7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

आमोस 7

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

आमोस एक चरवाहा था। वह भेड़-बकरियों की देखभाल करता था और गूलर के पेड़ों की छंटाई करता था। पर एक दिन परमेश्वर ने उसे कुछ अजीब दिखाया।

पहला दर्शन: टिड्डियों का बड़ा झुंड खेतों में उतरा और हरी घास को खा गया। आमोस डर गया। उसने कहा, "हे परमेश्वर यहोवा, क्षमा कीजिए! याकूब कैसे खड़ा रह सकेगा? वह तो बहुत निर्बल है!" परमेश्वर ने सुना और पछताए। उन्होंने कहा, "ऐसी बात अब न होगी।"

फिर दूसरा दर्शन आया: आग, इतनी बड़ी आग कि समुद्र सूख जाए, ज़मीन जल जाए। आमोस फिर गिड़गिड़ाया, "हे परमेश्वर यहोवा, रुक जाइए! याकूब कैसे खड़ा रह सकेगा?" परमेश्वर फिर रुक गए।

तीसरा दर्शन अलग था। आमोस ने प्रभु को एक दीवार के पास खड़ा देखा, हाथ में साहुल लिए हुए। साहुल एक डोरी होती है जिसके सिरे पर भारी टुकड़ा बंधा होता है, जिससे राजमिस्त्री जाँचते हैं कि दीवार सीधी है या टेढ़ी। परमेश्वर ने पूछा, "आमोस, तुझे क्या दिखता है?" आमोस ने कहा, "एक साहुल।" परमेश्वर ने कहा, "मैं अपनी प्रजा इस्राएल के बीच साहुल लगाऊँगा। अब मैं उन्हें नहीं छोड़ूँगा।"

फिर एक आदमी कहानी में आया, अमस्याह नाम का याजक। उसने राजा यारोबाम को खबर भेजी, "आमोस राजद्रोह कर रहा है!" फिर उसने आमोस से कहा, "यहाँ से भाग जा! यहूदा जाकर भविष्यद्वाणी कर, पर बेतेल में नहीं। यह राजा का मंदिर है।"

आमोस डरा नहीं। उसने जवाब दिया, "मैं भविष्यद्वक्ता नहीं था, मैं तो चरवाहा था। पर यहोवा ने मुझे भेड़ों के पीछे से बुलाया और कहा, जा, मेरी प्रजा से भविष्यद्वाणी कर।" फिर आमोस ने अमस्याह को कठोर शब्द सुनाए, कि उसके परिवार पर क्या होगा, क्योंकि उसने परमेश्वर के वचन को रोकने की कोशिश की थी।

इसका क्या मतलब है?

परमेश्वर ने दो बार दया दिखाई। जब आमोस ने विनती की, परमेश्वर रुक गए। इससे पता चलता है कि प्रार्थना का असर होता है, परमेश्वर सुनते हैं। पर तीसरी बार परमेश्वर ने साहुल दिखाया। इसका मतलब था, अब समय आ गया है। इस्राएल की दीवार, यानी उनका जीवन, टेढ़ा हो गया था। साहुल झूठ नहीं बोलता, वह ठीक-ठीक दिखा देता है कि दीवार सीधी है या नहीं।

अमस्याह चाहता था कि आमोस चुप रहे। पर परमेश्वर का वचन चुप नहीं कराया जा सकता। आमोस डरा नहीं, भले वह एक साधारण चरवाहा था और राजा का याजक उसके सामने खड़ा था।

एक ही कहानी की कड़ी

परमेश्वर बार-बार अपनी प्रजा को चेतावनी देते हैं, इसलिए नहीं कि वे उन्हें तोड़ना चाहते हैं, बल्कि इसलिए कि वे उन्हें बचाना चाहते हैं। यही परमेश्वर बाद में अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजते हैं, ताकि टेढ़ी दीवार फिर से सीधी की जा सके, हमारे भीतर से। यीशु मसीह ने वह सज़ा खुद उठाई, जो हमारी टेढ़ाई के कारण हम पर आनी थी।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी कुछ गलत किया और फिर उसे छिपाने की कोशिश की? आमोस जैसा साहस माँगो, जो सच बोलने से नहीं डरता। और जब कोई तुम्हें बताए कि तुम गलत हो, सुनने की हिम्मत रखो, जैसे साहुल दीवार को दिखाता है।

बातचीत के लिए

तुम्हें क्या लगता है, आमोस डरा क्यों नहीं जब अमस्याह ने उसे धमकाया?

साहुल दीवार को नापता है। परमेश्वर तुम्हारे जीवन में क्या नापना चाहते हैं?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आमोस जैसा साहस हमें भी दीजिए। जब हम टेढ़े हो जाएँ, तब हमें सीधा कीजिए। धन्यवाद कि आप हमें प्यार से चेतावनी देते हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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आमोस 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

आमोस 7 किस विषय में है?
आमोस एक चरवाहा था। वह भेड़-बकरियों की देखभाल करता था और गूलर के पेड़ों की छंटाई करता था। पर एक दिन परमेश्वर ने उसे कुछ अजीब दिखाया।
आमोस 7 क्या कहता है?
तीसरा दर्शन अलग था। आमोस ने प्रभु को एक दीवार के पास खड़ा देखा, हाथ में साहुल लिए हुए। साहुल एक डोरी होती है जिसके सिरे पर भारी टुकड़ा बंधा होता है, जिससे राजमिस्त्री जाँचते हैं कि दीवार सीधी है या टेढ़ी। परमेश्वर ने पूछा, "आमोस, तुझे क्या दिखता है?" आमोस ने कहा, "एक साहुल।" परमेश्वर ने कहा, "मैं अपनी प्रजा इस्राएल के बीच साहुल लगाऊँगा। अब मैं उन्हें नहीं छोड़ूँगा।"
आमोस 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने दो बार दया दिखाई। जब आमोस ने विनती की, परमेश्वर रुक गए। इससे पता चलता है कि प्रार्थना का असर होता है, परमेश्वर सुनते हैं। पर तीसरी बार परमेश्वर ने साहुल दिखाया। इसका मतलब था, अब समय आ गया है। इस्राएल की दीवार, यानी उनका जीवन, टेढ़ा हो गया था। साहुल झूठ नहीं बोलता, वह ठीक-ठीक दिखा देता है कि दीवार सीधी है या नहीं।
बच्चे आमोस 7 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुमने कभी कुछ गलत किया और फिर उसे छिपाने की कोशिश की? आमोस जैसा साहस माँगो, जो सच बोलने से नहीं डरता। और जब कोई तुम्हें बताए कि तुम गलत हो, सुनने की हिम्मत रखो, जैसे साहुल दीवार को दिखाता है।
आमोस 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, आमोस जैसा साहस हमें भी दीजिए। जब हम टेढ़े हो जाएँ, तब हमें सीधा कीजिए। धन्यवाद कि आप हमें प्यार से चेतावनी देते हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

अमस्याह याजक था, फिर भी उसने कहा, "इस्राएल के विरुद्ध भविष्यद्वाणी न कर।" उसे परमेश्वर का वचन नहीं, चुप्पी चाहिए थी। हम भी कभी ऐसे ही होते हैं। जो उपदेश चुभता है, उसे टाल देते हैं, और जो आयत सांत्वना देती है, उसे बार बार दोहराते हैं। सोच, आज तूने किस सच्चाई को सुनने से मन फेर लिया है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

आमोस के पास न कोई पदवी थी, न किसी नबी के घराने का नाम। वह भेड़ें चराता था और गूलर के पेड़ों की देखभाल करता था। फिर भी वह कहता है, "यहोवा ने मुझे भेड़-बकरियों के पीछे-पीछे चलने से बुलाकर कहा, 'जा, मेरी प्रजा इस्राएल से भविष्यद्वाणी कर।'"

परमेश्वर तुम्हें तुम्हारे काम के बीच से बुलाता है, किसी मंच से नहीं। सवाल यह नहीं कि तुम योग्य हो या नहीं, सवाल यह है कि जब वह बुलाए, तो तुम चलोगे या अपनी भेड़ों के पीछे ही रह जाओगे।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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