बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 51:7

बाइबल

पाठ

एक आदमी, जो राजा है, जिसके पास सेना है, महल है, दरबार है, अपने परमेश्वर से एक ऐसी चीज़ माँग रहा है जो केवल याजक किसी कोढ़ी पर करता था। "जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊँगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूँगा।" जूफा वह छोटी, झाड़ीनुमा टहनी थी जिसे लहू या शुद्धिकरण के जल में डुबोकर छिड़का जाता था। दाऊद यह नहीं कह रहा कि मैं सुधर जाऊँगा; वह कह रहा है कि मुझ पर वह अनुष्ठान कीजिए जो बस्ती के बाहर रहने वालों पर किया जाता है। और फिर, धुलने के बाद, बर्फ़ से भी अधिक उजला।

केंद्रीय सत्य

ध्यान दीजिए कि इस पद में हर क्रिया परमेश्वर की है और हर परिणाम दाऊद का। "शुद्ध कर", "धो" वे करते हैं; "पवित्र हो जाऊँगा", "श्वेत बनूँगा" यह उसके साथ होता है। यहाँ इब्रानी में जो शब्द "शुद्ध कर" के लिए है, उसका शाब्दिक अर्थ है "पाप को हटा देना", मानो पाप कोई ऐसी चीज़ हो जिसे किसी बाहरी हाथ से खुरचकर निकालना पड़े। यही इस पद की चुभन है: दाऊद अपने पश्चाताप को भी अपनी योग्यता नहीं बनाता। वह प्रायश्चित्त नहीं चढ़ाता, वह अपने आप को चढ़ा देता है। और "हिम से भी अधिक श्वेत" उस पुरानी हालत में लौटना नहीं है, यह उससे आगे की कोई उजली चीज़ है, जो अनुग्रह ही दे सकता है।

जोड़ने वाला सूत्र

जूफा की टहनी बाइबल में दो बार निर्णायक क्षणों पर उठती है। पहली बार मिस्र में, जब हर परिवार ने जूफा को मेम्ने के लहू में डुबोकर द्वार की चौखट पर लगाया और मृत्यु घर के ऊपर से निकल गई (निर्गमन 12)। दूसरी बार गोलगोथा पर, जहाँ यूहन्ना बताता है कि सिरके में भिगोया स्पंज जूफा की टहनी पर रखकर यीशु के मुँह तक पहुँचाया गया। दाऊद यह जोड़ नहीं देख सकता था, पर वह ठीक उसी दिशा में हाथ बढ़ा रहा है: मुझे किसी लहू के छिड़काव की ज़रूरत है, किसी ऐसे बलिदान की जो मेरे किए हुए से बाहर हो। और जिस मेम्ने पर वह टहनी अंत में टिकी, वही इस प्रार्थना का उत्तर है। यही कारण है कि भजन आगे कहता है कि परमेश्वर होमबलि से प्रसन्न नहीं होते; कोई बकरा इस दाग को उठा नहीं सकता।

दर्पण

हम अपने पापों को हटाते नहीं, उन्हें प्रबंधित करते हैं। जिस बात पर हमें शर्म आती है, उसके लिए हम एक व्याख्या तैयार रखते हैं: वह दिन कठिन था, वह आदमी पहले गलत बोला, दफ्तर में सब ऐसा ही करते हैं। हम अपने विवाह के उस कड़वे वाक्य को, बच्चे पर चिल्लाने को, हिसाब में उस छोटी बेईमानी को, इंटरनेट पर उस आदत को अपने ही अदालत में मुकदमा चलाकर बरी कर देते हैं। दाऊद यह रास्ता छोड़ देता है। वह वकील बनने से इनकार करता है और कोढ़ी की जगह खड़ा हो जाता है, हाथ खुले, कहता है: छिड़काव कीजिए। यह अपमानजनक लगता है, और यही स्वतंत्रता का दरवाज़ा है, क्योंकि जो सफ़ाई हम खुद करते हैं वह कभी हिम से अधिक श्वेत नहीं होती।

आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक बात लिखिए जिसे आप बार-बार अपने सामने उचित ठहराते हैं, और फिर ज़ोर से, अपनी आवाज़ में कहिए, "मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूँगा।" फिर वह कागज़ फाड़ दीजिए।

मुख्य पात्र

दाऊद यहाँ राजा नहीं है, वह बीमार है। उसकी भाषा शरीर की भाषा है: धोना, छिड़काव, टूटी हड्डियाँ। यह वही आदमी है जिसने गोलियत के सामने डर नहीं दिखाया, पर अपने ही हृदय के सामने वह ढह गया है। ध्यान दीजिए कि वह सज़ा से बचने की भीख नहीं माँगता; वह पवित्रता माँगता है। उसका दुख यह नहीं कि पकड़ा गया, बल्कि यह कि उसका पाप "निरन्तर" उसकी दृष्टि में रहता है, दिन में दरबार के बीच और रात में छत पर। और इस अंधेरे में भी उसके पास एक ही ठिकाना है: वही परमेश्वर जिनके विरुद्ध उसने पाप किया। यही विश्वास की सबसे कठोर और सबसे सच्ची अदा है, न्यायी के पास ही शरण लेना।

कठिन प्रश्न

पर बतशेबा का पति तो मर चुका है। कोई छिड़काव ऊरिय्याह को कब्र से नहीं उठाता। यहीं यह पद हमें असहज करता है: क्षमा पाप के परिणामों को नहीं मिटाती। दाऊद खुद आगे "हत्या के अपराध" का नाम लेता है, वह इसे छिपाता नहीं। बाइबल इस दर्द को हल नहीं करती, वह इसे खुला छोड़ देती है। परमेश्वर का धोना अपराधी को निर्दोष के रूप में अपने सामने खड़ा कर देता है, पर इतिहास वैसा ही रहता है, और टूटी हड्डियाँ जुड़ने में समय लेती हैं। इसलिए भजन में हर्ष माँगा जाता है, पाया नहीं जाता। अनुग्रह घाव को मिटाता नहीं; वह घाव के भीतर बैठ जाता है।

पहले सुननेवाले

इस्राएल के जो लोग मंदिर में यह भजन गाते थे, वे जूफा को किसी कविता का चित्र नहीं समझते थे। उन्होंने उसे देखा था। उन्होंने देखा था कि कोढ़ से चंगा हुआ आदमी बस्ती के बाहर बैठा है, याजक आता है, टहनी डुबोता है, छींटे पड़ते हैं, और तब वह आदमी अपने परिवार के पास लौट सकता है। यानी जूफा का अर्थ था: वापसी। समाज में, आराधना में, मेज़ पर। जब वे गाते थे "जूफा से मुझे शुद्ध कर", तो वे केवल भीतरी शांति नहीं माँग रहे थे, वे अपनी जगह माँग रहे थे, परमेश्वर की प्रजा के बीच बैठने का अधिकार। यह पद निर्वासन के अंत की प्रार्थना है।

चिंतन के प्रश्न

आपके भीतर कौन सी बात है जिसे आप सुधारने की कोशिश करते रहते हैं, जबकि वह वास्तव में धोए जाने की माँग करती है?

"हिम से भी अधिक श्वेत" होना आपके लिए क्या बदलेगा, यदि आप सचमुच मान लें कि परमेश्वर ने ऐसा कर दिया है?

Psalms में और गहराई से जानें

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Psalms 51:7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 51:7 का क्या अर्थ है?
एक आदमी, जो राजा है, जिसके पास सेना है, महल है, दरबार है, अपने परमेश्वर से एक ऐसी चीज़ माँग रहा है जो केवल याजक किसी कोढ़ी पर करता था। "जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊँगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूँगा।" जूफा वह छोटी, झाड़ीनुमा टहनी थी जिसे लहू या शुद्धिकरण के जल में डुबोकर छिड़का जाता था। दाऊद यह नहीं कह रहा कि मैं सुधर जाऊँगा; वह कह रहा है कि मुझ पर वह अनुष्ठान कीजिए जो बस्ती के बाहर रहने वालों पर किया जाता है। और फिर, धुलने के बाद, बर्फ़ से भी अधिक उजला।
भजन संहिता 51:7 किस विषय में है?
जूफा की टहनी बाइबल में दो बार निर्णायक क्षणों पर उठती है। पहली बार मिस्र में, जब हर परिवार ने जूफा को मेम्ने के लहू में डुबोकर द्वार की चौखट पर लगाया और मृत्यु घर के ऊपर से निकल गई (निर्गमन 12)। दूसरी बार गोलगोथा पर, जहाँ यूहन्ना बताता है कि सिरके में भिगोया स्पंज जूफा की टहनी पर रखकर यीशु के मुँह तक पहुँचाया गया। दाऊद यह जोड़ नहीं देख सकता था, पर वह ठीक उसी दिशा में हाथ बढ़ा रहा है: मुझे किसी लहू के छिड़काव की ज़रूरत है, किसी ऐसे बलिदान की जो मेरे किए हुए से बाहर हो। और जिस मेम्ने पर वह टहनी अंत में टिकी, वही इस प्रार्थना का उत्तर है। यही कारण है कि भजन आगे कहता है कि परमेश्वर होमबलि से प्रसन्न नहीं होते; कोई बकरा इस दाग को उठा नहीं सकता।
भजन संहिता 51:7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक बात लिखिए जिसे आप बार-बार अपने सामने उचित ठहराते हैं, और फिर ज़ोर से, अपनी आवाज़ में कहिए, "मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूँगा।" फिर वह कागज़ फाड़ दीजिए।
भजन संहिता 51:7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पर बतशेबा का पति तो मर चुका है। कोई छिड़काव ऊरिय्याह को कब्र से नहीं उठाता। यहीं यह पद हमें असहज करता है: क्षमा पाप के परिणामों को नहीं मिटाती। दाऊद खुद आगे "हत्या के अपराध" का नाम लेता है, वह इसे छिपाता नहीं। बाइबल इस दर्द को हल नहीं करती, वह इसे खुला छोड़ देती है। परमेश्वर का धोना अपराधी को निर्दोष के रूप में अपने सामने खड़ा कर देता है, पर इतिहास वैसा ही रहता है, और टूटी हड्डियाँ जुड़ने में समय लेती हैं। इसलिए भजन में हर्ष माँगा जाता है, पाया नहीं जाता। अनुग्रह घाव को मिटाता नहीं; वह घाव के भीतर बैठ जाता है।
भजन संहिता 51:7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके भीतर कौन सी बात है जिसे आप सुधारने की कोशिश करते रहते हैं, जबकि वह वास्तव में धोए जाने की माँग करती है?
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Psalms 51 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

पाप ने दाऊद की ज़बान पर ताला लगा दिया था। जो कभी भजन लिखता था, वह अब चुप था। इसलिए वह कहता है, "हे प्रभु, मेरा मुँह खोल दे, तब मैं तेरा गुणगान करूँगा।" ध्यान दे, वह शब्द नहीं माँगता, होंठ खुलने माँगता है। क्या तेरी भी कोई बात है जिसने तेरी आराधना को चुप करा रखा है? उसे क्षमा करने वाले के सामने रख दे।

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