भजन संहिता 139
पाठ
दाऊद इस भजन की शुरुआत एक ऐसे दावे से करता है जो सांत्वना भी है और घेराबंदी भी: "हे यहोवा, तूने मुझे जाँचकर जान लिया है।" उठना, बैठना, चलना, लेटना, मुँह से निकलने वाला हर शब्द और उससे पहले मन में उठा हर विचार, सब कुछ परमेश्वर के सामने खुला पड़ा है। फिर वह भागने की कल्पना करता है, आकाश तक, अधोलोक तक, भोर की किरणों पर सवार होकर समुद्र पार तक, और हर जगह वही हाथ उसे थामे मिलता है। इसके बाद वह पीछे मुड़कर गर्भ के अंधकार में झाँकता है, जहाँ उसकी देह बुनी जा रही थी और परमेश्वर की आँखें उस "बेडौल तत्व" पर टिकी थीं। अंत में वह दुष्टों के विरुद्ध तीखा फैसला सुनाता है और फिर अचानक वही जाँच अपने ऊपर माँग लेता है।
मूल बात
इस भजन का दिल यह है कि परमेश्वर का ज्ञान दूर से देखने वाली निगरानी नहीं, बल्कि पास आकर थामने वाला सम्बन्ध है। दुनिया में जाना जाना आमतौर पर खतरनाक होता है; जो आपके बारे में सब जानता है, वह आपको ब्लैकमेल कर सकता है, आपकी कीमत तय कर सकता है, आपको छोड़ सकता है। दाऊद यह मानता है कि परमेश्वर सब जानते हैं, पर फिर कहता है, "तो वहाँ भी तू अपने हाथ से मेरी अगुआई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।" यानी पूरा ज्ञान और पूरी वफ़ादारी एक ही हाथ में हैं। यही अनुग्रह का ढाँचा है: परमेश्वर हमें भ्रम के बिना जानते हैं और फिर भी शर्त के बिना थामे रहते हैं। पद 6 में दाऊद स्वीकार करता है कि यह समझ उसकी पकड़ से बाहर है, और यही ईमानदारी इस भजन को भावुक नहीं, गहरा बनाती है।
जोड़ने वाला सूत्र
पद 13 से 16 तक दाऊद उस जगह की बात करता है जहाँ किसी इंसान की आँख नहीं पहुँची: गर्भ का अंधेरा, "गुप्त" का कारख़ाना। यह वही जगह है जहाँ बाइबल की कहानी बार-बार मुड़ती है, क्योंकि परमेश्वर अपने काम की शुरुआत हमेशा वहीं करते हैं जहाँ कोई देख नहीं रहा। सारा का बाँझपन, हन्ना के आँसू, मरियम का गर्भ, सब इसी पैटर्न पर हैं। और जब परमेश्वर स्वयं देह धारण करते हैं, तो वे भी इसी रास्ते से आते हैं, एक गर्भ के अंधकार से, जहाँ "अंधियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।" यीशु मसीह में यह भजन सिर्फ़ सच्चा नहीं रहता, वह देह बन जाता है: वह इंसान जो हर इंसान को भीतर तक जानता है और फिर भी उसे छोड़ता नहीं। नतनएल से उनका पहला वाक्य यही था, कि मैंने तुझे अंजीर के पेड़ के नीचे देख लिया था, और वह देखा जाना निंदा नहीं, बुलाहट बन गया।
आईना
आप जानते हैं कि आपके भीतर एक कमरा है जिसका दरवाज़ा आप किसी के लिए नहीं खोलते। वह ईर्ष्या जो किसी सहकर्मी की तरक्की पर उठती है, वह हिसाब जो आपने घर में किसी के विरुद्ध चुपचाप जोड़ रखा है, वह रात का स्क्रीन जिसे सुबह आप याद नहीं करना चाहते, वह डर कि अगर लोग असली आपको जान लें तो टिकेंगे नहीं। दाऊद कहता है कि वह कमरा पहले से खुला है। "मेरे मुँह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।" यह पहले चुभता है, फिर छुड़ाता है, क्योंकि अब छवि बचाने का श्रम बेकार है। और ध्यान दीजिए, भजन जाँच के डर से शुरू होकर जाँच की माँग पर ख़त्म होता है।
आज ही पद 23 और 24 को ज़ोर से, अपनी आवाज़ में बोलकर प्रार्थना कीजिए, फिर दो मिनट चुप बैठिए और जो एक "बुरी चाल" मन में सबसे पहले उभरे, उसे कागज़ पर एक वाक्य में लिख डालिए।
मुख्य पात्र
इस भजन का मुख्य पात्र परमेश्वर हैं, और उनका चित्र हैरान करने वाला है। वे जासूस नहीं, कारीगर हैं। पद 13 का जो शब्द "रचा" के लिए इस्तेमाल हुआ है, उसका अर्थ है धागे बुनना, जैसे कोई कारीगर करघे पर बैठा हो। यही परमेश्वर हैं जो आपके अंदरूनी अंगों को बुनते हैं, आपकी अधूरी, "बेडौल" अवस्था को देखते हैं और घबराते नहीं। और यही परमेश्वर हैं जो अधोलोक तक पीछा करते हैं, पर पकड़ने के लिए नहीं, थामने के लिए: "अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।" दाऊद का अपना भीतरी मौसम इसमें साफ़ दिखता है, पहले बेचैनी, फिर हार मान लेना, फिर आश्चर्य, और अंत में वह साहस जो केवल जाना हुआ इंसान जुटा पाता है।
पहले सुनने वाले
जो लोग यह भजन पहली बार मंदिर में गाते थे, वे ऐसी दुनिया में जीते थे जहाँ हर देवता का एक इलाक़ा था। समुद्र पार जाना या क़ब्र में उतरना मतलब अपने देवता के अधिकार क्षेत्र से बाहर निकल जाना। इसलिए "यदि मैं अपना खाट अधोलोक में बिछाऊँ तो वहाँ भी तू है" उनके कानों में धर्मशास्त्र का विस्फोट था। परदेस में बसे, बंधुआई में ले जाए गए, बीमार या मरणासन्न इस्राएली के लिए इसका अर्थ था कि यहोवा येरूशलेम में छूट नहीं गए। और जिनके पास न ज़मीन थी न वंश, उनके लिए पद 16 का मतलब था कि उनका नाम किसी सरकारी रजिस्टर में नहीं, परमेश्वर की पुस्तक में दर्ज है।
कठिन सवाल
पद 19 से 22 को छोड़ देने का मन करता है। इतनी कोमल बुनाई के बाद अचानक, "हे हत्यारों, मुझसे दूर हो जाओ," और फिर वह वाक्य जो हमें असहज करता है: "मैं उनसे पूर्ण बैर रखता हूँ।" इसे मीठा करने की ज़रूरत नहीं। दाऊद अपनी निजी दुश्मनी नहीं, परमेश्वर के नाम के दुरुपयोग पर गुस्सा उतार रहा है, और वह गुस्सा वह अपने हाथ में नहीं रखता, परमेश्वर के सामने रख देता है। फिर भी तनाव बना रहता है, क्योंकि मसीह ने शत्रुओं से प्रेम करने को कहा। शायद इसका जवाब अगले ही पद में छिपा है: जो व्यक्ति दूसरों की दुष्टता पर इतना तप रहा था, वह तुरंत कहता है, मुझे भी जाँचिए। जो अपनी नफ़रत को परमेश्वर की जाँच के नीचे रखने को तैयार है, वह कम से कम सही जगह खड़ा है। और वहीं से वह प्रार्थना निकलती है जिसे हम सब को चाहिए: "अनन्त के मार्ग में मेरी अगुआई कर!"
चिंतन
आपके भीतर वह कौन सा कोना है जिसके बारे में आप चाहते हैं कि परमेश्वर उसे न देखें, और उसे छिपाए रखने में आपकी कितनी ताक़त ख़र्च होती है?
जब आप किसी की दुष्टता पर सचमुच गुस्सा होते हैं, तो क्या आप उसी साँस में अपने लिए भी जाँच माँग पाते हैं, जैसे दाऊद ने माँगी?
Psalms में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
A year of daily devotions through every psalm, ideal alongside your reading.
The second half of the psalter with the same loved precision.
Lewis thinking out loud about praise, cursing psalms and joy.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Psalms 139 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 139 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 139 किस विषय में है?
भजन संहिता 139 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 139 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 139 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 139 में आपको क्या स्पर्श करता है?
इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
