1 शमूएल 7
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
बीस साल बीत चुके थे। यहोवा का संदूक, जिसमें परमेश्वर की उपस्थिति का चिन्ह था, किर्यत्यारीम नाम के गाँव में अबीनादाब के घर में पड़ा हुआ था। इन बीस सालों में इस्राएल के लोग बहुत उदास रहे, और अंत में वे रोते हुए फिर से यहोवा की ओर मुड़ने लगे।
तब शमूएल, जो परमेश्वर का भविष्यवक्ता था, उनसे साफ बात कहता है। अगर तुम सच में परमेश्वर की ओर लौटना चाहते हो, तो सिर्फ रोना काफी नहीं है। जिन पराए देवताओं, बाल और अश्तोरेत की मूर्तियों को तुमने अपने घरों में रख लिया है, उन्हें दूर करो। इस्राएलियों ने ऐसा किया। फिर सब लोग मिस्पा नाम की जगह पर इकट्ठे हुए, उपवास किया, पानी उंडेला और खुले मन से मान लिया, हमने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।
ठीक उसी समय जब वे परमेश्वर की ओर लौट रहे थे, पलिश्ती सेना उन पर हमला करने आ गई। इस्राएली डर गए, लेकिन इस बार उन्होंने अपने बल पर लड़ने की कोशिश नहीं की। उन्होंने शमूएल से कहा, हमारे लिए प्रार्थना करना बंद मत करना। शमूएल ने एक मेमना बलि चढ़ाया और यहोवा को पुकारा, और यहोवा ने उसकी सुन ली। जिस वक्त पलिश्ती हमला करने आ रहे थे, यहोवा ने आकाश में इतनी जोर से गरज भेजी कि वे घबरा गए, और इस्राएल जीत गया।
इसके बाद शमूएल ने एक पत्थर खड़ा किया और उसका नाम रखा एबेनेजेर, जिसका मतलब है, यहाँ तक यहोवा ने हमारी सहायता की है। यह सिर्फ एक जीत की याद नहीं थी, यह एक पत्थर की गवाही थी।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय दिखाता है कि सच्चा पश्चाताप सिर्फ शब्दों का मामला नहीं है। इस्राएलियों ने अपनी मूर्तियाँ फेंक दीं, यह दिखाने के लिए कि उनका मन सच में बदल गया था। पश्चाताप का मतलब है, जो चीज़ परमेश्वर की जगह ले रही है उसे हटाना, न कि सिर्फ उसके बारे में अफ़सोस जताना।
फिर यह भी ध्यान देने लायक बात है कि जैसे ही लोग परमेश्वर की ओर लौटे, मुसीबत आ गई। ऐसा क्यों हुआ, यह बाइबल नहीं बताती। शायद परमेश्वर यह दिखाना चाहते थे कि सही राह पर चलने का मतलब यह नहीं कि सब कुछ आसान हो जाएगा। लेकिन इस्राएलियों ने इस बार गलती नहीं दोहराई। पहले वे लड़ाई में संदूक को हथियार की तरह ले गए थे, अब वे शमूएल से कहते हैं, हमारे लिए प्रार्थना करो। यह फर्क बहुत बड़ा है। वे लड़ाई से पहले परमेश्वर पर भरोसा करना सीख रहे थे, अपनी ताकत पर नहीं।
एक बड़ी कहानी की कड़ी
पूरी बाइबल में यह पैटर्न बार-बार दिखता है, लोग परमेश्वर से दूर जाते हैं, फिर मुश्किल आती है, फिर वे लौटते हैं, और परमेश्वर उन्हें बचाते हैं। यह कोई मशीन जैसा नियम नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर धीरज रखने वाले हैं और बार-बार अपने लोगों को अपनी ओर बुलाते हैं।
एबेनेजर का पत्थर हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की मदद हमेशा पीछे मुड़कर देखी जा सकती है। बहुत बाद में, यीशु मसीह के आने से यह साफ हो गया कि परमेश्वर सिर्फ लड़ाइयों में मदद नहीं करते, वे खुद इंसान बनकर हमारे बीच आए, ताकि हमारा असली दुश्मन, पाप, हमेशा के लिए हरा दिया जाए। शमूएल ने एक मेमने की बलि चढ़ाई, और सदियों बाद परमेश्वर का मेमना, यीशु मसीह, खुद बलि बन गए।
तुम्हारे लिए
कभी-कभी तुम्हारी ज़िंदगी में भी ऐसी चीज़ें होती हैं जो परमेश्वर से ज्यादा जगह ले लेती हैं, शायद कोई खेल, कोई फोन गेम, या किसी की पसंद पाने की चाहत। इस्राएलियों की तरह, कभी सोचना, क्या कुछ ऐसा है जिसे मुझे दूर रखना चाहिए ताकि परमेश्वर पहले स्थान पर रहें?
और जब मुश्किल आए, चाहे स्कूल में हो या घर में, याद रखना कि तुम अकेले नहीं लड़ रहे। तुम भी किसी से कह सकते हो, मेरे लिए प्रार्थना करना बंद मत करना, जैसे इस्राएलियों ने शमूएल से कहा था।
बात करें
तुम्हारे जीवन में कोई ऐसी चीज़ है जो कभी-कभी परमेश्वर से ज्यादा जगह ले लेती है?
इस्राएलियों ने पहले खुद लड़ने की कोशिश की, इस बार उन्होंने प्रार्थना की। तुम्हारे लिए इसका क्या मतलब हो सकता है?
साथ में प्रार्थना करें
हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप बार-बार हमें अपनी ओर बुलाते हैं। हमें दिखाइए अगर कुछ ऐसा है जो हमारे जीवन में आपसे बड़ी जगह ले रहा है। हमें सिखाइए कि मुश्किल समय में सबसे पहले आपकी ओर देखें। जैसे एबेनेजर का पत्थर याद दिलाता था, हमें भी याद दिलाइए कि आपने अब तक हमारी सहायता की है। आमीन।
1 शमूएल 7 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 शमूएल 7 किस विषय में है?
1 शमूएल 7 क्या कहता है?
1 शमूएल 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 शमूएल 7 से क्या सीख सकते हैं?
1 शमूएल 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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