7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यहोशू 24

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यहोशू बहुत बूढ़ा हो चुका है। जिसने यरीहो की दीवारें गिरते देखीं, जो मूसा के बाद इस्राएल का अगुवा बना, वह जानता है कि उसका समय पूरा हो रहा है। इसलिए वह पूरे इस्राएल को शेकेम में इकट्ठा करता है। बूढ़े लोग, न्यायी, सरदार, सब आते हैं, और वे "परमेश्वर के सामने उपस्थित" होते हैं। यह कोई साधारण सभा नहीं है।

और फिर यहोशू कुछ अजीब करता है। वह अपनी बात नहीं कहता। वह परमेश्वर के शब्दों में बोलता है, जैसे परमेश्वर स्वयं वहाँ खड़े होकर अपनी कहानी सुना रहे हों: "मैंने तुम्हारे मूलपुरुष अब्राहम को फरात के उस पार से ले आकर…" ध्यान दो कि इन वचनों में कितनी बार "मैंने" आता है। मैंने बुलाया, मैंने निकाला, मैंने बचाया, मैंने दिया।

परमेश्वर बिल्कुल शुरू से शुरू करते हैं, और शुरुआत बहुत सम्माननीय नहीं है: अब्राहम का परिवार दूसरे देवताओं की उपासना करता था। इस्राएल का इतिहास किसी अच्छे, धार्मिक परिवार से नहीं शुरू होता, बल्कि परमेश्वर की पहल से। फिर मिस्र, लाल समुद्र, वह अंधियारा जो परमेश्वर ने मिस्रियों और इस्राएल के बीच किया, जंगल के लंबे वर्ष, बिलाम जो श्राप देने आया था और आशीष देकर लौटा। और अंत में वह वाक्य जो सब कुछ खोल देता है: "यह तुम्हारी तलवार या धनुष का काम नहीं हुआ।" उन्हें ऐसा देश मिला जिसमें उन्होंने परिश्रम नहीं किया था, और वे उन बगीचों के फल खा रहे हैं जो उन्होंने नहीं लगाए।

इसके बाद यहोशू माँग रखता है: अब चुन लो। यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो कोई और चुन लो, पुरखाओं के देवता या एमोरियों के देवता। लेकिन अपने बारे में वह साफ कहता है: "मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।"

लोग जोश से कहते हैं: हम भी यहोवा की सेवा करेंगे! और तब यहोशू कुछ ऐसा कहता है जिसकी हम अपेक्षा नहीं करते। वह खुश नहीं होता। वह कहता है: "तुम से यहोवा की सेवा नहीं हो सकती; क्योंकि वह पवित्र परमेश्वर है।" तीन बार लोग हाँ कहते हैं, और तीन बार यहोशू उनके सामने कठिन सच्चाई रखता है। तब वह उनके साथ वाचा बाँधता है, यानी एक पक्का करार, और सब कुछ व्यवस्था की पुस्तक में लिख देता है। एक बड़ा पत्थर बांज वृक्ष के नीचे खड़ा किया जाता है, और यहोशू कहता है कि यह पत्थर गवाह रहेगा, क्योंकि उसने ये सारे वचन सुने हैं।

अध्याय तीन कब्रों पर खत्म होता है। यहोशू एक सौ दस वर्ष का होकर मरता है। यूसुफ की हड्डियाँ, जो सैकड़ों वर्ष से मिस्र से साथ चली आ रही थीं, अंत में शेकेम में गाड़ी जाती हैं। और एलीआजर याजक भी मर जाता है।

इसका अर्थ क्या है?

यहोशू का वह कड़ा वाक्य हमें रुकने पर मजबूर करता है। "तुम से यहोवा की सेवा नहीं हो सकती।" क्या वह उन्हें हतोत्साहित कर रहा है? मुझे लगता है वह उन्हें ईमानदार बना रहा है। उत्साह में हाँ कहना आसान है। लेकिन परमेश्वर की सेवा करना खिलौना नहीं है, क्योंकि परमेश्वर पवित्र हैं और वे आधे मन से चलने वालों से संतुष्ट नहीं होते। यहोशू चाहता है कि लोग जानें कि वे किस बात के लिए हाँ कह रहे हैं।

और ध्यान दो कि परमेश्वर पहले क्या करते हैं, और बाद में क्या माँगते हैं। पहले तेरह वचन उनके कामों की गिनती हैं। माँग सिर्फ चौदहवें वचन में आती है। परमेश्वर पहले प्रेम करते हैं, फिर बुलाते हैं। इसीलिए उनकी आज्ञा एक सूखा नियम नहीं, बल्कि धन्यवाद का उत्तर है।

जुड़ा हुआ धागा

इस्राएल ने वाचा तोड़ी। यह पूरी बाइबल जानती है। पत्थर गवाह बना रहा, और गवाही उनके खिलाफ गई। लेकिन परमेश्वर ने वाचा नहीं छोड़ी। जो हमसे नहीं हो सका, वह यीशु मसीह ने किया। वे एकमात्र हैं जिन्होंने पूरी सच्चाई और खराई से पिता की सेवा की। यहोशू ने कहा कि परमेश्वर पाप क्षमा नहीं करेंगे; क्रूस पर यीशु मसीह ने वह पाप अपने ऊपर लिया, ताकि क्षमा सचमुच मिल सके।

और यूसुफ की हड्डियाँ? वह एक चुपचाप की गवाही है। यूसुफ ने कहा था कि परमेश्वर उन्हें इस देश में ले आएँगे, और सैकड़ों वर्ष बाद वह वादा पूरा हुआ। परमेश्वर देर कर सकते हैं, पर वे भूलते नहीं।

तुम्हारे लिए

तुम्हारी उम्र में तुम धीरे-धीरे अपने चुनाव खुद करने लगते हो। यहोशू ने कहा: "आज चुन लो।" वह चुनाव एक बार का नहीं है, वह हर दिन नया होता है। तुम्हारे "दूसरे देवता" लकड़ी की मूर्तियाँ नहीं हैं। वे वे चीजें हैं जिन्हें तुम परमेश्वर से ज्यादा जगह देते हो: दोस्तों की राय, जीतना, स्क्रीन, अपनी इज्जत बचाने के लिए झूठ।

एक बात करके देखो: आज शाम पाँच चीजें गिनो जो परमेश्वर ने तुम्हारे लिए कीं। फिर सोचो, इस हफ्ते एक जगह कौन सी है जहाँ मुझे सच्चाई से हाँ कहना है? और अगर तुम गिर जाओ, तो हार मत मानो। यहोशू ठीक था कि हम अपने बल पर परमेश्वर की सेवा नहीं कर सकते। इसीलिए हम हर दिन उनसे शक्ति माँगते हैं।

इस पर बात करो

यहोशू ने लोगों को खुशी से हाँ कहने पर उन्हें रोका क्यों? तुम क्या सोचते हो, वह उन्हें क्या समझाना चाहता था?

यहोशू ने एक पत्थर गवाह के रूप में खड़ा किया। तुम्हारे जीवन में क्या चीज तुम्हें याद दिलाती है कि परमेश्वर ने तुम्हारे साथ क्या किया है?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु परमेश्वर, आपने पहले हमें चुना, इससे पहले कि हम आपको जानते। धन्यवाद कि आपने वह किया जो हम खुद नहीं कर सकते। हमें साफ मन दें, ताकि हम आज और कल फिर आपको चुनें। जब हम भूल जाएँ, तो आप हमें याद दिलाएँ। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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यहोशू 24 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहोशू 24 किस विषय में है?
यहोशू बहुत बूढ़ा हो चुका है। जिसने यरीहो की दीवारें गिरते देखीं, जो मूसा के बाद इस्राएल का अगुवा बना, वह जानता है कि उसका समय पूरा हो रहा है। इसलिए वह पूरे इस्राएल को शेकेम में इकट्ठा करता है। बूढ़े लोग, न्यायी, सरदार, सब आते हैं, और वे "परमेश्वर के सामने उपस्थित" होते हैं। यह कोई साधारण सभा नहीं है।
यहोशू 24 क्या कहता है?
इसके बाद यहोशू माँग रखता है: अब चुन लो। यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो कोई और चुन लो, पुरखाओं के देवता या एमोरियों के देवता। लेकिन अपने बारे में वह साफ कहता है: "मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।"
यहोशू 24 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यहोशू का वह कड़ा वाक्य हमें रुकने पर मजबूर करता है। "तुम से यहोवा की सेवा नहीं हो सकती।" क्या वह उन्हें हतोत्साहित कर रहा है? मुझे लगता है वह उन्हें ईमानदार बना रहा है। उत्साह में हाँ कहना आसान है। लेकिन परमेश्वर की सेवा करना खिलौना नहीं है, क्योंकि परमेश्वर पवित्र हैं और वे आधे मन से चलने वालों से संतुष्ट नहीं होते। यहोशू चाहता है कि लोग जानें कि वे किस बात के लिए हाँ कह रहे हैं।
बच्चे यहोशू 24 से क्या सीख सकते हैं?
और यूसुफ की हड्डियाँ? वह एक चुपचाप की गवाही है। यूसुफ ने कहा था कि परमेश्वर उन्हें इस देश में ले आएँगे, और सैकड़ों वर्ष बाद वह वादा पूरा हुआ। परमेश्वर देर कर सकते हैं, पर वे भूलते नहीं।
यहोशू 24 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यहोशू ने लोगों को खुशी से हाँ कहने पर उन्हें रोका क्यों? तुम क्या सोचते हो, वह उन्हें क्या समझाना चाहता था?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

शेकेम में यहोशू ने लोगों की भावना पर भरोसा नहीं किया, उसने वाचा बाँधी: "उसी दिन यहोशू ने लोगों के साथ वाचा बाँधी, और शेकेम में उनके लिये विधि और नियम ठहराए।" भीड़ ने कहा था, हम यहोवा की सेवा करेंगे। पर कहना आसान है, बँधना कठिन। तेरे मन का वादा कहीं लिखा गया है, या बस उस दिन की भावना में बह गया?

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