यशायाह 41:10
पाठ
"इधर-उधर मत ताक" — यही वह आदेश है जो अक्सर हमारी नज़र से फिसल जाता है। परमेश्वर अपने दास इस्राएल से कहते हैं कि डर को जगह न दे और घबराकर चारों ओर न देखे, क्योंकि वे स्वयं उसके साथ हैं और उसके परमेश्वर हैं। इसके बाद तीन ठोस वचन आते हैं: मैं तुझे दृढ़ करूँगा, तेरी सहायता करूँगा, और अपने धर्ममय दाहिने हाथ से तुझे सम्भाले रहूँगा। यह कोई भावनात्मक दिलासा नहीं है, बल्कि एक अदालत के दृश्य के बीच बोला गया वचन है, जहाँ जातियाँ काँप रही हैं और मूर्तियाँ कीलों से ठोंककर खड़ी की जा रही हैं। इसी शोर के बीच परमेश्वर एक छोटे, डरे हुए लोगों का नाम लेकर उन्हें अपना दास और अपना चुना हुआ कहते हैं।
मर्म
इस वचन का केन्द्र "मैं तेरे संग हूँ" है, और बाकी सब उसी से निकलता है। ध्यान दीजिए कि परमेश्वर पहले परिस्थिति नहीं बदलते, पहले वे अपनी उपस्थिति की घोषणा करते हैं। इस्राएल के शत्रु अब भी वहीं हैं, निर्वासन अब भी वास्तविक है, पर जिस अदालत में वे खड़े हैं उसका न्यायी ही उनका पक्षकार है। "धर्ममय दाहिना हाथ" का अर्थ केवल शक्ति नहीं, बल्कि वह शक्ति जो अपने वचन से बँधी है; परमेश्वर इसलिए सम्भालते हैं क्योंकि वे विश्वासयोग्य हैं, इसलिए नहीं कि याकूब सम्भालने योग्य है। पद 14 उसे साफ़ कहता है: "हे कीड़े सरीखे याकूब"। यहीं अनुग्रह की धार है। जिसे परमेश्वर थामे हैं उसकी सुरक्षा उसकी अपनी मज़बूती पर नहीं, थामनेवाले हाथ की पवित्रता पर टिकी है, और इसका सीधा असर इस पर पड़ता है कि हम भय के क्षणों में किसकी ओर देखते हैं।
सूत्र
निर्वासन में बैठे एक टूटे हुए लोगों से यह कहना कि "मैंने तुझे चुना है और त्यागा नहीं", परमेश्वर के पूरे छुटकारे के काम का ढाँचा है। वे अब्राहम को दूर देश से बुलाते हैं, याकूब को कीड़े जैसा कहकर भी नहीं छोड़ते, और अन्त में एक ऐसे दास को भेजते हैं जिसमें यह बुलाहट पूरी होती है। यशायाह की इन्हीं अध्यायों में "मेरा दास" की पुकार धीरे-धीरे उस एक व्यक्ति की ओर मुड़ती है जो हमारी जगह खड़ा होता है। जब यीशु मसीह गतसमनी में काँपते हैं और फिर भी पीछे नहीं हटते, तब वह दाहिना हाथ उन्हें संकट से बचाने के लिए नहीं, बल्कि संकट के पार ले जाने के लिए थामे रहता है। इसी कारण "मत डर" हमारे लिए खोखला नारा नहीं, बल्कि क्रूस और खाली कब्र पर टिका हुआ वचन है।
दर्पण
"इधर-उधर मत ताक" आज सबसे तीखा लगता है। डर हमें ताकने पर मजबूर करता है: नौकरी असुरक्षित है तो हम बाज़ार के हर संकेत पर नज़र गड़ाते हैं; बच्चे की परीक्षा है तो हम दूसरों के बच्चों से तुलना करते हैं; पैसा घटता है तो हम उस सौदे की ओर देखने लगते हैं जिसे हम ईमानदार नहीं कह सकते। ताकना निर्दोष नहीं होता, वह चुनाव बदल देता है। डरा हुआ आदमी झूठ को व्यावहारिक कहने लगता है, चुप्पी को समझदारी, और शत्रु से बदला लेने को आत्मरक्षा। यह पद हमें डर से बाहर नहीं निकालता, वह हमारी आँखों की दिशा बदलता है: सम्भालनेवाला हाथ पहले से पकड़े हुए है, इसलिए घबराहट में लिया गया समझौता अब ज़रूरी नहीं रहा।
आज ही, दस मिनट निकालकर एक कागज़ पर वह एक निर्णय लिखिए जो आप इस समय डर के कारण लेने जा रहे हैं, और उसके नीचे यही शब्द लिखकर ज़ोर से पढ़िए: "मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ।" फिर वह निर्णय चौबीस घंटे के लिए रोक दीजिए।
प्रश्न
पर यह वचन उन लोगों का क्या करे जिन्हें थामा नहीं गया, कम से कम वैसे नहीं जैसे उन्होंने चाहा था? इस्राएल को यह कहा गया था, और फिर भी बाबुल में पीढ़ियाँ मर गईं। पद 11 कहता है कि विरोधी मिट जाएँगे, पर हमारे अनुभव में अक्सर विरोधी टिका रहता है और हम टूटते हैं। इसे मीठा करके कहना बेईमानी होगी। ध्यान दीजिए कि परमेश्वर यहाँ यह नहीं कहते कि तू गिरेगा नहीं; वे कहते हैं कि मैं तुझे सम्भाले रहूँगा। सम्भालने और बचाने में अन्तर है। यह वचन दुःख को नहीं मिटाता, वह दुःख के भीतर एक पकड़ का वादा करता है, और यही वह जगह है जहाँ विश्वास सचमुच विश्वास बनता है, समझ नहीं।
बारीकी
पद 7 पर लौटिए। मूर्ति बनानेवाले भी एक दूसरे से कहते हैं, "हियाव बाँध!" और फिर कील ठोंक-ठोंककर मूर्ति को गिरने से बचाते हैं। यह चित्र क्रूर हास्य से भरा है: देवता को आदमी सहारा दे रहा है। और ठीक इसके बाद परमेश्वर कहते हैं, "मैं तुझे दृढ़ करूँगा।" दिशा उलट जाती है। हमारी बनाई हुई सुरक्षाएँ, चाहे वे बीमा हों, प्रतिष्ठा हो या नियंत्रण की आदत, हमें लगातार कील ठोंकने पर मजबूर करती हैं ताकि वे खड़ी रहें। जीवित परमेश्वर की विशेषता यही है कि उन्हें हमारे सहारे की ज़रूरत नहीं; वे थामनेवाले हैं, थामे जानेवाले नहीं।
शास्त्र की गूँज
यही आवाज़ यहोशू 1:9 में सुनाई देती है, जहाँ एक नए अगुवे को नदी पार करने से पहले यही कहा जाता है कि डर मत, क्योंकि परमेश्वर संग हैं; वहाँ भी वादा सुरक्षा का नहीं, साथ का है। और रोमियों 8 में पौलुस उसी अदालत के दृश्य को उठाता है: यदि परमेश्वर हमारी ओर हैं, तो कौन हमारे विरुद्ध? यशायाह की अदालत में जातियाँ अपने प्रमाण नहीं दे पातीं, और पौलुस की अदालत में दोष लगानेवाला चुप हो जाता है। दोनों जगह निर्णय वही है: थामनेवाला हाथ न्यायी का हाथ है।
मनन
आज आपका डर आपको किस ओर "ताकने" पर मजबूर कर रहा है, और वहाँ आप वास्तव में क्या ढूँढ़ रहे हैं?
आपके जीवन में कौन सी सुरक्षा ऐसी है जिसे खड़ा रखने के लिए आपको लगातार कील ठोंकनी पड़ती है?
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Isaiah 41:10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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