7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

मलाकी 3

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

मलाकी बाइबल के पुराने नियम की आखिरी पुस्तक है। जो लोग इसे पहली बार सुन रहे थे, वे बंधुआई से लौट आए थे, मन्दिर दोबारा बन गया था, और फिर… कुछ खास नहीं हुआ। कोई राजा नहीं, कोई चमत्कार नहीं। सिर्फ रोज़ का काम, रोज़ की धूल। और धीरे-धीरे लोगों के मन में एक फुसफुसाहट उठने लगी: "परमेश्वर की सेवा करने से क्या फायदा?"

इसी बीच परमेश्वर बोलते हैं। और वे शुरुआत एक वादे से करते हैं: "देखो, मैं अपने दूत को भेजता हूँ, और वह मार्ग को मेरे आगे सुधारेगा।" उन दिनों जब कोई राजा आता था, तो लोग पहले सड़क साफ करते थे, गड्ढे भरते थे। परमेश्वर कह रहे हैं: कोई आगे-आगे आएगा और रास्ता तैयार करेगा, और फिर प्रभु स्वयं अचानक अपने मन्दिर में आ जाएँगे। उन्हें "वाचा का दूत" कहा गया है। वाचा का मतलब है वह पक्का रिश्ता जो परमेश्वर ने अपने लोगों से बाँधा था, एक ऐसा वादा जिसे वे कभी नहीं तोड़ते।

लेकिन फिर एक चुभने वाला सवाल आता है: "उसके आने के दिन को कौन सह सकेगा?" परमेश्वर अपने आने की तुलना दो चीज़ों से करते हैं। सुनार की आग, जिसमें चाँदी गलाई जाती है ताकि गंदगी ऊपर आ जाए और हटाई जा सके। और धोबी का साबुन, जो कपड़े को रगड़-रगड़कर साफ करता है। दोनों तस्वीरें आरामदेह नहीं हैं। साफ होना कभी गुदगुदी जैसा नहीं लगता। पर ध्यान दो: आग जलाकर खत्म करने के लिए नहीं, शुद्ध करने के लिए है।

फिर परमेश्वर बताते हैं कि उन्हें क्या दिखता है: जो मजदूर की मजदूरी दबा लेते हैं, जो विधवाओं और अनाथों पर अन्याय करते हैं, जो परदेशी के साथ नाइंसाफी करते हैं, जो झूठी शपथ खाते हैं। परमेश्वर कहते हैं, मैं इनके विरुद्ध साक्षी दूँगा। यानी वे देख रहे हैं, और भूलते नहीं।

और तब वह वाक्य आता है जिस पर सब कुछ टिका है: "मैं यहोवा बदलता नहीं; इसी कारण, हे याकूब की सन्तान तुम नाश नहीं हुए।" लोग बदलते रहे, भटकते रहे, फिर भी बचे रहे, क्योंकि परमेश्वर का प्रेम बदला नहीं।

इसके बाद परमेश्वर कहते हैं: "तुम मेरी ओर फिरो, तब मैं भी तुम्हारी ओर फिरूँगा।" लोग हैरान होकर पूछते हैं, "हम किस बात में फिरें?" जैसे कोई कहे, "मैंने क्या किया?" परमेश्वर जवाब देते हैं: दशमांश में। दशमांश यानी हर दस हिस्सों में से एक हिस्सा परमेश्वर के भवन के लिए। उसी से याजकों और गरीबों के लिए भोजन आता था। लोग वह हिस्सा अपने पास रख लेते थे। और परमेश्वर एक अनोखी चुनौती देते हैं: "ऐसा करके मुझे परखो" कि मैं आकाश के झरोखे खोलकर आशीष की वर्षा करता हूँ कि नहीं।

अंत में एक छोटा-सा दृश्य है, जो मुझे सबसे सुंदर लगता है। कुछ लोग, जो परमेश्वर का भय मानते थे, आपस में बातें करने लगे। और लिखा है कि यहोवा ध्यान धरकर उनकी सुनते थे, और उनके नाम एक पुस्तक में लिखे जा रहे थे। परमेश्वर कहते हैं, वे लोग "मेरे निज भाग" होंगे, मेरा खास खज़ाना, और मैं उनसे वैसी कोमलता करूँगा जैसे कोई पिता अपने बेटे से करता है।

इसका क्या अर्थ है?

यहाँ दो बातें साथ-साथ चलती हैं, और हमें दोनों को पकड़ना है। पहली: परमेश्वर अन्याय को हल्के में नहीं लेते। जब कोई मजदूर को उसका पैसा नहीं देता, जब किसी अनाथ को धक्का दिया जाता है, परमेश्वर देखते हैं। दूसरी: वे बदलते नहीं। उनका गुस्सा उनके प्रेम का दुश्मन नहीं है।

एक कठिन बात भी है। लोगों ने कहा था कि अभिमानी और बुरे लोग सफल हो रहे हैं, और यह सच था। मलाकी इसका पूरा जवाब नहीं देता। वह इतना कहता है: एक दिन आ रहा है जब फर्क साफ दिखेगा। मुझे भी नहीं पता कि परमेश्वर कब तक इंतज़ार करते हैं और क्यों। लेकिन मुझे यह पता है कि वे उन बातचीतों को सुन रहे थे जो निराश लोग आपस में कर रहे थे।

जोड़नेवाला धागा

वह दूत जो रास्ता तैयार करता है, वह यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला था। और वह प्रभु जो अचानक अपने मन्दिर में आए, वे यीशु मसीह हैं। मलाकी के इन शब्दों के बाद लंबा सन्नाटा रहा, और फिर एक बच्चा बेतलेहेम में जन्मा। वही "वाचा का दूत", जिसने परमेश्वर का वादा तोड़ा नहीं, बल्कि पूरा किया।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी सोचा है, "प्रार्थना करने से क्या फायदा, कुछ बदलता तो नहीं"? यह सोचना पाप नहीं है, मलाकी के लोग भी यही सोचते थे। पर देखो उन्होंने क्या किया जो परमेश्वर का भय मानते थे: उन्होंने आपस में बात की। किसी ऐसे व्यक्ति से बात करो जो विश्वास करता है, अपने सवाल बताओ। और जान लो: तुम्हारा नाम भूला नहीं गया है।

इस पर बात करो

आग और साबुन, दोनों तस्वीरें साफ करने की हैं। तुम्हें लगता है परमेश्वर हमारे जीवन में क्या "साफ" करना चाहते हैं, और वह क्यों कभी-कभी असहज लगता है?

तुम्हारे पास परमेश्वर के बारे में कोई ऐसा सवाल है जिसका जवाब तुम्हें अभी तक नहीं मिला? उसे कहने की हिम्मत करो।

मिलकर प्रार्थना

प्रभु परमेश्वर, आप बदलते नहीं, और इसीलिए हम बचे हुए हैं। जब हमें लगे कि कुछ नहीं बदल रहा, तब हमें याद दिलाइए कि आप सुन रहे हैं। हमें अंदर से साफ कीजिए, चाहे वह आसान न हो। और धन्यवाद कि हमारे नाम आपके पास लिखे हैं। आमीन।

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मलाकी 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मलाकी 3 किस विषय में है?
मलाकी बाइबल के पुराने नियम की आखिरी पुस्तक है। जो लोग इसे पहली बार सुन रहे थे, वे बंधुआई से लौट आए थे, मन्दिर दोबारा बन गया था, और फिर... कुछ खास नहीं हुआ। कोई राजा नहीं, कोई चमत्कार नहीं। सिर्फ रोज़ का काम, रोज़ की धूल। और धीरे-धीरे लोगों के मन में एक फुसफुसाहट उठने लगी: "परमेश्वर की सेवा करने से क्या फायदा?
मलाकी 3 क्या कहता है?
फिर परमेश्वर बताते हैं कि उन्हें क्या दिखता है: जो मजदूर की मजदूरी दबा लेते हैं, जो विधवाओं और अनाथों पर अन्याय करते हैं, जो परदेशी के साथ नाइंसाफी करते हैं, जो झूठी शपथ खाते हैं। परमेश्वर कहते हैं, मैं इनके विरुद्ध साक्षी दूँगा। यानी वे देख रहे हैं, और भूलते नहीं।
मलाकी 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अंत में एक छोटा-सा दृश्य है, जो मुझे सबसे सुंदर लगता है। कुछ लोग, जो परमेश्वर का भय मानते थे, आपस में बातें करने लगे। और लिखा है कि यहोवा ध्यान धरकर उनकी सुनते थे, और उनके नाम एक पुस्तक में लिखे जा रहे थे। परमेश्वर कहते हैं, वे लोग "मेरे निज भाग" होंगे, मेरा खास खज़ाना, और मैं उनसे वैसी कोमलता करूँगा जैसे कोई पिता अपने बेटे से करता है।
बच्चे मलाकी 3 से क्या सीख सकते हैं?
वह दूत जो रास्ता तैयार करता है, वह यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला था। और वह प्रभु जो अचानक अपने मन्दिर में आए, वे यीशु मसीह हैं। मलाकी के इन शब्दों के बाद लंबा सन्नाटा रहा, और फिर एक बच्चा बेतलेहेम में जन्मा। वही "वाचा का दूत", जिसने परमेश्वर का वादा तोड़ा नहीं, बल्कि पूरा किया।
मलाकी 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हारे पास परमेश्वर के बारे में कोई ऐसा सवाल है जिसका जवाब तुम्हें अभी तक नहीं मिला? उसे कहने की हिम्मत करो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

जिस समय चारों ओर लोग कह रहे थे कि परमेश्वर की सेवा करना व्यर्थ है, कुछ लोग चुपचाप आपस में बातें कर रहे थे। और लिखा है, "यहोवा ध्यान धरकर उनकी सुनता था।" उनकी फुसफुसाहट स्वर्ग में दर्ज हो गई। तेरी वे प्रार्थनाएँ जो किसी ने नहीं सुनीं, तेरा वह विश्वास जो किसी को दिखा नहीं, परमेश्वर की पुस्तक में लिखा जा चुका है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

परमेश्वर ने टिड्डी को डाँटने और आकाश के झरोखे खोलने का वादा किया, और उसके बाद कहा, "तब सब जातियाँ तुमको धन्य कहेंगी।" गौर कर, आशीष वहाँ रुकती नहीं जहाँ तू है। तेरा भरा हुआ घर, तेरा चंगा मन, तेरी थमी हुई चिंता, ये पड़ोसियों के सामने परमेश्वर की गवाही बन जाते हैं। तो जो तुझे मिला है, वह छिपाने के लिए है या दिखाने के लिए?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

तुम्हारी शिकायत नई नहीं है: "अब से हम अहंकारियों को धन्य कहते हैं; क्योंकि दुष्टता के काम करनेवाले तो सफल हो जाते हैं।" ईमानदारी महँगी पड़ती है और बेईमानी चमकती दिखती है। पर ध्यान दो, ठीक अगली आयत में यहोवा का भय माननेवाले आपस में बातें करने लगे, और परमेश्वर ने उनके नाम एक पुस्तक में लिख लिए। तुम्हारी थकी हुई वफादारी उसकी नज़र से छूटी नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

सुनार चाँदी को आग पर रखकर चला नहीं जाता। वह बैठा रहता है, आँख गड़ाए, क्योंकि एक पल की देर चाँदी को बिगाड़ सकती है। मलाकी कहता है, "वह चाँदी का तानेवाला और शुद्ध करनेवाला बनकर बैठेगा।" तेरी आग में भी वह बैठा है, दूर खड़ा तमाशा नहीं देख रहा। जब तक उसे तुझमें अपना चेहरा न दिखे, वह उठेगा नहीं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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