जकर्याह 9:4
पाठ
यह एक ही वाक्य में गिरती हुई दीवार का शोर है। सोर, वह द्वीप-नगर जिसने अपने चारों ओर समुद्र और पत्थर का घेरा खड़ा किया, जिसने चाँदी को धूल की तरह और सोने को गली की कीच की तरह ढेर कर रखा था, अचानक किसी और के हाथ में सौंप दिया जाता है। परमेश्वर कहते हैं कि वे "उसको औरों के अधिकार में कर देगा, और उसके घमण्ड को तोड़कर समुद्र में डाल देगा।" जिस समुद्र ने उसे व्यापार दिया और सुरक्षा दी, वही अब उसके अभिमान की कब्र बनता है। और अंत में आग: "वह नगर आग का कौर हो जाएगा।" जो अजेय दिखता था, वह निवाला बन जाता है, किसी और के मुँह का ग्रास।
मर्म
यहाँ केवल एक नगर का पतन दर्ज नहीं है, यहाँ यह घोषित होता है कि सुरक्षा किसकी सम्पत्ति है। सोर की गलती यह नहीं थी कि वह धनी था, बल्कि यह कि उसने अपनी सम्पत्ति को अपना उद्धार बना लिया। पद 3 में उसने "अपने लिये एक गढ़ बनाया"; पद 8 में परमेश्वर स्वयं अपने भवन के चारों ओर छावनी डालते हैं। दो गढ़, दो प्रकार की आशा। सृष्टि का परमेश्वर यह याद दिलाते हैं कि समुद्र, सोना और शक्ति उनकी बनाई हुई चीज़ें हैं, किसी की ढाल नहीं। न्याय यहाँ परमेश्वर का क्रोधित विस्फोट नहीं, बल्कि उनकी पवित्रता की सुसंगति है: जो अपने आप को ऊँचा करता है, उसे वे नीचे उतारते हैं, ताकि अनुग्रह के लिए जगह बने। यही वह भूमि साफ़ करना है जिस पर पद 9 का दीन राजा गदहे पर चढ़कर आता है।
सूत्र
जकर्याह इस अध्याय में उत्तर से दक्षिण की ओर एक रेखा खींचता है, हद्राक से दमिश्क, फिर सोर और सीदोन, फिर पलिश्ती नगर, और यह रेखा जाकर रुकती है यरूशलेम के फाटक पर, जहाँ राजा गदहे पर चढ़कर आता है। यह क्रम संयोग नहीं है। पहले किले गिरते हैं, फिर राजा आता है, और वह राजा घोड़े और रथ लेकर नहीं आता, बल्कि उन्हें नष्ट करने आता है: "मैं एप्रैम के रथ और यरूशलेम के घोड़े नष्ट करूँगा।" सोर का न्याय और सिय्योन का उद्धार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जिस परमेश्वर ने सोर की चाँदी को धूल ठहराया, उन्होंने अपने लोगों को छुड़ाने के लिए चाँदी नहीं, "वाचा के लहू" की कीमत चुकाई (पद 11)। मत्ती 21 में यीशु मसीह जानबूझकर उसी गदहे पर बैठते हैं: वे ऐसे राजा हैं जिनका गढ़ उनका अपना शरीर है, जो तोड़ा जाता है ताकि दूसरे बचें।
दर्पण
आपके पास भी एक सोर है। वह बैंक का वह आँकड़ा हो सकता है जिसे आप महीने में तीन बार देखते हैं, या वह बीमा पॉलिसी जिसे पढ़कर नींद आती है, या वह पेशेवर कुशलता जिसके बल पर आप सोचते हैं कि आप कभी बेकार नहीं होंगे। ध्यान दीजिए, पाठ सोर की बुद्धि को नकारता नहीं; पद 2 मानता है कि "ये तो बहुत ही बुद्धिमान हैं।" समस्या तब शुरू होती है जब बुद्धि और बचत दीवार बन जाती है और हम भूल जाते हैं कि दीवार के बाहर कौन खड़ा है। यह पाठ आपसे गरीबी नहीं माँगता, यह पूछता है कि आपकी नींद किस पर टिकी है। और वह जो समुद्र में फेंका जा सकता है, वह नींव नहीं हो सकता।
आज ही अपने फोन पर वह संख्या खोलिए जिसे देखकर आपको सुरक्षा महसूस होती है, चाहे वह खाता हो, नौकरी का अनुबंध हो या कोई सूची, उसे देखते हुए ज़ोर से कहिए: "यह मेरा गढ़ नहीं है," और फिर परमेश्वर से एक वाक्य में उस सुरक्षा के लिए धन्यवाद दीजिए जो वे स्वयं हैं।
एक बारीकी
"उसके घमण्ड को तोड़कर समुद्र में डाल देगा।" इब्रानी में यहाँ जो शब्द है, ख़ेल, उसके दो अर्थ हैं: दीवार या प्राचीर, और साथ ही धन-सम्पत्ति। सोर के लिए दोनों एक ही थे। उसका धन ही उसकी दीवार था, और उसकी दीवार ही उसका धन। परमेश्वर एक ही वार में दोनों को समुद्र में गिरा देते हैं। और यहीं वह भयानक विडम्बना है: समुद्र सोर की माता थी, उसके जहाज़, उसका व्यापार, उसका खाई-सा घेरा। जो हमें जीवन देता है, वही, जब हम उसे परमेश्वर के स्थान पर बिठा दें, हमें निगल जाता है। पैसा, प्रतिभा, परिवार, कोई भी अच्छी चीज़ मूर्ति बनते ही कब्र बन जाती है।
कठिन प्रश्न
यह भविष्यवाणी इतिहास में पूरी हुई, और वह पूर्ति सुन्दर नहीं थी। जब सोर गिरा, तो सिर्फ़ अभिमान नहीं गिरा; बच्चे मरे, स्त्रियाँ बेची गईं, आग ने अमीर और गरीब में भेद नहीं किया। क्या परमेश्वर का न्याय हमेशा इतना अंधाधुंध होता है? पाठ इसका उत्तर नहीं देता, और मैं उसे चिकना नहीं करूँगा। इतना ही कहा जा सकता है कि यही अध्याय आगे चलकर पलिश्तियों के बारे में कुछ अप्रत्याशित कहता है: "उनमें से जो बचा रहेगा, वह हमारे परमेश्वर का जन होगा।" न्याय के बाद भी परमेश्वर के पास एक शेष बचता है जिसे वे अपना कहते हैं। यह पीड़ा को नहीं मिटाता, पर यह बताता है कि विनाश परमेश्वर का अंतिम शब्द नहीं है।
संदर्भ
जकर्याह निर्वासन के बाद के यरूशलेम में बोलता है, एक ऐसे शहर में जहाँ मंदिर मुश्किल से खड़ा हुआ है और दीवारें अब भी अधूरी हैं। सुनने वाले वे लोग हैं जिनके पास न सेना है, न खज़ाना, न राजा। और उनके सामने उत्तर-पश्चिम में सोर खड़ा है: मुख्य भूमि से अलग एक द्वीप-किला, भूमध्यसागर के व्यापार का केंद्र, इतना धनी कि सोना गली की मिट्टी जैसा लगे, इतना सुरक्षित कि बाबुल की तेरह वर्ष की घेराबंदी भी उसे पूरी तरह न तोड़ सकी। जकर्याह जिस मार्ग का वर्णन करता है, वही मार्ग सिकंदर की सेना ने लिया, और 332 ईसा पूर्व में समुद्र में पत्थर भरकर द्वीप तक पुल बनाया और नगर जला दिया। लौटे हुए निर्वासितों को यही सुनना था: तुम्हारी कमज़ोरी अंतिम सच्चाई नहीं, और उनकी ताकत भी नहीं।
चिंतन
अगर कल आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा समुद्र में गिर जाए, तो आपके विश्वास में क्या बचेगा?
सोर की बुद्धि परमेश्वर ने स्वीकार की, पर उसका भरोसा नहीं। आपके जीवन में कौन-सा वरदान अभी वरदान से गढ़ बनता जा रहा है?
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Zechariah 9:4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Zechariah 9 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, तू जानता है कि मेरे भीतर कितना घमंड छिपा है। जहाँ मैं अपनी ताकत और अपनी दीवारों पर भरोसा करता हूँ, वहाँ मुझे नम्र कर। मेरा अहंकार टूट जाए तो भी मुझे थामे रखना, क्योंकि तेरे सामने झुकना ही मेरे लिए सुरक्षित जगह है।
पिता, धन्यवाद कि आप सेनाओं के यहोवा हैं और हमारे चारों ओर ढाल बनकर खड़े रहते हैं। जो पत्थर हमारी ओर फेंके गए, वे आपकी सामर्थ्य से हमारे पाँवों तले रह गए। धन्यवाद कि आप हमें कटोरे के समान भर देते हैं और कभी खाली नहीं छोड़ते।
पिता, तू उन्हें भी अपना बना लेता है जिन्हें सब पराया कहते हैं। मेरे भीतर जो कुछ मैला है, उसे तू निकाल दे और मुझे अपने लोगों में गिन ले। जहाँ मैंने दीवारें खड़ी की हैं, वहाँ तू मुझे किसी को भाई कहना सिखा दे।
प्रभु, तू अपने लोगों को अपने हाथ में धनुष की तरह उठाता है। मैं कमज़ोर महसूस करता हूँ, फिर भी तू मुझे अपने काम के लिए चुनता है। मुझे अपने हाथों में थाम ले, अपने मकसद के लिए तैयार कर, और जहाँ तू भेजे वहाँ जाने का साहस दे।
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