2 इतिहास 26
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
उज्जियाह केवल सोलह वर्ष का था जब यहूदा की प्रजा ने उसे अपने पिता अमस्याह के स्थान पर राजा बनाया। वह बावन वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा, यह बहुत लंबा समय है। शुरुआत में उज्जियाह ने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था। जकर्याह नामक एक व्यक्ति था जो परमेश्वर को समझता था, और जब तक उज्जियाह परमेश्वर की खोज में लगा रहा, तब तक परमेश्वर ने उसे सफलता दी। उसने पलिश्तियों से युद्ध करके उनकी शहरपनाहें गिरा दीं, नए नगर बसाए, यरूशलेम में मजबूत गुम्मट बनवाए, खेती-किसानी बढ़ाई, एक बड़ी और अच्छी तरह सजी सेना तैयार की। उसकी कीर्ति दूर-दूर तक, यहाँ तक कि मिस्र की सीमा तक फैल गई। वह सचमुच सामर्थी राजा बन गया था।
परन्तु ठीक यहीं कहानी मुड़ जाती है। बाइबल लिखती है कि जब वह सामर्थी हो गया, तब उसका मन फूल उठा। उसने यहोवा के विश्वास को तोड़ा और मंदिर में जाकर खुद धूप जलाने लगा, जो केवल हारून के वंश के याजकों का काम था। याजक अजर्याह अस्सी बहादुर याजकों के साथ अंदर गया और उज्जियाह को रोका। राजा झुँझला उठा, और ठीक उसी पल, याजकों के सामने ही, उसके माथे पर कोढ़ फूट निकला। उसे मंदिर से बाहर निकाल दिया गया, और वह मरने तक कोढ़ी होकर अलग घर में रहा। उसका बेटा योताम राज्य का कामकाज संभालने लगा।
What Does This Mean?
यह कहानी हमें दिखाती है कि ताकत और सफलता इंसान के भीतर कुछ खतरनाक जगा सकती है, अगर वह सावधान न रहे। उज्जियाह ने कोई दूसरे देवता की पूजा नहीं की, उसने बस यह सोच लिया कि अब वह इतना बड़ा हो गया है कि नियम उस पर लागू नहीं होते। परमेश्वर ने याजकों और राजा को अलग-अलग काम दिए थे, यह एक सीमा थी। उज्जियाह ने सोचा कि उसकी सफलता उसे उस सीमा को पार करने का हक़ देती है। बाइबल इसे साफ शब्दों में "विश्वासघात" कहती है, यानी भरोसा तोड़ना। यह कठिन सच्चाई है, पर पाठ इसे छिपाता नहीं। एक अच्छा राजा, जिसने इतने साल सही काम किया, आखिर में अपने ही घमंड से गिर गया।
The Common Thread
उज्जियाह दाऊद के वंश का राजा था, और परमेश्वर ने दाऊद से वादा किया था कि उसके वंश में से एक राजा सदा राज्य करेगा। यह एक नियम और याजकपद को अलग रखने की कहानी हमें याद दिलाती है कि मनुष्यों में से कोई भी पूरी तरह राजा और याजक दोनों एक साथ, बिना गलती के नहीं हो सका। बहुत बाद में यीशु मसीह आए, जो राजा भी हैं और महायाजक भी, पर उन्होंने कभी अपने अधिकार का घमंड से दुरुपयोग नहीं किया। वे ऊँचे होकर भी नम्र बने रहे। उज्जियाह की कहानी हमें उस राजा की याद दिलाती है जो कभी नहीं गिरा, जो अपने लिए नहीं बल्कि हमारे लिए नीचे आया।
For You
कभी-कभी तुम किसी काम में बहुत अच्छे बन जाते हो, स्कूल में, खेल में, या दोस्तों के बीच। तब मन में यह विचार आ सकता है, "अब मुझे किसी की बात सुनने की जरूरत नहीं।" उज्जियाह की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता के समय ही सबसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए। जब याजकों ने उसे टोका, तो उसे शांति से सुनना चाहिए था, पर वह झुँझलाया। सोचो, जब कोई तुम्हें सही बात बताए और तुम्हें बुरा लगे, तब तुम क्या करते हो? यह सवाल हर दिन काम आता है।
Talk About It
उज्जियाह इतने सालों तक अच्छा राजा रहा, फिर अचानक उसने ऐसी गलती क्यों की? क्या तुम्हें लगता है कि सफलता सच में किसी को बदल सकती है?
याजकों ने उज्जियाह को रोकने का साहस दिखाया, हालांकि वह राजा था। तुम्हें किसी को सही बात कहने का साहस कब दिखाना पड़ा है?
Praying Together
हे परमेश्वर, आप हमें बुद्धि और सफलता देते हैं, पर हमें अपने घमंड से बचाइए। जब हम कुछ अच्छा कर पाएं, तब हमें नम्र बनाए रखिए। हमें सुनने का दिल दीजिए, जब कोई हमें सही राह दिखाए। हमें याद दिलाइए कि असली ताकत आपकी ओर देखते रहने में है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
2 इतिहास 26 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 इतिहास 26 किस विषय में है?
2 इतिहास 26 क्या कहता है?
2 इतिहास 26 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 2 इतिहास 26 से क्या सीख सकते हैं?
2 इतिहास 26 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
उज्जियाह ने सेना के हर एक जन के लिये तैयारी की, "उज्जियाह ने उनकी समस्त सेना के लिये ढालें, बरछे, टोप, झिलम, धनुष और गोफन के पत्थर तैयार किए।" ढाल, टोप, झिलम, सब कुछ। पर जिस दिल को उसने खुला छोड़ दिया, वहीं से घमंड घुस आया और वही उसका पतन बना। तुम भी बहुत कुछ सँभालते हो। क्या अपने भीतर के लिये भी कोई पहरा रखा है?
किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?
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