जकर्याह 9
पाठ
अध्याय की शुरुआत उत्तर से होती है: हद्राक, दमिश्क, हमात, फिर समुद्र के किनारे सोर और सीदोन, और वहाँ से नीचे पलिश्ती नगरों तक, अश्कलोन, गाज़ा, एक्रोन, अश्दोद। एक-एक करके ये गढ़ ढहते हैं, और जो बचता है वह "हमारे परमेश्वर का जन" बन जाता है। इसके बाद स्वर अचानक बदलता है: सिय्योन को जयजयकार का न्योता मिलता है, क्योंकि उसका राजा आ रहा है, दीन, गदही के बच्चे पर सवार; रथ-घोड़े-धनुष तोड़े जाएँगे, बन्दी गड्ढे से छुड़ाए जाएँगे, और परमेश्वर की प्रजा भेड़-बकरियों की तरह बचाई जाकर मुकुट के रत्नों की तरह चमकेगी।
मर्म
इन नामों को सुनने वाले लोग लौटे हुए बन्दी थे, फारस के एक छोटे से प्रांत में बसे, जिनके पास न सेना थी न राजा। और उनके कानों में जो नाम गूँजते हैं, वे सदियों से उनके आतंक के नाम हैं: सोर का वह द्वीप-किला जिसे कोई तोड़ न सका, गाज़ा जहाँ शिमशोन पिसा था। परमेश्वर कहते हैं कि सोर की चाँदी "धूल के किनकों के समान" है, और उसका सोना "सड़कों की कीच के समान" है, फिर भी वह घमण्ड समुद्र में डाल दिया जाएगा। यहाँ धर्मशास्त्र सम्पत्ति के विरुद्ध नहीं, आत्मनिर्भरता के विरुद्ध बोलता है। जो अपनी दीवारों पर भरोसा करता है, वह अपनी दीवारों के साथ गिरता है; और जो निःशस्त्र है, उसके लिए परमेश्वर स्वयं छावनी बन जाते हैं।
सूत्र
पद 9 की तस्वीर उस समय के किसी भी विजय-जुलूस से उलटी है। फारसी सम्राट और बाद में सिकन्दर घोड़ों और रथों पर आते थे; धूल उड़ती, भाले चमकते, नगर के द्वार डर से खुलते। यहाँ राजा गदही के बच्चे पर आता है, और उसका पहला काम अपने ही लोगों के हथियार तोड़ना है: "मैं एप्रैम के रथ और यरूशलेम के घोड़े नष्ट करूँगा।" यह निःशस्त्रीकरण भीतर से शुरू होता है। सदियों बाद यीशु मसीह ने ठीक यही दृश्य जान-बूझकर दोहराया, फसह के हुजूम के बीच, और मत्ती ने इसी पद को उद्धृत किया। जिस सप्ताह वे इस तरह आए, उसी सप्ताह उन्होंने "वाचा के लहू" की बात कही, जिसका ज़िक्र पद 11 में पहले से है।
आईना
हम भी सोर की तरह गढ़ बनाते हैं, केवल ईंटों से नहीं। बचत खाता, दूसरी नौकरी का विकल्प, वह रिश्ता जो हमें ज़रूरत पड़ने पर बचा लेगा, वह जानकारी जो हमने किसी के बारे में सम्भाल रखी है। ये सब चाँदी के किनके हैं, और वे बुरे नहीं; बुरा तब होता है जब वे हमारी सुरक्षा का असली आधार बन जाते हैं और हम परमेश्वर के सामने निःशस्त्र खड़े होने से डरने लगते हैं। पद 11 कहता है कि बन्दी "बिना जल के गड्ढे" से निकाले गए; सूखा कुआँ वह जगह है जहाँ आदमी न डूबता है न बचता है, बस धीरे-धीरे सूखता है। आज कोई ऐसा गढ़ चुनिए और उसका नाम लिखिए: वह एक चीज़ जिसके बिना आप असुरक्षित महसूस करेंगे। कागज़ पर लिखकर, ज़ोर से परमेश्वर के सामने कहिए कि यह मेरी ढाल नहीं है, आप हैं।
अन्तर्पाठ
पद 11 का "मेरी वाचा के लहू" सीधे निर्गमन 24 की ओर इशारा करता है, जहाँ मूसा ने बलि का लहू लोगों पर छिड़ककर कहा था कि यह वाचा का लहू है। ज़करयाह कह रहे हैं: तुम बन्दी हो, पर तुम अनाथ नहीं; सीनै पर बँधा वह रिश्ता अब भी तुम्हारा कानूनी आधार है, और उसी के बल पर परमेश्वर तुम्हें गड्ढे से खींच रहे हैं। और जब यीशु मसीह प्याला उठाकर कहते हैं कि यह "वाचा का लहू" है, तो वे इन दोनों धागों को एक गाँठ में बाँध देते हैं। दूसरी गूँज इफिसियों 2 में है, जहाँ पौलुस लिखते हैं कि मसीह आकर शान्ति का सुसमाचार सुनाया, दूर वालों और निकट वालों को; वही "अन्यजातियों से शान्ति की बातें" जो पद 10 में हैं।
प्रश्न
पद 10 में हथियार तोड़े जाते हैं, और पाँच पद बाद वही लोग गोफन के पत्थरों पर पाँव रखते हैं और लहू से भरे कटोरे जैसे हो जाते हैं। यह असहज है, और इसे मीठा करके सुलझाना बेईमानी होगी। ध्यान दीजिए, फ़र्क़ यह है कि युद्ध अब उनका नहीं: "तब यहोवा उनके ऊपर दिखाई देगा, और उसका तीर बिजली के समान छूटेगा।" वे तीर नहीं चलाते, वे तीर हैं, धनुष पर चढ़ाए हुए। फिर भी भाषा खूनी है, और बाइबल इसे धुँधला नहीं करती। परमेश्वर का न्याय अत्याचारियों के विरुद्ध सचमुच हिंसक है; हमें यह चुनना नहीं मिलता कि हम केवल कोमल गदही वाला पद रखें और बाक़ी फेंक दें।
बारीकी
पद 7 का एक वाक्य आसानी से छूट जाता है: "एक्रोन के लोग यबूसियों के समान बनेंगे।" यबूसी यरूशलेम के मूल निवासी थे, जिन्हें दाऊद ने हराया, पर मिटाया नहीं; वे नगर में घुल-मिल गए, दाऊद ने तो एक यबूसी का खलिहान ही खरीदकर वहाँ वेदी बनाई थी। यानी एक्रोन के पलिश्ती, इस्राएल के सबसे पुराने दुश्मन, नष्ट नहीं होंगे, अपनाए जाएँगे। उनके मुँह से मूर्तियों का लहू निकाल दिया जाएगा, और वे "यहूदा में अधिपति सा" गिने जाएँगे। यह पहली सुनने वालों के लिए लगभग अपमानजनक उदारता थी। और यही इस अध्याय का असली मोड़ है: परमेश्वर का राजा दुश्मनों को घोड़े पर नहीं, गदहे पर चढ़कर जीतता है, और जीतकर उन्हें अपने घर में बिठा लेता है।
चिंतन
आपके जीवन में वह "बिना जल का गड्ढा" कौन सा है, जहाँ आप न डूब रहे हैं न बच रहे हैं, बस सूख रहे हैं?
यदि परमेश्वर आपके गढ़ नहीं, बल्कि आपके हथियार तोड़ना चाहें, तो सबसे पहले क्या टूटेगा?
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Zechariah 9 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
जकर्याह 9 का क्या अर्थ है?
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जकर्याह 9 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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Zechariah 9 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, तू जानता है कि मेरे भीतर कितना घमंड छिपा है। जहाँ मैं अपनी ताकत और अपनी दीवारों पर भरोसा करता हूँ, वहाँ मुझे नम्र कर। मेरा अहंकार टूट जाए तो भी मुझे थामे रखना, क्योंकि तेरे सामने झुकना ही मेरे लिए सुरक्षित जगह है।
पिता, धन्यवाद कि आप सेनाओं के यहोवा हैं और हमारे चारों ओर ढाल बनकर खड़े रहते हैं। जो पत्थर हमारी ओर फेंके गए, वे आपकी सामर्थ्य से हमारे पाँवों तले रह गए। धन्यवाद कि आप हमें कटोरे के समान भर देते हैं और कभी खाली नहीं छोड़ते।
पिता, तू उन्हें भी अपना बना लेता है जिन्हें सब पराया कहते हैं। मेरे भीतर जो कुछ मैला है, उसे तू निकाल दे और मुझे अपने लोगों में गिन ले। जहाँ मैंने दीवारें खड़ी की हैं, वहाँ तू मुझे किसी को भाई कहना सिखा दे।
प्रभु, तू अपने लोगों को अपने हाथ में धनुष की तरह उठाता है। मैं कमज़ोर महसूस करता हूँ, फिर भी तू मुझे अपने काम के लिए चुनता है। मुझे अपने हाथों में थाम ले, अपने मकसद के लिए तैयार कर, और जहाँ तू भेजे वहाँ जाने का साहस दे।
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