बाइबल व्याख्या

प्रकाशितवाक्य 8

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

सातवीं मुहर खुलती है और कुछ नहीं होता। स्वर्ग में "आधे घण्टे तक सन्नाटा छा गया।" फिर सात स्वर्गदूतों को तुरहियां दी जाती हैं, और एक और स्वर्गदूत सोने का धूपदान लेकर वेदी के पास खड़ा होता है, जहाँ धूप "सब पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ" चढ़ाई जाती है। वही धूपदान फिर वेदी की आग से भरकर पृथ्वी पर उलट दिया जाता है, और चार तुरहियां बजती हैं: पृथ्वी, समुद्र, नदियाँ और आकाश के ज्योतियाँ, हर बार एक तिहाई हिस्सा नष्ट। अध्याय एक उकाब की चीख पर बन्द होता है: "हाय, हाय, हाय!"

मूल बात

ध्यान दीजिए कि पूरे अध्याय का धुरा कहाँ है। सात तुरहियां बजने से पहले परमेश्वर एक ही काम करते हैं: वे प्रार्थनाएँ स्वीकार करते हैं। और उसके बाद जो आग पृथ्वी पर गिरती है, वह किसी और जगह से नहीं आती, वह "वेदी की आग" है, उसी वेदी की जिस पर संतों की प्रार्थनाएँ चढ़ी थीं। यूहन्ना यह कहना चाहता है कि इतिहास में परमेश्वर का हस्तक्षेप उनके लोगों की पुकार से जुड़ा हुआ है। और दूसरी बात: हर बार "एक तिहाई", कभी पूरा नहीं। यह विनाश नहीं, चेतावनी है। परमेश्वर का न्याय यहाँ रुका हुआ न्याय है, जिसमें अब भी लौटने की जगह बची है। संयम ही उनकी करुणा का रूप है।

जोड़ने वाला सूत्र

ये तुरहियां नई नहीं हैं। खून, ओले, आग, पानी का कड़वा हो जाना, अंधकार: यह मिस्र की विपत्तियों की भाषा है। जैसे फिरौन के सामने परमेश्वर ने अपनी दासों की चिल्लाहट सुनकर साम्राज्य की नींव हिलाई थी, वैसे ही अब वे रोम के संसार को हिलाते हैं। लेकिन एक निर्णायक अंतर है: यहाँ मुहरें खोलने वाला वध किया हुआ मेम्ना है। जो इतिहास के ताले खोलता है, वह वही है जिसने खुद अन्याय झेला। और भजन 141 की वह पुरानी इच्छा, कि मेरी प्रार्थना धूप के समान तेरे सामने पहुँचे, यहाँ पूरी होती है। मसीह के कारण आपकी प्रार्थना छत से टकराकर नहीं गिरती; वह सिंहासन के सामने की वेदी तक जाती है।

आइना

आपकी सबसे पुरानी प्रार्थना कौन सी है, वह जिसे आपने कहना छोड़ दिया? वह बेटा जो अब भी नहीं लौटा, वह रिश्ता जो सुधरा नहीं, वह रिपोर्ट जो हर बार वही बताती है, वह दफ्तर जहाँ बेईमान आदमी तरक्की पाता रहा। हमने चुप्पी को उत्तर का न होना समझ लिया। यह अध्याय कहता है कि चुप्पी उत्तर की अनुपस्थिति नहीं, उत्तर की तैयारी हो सकती है। आधा घण्टा स्वर्ग थम जाता है, क्योंकि आपकी आवाज़ पढ़ी जा रही है।

और दूसरी तरफ यह पाठ हमारे भरोसे को भी नंगा करता है। पेड़, घास, समुद्र, जहाज, सूर्य: हम इन्हीं पर टिके हैं और मान बैठे हैं कि ये अटल हैं। तुरहियां बताती हैं कि नहीं हैं।

आज करें यह: कागज़ पर वह एक प्रार्थना लिखिए जिसे आपने बेकार समझकर छोड़ दिया था, और उसे ज़ोर से, एक बार, बोलकर परमेश्वर के सामने रखिए। कागज़ फेंकिए नहीं, बाइबल में रख दीजिए।

कठिन प्रश्न

पर यह असहज है: संतों की प्रार्थनाएँ ऊपर जाती हैं, और नीचे आग गिरती है, लोग मरते हैं। क्या हमारी प्रार्थना किसी के विनाश का कारण बनती है? मैं इसे चिकना नहीं करना चाहता। यूहन्ना ठीक पहले वेदी के नीचे के शहीदों को "हे प्रभु, कब तक?" पुकारते सुना था। वह प्रार्थना बदला नहीं, न्याय माँगती है, और न्याय माँगना पाप नहीं। फिर भी यह सच बना रहता है कि परमेश्वर के उत्तर में दर्द होता है, और हम नहीं जानते क्यों संसार को सीधा करने का यही रास्ता चुना गया। इतना हम जानते हैं: आग गिराने वाला हाथ हमारा नहीं, स्वर्गदूत का है, और मापने वाला परमेश्वर है, जो "एक तिहाई" पर रुक जाते हैं।

पहले पाठक

एशिया माइनर की छोटी कलीसियाएँ यह सुन रही थीं, मुट्ठी भर लोग जिनकी शिकायत किसी अदालत में नहीं सुनी जाती थी। उनके लिए "एक तिहाई जहाज नाश हो गए" कोई प्राकृतिक आपदा का चित्र नहीं था, बल्कि उस व्यापारिक तंत्र पर चोट थी जिसके बल पर रोम उन्हें दबाता था। तुरही उनके कानों में युद्ध का संकेत थी और मंदिर की आराधना की आवाज़ भी। यरूशलेम का मंदिर जल चुका था, उनके पास कोई वेदी, कोई धूप, कोई पुरोहित नहीं था। और तब उन्हें दिखाया जाता है कि असली वेदी सिंहासन के सामने खड़ी है, और उस पर चढ़ने वाला धूप उनकी अपनी हाँफती प्रार्थनाएँ हैं।

पृष्ठभूमि

यूहन्ना पतमुस टापू पर है, पहली सदी के अंत में, "परमेश्वर के वचन के कारण" वहाँ भेजा गया। अध्याय चार से हम सिंहासन के कमरे में हैं; छह मुहरें खुल चुकी हैं, और यह सातवीं मुहर पूरे तुरही-चक्र को अपने भीतर खोलती है। दृश्य जानबूझकर पुरोहिती है: सोने का धूपदान, वेदी, धुआँ, ठीक वैसे जैसे मंदिर में दिन की भेंट चढ़ती थी, जब लोग बाहर खड़े होकर चुपचाप प्रार्थना करते थे। वही चुप्पी अब स्वर्ग में है। और अंत में आकाश के बीच उड़ता उकाब, शिकारी पक्षी, लाशों का चिह्न, तीन बची तुरहियों की घोषणा करता है। यह पाठ डराने के लिए नहीं, संभालने के लिए लिखा गया।

चिंतन

वह कौन सी प्रार्थना है जिसे मैंने परमेश्वर की चुप्पी को "ना" समझकर छोड़ दिया, और यह अध्याय उसके बारे में मुझसे क्या कह रहा है?

मेरे जीवन में किन चीज़ों को मैंने चुपचाप अटल मान लिया है, जिन्हें तुरहियां "एक तिहाई" कहकर हिला देती हैं?

Revelation में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Revelation

Michael Wilcock

A steady, sane guide through the visions to the throne of the Lamb.

Revelation For Everyone

N.T. Wright

Wright makes the last book hopeful instead of frightening.

Revelation: An Introduction and Commentary

Leon Morris

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Revelation

Craig Keener

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Revelation 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रकाशितवाक्य 8 का क्या अर्थ है?
सातवीं मुहर खुलती है और कुछ नहीं होता। स्वर्ग में "आधे घण्टे तक सन्नाटा छा गया।" फिर सात स्वर्गदूतों को तुरहियां दी जाती हैं, और एक और स्वर्गदूत सोने का धूपदान लेकर वेदी के पास खड़ा होता है, जहाँ धूप "सब पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ" चढ़ाई जाती है। वही धूपदान फिर वेदी की आग से भरकर पृथ्वी पर उलट दिया जाता है, और चार तुरहियां बजती हैं: पृथ्वी, समुद्र, नदियाँ और आकाश के ज्योतियाँ, हर बार एक ति
प्रकाशितवाक्य 8 किस विषय में है?
ये तुरहियां नई नहीं हैं। खून, ओले, आग, पानी का कड़वा हो जाना, अंधकार: यह मिस्र की विपत्तियों की भाषा है। जैसे फिरौन के सामने परमेश्वर ने अपनी दासों की चिल्लाहट सुनकर साम्राज्य की नींव हिलाई थी, वैसे ही अब वे रोम के संसार को हिलाते हैं। लेकिन एक निर्णायक अंतर है: यहाँ मुहरें खोलने वाला वध किया हुआ मेम्ना है। जो इतिहास के ताले खोलता है, वह वही है जिसने खुद अन्याय झेला। और भजन 141 की वह पुरानी इच्छा, कि मेरी प्रार्थना धूप के समान तेरे सामने पहुँचे, यहाँ पूरी होती है। मसीह के कारण आपकी प्रार्थना छत से टकराकर नहीं गिरती; वह सिंहासन के सामने की वेदी तक जाती है।
प्रकाशितवाक्य 8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
और दूसरी तरफ यह पाठ हमारे भरोसे को भी नंगा करता है। पेड़, घास, समुद्र, जहाज, सूर्य: हम इन्हीं पर टिके हैं और मान बैठे हैं कि ये अटल हैं। तुरहियां बताती हैं कि नहीं हैं।
प्रकाशितवाक्य 8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पर यह असहज है: संतों की प्रार्थनाएँ ऊपर जाती हैं, और नीचे आग गिरती है, लोग मरते हैं। क्या हमारी प्रार्थना किसी के विनाश का कारण बनती है? मैं इसे चिकना नहीं करना चाहता। यूहन्ना ठीक पहले वेदी के नीचे के शहीदों को "हे प्रभु, कब तक?" पुकारते सुना था। वह प्रार्थना बदला नहीं, न्याय माँगती है, और न्याय माँगना पाप नहीं। फिर भी यह सच बना रहता है कि परमेश्वर के उत्तर में दर्द होता है, और हम नहीं जानते क्यों संसार को सीधा करने का यही रास्ता चुना गया। इतना हम जानते हैं: आग गिराने वाला हाथ हमारा नहीं, स्वर्गदूत का है, और मापने वाला परमेश्वर है, जो "एक तिहाई" पर रुक जाते हैं।
प्रकाशितवाक्य 8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यूहन्ना पतमुस टापू पर है, पहली सदी के अंत में, "परमेश्वर के वचन के कारण" वहाँ भेजा गया। अध्याय चार से हम सिंहासन के कमरे में हैं; छह मुहरें खुल चुकी हैं, और यह सातवीं मुहर पूरे तुरही-चक्र को अपने भीतर खोलती है। दृश्य जानबूझकर पुरोहिती है: सोने का धूपदान, वेदी, धुआँ, ठीक वैसे जैसे मंदिर में दिन की भेंट चढ़ती थी, जब लोग बाहर खड़े होकर चुपचाप प्रार्थना करते थे। वही चुप्पी अब स्वर्ग में है। और अंत में आकाश के बीच उड़ता उकाब, शिकारी पक्षी, लाशों का चिह्न, तीन बची तुरहियों की घोषणा करता है। यह पाठ डराने के लिए नहीं, संभालने के लिए लिखा गया।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Revelation 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 13

पिता, जब आने वाले दिनों की चेतावनी मेरे कानों में गूँजती है, तो मेरा मन काँप उठता है। मुझे सोते हुए मत पाना। मेरी आँखें खोल, ताकि मैं समय को पहचानूँ और उन लोगों के लिए प्रार्थना करूँ जो अब भी तुझसे दूर हैं। तेरी दया में मुझे थामे रख।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

तीसरे स्वर्गदूत ने तुरही फूँकी, और एक बड़ा तारा जो मशाल के समान जलता था, आकाश से टूटा, और नदियों की एक तिहाई पर और पानी के सोतों पर जा पड़ा।" देख, वह तारा नदियों के ऊपर नहीं, सोतों पर गिरा। जहाँ से पानी निकलता है, वहीं चोट लगी। परमेश्वर ऊपरी दिखावे से नहीं, जड़ से निपटता है। तेरे जीवन का सोता आज किस चीज़ से भर रहा है?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 2

पिता, धन्यवाद कि वे सात स्वर्गदूत तेरे सामने खड़े रहते हैं और तुरहियां उन्हें तेरी ही ओर से दी गईं। कुछ भी अपने आप नहीं बजता, हर आवाज़ तेरे हुक्म से उठती है। इसी से मेरा मन शांत है, क्योंकि आने वाला समय भी तेरे ही हाथ में है।

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