7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 शमूएल 6

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

2 शमूएल 6: परमेश्वर का पवित्र सन्दूक

समझाइश

दाऊद राजा बहुत खुश था। वह एक बड़ा काम करना चाहता था, परमेश्वर का पवित्र सन्दूक यरूशलेम लाना। यह सन्दूक परमेश्वर की उपस्थिति की निशानी थी। दाऊद ने तीस हजार वीरों को बुलाया। सबने मिलकर सन्दूक को एक नई गाड़ी पर रखा। बैल गाड़ी खींच रहे थे, और उज्जा और अह्यो नाम के दो भाई उसके साथ चल रहे थे।

लोग बहुत खुश थे। वे गाते थे, वीणा और डफ और झाँझ बजाते थे। सोचो कितना शोर और कितनी खुशी रही होगी, जैसे कोई बड़ा त्योहार हो।

पर अचानक कुछ हुआ। बैलों ने ठोकर खाई, गाड़ी हिल गई। उज्जा डर गया कि सन्दूक गिर जाएगा। उसने झट से अपना हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया। लेकिन उसी पल परमेश्वर ने उसे मारा, और वह वहीं मर गया।

दाऊद यह देखकर स्तब्ध रह गया। वह दुखी भी हुआ और डर भी गया। उसने सोचा, "यहोवा का सन्दूक मेरे यहाँ कैसे आए?" वह सन्दूक को आगे नहीं ले गया, बल्कि उसे ओबेदेदोम नाम के एक आदमी के घर छोड़ दिया।

तीन महीने बीते। परमेश्वर ने ओबेदेदोम के घर को आशीष दी, सब कुछ भला हुआ। जब दाऊद ने यह सुना, तो वह फिर से हिम्मत के साथ सन्दूक को लेने गया। इस बार बड़े आनंद के साथ!

दाऊद इतना खुश था कि वह राजा होते हुए भी परमेश्वर के सामने पूरे दिल से नाचा। उसने एपोद नाम का सादा वस्त्र पहना था, राजा जैसे शाही कपड़े नहीं। लोग जयजयकार करते, तुरही फूँकते हुए सन्दूक को शहर में लाए।

पर शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की से यह देखा और दाऊद को मन ही मन तुच्छ समझा। बाद में उसने दाऊद से ताना मारते हुए कहा कि वह कैसा राजा दिखा जो लोगों के सामने इस तरह नाचा। दाऊद ने साफ उत्तर दिया, "मैं यहोवा के सामने नाचा, और मैं फिर भी ऐसे ही नाचूँगा, चाहे मैं कितना भी छोटा दिखूँ।"

इसका क्या मतलब है?

यह कहानी हमें दिखाती है कि परमेश्वर पवित्र हैं। वे खिलौना नहीं हैं जिन्हें हम अपने तरीके से संभाल लें। उज्जा का इरादा शायद अच्छा था, पर उसने परमेश्वर की बातों की परवाह नहीं की थी, कि सन्दूक को कैसे उठाना चाहिए। परमेश्वर चाहते हैं कि हम उन्हें आदर और सम्मान से जानें।

पर यह कहानी यह भी दिखाती है कि परमेश्वर की उपस्थिति आशीष लाती है। ओबेदेदोम के घर में खुशियाँ आईं। और जब दाऊद ने सही तरीके से, नम्रता और खुशी के साथ सन्दूक को लाया, तो पूरा इस्राएल आनंदित हुआ।

दाऊद ने एक और बात सिखाई। वह राजा होते हुए भी अपने आप को छोटा बनाने से नहीं डरा। उसके लिए परमेश्वर की आराधना करना, लोगों की नज़र में अच्छा दिखने से कहीं ज्यादा जरूरी था।

एक बड़ी कड़ी

परमेश्वर का सन्दूक दिखाता था कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच रहना चाहते हैं। बाद में परमेश्वर ने और भी बड़ा काम किया। उन्होंने अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा, ताकि वे खुद मनुष्यों के बीच आकर रहें। अब हमें किसी सन्दूक की जरूरत नहीं, क्योंकि यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर हमारे हृदय में भी आ सकते हैं।

तुम्हारे लिए

जब तुम परमेश्वर से प्रार्थना करते हो या उनकी आराधना करते हो, तो याद रखो वे बहुत महान हैं। उन्हें सच्चे दिल से आदर दो। और दाऊद की तरह, कभी मत डरो कि कोई तुम्हें परमेश्वर की आराधना करते देखकर क्या सोचेगा।

बात करें

अगर तुम दाऊद की जगह होते और मीकल तुम्हें ताना मारती, तो तुम क्या करते?

तुम्हें क्या लगता है, परमेश्वर की आराधना करते समय हमें क्या बातें ध्यान में रखनी चाहिए?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप महान और पवित्र हैं। हमें सिखाइए कि आपका आदर कैसे करें। हमें दाऊद जैसा साहस दीजिए, कि हम खुले दिल से आपकी आराधना कर सकें, चाहे कोई कुछ भी कहे। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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2 शमूएल 6 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 शमूएल 6 किस विषय में है?
दाऊद राजा बहुत खुश था। वह एक बड़ा काम करना चाहता था, परमेश्वर का पवित्र सन्दूक यरूशलेम लाना। यह सन्दूक परमेश्वर की उपस्थिति की निशानी थी। दाऊद ने तीस हजार वीरों को बुलाया। सबने मिलकर सन्दूक को एक नई गाड़ी पर रखा। बैल गाड़ी खींच रहे थे, और उज्जा और अह्यो नाम के दो भाई उसके साथ चल रहे थे।
2 शमूएल 6 क्या कहता है?
दाऊद यह देखकर स्तब्ध रह गया। वह दुखी भी हुआ और डर भी गया। उसने सोचा, "यहोवा का सन्दूक मेरे यहाँ कैसे आए?" वह सन्दूक को आगे नहीं ले गया, बल्कि उसे ओबेदेदोम नाम के एक आदमी के घर छोड़ दिया।
2 शमूएल 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पर शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की से यह देखा और दाऊद को मन ही मन तुच्छ समझा। बाद में उसने दाऊद से ताना मारते हुए कहा कि वह कैसा राजा दिखा जो लोगों के सामने इस तरह नाचा। दाऊद ने साफ उत्तर दिया, "मैं यहोवा के सामने नाचा, और मैं फिर भी ऐसे ही नाचूँगा, चाहे मैं कितना भी छोटा दिखूँ।"
बच्चे 2 शमूएल 6 से क्या सीख सकते हैं?
दाऊद ने एक और बात सिखाई। वह राजा होते हुए भी अपने आप को छोटा बनाने से नहीं डरा। उसके लिए परमेश्वर की आराधना करना, लोगों की नज़र में अच्छा दिखने से कहीं ज्यादा जरूरी था।
2 शमूएल 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम दाऊद की जगह होते और मीकल तुम्हें ताना मारती, तो तुम क्या करते?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

इस प्रकार दाऊद और इस्राएल का सारा घराना जयजयकार करते और नरसिंगे फूँकते हुए यहोवा का सन्दूक ले आए।"

पहली बार भी बाजे बजे थे, पर सन्दूक गाड़ी पर था और रास्ते में मौत हुई। तीन महीने बाद वही दाऊद फिर आता है, इस बार कंधों पर, परमेश्वर के कहे अनुसार। तब जयजयकार सच्चा हुआ।

तेरी आराधना का शोर नहीं, उसका तरीका परमेश्वर देखता है। क्या तू उसे अपनी सुविधा की गाड़ी पर ढो रहा है?

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