटना इतना कड़वा है, वह सचमुच "बलवे और हत्या के कारण" बंद था, यानी वही अपराध जिसका झूठा आरोप यीशु पर लगा। यूनानी में यीशु डाकू से जो शब्द कहते हैं वह है परादैसोस, बगीचा। जिस बाग से मनुष्य निकाला गया था, उसका द्वार एक फाँसी की जगह पर फिर खुलता है।

चिंतन

पिलातुस जानता था कि सही क्या है और फिर भी भीड़ के आगे झुका; आपके जीवन में इस समय कौन-सी "चिल्लाहट" आपके विवेक से ज़्यादा प्रबल हो रही है?

यदि वह डाकू बिना कुछ सुधारे केवल याचना करके स्वीकार हुआ, तो आप किस बात को अभी तक परमेश्वर के पास लौटने की शर्त बनाए बैठे हैं?

Luke में और गहराई से जानें

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Luke For Everyone

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Luke: An Introduction and Commentary

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Luke 23 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

लूका 23 का क्या अर्थ है?
महासभा यीशु को पिलातुस के पास ले जाती है, और आरोप राजनीतिक रंग में रंगा जाता है: कर देने से मना करना, अपने आपको राजा कहना। पिलातुस तीन बार कहता है कि उसे कोई दोष नहीं मिला, फिर भी भीड़ की चिल्लाहट के आगे झुक जाता है; बरअब्बा छूटता है, निर्दोष सौंपा जाता है। खोपड़ी नामक जगह पर दो कुकर्मियों के बीच उसे क्रूस पर चढ़ाया जाता है, दोपहर से तीसरे पहर तक अंधियारा छाया रहता है, मन्दिर का परदा फट जाता है, और यूसुफ नामक एक सदस्य उसका शव एक नई कब्र में रखता है।
लूका 23 किस विषय में है?
"मन्दिर का परदा बीच से फट गया" यह केवल नाटकीय संयोग नहीं। वह परदा सदियों से कहता आया था: पवित्रता के पास बिना बुलाए मत आना, पाप और परमेश्वर के बीच दूरी है। साल में एक बार, लहू लेकर, एक ही याजक भीतर जाता था। अब वह परदा ऊपर से नीचे तक फट जाता है, यानी यह मनुष्य का काम नहीं, परमेश्वर का। जिस वाचा की छाया लैव्यव्यवस्था में थी, उसकी पूर्ति यहाँ होती है: बलिदान अब मन्दिर के भीतर नहीं, नगर के बाहर चढ़ाया गया, और उसने द्वार सदा के लिए खोल दिया। यीशु की मृत्यु मन्दिर-व्यवस्था की हार नहीं, उसका लक्ष्य है।
लूका 23 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
लूका का पहला पाठक-वर्ग बड़ी हद तक गैर-यहूदी विश्वासी था, जो रोमी साम्राज्य में रहते हुए एक अजीब आरोप झेलता था: तुम्हारा गुरु राजद्रोही था, सूली पर चढ़ा अपराधी। लूका शांत सटीकता से जवाब देता है। पिलातुस तीन बार निर्दोषता की घोषणा करता है, हेरोदेस भी कुछ नहीं पाता, और अंत में एक रोमी सूबेदार ही कहता है, "निश्चय यह मनुष्य धर्मी था।" जिन कानों ने रोम की अदालतों की भाषा सुनी थी, उनके लिए यह गवाही भारी थी: साम्राज्य की अपनी आवाज़ से यीशु निर्दोष ठहरा। और सतायी जा रही कलीसिया के लिए संदेश साफ था कि निर्दोष होकर दुख उठाना मसीह के रास्ते से भटकना नहीं है।
लूका 23 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह फसह के पर्व की तैयारी का दिन है, यरूशलेम तीर्थयात्रियों से भरा है, और रोमी हाकिम सामान्यतः कैसरिया में रहता था पर पर्व के दिनों में शहर में मौजूद रहता, क्योंकि भीड़ और बगावत साथ-साथ चलते थे। पिलातुस का डर धार्मिक नहीं, राजनीतिक था: दंगा हुआ तो रोम को जवाब देना पड़ेगा। इसीलिए बरअब्बा का छूटना इतना कड़वा है, वह सचमुच "बलवे और हत्या के कारण" बंद था, यानी वही अपराध जिसका झूठा आरोप यीशु पर लगा। यूनानी में यीशु डाकू से जो शब्द कहते हैं वह है परादैसोस, बगीचा। जिस बाग से मनुष्य निकाला गया था, उसका द्वार एक फाँसी की जगह पर फिर खुलता है।
लूका 23 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि वह डाकू बिना कुछ सुधारे केवल याचना करके स्वीकार हुआ, तो आप किस बात को अभी तक परमेश्वर के पास लौटने की शर्त बनाए बैठे हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Luke 23 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 39

पिता, धन्यवाद कि क्रूस पर लटके उस कुकर्मी के ताने, "अपने आप को और हमें भी बचा," सुनकर भी यीशु नीचे नहीं उतरे। उन्होंने अपने आप को नहीं बचाया, ताकि मुझे बचा सकें। उस ठहरे रहने के लिए आपका बहुत आभार।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 46

पिता, जब सब कुछ हाथ से छूटता लगता है, तब मैं भी अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपना सीखना चाहता हूँ। मेरे डर, मेरी अधूरी बातें, मेरा कल, सब तुझे दे देता हूँ। तेरे हाथ सुरक्षित हैं, यही मेरा भरोसा हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 30

अपनी पीठ पर क्रूस लिए, लहूलुहान चलते हुए यीशु रुककर रोती हुई स्त्रियों से कहते हैं कि मेरे लिए नहीं, अपने लिए रोओ। और फिर यह भयानक बात: "तब वे पहाड़ों से कहने लगेंगे, 'हम पर गिरो' और टीलों से कि 'हमें ढाँप लो।'" सोचो, पहाड़ के नीचे दबना उस दिन का सामना करने से आसान लगेगा। पर जिससे लोग छिपना चाहेंगे, वही आज तुम्हें ढाँपने को क्रूस तक चला जा रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

फसह पर एक बन्दी को छोड़ने की रीति थी, "उसे हर एक पर्व में उनके लिये एक बन्दी को छोड़ना पड़ता था।" छुटकारे के इसी पर्व में एक दोषी छूट गया और एक निर्दोष बाँधा गया। बरअब्बा को शायद कभी समझ न आया हो कि उसकी जंजीरें किसने पहनीं। पर तुम जानते हो। तुम्हारी जगह कोई खड़ा हुआ था। आज उस अदला बदली को हल्के में मत लेना।

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